. दुखी मौसी की चूत को पहले टॉयलेट में फिर ट्रेन में चोदा मेरा नाम अविनाश शुक्ला है और मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं.
यहाँ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी आज से करीब तीन साल पहले घटी एक वास्तविक घटना पर आधारित है.
उस वक्त मैं अपनी बी.
एस.
सी.
की पढ़ाई पूरी करके मुंबई आ गया था.
मैंने आईआईटी मुंबई में एम.
एस.
सी.
में एडमिशन ले लिया था.
एडमिशन हो गया था और कुछ दिन के बाद फिर कॉलेज भी शुरू हो गया.
अब एक महीने के बाद मेरा मन यहां मुंबई में भी लगने लगा था.
फिर एक दिन मेरे पास मेरी मौसी मौसी का फोन आया- हैलो अविनाश बेटा तुम कैसे हो मन लगाकर पढाई तो कर रहे हो ना? मैंने उत्तर दिया की हाँ मौसी मैं बिलकुल ठीक हूं और पूरा मन लगाकर पढाई कर रहा हूँ.
मौसी बोली की बेटा तुम तो मुंबई जाकर मुझे भूल ही गए? मैं बोला की नहीं मौसी, आपसे तो मैं बहुत प्यार करता हूं.
आपको कैसे भूल सकता हूं मैं! मौसी थोड़ी सी उदास हो गई क्योंकि उसकी आवाज से मुझे पता लगने लगा.
उससे मैंने पूछा- कुछ बात हुई है क्या मौसी? वो बोली- हां, तभी तो तुझे याद कर रही थी.
तुझसे ही तो शेयर करती हूं मैं अपने दिल की बात.
आज तेरे शराबी मौसा जी ने फिर मुझे शराब के नशे में बहुत बुरी तरह से मारा है.
ये कहते हुए वो जोर जोर से रोने लगी.
मैंने मेरी दुखी मौसी को किसी तरह से शांत किया.
काफी देर के बाद वो शांत हुई.
दोस्तो, आपके मन में मौसी के बारे में कुछ सवाल आ रहे होंगे कि हम दोनों में इतना अच्छा रिश्ता कैसे है, तो मैं आपको बता दूं कि हम दोनों के बीच शारीरिक रिश्ता बन गया था और वो एक साल से चल रहा था.
अब आगे की सेक्स कहानी पढ़ने से पहले आप मेरी कामुकता से भरी मौसी के बारे में थोडा विस्तार से जान लें, उसके बाद मैं आगे की कहानी आपको बताऊंगा.
मेरी मौसी एक 32 साल की शादीशुदा औरत है और मगर उनका पति शराबी है और हर दिन शराब पीकर उन्हें नंगी करके मारता है.
मेरी जवान और सेक्सी माल मौसी के 2 बच्चे भी हैं मगर फिर भी वो देखने में बहुत ही ज्यादा कामुक लगती है.
एक 9 साल का बेटा और एक 6 साल की बेटी.
वो मेरे नाना के छोटे भाई की बेटी यानि कि मेरी मौसी है लेकिन सगी नहीं है.
पिछले 1 साल से हम दोनों के अवैध शारीरिक संबंध चल रहे हैं और हम बहुत अच्छे से एक दुसरे की कामवासना को शांत करते आ रहे हैं.
मैंने बहुत बार मेरी मौसी की टाइट चूत और गांड को ओपने लम्बे मोटे लंड से चोदा था.
वो देखने में पतली और गोरी है.
कुल मिलाकर बिलकुल हूर की परी लगती है.
मेरी कामुकता की देवी मौसी एक बहुत ही ज्यादा सेक्सी बदन की मालकिन है.
अब आगे की सेक्स कहानी सुनाता हूँ.
मौसी फोन पर सिसकते हुए बोली- अविनाश, तुम मुझे भी कुछ दिनों के लिए मुंबई ले जाओ, मैं यहां नहीं रहना चाहती.
मैं बोला- ठीक है, मैं कुछ इंतजाम करता हूं.
उसके बाद आप चली आना.
इतना कहकर मैंने फ़ोन रख दिया.
मौसी एक बहुत ही सीधी सादी औरत थी.
मगर उसका पति यानि मेरा मौसा अजय बहुत शराब पीता था और मौसी की देखभाल भी ठीक से नहीं कर सकता था.
अब मैं मौसी को मुंबई लाने के बारे में सोचने लगा.
सच्ची बताऊं तो मुझे उससे प्यार हो गया था.
मैं उसकी चूत का दीवाना हो गया था.
उसकी चूत में एक नशा सा था.
अब मुम्बई में किसी औरत को लाने के लिए आप भी सोच सकते हो कि उसे घर भी चाहिए और उसके खर्चे का हिसाब भी फिर अलग रह जाता है.
ऊपर से उसके दो दो बच्चे भी थे.
मैं आप लोगों को बता दूं कि मेरे पिता की मृत्यु हो चुकी है और मेरी मां एक टीचर है.
वो गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाती है.
मेरे पास जितने पैसे थे वो तो मैंने एडमिशन और एक बिजनेस में लगा दिये.
अतिरिक्त कमाई के लिए मैं सूखे मेवों का बिजनेस कर रहा था.
मैं अपने भविष्य के लिए कुछ बचत करने की सोच रहा था.
इसलिए मेरे पास ज्यादा पैसे नहीं बचे थे और मैं एक दो बीएचके वाले फ्लैट में रह रहा था, वो भी किराये पर.
मौसी के लिए मैंने और सोचा.
मुझे कम समय में बहुत अधिक पैसे कमाने थे तो फिर मैंने जिगोलो बनकर पैसे कमाने की ठान ली.
फिर मैंने हाथ पैर मारे और मुझे जिगोलो की जॉब मिल गयी और अब कमाई इतनी थी कि मौसी का खर्चा इस जिगोलो के काम से निकल सकता था.
यदि आप को जिगोलो जॉब के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है तो मैं आप को बता दूँ की जिगोलो वो लड़के और मर्द होते हैं जो पैसे लेकर पति से असंतुष्ट भाभियों और शादी शुदा ओरतों के साथ अवैध शारीरिक संबंध बनाते है.
कई कुंवारी लड़कियां भी अपनी शारीरिक जरुरत पूरी करने के लिए इनकी सेवाए लेती हैं.
कुल मिलकर जैसे कॉल गर्ल होती हैं वैसे ही होते हैं जिन्हें प्ले बॉय के नाम से भी जाना जाता है बस पुरुष वेश्यावृत्ति और महिला वेश्यावृत्ति दोनों में अंतर इतना सा होता है की कॉल गर्ल पैसे लेकर चुदवाती है और जोगोलो चोदने के पैसे लेते हैं.
यह एक तरह से पुरुष वेश्यावृत्ति होती है जिसमे पैसे के साथ आनंद भी प्राप्त होता है.
इस सब में 20-25 दिन लग गये और जब सब कुछ निश्चित हो गया तो फिर मैंने मौसी को फोन किया और उससे कहा कि मैंने उसके लिये सारा इंतजाम कर लिया है.
ये सुनकर वो काफी खुश हो गयी.
वो कहने लगी कि वो घर से भाग आयेगी.
ये सुनकर मैं एक बार तो घबरा गया लेकिन मैं भी उससे प्यार करता था.
हमारे पास कोई और रास्ता भी नहीं था.
फिर हमने एक प्लान बनाया कि वो तीन दिन बाद शॉपिंग करने शहर आयेगी और मैं भी उसी दिन पहुंच जाऊंगा.
फिर हम दोनों वहां से मुंबई आ जायेंगे.
इस तरह से हमने ये सब किया और मैं तय दिन पर वहां पहुंच गया.
मौसी भी आ गयी.
उसने रेड कलर की साड़ी पहनी हुई थी जो काफी हद तक पारदर्शी थी.
उसका गोरा पेट और पतले से सफ़ेद ब्लाउज में उसकी काली ब्रा बिलकुल साफ पता लग रही थी.
आज मेरी मौसी देखने में जैसे कोई रंडी लग रही थी मगर हाई क्लास … होंठों पर पूरी गहरी लाल लिपस्टिक लगाई हुई थी उसने.
दुखी मौसी की टाइट चूत को पहले टॉयलेट में फिर चलती ट्रेन में चोदा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी :- उन्हें देखते ही मेरा मन तो कर रहा था कि उसको वहीं किसी कोने में दबोच लूं और पकड़ कर चोद दूँ.
मगर ऐसा कुछ वहां पर हो नहीं सकता था क्योंकि उसके दोनों बच्चे भी साथ थे अब भला उन बच्चों के सामने तो उनकी माँ को नंगी करके चोद नहीं सकता था अपनी कामवासना शांत करने के लिए.
वो भी मेरी आंखों में लगातार देख रही थी और उस कामुकता की देवी को मेरी आँखों में चोदा चादी करने की हवस बिलकुल साफ़ साफ दिखाई दे रही थी.
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
उसका बेटा गुलाब काफी बड़ा हो चुका था.
वो सब समझने लगा था.
मैंने कई बार दुखी मौसी की चुदाई उसके घर में ही की थी और गुलाब इस बात को जानता था इसलिए कोई परेशानी वाली बात नहीं थी.
फिर मैं मौसी और बच्चों को चाट खिलाने ले गया.
वहीं पीछे एक टॉयलेट था.
दोस्तों टॉयलेट देखते ही मेरे मन में ख्याल आया की क्यों ना आज मौसी को टॉयलेट में लेजाकर चोदा जाये.
फिर मैंने बच्चो को वहीं चाट खाने को बोला और मैं मौसी को लेकर टॉयलेट में घुस गया.
अंदर टॉयलेट में जाते ही मैंने सीधे उस कामुक महिला के कपड़े और पैंटी उतरवाकर अपना खड़ा लण्ड उसकी चूत में घुसा दिया और ज़ोर से धक्के दे देकर चुदाई करने लगा.
उसके मुंह से चीख निकलने ही वाली थी कि मैंने उसके मुंह में रुमाल ठूंस दिया.
मेरे ऊपर तो जैसे चोदा चादी करने का भूत सवार हो गया था.
मैं उसको कस कर चोद देना चाहता था और उसकी चूत में अपने लौड़े के गहरे धक्के लगा रहा था.
मेरे हर धक्के के साथ उसके चूतड़ जोर से दीवार से टकरा जाते थे.
बहुत दिनों के बाद मौसी की चूत मिली थी और वो भी ऐसे माहौल में.
पब्लिक प्लेस में चुदाई छुपकर करने का भी अपना ही एक रोमांच होता है.
ये मैंने उस दिन जाना था.
दस मिनट की अन्धाधुन्ध चुदाई के बाद मैंने अपना गाढ़ा गाढ़ा वीर्य छोड़ा.
तब तक तो वो दो बार झड़ चुकी थी.
फिर हम दोनों ने अपने कपड़े सही किये और बच्चों के पास आ गये.
तब तक बच्चों ने भी चाट खत्म कर लिया था.
मैंने बिल पे किया और वहां से बाहर निकला.
फिर मैंने एक स्कार्पियो गाड़ी बुक की और वहाँ से उसे दूसरे शहर लाया ताकि कोई अगर मौसी को खोजे भी तो कोई प्रॉब्लम न हो.
जब हम पहुंचे तब तक शाम के 7 बज चुके थे.
एक घंटे बाद हमारी ट्रेन थी.
मैंने सेकेण्ड क्लास एसी की सीट बुक की थी.
चारों सीट एक ही केबिन में मिल गयी थी.
हम ट्रेन में चढ़े और फिर गाड़ी चल दी.
हम हल्की फुल्की बातें करने लगे.
मैं और मौसी एक ही सीट पर चिपक कर बैठे थे और मेरा हाथ मौसी की गांड को सहला रहा था और बच्चे दूसरी सीट पर बैठे थे.
मौसी को थोड़ा असहज महसूस हो रहा था.
उसने मुझसे कहा- पहले बच्चों को सोने दो, फिर मुझे चोद लेना.
फिर हमने खाना खाया और फिर दोनों बच्चों को नीचे वाली सीट में सुला दिया और हम ऊपर वाली सीट पर सो गए ताकि सही मौका पाकर चलती ट्रेन के अंदर चोदा चादी करके अपनी अपनी कामवासना शांत कर सकें.
करीब 11 बजे लगभग सभी यात्री सो गए थे.
बच्चे भी सो गए थे और सभी लाइटें ऑफ थीं.
मैं चुपके से मौसी की सीट पर चढ़ गया.
उसकी भी आँख लग चुकी थी.
मैंने उसे किस करना चालू कर दिया.
फिर उसकी नींद खुली और फिर वो भी मुझे किस करने लगी.
बहुत देर तक हम लोगों का रोमांस चलता रहा.
हम दोनों एक दूसरे को प्यार कर रहे थे.
चूम रहे थे.
अपने प्यार का इजहार कर रहे थे.
शब्दों से भी और होंठों से भी.
उसके बाद मैंने उसके को खोल दिया.
अब वो सिर्फ ब्रा में थी.
दोस्तो, मैंने उसकी पैंटी दिन में ही टॉयलेट में खोल दी थी.
उसको उसने अपने कपड़ों में रख लिया था.
अब मैंने उसकी ब्रा को खोला और उसका दूध पीने लगा.
दोस्तो, उस कामुकता की देवी के बड़े बड़े स्तनों से ऐसा स्वाद आ रहा था जैसे कि उसका दूध निकल रहा था और मैं बच्चे की तरह उसका दूध पीने लगा.
मेरी दुखी मौसी बड़े प्यार से मेरे सिर को सहलाने लगी.
उस समय मैं स्वर्ग सुख की अनुभूति कर रहा था.
फिर मैं मेरी दुखी मौसी की टाइट चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा.
जैसे ही मेरी जीभ उस शादी शुदा महिला की में गयी तो वो बहुत ही ज्यादा चुदासी हो उठी और वो मेरे बालों को मस्ती में आकर सहलाने लगी.
चूत चुसाई के दौरान दुखी मौसी की टाइट चूत बार बार ऊपर उठकर मेरे मुंह तक आ रही थी.
मेरी जीभ पूरी की पूरी उसकी चूत में गहराई तक चाट कर आ रही थी.
शायद इतनी उत्तेजना को वो संभाल नहीं पा रही थी.
कुछ देर की चूत चटाई के बाद उसने अपनी चूत का जूस मेरे मुंह में छोड़ दिया.
फिर मैंने उसकी चूत में लंड रखा और आधा अंदर घुसा दिया.
फिर उसको किस करने लगा.
धीरे धीरे मेरी गांड हिलने लगी और लंड उसकी चूत में अंदर बाहर होते हुए गोते खाने लगा.
बहुत ही कामुक अहसास था आज पहली बार मैं अपनी माँ की बहन को चलती ट्रेन में चोद रहा था.
चलती ट्रेन में किसी शादी शुदा महिला की चूत मारने का ये मेरा पहला अनुभव था इस लिए मुझे चलती ट्रेन के अंदर सेक्स करने में बहुत ही ज्यादा आनंद आ रहा था.
धीरे धीरे चोदते हुए मैंने अपना पूरा लम्बा मोटा लंड मौसी की टाइट चूत में दम लगाकर ठूंस दिया.
मेरी मौसी की चूत काफी ज्यादा टाइट थी जिस वजह से उन्हें मेरा लम्बा मोटा लंड लेने में बहुत ज्यादा तेज दर्द हुआ मगर मैं निर्दयी बनकर उनकी टाइट चूत को अपने लम्बे मोटे लंड से लगातार चोदता रहा.
फिर उसे भी मेरे लंड से चुदने में बहुत आनंद आने लगा और वो दबी आवाज़ में सिसकारते हुए मुझसे बोलने लगी- अविनाश … ई लव यू … आह्ह … इस्स … आह्ह … मुझे अपनी रंडी बनाकर खूब मजे से चोदा चादी करो … आह्ह … ओईई … आह्ह … म्मम … ओह्ह … चोदते रहो जान … चोदते रहो. मुझे.
चलती ट्रेन में हमारी शानदार चुदाई लगभग 1 घंटे नॉनस्टॉप चली.
करीब एक घंटे की खतरनाक चुदाई के बाद मैं मेरी दुखी मौसी की टाइट चूत में अपना वीर्य झडाकर उसके साथ नंगा ही सो गया.
मेरी नींद रात के करीब 2 बजे खुली तो मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहने और वापस अपनी सीट पर आकर सो गया.
फिर हम मुम्बई दोपहर 2 बजे पहुंच गए.
दोस्तो, मौसी को भागने में कोई प्रॉब्लम भी नहीं हुई क्योंकि उसका पति बहुत बड़ा शराबी था और वो अपने बीबी और बच्चों के शराब के नशे में बहुत बुरी तरह से मारा पिटी किया करता था.
अपने घरवालों को मौसी ने पहले ही समझा दिया था.
चूंकि मौसी अपने ससुराल में दुखी थी और वो भी चाहते थे कि मौसी अपने बच्चों के साथ अलग रहने लगे इसलिए मौसी का ये कदम उसके मायके वालों को भी स्वीकार था.
मगर उसके मायके वालों यानि कि मेरे छोटे नाना के परिवार को ये नहीं पता था कि मौसी और मेरे बीच है.
उनके लिए हम दोनों नॉर्मल ही थे.
उन्हें लगता था कि मौसी मेरे पास सुरक्षित रहेगी.
हम लोग मुंबई आकर रहने लगे.
अब मेरे पास जैसे पूरा परिवार हो गया था.
मौसी और उसके दो बच्चे आ गये थे घर में.
हम सब चारों के चारों बहुत खुश थे.
मौसी के बच्चे भी अब मुझे अपने नए पिता के रूप में स्वीकार कर चुके थे.
दोस्तों उम्मीद करता हूँ की आप सभी को मेरी अन्तर्वासना से भरी हिंदी सेक्स कहानी ‘दुखी मौसी की टाइट चूत को पहले टॉयलेट में फिर चलती ट्रेन में चोदा‘ बहुत पसंद आई होगी….
स्रोत:इंटरनेट