. अब राहुल ने मेरी साड़ी उतारनी शुरू कर दी.
साड़ी के बाद ब्लाउज, फिर ब्रा और आखिर में पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया.
मैं राहुल के सामने एकदम नंगी खड़ी थी.
अब राहुल मेरे शरीर को देखने लगे.
अब मैंने भी राहुल के सारे कपड़े उतार दिए.
जैसे ही मैंने उनकी चड्डी उतारी राहुल का लण्ड निकल पड़ा.
राहुल का लण्ड ज्यादा बड़ा नहीं था लेकिन एकदम सख्त लोहे की रॉड की तरह तना हुआ खड़ा था.
मैंने उसे पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया.
सच में वो बहुत ही ज्यादा हार्ड था.
मैं घुटने के बल बैठ गयी और राहुल के लौड़े को चूसने लगी.
जितने गोरे राहुल थे वैसा ही उनका लण्ड था.
उनका आगे का टोपा एकदम सुर्ख लाल था। राहुल मेरे बालों को पकड़कर अपने लण्ड के बेदर्दी भरे झटके मेरे मुँह में मारने लगे.
मेरे मुँह से गप्प … गप्प … गप्प … अम्म … की आवाजें निकल रही थीं.
राहुल ने झट से मुझे जमीन पर बिछे गद्दे पर गिरा दिया और मेरे ऊपर आ गए.
अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे। उसने मेरे दोनों चूचों को दोनों हाथों से पकड़ा, फिर उन्हें गौर से देखते हुए बोले कि भाभी आपके चूचे कितने गोल और बड़े हैं.
टाइट भी हैं। फिर उन्हें सहलाते हुए, खेलते हुए मेरे चूचकों को मसलने लगे.
अब वह अपना मुँह लगा कर उन्हें बारी-बारी से चूसने लगे.
मुझे भी पूरी मस्ती चढ़ गई थी। मैं भी पूरा मजा लेना चाहती थी.
मैं अपने हाथ से राहुल के लण्ड को टटोलने लगी.
यह देख उसने अपना लण्ड मुझे मेरे हाथ में दे दिया। मैं भी जोश में आ गयी और लण्ड को पूरे जोर से दबा कर मसलने लगी। हम दोनों एक-दूसरे के शरीर से खेलने लगे। कभी वो मुझे चूमते, कभी मैं उन्हें.
अब हम दोनों पूरी तरह से गर्म हो चुके थे। उनका लण्ड मेरी चूत से रगड़ खा रहा था। राहुल ने अपना लण्ड मेरी चूत पर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दिया और साथ ही मुझे प्यार करने लगे। कभी मेरी चूचियों को दबाते, कभी चूसते, कभी मेरे चूतड़ों को दबाते और सहलाते.
राहुल मेरी गांड के छेद में भी उंगली कर देते जिससे मैं उछल जाती। मुझसे अब सहन नहीं हो रहा था.
मैं अब जल्द से जल्द चूत में उसका लण्ड डलवा लेना चाहती थी पर वो बस मुझे तड़पाए जा रहे थे। वो मेरी चूत की पंखुड़ियों के बीच अपने लण्ड को रगड़े जा रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था। अब मैंने राहुल से कहा- प्लीज … अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता, जल्दी से अपना लण्ड मेरी चूत के अन्दर डालो और मेरी चूत का कीमा बना दो.
मुझे और मत तड़पाओ राहुल … प्लीज अपना लंड मेरी चूत में डालो! अब राहुल ने अपने हाथ में थोड़ा थूक लगा कर अपने लंड के सुपारे में लगाया और मेरी चूत पर रख कर थोड़ा रगड़ा। मैं सिहर गई। फ़िर राहुल मेरी दोनों टांगों को पकड़कर ऊपर उठाने लगे और उन्होंने मेरी दोनों टांगों को मेरे सिर के इधर-उधर गद्दे से लगा दिया.
अब मेरी चूत बिल्कुल ऊपर उठ गई थी। मेरी चूत बिल्कुल छत की सीध में आ गई थी.
इस स्थिति में लंड चूत की जड़ तक जाता है.
सबसे ज्यादा मज़ा मुझे इसी पोज़ में आता है। उन्होंने फिर अपना लण्ड मेरी चूत के मुँह पर रखकर एक जोर का धक्का मारा.
मेरी चीख निकल गयी.
उनका वो धक्का बहुत ज्यादा तेज था। राहुल ने धीरे से अपने लंड को बाहर निकाला और फिर जोरदार धक्के के साथ अपना लंड मेरी चूत में पेल दिया.
अब राहुल ने तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए और मैं चिल्लाने लग गयी.
मेरी चूत … उफफ्फ़ … ओह्ह … माय्य … गॉडड … फ़क्क … मी … देवर जी.
आज तो लगता है मैं मज़े से मर ही जाऊँगी … मेरे राहुल, आप मुझे चोद कर कितना मज़ा दे रहे हो.
उफ्फ़ … अहह … हाँ … और चोदो, अपनी भाभी की चूत … अंदर तक घुसेड़ दो राहुल … अपने लण्ड को … उफ्फ … अह्ह … आह … चोदो.
मैं मस्ती में राहुल को और उत्तेजित करने लगी.
हाँ … हाँ … बस ऐसे ही! ऐसे ही चोदो मुझे! चोद दो मेरी चूत को अपने इस लंड से! और ज़ोर से … और ज़ोर से! हाँ राहुल … ऐसे ही … बस ऐसे ही चोदो मुझे! आहहहह … आहह … अब राहुल और तेजी के साथ मुझे चोदने लगे। राहुल ने अपने हाथों से मेरे मम्मों को फिर से दबाना शुरू कर दिया, वो दोनों हाथों से मेरे मम्मों को जकड़े हुए थे। उनके धक्के लगातार मेरी चूत को अंदर तक निचोड़ रहे थे। मैं काफी उत्तेजित हो चुकी थी। मैं उनके सुपारे को लगातार अपनी बच्चेदानी में महसूस कर रही थी.
राहुल ने मुझे चूमते हुए कहा- भाभी तुम्हारी चूत कितनी कसी हुई है.
मुझे कितना मज़ा दे रही है। मैं बोली- तुम्हारे भाई से तो कुछ भी नहीं होता.
उसकी लुल्ली किसी काम की नहीं है राहुल.
अब तुम ही मेरे पति हो.
मुझे सुहागरात का मज़ा दो.
तभी राहुल ने मुस्कराते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये और मुझे चूमते हुए मेरी चूत में लगातार धक्के लगाने लगे। मैंने भी नीचे से अपनी कमर को उछालाना शुरू कर दिया। अब मुझे और ज्यादा मजा आने लगा.
राहुल ने अब अपनी गति बहुत तेज़ कर दी.
मैं सिसकारियाँ लेने लगी। मेरी चूत से पानी निकलने लगा.
उनके धक्कों से मेरी चूत में उसका लंड बहुत आसानी से जा रहा था। मैं तो मस्ती में कभी उनके बाल नोंचती तो कभी उनकी पीठ नोंचती.
वो भी कभी मेरे गाल काटते तो कभी चूचुकों को और जोर से दबाते.
हम दोनों कभी एक-दूसरे को देखते, कभी चूमते, चूसते या काटते और इस तरह वो तेज़ी से मेरी चूत को चोदे जा रहे थे। हम दोनों पसीने से भीग रहे थे। राहुल इतनी तेज ठोकर मार रहे थे मेरी चूत में कि उनका लंड मुझे मेरी बच्चेदानी से टकराता हुआ महसूस हो रहा था.
मैं चीख रही थी.
आआआ … आआहह … मार डालो मुझे राहुल … आपका लण्ड … ओह माई गॉड … मेरे राहुल.
वह अपने लण्ड को जड़ तक पेले हुए मेरी पसीने से भीगी हुई काखों के पसीने को चाट रहे थे.
कभी चूचियों को पीते.
कभी मेरे होंठों को पीते.
मैं भी उनकी हर ठोकर पर अपने चूतड़ उठा कर उनका लण्ड चूत में ले लेती.
जब राहुल का लंड मेरी चूत पर ठोकर मारता तो उनके अंडकोष मेरी गांड पर लगते तो ‘थप-थप-थप’ की आवाज से कमरा गूँज उठता। आह्ह् … चोदो.. मैं झड़ रही हूँ … आह्ह.. राहुल फाड़ दो मेरी जालिम चूत को आहह्ह्ह् … चोदो … पूरी तरह निचोड़ कर पानी निकाल दो.
राहुल ठोकर पर ठोकर मार रहे थे और मेरी चूत फचफचा रही थी। राहुल मैं झड़ रही हूँ … आहह्ह्ह … ठोको अपना लंड … चोदो … फाड़ दो मेरी चूत.
आह्ह … मैं बड़बड़ा रही थी.
मैं पूरी तरह से झड़ चुकी थी। अब उनकी बारी थी.
राहुल के धक्के अब बहुत ज्यादा तेज हो गए थे.
फिर 5-7 जोरदार धक्कों के साथ वो भी झड़ गए.
मैंने महसूस किया कि उनका गर्म वीर्य मेरे अन्दर गया और मेरी चूत उसके वीर्य से भर गई। वो हाँफते हुए मेरे होंठों को चूसते हुए मेरे ऊपर निढाल हो गए। करीब 5 मिनट वो मेरे ऊपर ही पड़े रहे। फिर वो मुझसे अलग हुए.
उसका लंड सिकुड़ कर छोटा सा हो गया था और मेरी चूत से उसका वीर्य बहने लगा था। हम दोनों के ही शरीर से पसीना बह रहा था। उस रात राहुल ने मुझे सुबह 5 बजे तक कई बार चोदा। वो सब मैं आपको अगली कहानी में बताऊंगी कि राहुल ने उस रात और क्या-क्या किया.
2011 से अब तक मैं राहुल से चुद रही हूँ.
जब वो यहाँ गांव आते हैं तब उनके लंड पर बैठकर खेलती हूँ। मेरी देवर भाभी सेक्स की इस कहानी के बारे में आप अपने विचार मुझे मेल आई-डी पर भेज सकते हैं। आपकी प्यारी भाभी। [email protected].
स्रोत:इंटरनेट