. खैर, हम दोनों में यह सब बातें हुईं और कुछ देर बाद नफीसा भाभी वहाँ से चली गईं.
पर मेरे लंड को सुकून ही नहीं हुआ.
उधर भाभी गईं और मैं सीधा बाथरूम में जा के अपने हाथ से अपना लंड हिला के शांत हो गया.
अब मैं नफीसा भाभी को चोदने का सोच सोच के रोज मुठ मारने लगा.
मेरी निगाह उसके मस्त जोबन पर अटक के रह गई थी.
फिर एक दिन मैं आंटी से मिलने उनके घर गया.
तब अंकल मुझे घर के बाहर ही मिल गए.
अंकल ने मुझसे पूछा- बेटा आजकल कहाँ हो, दिखते नहीं हो? मैंने कहा- अंकल, काम में बिज़ी था इसलिए तो आज स्पेशल टाइम निकाल कर घर पे आया हूँ.
अंकल ने कहा- बेटा तुम घर में जाओ, मुझे थोड़ा काम है, तो मैं शाम को आऊंगा.
जैसे ही मैं घर में गया, तो घर में कोई भी नहीं था.
मैं ऊपर गया तो सेक्सी आवाजें आने लगीं.
मैं रुक गया और मैंने चुपके से जा के देखा तो नफीसा भाभी बेड पे चित पड़ीं, अपनी पेंटी में हाथ डाल के ‘आअहह आआआ आआहह..’ कर रही थीं.
मैं भाभी को छिप कर देख रहा था.
वो खुद अपने बूब्स मसल रही थीं और अपनी उंगली चूत में डाल के मज़े ले रही थीं.
मैं तो उनकी ये दशा देख कर दंग रह गया.
थोड़ी देर के बाद नफीसा भाभी ने अपना पानी निकाल दिया और मैं अपने खड़े लंड को पेंट में सैट कर के वहाँ से नीचे आ गया.
थोड़ी देर के बाद नफीसा भाभी भी नीचे आईं.
भाभी ने कहा- अरे जुल्फी तुम कब आए? मैंने कहा- बस अभी थोड़ी देर हुई, आप कहाँ थीं भाभी? उसने कहा- मैं रूम में थी, रेस्ट कर रही थी.
मैंने कहा- ओके? मैं ऊपर आया पर आप तो मुझे नहीं दिखी थीं.
मेरी इस बात से वो चौंक गयी और उसने कहा- तुम ऊपर आए थे? मैंने कहा- हां मैं ऊपर आया था और जब देखा कि कोई नहीं है, तो नीचे आ कर बैठ गया.
उसने कहा कि अगर तुम ऊपर आए थे.. तो तुमको कोई नहीं दिखा? मैंने कहा कि हां कोई नहीं दिखा था.
वो शर्मा गयी और वो नीची नज़र करके चुपचाप बैठ गईं.
मैंने उसको इशारा किया पर वो जानबूझ के नाटक कर रही थी.
मैंने बहाने से हिम्मत करके उसको छू लिया और उसके करीब बैठ गया.
उसने मेरी तरफ प्यार से देखा, तो मैं उसके बूब्स को देखते हुए उसको अपनी बांहों में जकड़ लिया.
नफीसा- जुल्फी यह क्या कर रहे हो? मैं- दोस्ती निभा रहा हूँ.
नफीसा- जुल्फी कोई देख लेगा, तो क्या सोचेगा? मैंने अपना लंड निकाल कर उसका हाथ मेरे लंड पर रख दिया.
फिर मैंने उससे कहा कि अभी तुम अपने रूम में जो कर रही थीं, वो मैंने सब देख लिया है.
शायद तुमको लंड की ज़रूरत है इसलिए मैं तुमको खुशी देना चाहता हूँ.
नफीसा- जुल्फी प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मैं यह नहीं कर सकती.
मैं मानती हूँ कि मुझे लंड की ज़रूरत है और तुम्हारा लंड मुझे मिल जाएगा, यह मेरी ख़ुशनसीबी है पर प्लीज़ मुझे छोड़ दो.
वो मेरा लंड सहलाते हुए यह सब कह रही थी.
मैंने उसे छोड़ दिया, पर उसने मेरा लंड नहीं छोड़ा था.
वो कह रही थी- जुल्फी प्लीज़ छोड़ दो, छोड़ दो.
मैंने कहा- नफीसा मैंने तो छोड़ दिया है.. मगर तुमने मेरा अभी तक नहीं छोड़ा है.
क्यों अपने आपको तकलीफ़ दे रही हो? मेरा लंड मसलते हुए नफीसा कह रही थी कि जुल्फी मैं यह नहीं कर सकती.
मैं उसके मम्मों को दबाने लगा, मसलने लगा और वो मदहोश होने लगी.
मैं उसकी पेंटी में हाथ डाल कर सहलाने लगा और वो ना ना करते हुए धीरे धीरे मेरे लंड को बहुत सहलाने लगी.
मुझसे चिपकने लगी.
मैंने वक़्त ना गंवाते हुए उसे बेडरूम में आने को कहा.
वो आंखें बंद करके मेरी गोद में आ गयी.
मैंने उसे उठाया और ऊपर उसके बेडरूम में ले जाकर उसे बिस्तर पर लेटा दिया.
मैंने उसके सारे कपड़े निकाल दिए.
उसकी चुत ऐसी गुलाबी थी कि बस पूछो ही मत.
उसके बूब्स काफी टाइट और कड़क आकार में थे.
अपने जिगरी दोस्त की नंगी बीवी देख कर मेरा तो बुरा हाल हो गया था.
मैंने उसे चूमा, तो वो झट से उठ कर बैठ गई और उसने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया.
वो मेरे लंड को बड़ी बेताबी से चूसने लगी.
मैं भी उसके मम्मों को चूसने लगा और 69 में होकर उसकी चुत चाटने लगा.
थोड़ी देर के बाद नफीसा ने मुझसे कहा- प्लीज़ जुल्फी, पहले दरवाजा बंद कर दो.
मैंने दरवाजा बंद किया.
नफीसा- आओ जल्दी से मेरे ऊपर छा जाओ, तुमने मुझे पागल बना दिया है.
मैं- पागल तो मैं भी हूँ, कितने दिन से सोच रहा था कि नफीसा एक दिन मेरी बांहों में हो.
नफीसा- आज मैं तुम्हारी बांहों में हूँ और तुम्हारे हवाले मैं अपना जिस्म सौंप रही हूँ.
मैं- ठीक है, आज तुम्हें हर खुशी मिल जाएगी.
वासना के नशे में आकर उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाल के मुझसे चोदने को कहा.
मैंने धीरे से उसकी चुत में अपना आधा लंड एक ही झटके में दे दिया.
नफीसा ने कराहते हुए कहा- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गई … बहुत दर्द हो रहा है जुल्फी.
मैं- थोड़ी देर होगा मेरी जान.
नफीसा- जुल्फी जल्दी से पूरा लंड अन्दर डाल दो और मुझे आज ज़िंदगी का मज़ा दे दो.
मैं नफीसा को जी भर के चोदता रहा और वो मेरी बांहों में मचलती रही.
करीब बीस मिनट के बाद जब मैं झड़ने वाला था, तब मैंने नफीसा से कहा- नफीसा मैं माल कहां निकालूँ? नफीसा ने माल को अपनी चुत में निकालने को कहा.
आख़िर में मैंने भी लास्ट झटके मार के नफीसा की चुत में माल निकाल दिया.
उतने में नफीसा तीन बार झड़ चुकी थी.
थोड़ी देर हम दोनों एक दूसरे की बांहों में पड़े रहे.
फिर हमने हफ्ते में तीन दिन सेक्स करने का फैसला किया.
इस घटना के बाद मेरी और नफ़ीसा की सेक्स लाइफ़ बहुत अच्छे से चल रही थी.
यह सिलसिला लम्बे अरसे तक चला.
वो अब भी मेरे साथ चैट करती है और हम दोनों के बीच का जो रिश्ता है कि हम किसी को पता नहीं चलने दिया.
दोस्तो, आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बताएं.
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स्रोत:इंटरनेट