. मुझे नंगा देख कर दोनों ने एक ही घूंट में अपने गिलास खाली कर दिए.
मैंने उन्हें एक एक सिगरेट दी.
कुछ देर बाद दोनों पर नशा हावी होने लगा.
दोनों ने सिगरेट बुझाई.
वन्दना को कुछ ज्यादा नशा हो गया, वो मेरे पास आई और मेरे लन्ड से खेलते हुए बोली- हम्म … तो बोलो जीजू क्या करना है? नीरू मेरी तरफ देख कर हँसने लगी और बोली- हाँ बोलो जानू, क्या करना है? मैं- चलो अब तुम दोनों एक दूसरे को नंगी करो। सबसे पहले वन्दना, तुम नीरू की कमीज उतारो! नीरू ने हल्के पीले रंग का कॉटन का सलवार सूट पहना था। वन्दना- जो हुकुम मेरे आका! बोल कर नीरू की कमीज निकाल दी, नीरू ने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी.
ये देख कर वन्दना बोली- वाह दीदी, आपके सन्तरे तो बड़े ही गए। नीरू- बड़े नहीं होंगे तो और क्या होंगे? तेरे ये जीजू इन्हें क्या कम मसलते और चूसते हैं। मैं- नीरू, अब तुम वन्दना को बिल्कुल नंगी कर दो और खुद भी नंगी हो जाओ। नीरू ने ऐसा ही किया.
अब मैंने दोनों को बेड पर बुलाया और वन्दना को नीरू की चूत चाटने को बोला तो उसने झट से नीरू की चूत को मुंह में भर लिया और उसकी चूत के दाने पर जीभ फेरने लगी.
ऐसा करने से नीरू एकदम मचल गयी.
वो खड़ी हुई और मेरे बिना कहे दोनों बहनें 69 की पोजिशन में हो गयी.
दोनों बहनें सिसकारियां ले ले कर एक दूसरे की चूत चाट रही थी क्योंकि दोनों ही पहली बार किसी औरत से चूत चटवा रही थी तो दोनों ही एक साथ झड़ गयी.
मैं सोफे पे बैठा दोनों को देख रहा था.
मैंने नीरू को अपने पास बुलाया.
वो आकर मेरी जांघों के ऊपर बैठ गयी.
मैं उसके होंठ, जिन पे वन्दना की चूत का पानी लगा था, चूसने लगा.
फिर मैंने वन्दना को भी बुलाया.
अब वो दोनों मेरे लन्ड से खेलने लगी.
मैं उठकर सोफे पे बैठ गया वो दोनों भी मेरे अगल बगल बैठ गयी.
नीरू मेरा लन्ड पकड़ कर ऊपर नीचे करने लगी.
मैं वन्दना के होंठों को चूमने लगा, हम दोनों की जीभ आपस में खेलने लगी.
थोड़ी देर बाद नीरू ने मुझे खिसका कर नीचे कर दिया और खुद सोफे पर घोड़ी बन कर मेरा लन्ड चूसने लगी.
मैंने अपना हाथ पीछे घुमा कर उसकी चूत में उंगली दे दी और उंगली से उसकी चूत चोदने लगा.
नीरू पूरी शिद्दत से मेरा लन्ड चूस रही थी.
उसने अपने थूक से मेरा पूरा लन्ड गीला कर दिया जिससे उसके थूक की तारें बनने लगी.
उधर वन्दना ने अपने दोनों पैर मोड़ कर अपनी गांड के नीचे रख लिए और अपने चुचों को मेरे मुंह में देने लगी.
मैंने उसके चुचों को चूसते हुए उसके एक निप्पल पर हल्का सा काट दिया तो वो दर्द से उछल गयी और बोली- हाय जीजू, ऐसे मत काटो, निशान पड़ जायेगा.
फिर मैं सोफे पर लेट गया.
नीरू के चूसने से मेरा लन्ड बिल्कुल तन गया था जिसे देख कर वन्दना के मुंह में पानी आ गया.
वो बोली- बस करो दीदी, अब मुझे भी जीजू का लन्ड चूसने दो! नीरू बोली- आ जा मेरी प्यारी बहना, तू भी चूस ले! मेरा लन्ड नीरू के थूक से सना हुआ था जिसे वन्दना झट से मुंह में लेकर चूसने लगी.
मैंने नीरू को अपने मुंह पर बिठाया और उसकी चूत चाटने लगा.
थोड़ी देर बाद नीरू पूरी मस्ती में आ गयी, उसके मुंह से कामुक सिसकारियां निकलने लगी.
वो आह आह करने लगी और ‘अंदर तक अपनी जीभ डालो … जानू खा जाओ मेरी चूत के दाने को!’ ऐसा बोलने लगी.
मैं उसकी चूत की फांकों को हल्का हल्का काटने लगा.
मेरे ऐसे करने से वो आ आ आ आह करके झड़ गयी और उठ कर वन्दना के पीछे जाकर उसकी चूत चाटने लगी.
बहुत ही कामुक नजारा था.
अब मैंने नीरू को बेड पर लिटाया और उसकी गांड के नीचे तकिया रख कर उसकी टांगें हवा में फैला दी जिससे उसकी चूत बिल्कुल ऊपर को हो गयी.
मैंने नीरू की चूत पर लन्ड सेट किया और एक जोरदार झटके से अंदर पेल दिया.
नीरू ने अपने होंठ दांतों में भींच लिए मैं धीरे धीरे झटके मार रहा था और वन्दना उसके चुचों को चूस रही थी.
अब नीरू फिर से चुदासी हो गयी और अपनी गांड को उठा उठा कर लन्ड को अंदर लेने लगी.
उधर वन्दना अब उठ कर नीरू के मुंह पर बैठ कर चूत कटवाने लगी.
थोड़ी देर बाद मैंने नीरू की चूत से लन्ड निकाल कर वन्दना के मुंह में दे दिया.
अब नीरू वन्दना की चूत चाट रही थी और वन्दना मेरा लन्ड चूस रही थी.
फिर मैंने वन्दना को घोड़ी बनाया और उसकी चूत में लन्ड पेल दिया और झटके मारने लगा.
वन्दना के चुचे हवा में झूल रहे थे.
अब नीरू ने वन्दना का मुंह अपनी चूत पर दबा दिया.
वन्दना सामने से नीरू की चूत चाट रही थी और पीछे से मेरा लन्ड ले रही थी.
इतनी देर की चुदाई के दौरान दोनों दो दो तीन तीन बार झड़ चुकी थी कुछ देर बाद वन्दना दोबारा से झड़ गयी.
फिर मैंने उसकी चूत से लन्ड निकाला और बेड पर लेट गया.
नीरू आकर मेरे लन्ड पर बैठ गई और कूदने लगी.
फिर वन्दना नीरू की तरफ मुंह करके मुझसे अपनी चूत चटवाने लगी और खुद ने अपने होंठ नीरू के होंठों पर रख दिये.
कुछ देर बाद नीरू का बदन भी अकड़ने लगा और वो जोर से झड़ गई.
अब मेरा पानी निकलने वाला था, मैंने नीरू को बताया तो वो दोनों मेरे ऊपर से उठ गई.
मैं बेड पर खड़ा हो गया.
नीरू और वन्दना दोनों एक साथ मेरा लन्ड चूसने लगी.
कुछ देर बाद मेरे लन्ड से जोर से वीर्य की पिचकारी निकली जिससे दोनों बहनों के मुंह और बालों को भर दिया.
दोनों ने एक दूसरी को चाटा और फिर मेरे लन्ड को भी दोनों ने चाट कर साफ कर दिया। अब हम तीनों थक कर बेड पर लेट गए.
थोड़ी देर बाद वन्दना उठी, हम तीनों के लिए पेग बनाये और मुझे एक सिगरेट जला कर दी.
हमने नंगे ही पेग पी कर सिगरेट खत्म की और एक दूसरे को चूम कर नंगे ही सो गए.
शाम को मेरी आँख 6.
30 बजे खुली.
मैंने देखा कि वो दोनों नंगी बहनें गहरी नींद में सोई हुई थी.
दोनों बहनों का नंगा बदन बहुत ही कयामत ढा रहा था.
मैंने दोनों को जगाया फिर हम तीनों साथ में नहाये और तैयार होकर घूमने चले गए.
हमने बाहर ही खाना खाया और वापिस आ गए.
उसके बाद हमने रात को भी जोरदार चुदाई की.
उसके बाद नीरू सो गई और मैंने वन्दना को अलग कमरे में चोदा.
वन्दना की उस चुदाई की कहानी मैं आप को फिर कभी सुनाऊंगा। आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताना.
मेरा ईमेल है [email protected]
स्रोत:इंटरनेट