. मैं पीछे वाले दरवाजे पर आया, हल्का सा दबाया तो दरवाजा खुल गया.
मैं अन्दर आया और दरवाजा बंद करके ऊपर की तरफ चल दिया.
सीढ़ियों में अंधेरा था और संगीता वहीं खड़ी थी, मुझे देखते ही लिपट गई और मेरे होंठ चूसने लगी.
मैं संगीता को लेकर उसके बेडरूम में ले आया.
बेड पर बैठकर मैंने अपना लण्ड लोअर से बाहर निकाल कर संगीता की स्कर्ट उठाई और उसकी पैन्टी नीचे खिसका कर उसे अपने लण्ड पर बैठा लिया.
उसका टॉप उतारकर मैंने उसकी ब्रा निकाल दी.
संगीता के कबूतर आजाद हो चुके थे, मैंने संगीता की चूचियां चूसते चूसते उसकी स्कर्ट और पैन्टी उतार दी.
जितना मैं उतावला था, संगीता उससे ज्यादा उतावली थी.
मैंने अपना लोअर उतार दिया और उसके ड्रेसिंग टेबल पर रखी कोकोनट ऑयल की बॉटल उठा लाया.
संगीता का टॉवल चार तह करके तकिये पर बिछाया और तकिया संगीता की गांड़ के नीचे रख दिया.
संगीता की चूत के लब खोलकर मैं अपना लण्ड वहां रगड़ने लगा, संगीता मदहोश और बेताब हो रही थी.
अपनी हथेली पर ढेर सा कोकोनट ऑयल लेकर मैंने अपने लण्ड पर मला और संगीता की चूत के लब खोलकर लण्ड का सुपाड़ा रख दिया.
मैंने संगीता से कहा- तुम वन, टू, थ्री बोलो.
थ्री बोलते ही ये अन्दर चला जायेगा.
संगीता के वन, टू, थ्री बोलते ही लण्ड को अन्दर की ओर दबाया तो मेरे लण्ड का सुपारा टप्प की आवाज के साथ संगीता की चूत के अन्दर हो गया.
संगीता चिल्लाई और खुद ही अपनी हथेली से अपना मुंह दबा लिया, थोड़ी देर बाद बोली- तुम बहुत गंदे हो.
मैं हंसने लगा और संगीता की चूची चूसते हुए उसके गाल सहलाने लगा.
उसके गाल पर दो आंसू भी छलके हुए थे.
संगीता को दिलासा देते हुए मैं लण्ड को अन्दर सरकाना जारी रखे हुए था.
आधा लण्ड अन्दर हो गया था लेकिन आगे बैरियर था.
मैंने अपने लण्ड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया तो संगीता को अच्छा लगने लगा.
अन्दर बाहर करते करते मैंने संगीता से कहा- अभी जैसे अपनी हथेली से तुमने अपना मुंह दबाया था, एक बार फिर दबाओ, देखूं कैसी लगती हो.
संगीता ने अपनी हथेली से मुंह दबाया तो मैंने कहा- बहुत सुन्दर लग रही हो, ऐसे ही कस कर दबाये रहो.
इतना कहकर मैंने जोर से ठोकर मारी और संगीता की चूत की झिल्ली फाड़कर मेरा लण्ड अन्दर तक चला गया.
अब रुकने का कोई काम नहीं था.
मैंने लण्ड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना जारी रखा.
संगीता की चूत से रिसते खून से तकिये पर बिछा टॉवल लाल हो रहा था.
संगीता अब नार्मल हो चुकी थी और पूरी तरह से इन्ज्वॉय कर रही थी.
उस रात तीन घंटे में संगीता को दो बार चोदा.
ननद और भाभी दोनों अव्वल दर्जे की चुदक्कड़ बन चुकी थीं.
ऐसा लगता है कि मुझे देखते ही दोनों की चूत में खुजली होने लगती है.
एक दिन शाम को चार बजे मैं गया तो संगीता और मीना दोनों टीवी देख रही थीं.
मुझे देखकर संगीता उठी और हम दोनों ऊपर चले गये.
संगीता की बुक्स और रफ कॉपी टेबल पर रखी थी.
मैं चेयर पर बैठ गया और संगीता को अपनी गोद में बिठाकर उसके होंठ चूसने लगा.
अपना हाथ संगीता के टॉप में डालकर मैं उसकी चूचियां दबाने लगा, निप्पल्स टाईट हो गये तो टॉप ऊपर खिसका कर मैंने एक चूची मुंह में ले ली.
संगीता की स्कर्ट उठाकर उसकी पैन्टी उतार दी.
अपना लण्ड लोअर से बाहर निकाला और संगीता को टेबल के सहारे घोड़ी बना दिया.
लण्ड को अपनी थूक से गीला किया और संगीता की चूत में डाल दिया.
संगीता की कमर पकड़कर चोदना शुरू ही किया था कि सीढ़ियां चढ़ती मीना की आवाज सुनाई दी.
एक सेकेंड में हम अपनी अपनी चेयर पर बैठ गये और संगीता लिखने लगी.
मीना आई और बोली- अरे यार, सुनती नहीं हो.
तुम्हारी सहेली आशा आई है, जाओ मिल लो.
थका दिया मुझे सीढ़ियां चढ़ाकर.
संगीता चली गई तो मैंने मीना को बाहों में भर लिया, उसकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर उठा दिया.
मीना की पैन्टी उतारकर उसको घोड़ी बनाकर चोदना शुरू कर दिया.
मोटी होने के कारण उसको घोड़ी बने रहने में दिक्कत होने लगी तो बेड पर लिटा दिया और खड़े खड़े चोद दिया.
चुदवाने के बाद मीना ने पैन्टी पहनी, पसीना पोंछा और चली गई.
मैंने बाथरूम में जाकर अपना लण्ड धोया और चेयर पर बैठ गया.
कुछ देर बाद संगीता आ गई, मैंने उसका टॉप उठाकर चूचियां निकाल लीं और संगीता को अपने पैरों के पास जमीन पर बिठाकर अपना लण्ड उसके मुंह में दे दिया.
संगीता मजे ले लेकर लण्ड चूस रही थी.
मेरा लण्ड पूरे जोश में आ गया तो मैंने संगीता का टॉप उतारा और नीचे के कपड़े भी उतार दिये तो संगीता बोली- क्या कर रहे हो विजय ? दरवाजा खुला है और भाभी आ गई तो? “नहीं आयेगी, अब नहीं आयेगी.
एक बार सीढ़ियां चढ़ने में उसकी सांस फूल गई, दोबारा क्या चढ़ेगी.
” मैंने अपने कपड़े भी उतार दिये और बेड पर लेट गया.
मैंने संगीता से कहा- ऑयल की बॉटल उठा लाओ, मेरे लण्ड पर लगाओ.
संगीता ने ऐसा ही किया.
मैंने कहा अपनी चूत के लब खोलकर मेरे लण्ड पर बैठ जाओ और फुदक फुदक कर चोदो.
आज चोदना तुम्हारे हिस्से, मैं लेटा रहूंगा.
संगीता मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे लैंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी फटी चूत के छेद पर रख कर नीचे बैठने लगी.
उसे दर्द हो रहा था पर फिर भी सी … सी … करती वो पूरी मेरे लंड पर बैठ गयी और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में खो गया.
इसके बाद वो धीरे धीरे हिलना शुरू हुई और फिर कुछ ही देर में उसने कुशल घुड़सवार की तरह घोड़ा दौड़ा दिया.
इसके बाद तो वही सब जो आप सभी कहानियों में पढ़ते हैं.
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स्रोत:इंटरनेट