. फिर मैंने उसकी जो गांड मारी, जन्नत का मजा आ गया.
क्या मखमली चीज थी साली मादरचोद … वाह मेरा लंड तो जैसे जन्नत का मजा ले रहा था.
दोपहर तीन बजे रितिका का कॉल आया, तो मैं उसको लेने उसके होटल पर चला गया.
मुझे देखकर ही वो मुझसे चिपट गयी.
उसके भरी चूचियां मेरी छाती के गड़कर दिल पर छुरी चला रही थीं.
सवेरे सवेरे लंड ने उषा को ले लिया था, तो अभी उसे भी कोई जल्दी नहीं थी.
रितिका आज भी कांटा माल दिखती थी.
उसकी भरी हुई जांघें, वो चुत का त्रिकोण … वो आधे आधे किलो के दोनों मम्मे … वो दो तरबूज जैसे चूतड़ … हाय क्या मस्त चीज थी यार … साला आदमी का लंड एकदम से सलामी दे दे.
उसको मैं अपने रूम पर ले आया.
वो- जान, कितने दिनों के बाद मिले हैं न! मैं- हां यार … तुम्हारी बहुत याद आती थी.
रितिका- आज मैं तुम्हारी अतिथि हूँ क्या खिलाओगे मुझे? “तुम्हारी पसंद का केला.
” “हाय गुड़ खाके मर जावां.
” “कितनी की लीं?” “ज्यादा नहीं सिर्फ तीन की.
” “क्या पूरा बजाया.
” “हां यार आज सवेरे ही एक को बजाकर आ रहा हूँ.
” “कौन थी?” “मेरी काम वाली.
” “भोसड़ी के, काम वाली को भी नहीं छोड़ा?” “वो चीज ही ऐसी है कि केला देने का मन बन गया.
” “अच्छा, मैं भी देखना चाहूंगी तेरी काम वाली को.
” “कहो तो उसको भी सम्मेलन में बुला लूँ?” “पहले मेरी इच्छा तो पूरी होने दे … फिर उसके साथ भी करेंगे.
” “यार आज मन थ्री-सम करने का है?” “ठीक है बुला ले … लेकिन एक शर्त है … मेरी पूरी मारने के बाद ही उसे बुलाना.
” “अरे उसको तुझे मुझसे चुदते देखना है.
” “ये कैसी वाहियात बात कह रहे हो तुम?” “हां यार … बहुत भूखी है मादरचोदी.
” “अच्छा … फिर तो एक बार देखने को बनता ही है मादरचोदी रांड को … तेरी पसंद है … साली पटाखा होगी न?” “अच्छा में कॉल करके बुला लेता हूँ उसको.
” मैंने जैसे ही उषा को फोन लगाया, तो रितिका ने मेरे हाथ से मोबाइल खींच लिया.
मेरे “रुक रुक..” बोलने तक, उसने उषा से बात शुरू भी कर दी थी.
“क्यों रे साली … सुना है बड़ी नमकीन है तेरी चुत, खूब परपराती है क्या?” उषा के समझ में एकदम कुछ नहीं आया.
वो पूछने लगी- आप कौन? और ये सब क्या बोल रही हैं? रितिका के हाथ से मोबाईल लेकर मैंने उससे कहा- मैं राकेश बोल रहा हूँ, तुम जिससे बात कर रही थी, वो रितिका थी.
ये सुनकर वो हंस पड़ी- तुम्हारी गर्लफ्रेंड तो तुमसे भी ज्यादा सेक्सी बात करती है बाबू.
“हां यार, वो है ही ऐसी कि चुदाई के वक्त किसी की परवाह नहीं करती.
” “अभी मैं काम पर हूँ … आधे घंटे में रूम पर पहुंचती हूँ.
” फोन कट हो गया.
रितिका ने पूछा- क्या कहा उसने? मैंने कहा कि वो कह रही है पहले इसकी चुत और गांड ढीली कर, तब तक मैं आती हूँ.
रितिका- कमीने … साले … आज तो तेरी चांदी है.
पहले मेरी लेगा, फिर उसको चोदेगा.
मैं- जे बात, अब आएगा मजा … साली … आज तो तेरी चुत का बाजा बजाऊंगा.
रितिका- तू मेरी चुत का बाजा बजाता है कि मैं तेरे लंड को ढीला कराती हूँ … ये तो बिस्तर पर ही देखेंगे.
मैंने वैसे ही रितिका को गोद में उठाया.
मेरा लंड उसकी गांड से टच कर रहा था.
मैं- साली … कमीनी, नीचे पेंटी पहनी ही नहीं क्या तूने? रितिका- नहीं यार, यहाँ आकर निकालना ही था, तो फिर पहनने का क्या फ़ायदा? उसकी इन सेक्सी बातों को सुनकर मेरे लंड का तनाव एकदम से बढ़ गया.
अब तनकर वो लकड़ी हो चुका था.
आज रितिका की घनघोर चुदाई करने का मन था.
उसको पलंग पर लिटा कर मैंने पहला ही झटका मारा कि वो चिल्ला उठी- आह साले … धीरे कर ना … कमीन चुत फाड़ दी मादरचोद.
“तेरी माँ की चुत.
” “उसकी बाद में, पहले मेरी ले न हरामी.
” “वाओ क्या बात है यार … तेरी चुत क्या मस्त है.
आजा, आज तुझे मस्त बजाता हूँ मेरी छिनाल.
” “उम्म्ह… अहह… हय… याह… साले … ले ना..” ऐसा कहकर वो मेरे लंड के प्रहार सहन कर रही थी.
उतने में परदा हिला.
मैं समझ गया कि उषा परदे के पीछे हाजिर हो गयी है.
अब तो फुल फ़ोर्स में रितिका को बजना ही था.
“रितिका आज मेरा मूत पीएगी?” “हां जान, तुम जो भी दोगे, वो सारा पी लूंगी.
” उधर पर्दे के पीछे उषा की हालत क्या हो रही होगी, वो सोच कर मेरे लंड में और जोश भर गया था.
अचानक परदा थोड़ा सा हटा, तो मैंने देखा कि उषा अपनी सलवार उतार कर गांड में उंगली डाल रही थी.
वह मेरे लंड को देखकर अपनी उंगली को गांड में डाल कर मुँह से चूस रही थी.
मुझे लगा उसके अन्दर आने का समय हो चुका है.
साली मस्त छिनाल थी.
मैं रितिका की चुदाई आधी छोड़कर उठा और मैंने परदा एकदम से सरका दिया.
मेरे अधूरी चुदाई से भिन्नाई रितिका मेरी तरफ देखने लगी.
“रुक अभी और मजा आएगा.
” हाय क्या सीन था.
एक तरफ एक्स गर्लफ्रेंड नंगी पड़ी थी.
दूसरी तरफ मेरी सेक्सी काम वाली गांड खोले खड़ी थी.
दोनों साली चुदक्कड़ थीं.
मैंने उषा को नजदीक बुलाया.
उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया, तो उसकी सलवार एकदम नीचे गिर गई.
मादरचोदी ने कोई पैंटी पहनी ही नहीं थी.
मैंने कहा- जल्दी से कमीज उतार माँ की लौड़ी.
तो पहले उसने रितिका की तरफ देखा, मुस्काई और उसने अपनी कमीज उतार दी.
रितिका चिल्लाई- हाय क्या मस्त चूचे है तेरे छिनाल … चूमने को दिल करता है … आजा मुझे चुसवा दे.
ऊषा- रितिका जी, रुक जाओ ना.
अभी तो आयी हूँ … नंगी हुई हूँ.
एडजस्ट तो होने दो.
रितिका- ठीक है … आज तू मेरे बाद चुदेगी मेरी बन्नो.
इधर रितिका बेड पर सोई थी.
मैंने जम्प ही लगाया था कि उसने पैर ऊपर कर लिए.
मैंने रितिका की चूत में लंड को लैंड किया ही था कि उषा ने अपनी चुत मेरे चेहरे पर लगा दी.
उसकी चुत के शहद को चूसते हुए मैंने रितिका की चुदाई शुरू की ही थी कि उषा ने पलटी मारी और अपनी गांड मेरे मुँह के सामने कर दी.
लंड रितिका की चुत में और मुँह में गांड का मजा … ये बात किसी जन्नत के सुख से कम थी.
दोस्तो, ये नौकरानियां भी कभी कभी बड़ी मजा देती हैं.
एक बात है कि अगर गर्लफ्रेंड कोआपरेटिव हो, तो सेक्स का मजा कुछ और ही होता है.
उसमें भी उषा जैसी कामवाली हो, तो चुदाई में चार चाँद तो लगना लाजमी है.
आपका अभि देवले [email protected].
स्रोत:इंटरनेट