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पति और देवर ने मिलकर चुदाई करी थ्रीसम सेक्स के मजे दिए

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पति और देवर ने मिलकर चुदाई करी थ्रीसम सेक्स के मजे दिए 1

. पति और देवर ने मिलकर चुदाई करी थ्रीसम सेक्स के मजे दिए जब मेरे पति ने उससे उसकी इच्छा पूछी तो उसने मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने की इच्छा जाहिर करी.
जब मैंने ये बात सुनी तो मुझे बहुत बुरा लगा की मेरा देवर अब कुछ दिन का मेहमान है इस दुनिया में इसलिए मैंने भी मेरे कैंसर पीड़ित देवर से चुदवाने के लिए तयार हो गयी.
मरने से पहले मैं अपने देवर की आखरी ख्वाहिश जरुर पूरी करुँगी मैंने सोचा.
अगले दिन सुनील[ मेरे पति बजार से ढेर सारे गुलाब के फूल ले आये.
उन्होंने अनिल के कमरे को सुहागरात जैसा सजा दिया.
बेड पर साफ और नई चादर बिछा दी.
मेरा देवर अनिल मरने से पहले अपनी भाभी यानि मेरे साथ एक बार सुहागरात मनाना मनाता चाहता था.
तो उस रात मैं भी खूब सज धज गयी.
मैंने अपनी बनारसी साड़ी पहनी थी.
ढेर सारा मेकप किया था.
पति मुझको लेकर अनिल के कमरे तक ले आई.
मेरे पति ने अपने भाई से बोला की लो मेरे भाई तुम्हारी भाभी आज रात के लिए तुम्हारी रंडी है तू इसके साथ जो करना चाहे कार सकता है और मेरा हाथ अपने भाई अनिल के हाथ में दे दिया.
फिर मेरे कैंसर पीड़ित देवर ने अपने भाई से बोला की भैया आप भी हमारे साथ में सेक्स करो ना हम दोनों भाई मिलकर भाभी की चुदाई करते हैं थ्रीसम सेक्स करने में बड़े मजे आयंगे.
थ्रीसम सेक्स की बाद पर मेरी पति थोडा शरमा गए और कुछ नहीं बोले.
मेरे पति थ्रीसम सेक्स करने से मना करते उससे पहले मैंने बोला की ठीक है देवर जी जैसी आप की इच्छा यदि आज आपकी इच्छा थ्रीसम सेक्स करने की है तो हम जरुर करेंगे.
मेरा मेरे पति और देवर के साथ थ्रीसम सेक्स शुरू हो गया.
मेरे कैंसर पीड़ित देवर अनिल ने मुझे चोदने के लिए अपने बिस्तर पर बिठा लिया.
अनिल और मेरे पति सुनील दोनों ने नए कपडे पहने थे.
मेरे कैंसर पीड़ित देवर मेरे बदन से खेलने लगे, तो मेरे पति भी मेरे पैरों को चूमने लगे.
कुछ देर बाद देवर जी ने मुझे नंगा कर दिया और मेरे बड़े बड़े मम्मो को वो दबाने लगे.
अब अनिल [मेरा देवर] मेरे मम्मे पीने लगा.
जबकि मेरे पति मेरे चूत पीने लगे.
‘पंखुड़ी बेबी!! मुझे माफ कर देना.
तुम सच में बहुत सुंदर हो.
मैं कभी तुम्हारी तारीफ ही नही करता हूँ.
क्यूंकि मेरा काम मुझको बड़ी टेंशन और तनाव दे देता है.
सॉरी बेबी!! पतिदेव बोले.
कोई नही जी !! मैं बोली देवर जी और मेरे पति दोनों अब नंगे हो गए.
देवर जी की ही ये सुहागरात थी.
इसलिए उन्होंने मुझे सीधा बेड पर लिटा दिया और मेरे उपर सिर से पाँव तक गुलाब के फूल डाल दिए.
मुझे बहुत अच्छा लगा.
बड़ी खुशी मिली मुझे.
देवर मेरे दोनों स्तन को अपने सख्त हाथ से दबाने लगा.
मुझे हल्का हल्का दर्द ही हो रहा था, पर अच्छा भी लग रहा था.
आज किसी दूसरे मर्द के हाथों ने मुझे मेरे गुप्त अंगों पर हाथ लगाया था.
मुझे अच्छा लगा.
अनिल का लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा और कुछ देर बाद तो मेरे पति से भी जादा लम्बा हो गया.
मन हुआ की देवर से कहूँ की अपनी भाभी को अपना लंड चुस्वाओ, पर फिर सोचा की ऐसा करना सही नही होगा.
इसलिए मैंने अपनी इक्षा को दबाए रखा.
अनिल मेरे दोनों मम्मे अपने हाथ से गोल गोल आकार में दबाता रहा और पीता रहा.
मेरी पति दूसरी तरह मेरी चिकनी संगमरमरी जांघ को सहला और चूम रहें थे.
आज मैं २ २ मर्दों से चुदने वाली थी.
अनिल मेरे होंठ, मेरे लब का बार बार रसपान कर रहा था.
आखिर मैं उसकी भाभी थी.
मरने से पहले उसकी ये आखरी ख्वाइश तो पूरी कर ही सकती थी.
मेरे मेरे माथे को बार बार मुझे अपनी बीबी समझ के चूम रहा था.
मेरे दोनों उजले कन्धों को वो चूम लेता था और काट लेता था.
मेरे पति अपने छोटे भाई का मेरे लिए उमड़ता प्यार देख कर मुस्कुरा देते थे.
कबसे अनिल मुझे और मेरी चूत को भोगना चाहता था.
आज उसकी तमन्ना पूरी होने वाली थी.
तभी अनिल ने मेरे एक स्तन को अपने मुंह में भर लिया.
आँखे बंद करके मेरे उपर ही लेट गया और पीने लगा.
लगा जैसे कोई बच्चा मेरा दूध पि रहा हो.
पति मेरी बुर पी रहें थे.
करीब एक घंटे तक मेरे दूध पीटा रहा.
क्यूंकि वो मेरे साथ अपनी यादगार सुहागरात मना रहा था.
मैं उसको किसी भी बात के लिए मना नहीं कर सकती थी.
मुझे हर हाल में उसकी इक्छा पूरी करनी थी.
मेरा कैंसर पीड़ित देवर अनिल मेरी नंगी पीठ को अपने हाथ से सहलाता रहा था और लेटकर मेरे बड़े बड़े स्तनों में से किसी छोटे बच्चे की तरह दूध पी रहा था.
मुझे मेरे कैंसर पीड़ित देवर को अपने बड़े बड़े स्तनों में से दूध पिलाने में बहुत आनंद आ रहा था.
मेरे स्तनों में से सारा का सारा दूध निचोड़ लेने के बाद मुझसे मेरा कैंसर पीड़ित देवर बोला की भाभी मैं तुम्हारी गुलाबी चूत में ऊँगली करूँगा और आपको बहुत मजे दूंगा! मैं बोली की ठीक है देवर जी मेरे जिस्म के साथ आप को जो भी करना है कर लो आपको पूरी आजादी. है… मेरी पति अब मेरी चूत से हट कर मेरे सिरहाने आ गए और फिर उन्होंने ब्लोजॉब के लिए अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया.
मैं किसी रंडी की तरह से उनके खड़े लंड को पुरे जोश के साथ चूसने लगी.
जब मैं मेरे पति का खड़ा लंड अपने मूंह में लेकर चूस रही थी तो उसी दौरान मेरा देवर अनिल मेरी चूत पर आ गया.
मैंने आज सुबह ही अपनी झांटे के बाल साफ़ कर लिए थे ताकि मेरी चूत चिकनी और आकर्षित दिखे.
फिर मेरे कैंसर पीड़ित देवर अनिल ने अपने दोनों अंगूठे से मेरी चूत रबर की तरह फैला दी और उसे अपनी जीभ से चोदने लगा.
मेरी गुलाबी चूत को करीब पांच मिनिट तक अपनी जीभ से मेरी बुर चोदने के बाद मेरे कैंसर पीड़ित देवर अनिल ने अपना मुंह मेरी गुलाबी चूत पर से हटा लिया और अपनी दो लम्बी उँगलियाँ मेरी गुलाबी चूत के अंदर थूक लगाकर डाल दी.
जैसे ही उसकी दो उँगलियाँ मेरी चूत के अंदर गयी मुझे तो ऐसा लगा मानो मुझे सारे जहाँन की खुशियाँ मिल गयी हो.
मेरा हरामी देवर अनिल अपनी दो लम्बी उँगलियाँ जल्दी जल्दी मेरी चूत में चलाने लगा.
मैं तो मजे में डूब गयी.
मेरा देवर अनिल तो बड़ा शरारती निकला.
जहाँ एक तरह वो मेरे बड़े से फटे हुए भोसड़े में अपनी लम्बी दो उँगलियाँ जल्दी जल्दी चला रहा था, वहीँ वो अपने अंगूठे से मेरी बुर के अंदर मौजूद करने वाले छेद को सहला रहा था.
उस ठरकी की इन सब गन्दी हरकतों की वजह से मेरी कामउत्तेजना बहुत जादा बढ़ने लगी.
मन हुआ की जिस छेद में से मैं पेशाब करती हूँ, काश उसमे भी अनिल अपना लंड डाल दे और मेरे साथ हार्डकोर सेक्स करे.
उधर मेरे पति मेरे सिरहाने पर आकर खड़े हो गए थे, और मुझे अपना लंड चुसवा रहे थे.
दोस्तों, मैं बता नही सकती हूँ की मुझे मुझे मेरी पति और कैंसर पीड़ित देवर के साथ थ्रीसम सेक्स करने में कितना आनंद आ रहा था मैं बड़ी भाग्यशाली थी जो शादी शुदा लड़की होने के बावजूद आज मुझे दो दो लंड अपनी गांड और चूत. के छेद में लेने का सोभाग्य प्राप्त हो रहा था.
मेरे कैंसर पीड़ित देवर अनिल की शरारतों ने तो मेरी जान ही निकाल दी थी.
मेरी टाइट चूत से मक्खन निकलने लगा.
मारे उत्तेजना के मैं मूतने लगी तो अनिल ने अपना मुंह लगा दिया और मेरा सारा मूत वो पी गया.
मुझे बड़ी खुशी हुई.
कई मिनटों से वो अपनी २ मोटी मोटी ऊँगली मेरी चूत में कर रहा था, इससे मेरा भोसड़ा और खुल गया और छेद और चौड़ा हो गया.
मुझसे रहा नहीं गया और मैं बोली की देवर जी! अब अपनी इस को और मत सताओ सेक्स करने के लिए! मुझे अब तुम चोदो और मेरी कामवासना शांत कर दो.
यह सुनते ही जैसे अनिल को नया उत्साह आ गया.
फटाफट उसने अपना मोटा लंड मेरे भोसड़े में खोंस दिया और मुझे चोदने लगे.
उधर मेरे पति सुनील मेरा दूसरी तरह मुंह चोद रहें थे.
मेरी बचपन से ही थ्रीसम सेक्स करने की इच्छा थी और देखो आज मेरी वो ज्वलंत इच्छा पूरी हो चुकी थी और आज एक साथ दो मर्दों की रंडी बनने का सौभाग्य मुझ भाग्यशाली लड़की को मिल रहा था.
देवर जी कबसे मेरी चूत का भोग लगाना चाहते थे.
आज जाकर उनका सपना पूरा हुआ था.
वो मुझे फट फट करके भांज रहें थे.
पति मेरे कर रहे थे और इस दौरान मेरा देवर मेरे को बड़े प्यार से सहला रहे थे.
आ ममा माँ माँ ऊई उई आह आह्हह्ह !! मैं बहुत ही ज्यादा कामुक सिसकियाँ ले रही थी.
मेरा कैंसर पीड़ित देवर अनिल मुझे जादा से जादा गहराई तक चोदना चाहता था.
वो मुझ नंगी शादी शुदा लड़की की टाइट चूत में घप घप करके अपना लंबा मोटा लंड भांजता रहा और मैं नंगी लड़की चुदाई करवाते करवाते बस उसकी सूरत ही निहारती रही.
कई जोरदार धक्के देता देता मेरा कैंसर पीड़ित देवर मेरी चूत में ही झड गया.
हम भाभी और देवर की चुदाई देखकर मेरे पति बहुत ही ज्यादा चुदास से भर चुके थे और फिर मेरे कैंसर पीड़ित देवर के हटते ही अब मेरे पति मेरी चुदाई करने के लिए मेरे उप्पर चढ़ गए.
उनका लंड खड़ा था और बढ़ी आराम से मेरी बुर के अंदर चला गया.
अब मेरे पति मेरी चुदाई करने लगे रो इस दौरान मेरा नंगा देवर अनिल मेरी बगल में नंगा ही लेट गया.
मेरी चुदाई करते करते वो बहुत ही ज्यादा थक चूका था और उस के नंगे शरीर पर बहुत ही ज्यादा पसीना आ चूका था.
मैं उसके सीने पर उसके काले काले सीने के बालों को सहलाने लगी.
वो अभी बांका छोरा था.
मेरी पति सुनील ने मुझको २० मिनट तक लिया फिर वो भी झड गए.
मेरा कैंसर पीड़ित देवर अनिल एक बार फिर से तयार हो गया था.
मेरा नंगा देवर मुझसे बोला की भाभी! कुतिया बनो मुझे आप की गांड भी मारनी है…मैंने कुतिया बनकर अपनी गांड की चुदाई करवाने में कोई बहाने नही मारे और जल्दी से अपनी गांड की चुदाई करवाने के लिए कुतिया बन गयी.
अनिल ने एक बार फिर से मेरी गांड के छेद में अपना खड़ा लंड किसी नुकीले खंजर की तरह घोंप दिया.
और मुझे लेने लगा.
जोश जोश में वो मेरे चूतडों पर जोर जोर से थप्पड़ लगा देता.
उसकी मार ने मेरे चुतड लाल लाल हो जाते.
ऐसा करते हुए अनिल ने मुझे काफी देर ठोका, फिर मेरे मस्त मस्त चूतडों पर ही उसने अपना सारा माल गिरा दिया.
दोस्तों, अनिल के साथ मेरी सुहागरात बड़ी मस्त रही.
मेरी देवर ने करीब एक मैंने तक मेरी खूब जमकर चुदाई करी मगर बाद में मुझे पता चला की मेरा देवर झूंठ बोल रहा था और उसकी तब्यत बिलकुल ठीक थी.
मुझे पता चल चूका था की उसने जो ब्लड कैंसर की रिपोर्ट मेरे पति को दिखाई थी वो सब नकली थी.
मगर अब क्या था मैं तो उससे चुदवा चुकी थी और वो मेरे साथ गेम खेल चूका था.
दोस्तों उम्मदी करती हूँ की हमारी थ्रीसम सेक्स के ये मजेदार अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी “पति और देवर ने मिलकर चुदाई करी मुझे थ्रीसम सेक्स के मजे दिए” आप सभी को बहुत पसंद आयी होगी….
स्रोत:इंटरनेट