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परिवार में बेनाम से मधुर रिश्ते 2

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परिवार में बेनाम से मधुर रिश्ते 2 1

. यह कहानी सुनें.
मेरे भाई शिवम का लंड मेरी चूत में इतना मजा दे रहा था कि दो मिनट बाद ही मेरा बदन एकदम से अकड़ गया और मैंने शिवम की गांड पकड़ ली और चूत को उसके लंड पर सटा दिया.
उसका लंड मेरी चूत में पूरा समाया हुआ था.
और तभी मेरी चूत से मेरा गर्म गर्म पानी छूट गया.
मैं उससे लिपट गयी और झटके देकर शांत हो गयी.
अब मैं फिर से नीचे लेटी और एक बार फिर से शिवम मेरी चूत में धक्के लगाने लगा.
चुदाई के दौरान पच पच की आवाज हो रही थी.
उधर लूसी भी झड़ गयी थी और अब उसकी सिसकारियां बंद हो गयी थीं.
वो दर्द में सिसकार रही थी.
दोनों भाई हम दोनों बहनों की चूत को रौंद रहे थे.
फिर एकाएक शिवम के धक्के तेज हो गये और फिर वो भी मेरी चूत में झड़ता चला गया.
उधर विवेक ने भी लूसी की चूत में माल भर दिया और हम चारों शांत हो गये.
इस तरह से उस रात हमने तीन बार मजे लिये.
हमारा रिश्ता अब और गहरा हो गया था.
हम दोनों उनसे चुदती रहीं और एक बार तो दोनों को बच्चा भी ठहर गया था लेकिन दवाई खाकर हमने वो गिरा दिया.
एक दिन की बात है कि मैं और विवेक घर के पीछे बने बाथरूम में एक साथ मस्ती कर रहे थे.
हमने ध्यान नहीं दिया कि छत के ऊपर हमारे बड़े पिताजी के बेटे अनिकेत भैया ऊपर से हम लोगों को देख रहे थे.
उनको शक हो गया कि बाथरूम में कविता पहले से थी तो विवेक क्यों गया? भैया जब तक नीचे आते विवेक जा चुका था लेकिन भैया को शक हो गया था.
वह हमारे ऊपर निगाह रखे हुए थे.
इस सब से हम दोनों अनजान थे लेकिन एक सप्ताह ही बीता होगा कि एक दिन विवेक ने दोपहर को मुझे इशारा करके पीछे जाने को कहा.
मैं पीछे जाने लगी तो विवेक भी पीछे आ गया.
इतने में हम दोनों चिपक कर बाथरूम में चले गए.
अनिकेत भैया बाथरूम के गेट पर आकर खड़े हो गए और दरवाजे को खटखटाने लगे.
हम दोनों डर गए थे.
अनिकेत भैया दरवाजे को और तेज खटखटाने लगे.
अनिकेत भैया ने कहा- विवेक, दरवाजा खोल साले.
मुझे पता है तू अंदर ही है.
अब हम दोनों बहुत डर गये.
मगर विवेक कुछ सोचने लगा.
फिर उसने दरवाजा खोल दिया.
मैंने नजर नीचे झुका ली और अनिकेत भैया भी अंदर आ गये.
वो बोले- साले हरामी, ये क्या कर रहा है? विवेक बोला- क्या कर रहा हूं, वही कर रहा हूं जो आप करते हो? अनिकेत भैया- मैं क्या करता हूं? विवेक- आप भी तो नानी के साथ करते हैं.
अनिकेत- क्या बकवास कर रहा है तू? विवेक- मेरे पास फोटो भी है, अगर कहो तो अभी दिखाऊं? अनिकेत ने मेरी तरफ देखा और फिर बोला- नहीं, रहने दे.
मगर ये सब तुम दोनों का नहीं चलेगा.
या तो मुझे भी अपने साथ शामिल करो या फिर मैं इस बात को ऐसे नहीं चलने दूंगा.
विवेक बोला- तो फिर पहले आप ही कर लो और मैं बाहर चला जाता हूं.
मगर ये बात कहीं और नहीं जानी चाहिए.
मैं विवेक को हैरानी से देख रही थी.
वो अनिकेत भैया से मेरी चूत चुदवाना चाह रहा था.
फिर विवेक बाहर चला गया और अनिकेत भैया ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया.
मैं थोड़़ी घबरा गयी.
मैंने अनिकेत के बारे में कभी ऐसा नहीं सोचा था.
वो मुझे बांहों में लेकर मेरे ऊपर टूट पड़ा.
मैं पहले ना ना करती रही लेकिन मेरा मन भी अंदर से अनिकेत के खड़े लंड को पाने के लिए बेताब था.
जिस लंड से मेरी मां चुद रही थी मैं भी देखना चाहती थी कि उस लंड में ऐसी क्या खास बात है? अनिकेत भैया ने मेरी चूचियों को नंगी कर दिया और उन पर होंठ लगाकर पीने लगा.
मुझे अच्छा लगने लगा लेकिन मैं ज्यादा दिखा नहीं रही थी कि मुझे मजा आ रहा है.
वो बहुत मस्त तरीके से मेरी चूचियों को पी रहे थे.
मैं जोर जोर से सिसकारने लगी.
तभी विवेक भी अंदर आ गया.
मैंने विवेक से कहा- ये बहुत जोर से कर रहे हैं.
वो बोला- कोई बात नहीं, इनको भी मजा लेने दो.
अनिकेत बोला- कविता, मैंने तुझे गोद में लेकर खिलाया है.
जब तू बच्ची थी तो मेरी गोद में खेलती थी.
आज एक बार फिर मैं तुझे गोद में लेने वाला हूं लेकिन आज तुझे खिलाऊंगा नहीं बल्कि तुझे अपने लंड पर झुलाऊंगा.
इतना बोलकर वो मेरी चूत को जोर जोर से मसलने लगे.
उन्होंने मेरा हाथ अपने लंड पर रखवा दिया.
मैं भी गर्म हो चुकी थी तो मैंने उनका लंड पकड़ लिया.
अनिकेत का लंड बहुत लम्बा और मोटा था.
मगर अभी वो पैंट के अंदर ही था.
फिर उसने मेरी चूत में उंगली दे दी तो मैं उचक गयी.
वो तेजी से मेरी चूत में उंगली चलाने लगा.
अब मैं उससे लिपट गयी और उंगली को बर्दाश्त करने लगी.
उसने एक हाथ पीछे ले जाकर मेरी गांड में भी उंगली दे दी.
मेरे पास अब कोई रास्ता नहीं था.
आगे से मेरी चूत में उंगली जा रही थी और पीछे से मेरी गांड में। ऐसा लग रहा था जैसे वो अपने दोनों ही हाथ मेरे अंदर घुसा देगा.
फिर उसने उंगली निकाल ली और साथ ही अपनी पैंट भी खोल ली.
वो नीचे से अब अंडरवियर में था और उसकी पैंट नीचे गिर गयी थी.
उसने पैंट निकाल दी और केवल अंडरवियर में रह गया.
ऊपर उसने टीशर्ट पहनी हुई थी.
अब उसने मुझे अपनी गोद में उठाया और मेरी चूत में लंड घुसा दिया.
मैं एकदम से उचक गयी.
और तभी उसने मुझे अपने लंड पर उछालना शुरू कर दिया.
मैं उससे चिपक गयी और उसके लंड पर कूदने लगी.
उसका लंड नीचे ही नीचे मेरी चूत में अंदर बाहर हो रहा था.
ऐसा लग रहा कि लंड मेरे पेट में टकरा रहा है.
मैं भी उसको पूरा जड़ तक घुसवा रही थी.
ऐसे ही मजा आ रहा था.
विवेक वहीं खड़ा होकर मजे ले रहा था.
वो मेरी गांड को छेड़ रहा था.
उधर अनिकेत तेजी से मुझे अपने लंड पर उछाल रहा था.
पांच मिनट की चुदाई के बाद मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और मैं बेहाल हो गयी.
अभी भी अनिकेत के लंड के धक्के रुक नहीं रहे थे.
अब बाथरूम में पच पच की आवाज होने लगी.
कुछ देर के बाद अनिकेत भी एकदम से शांत होता चला गया.
उसका वीर्य मेरी चूत में निकल गया था.
इस तरह से अब विवेक और अनिकेत दोनों ने कई बार मिलकर मुझे चोदा.
अब विवेक मेरी मम्मी की चुदाई करने का प्लान कर रहा था और वो इस प्लान को अनिकेत के साथ बना रहा था। शिवम और लूसी को इस बारे में नहीं पता था.
एक बार ऐसा हुआ कि शिवम ने मुझे चोदने का बोला.
उस दिन दोपहर में मम्मी मार्केट चली गयी.
शिवम मुझे बाथरूम में लेकर घुस गया और मेरी चूचियों को नंगी करके पीने लगा.
कुछ ही देर के बाद उसका लंड मेरी चूत में था.
हम दोनों ने चुदाई की और शिवम मेरी चूत में खाली हो गया.
जब हमने बाथरूम का दरवाजा खोला तो बाहर अनिकेत भैया खड़े थे.
अनिकेत हम दोनों को देखकर मुस्कराने लगे लेकिन शिवम की तो जैसे हवा ही निकल गयी.
वो कुछ नहीं बोल सका.
अनिकेत बोले- क्यों रे … अपनी ही सगी बहन के साथ? मैंने शिवम का चेहरा देखा तो वो लाल हो गया था.
अनिकेत ने कहा- डरो नहीं, विवेक ने मुझे सब पहले से ही बता दिया था.
फिर शिवम थोड़ा नॉर्मल हो गया.
अनिकेत भैया ने मुझे गोद में उठा लिया और बोले- तुमने तो पूरे घर में चुदाई का माहौल बना दिया है.
मैंने कहा- शुरूआत भी तो आपने ही की थी.
मां को अपनी रखैल बना लिया आपने! अनिकेत बोले- मैं लूसी को भी चोदना चाहता हूं.
शिवम ने कहा- लेकिन विवेक मानेगा? अनिकेत- उसको मनाना मेरा काम है.
वो तुम्हारी मां को चोदना चाहता है.
शिवम- वो तो मैं भी चोदना चाहता हूं.
करो कुछ प्लान फिर तो! अनिकेत- इतना आसान नहीं है उसे चोदना.
तुम लोग अभी छोटे हो.
उसको चोदने में टाइम लगेगा.
शिवम- कोई छोटा नहीं है.
सब बड़े हो गये हैं.
आप प्लान करो। अनिकेत- ठीक है, आज रात को कुछ करते हैं.
सभी मिलकर मस्ती करेंगे.
अब हमारी पूरी तैयारी हो गयी थी.
अनिकेत भैया, विवेक और लूसी पिछले दरवाजे से घर में लगभग 10:30 बजे अंदर आए.
आज अनिकेत भैया के नए रिश्ते के साथ अंदर का माहौल गर्म था.
अनिकेत भैया ने लूसी को अपनी बांहों में ले लिया और उसकी चूचियों को दबाने लगे.
लूसी को शर्म आ रही थी.
वो पहली बार अनिकेत से चुदवाने जा रही थी.
शिवम बोला- अनिकेत भैया, आप मां को कब से चोद रहे हैं? अनिकेत भैया बोले- बहुत लंबी कहानी है.
10 साल से ऊपर हो गये हैं.
तब से ही चोद रहा हूं.
बताने बैठूंगा तो 2 घंटे लग जाएंगे.
मैं बोली- आप शॉर्ट में बताइए.
अनिकेत भैया- काम करने दो ना पहले, अभी तो हम मजा लेंगे। मगर हम जिद करने लगे तो भैया बताने लगे.
अनिकेत भैया बोले- तब मैं 19 साल का था.
चाची का तुम्हारे बड़े मामा के बड़े लड़के सुनील से संबंध था.
वो उसको बराबर आकर चोदता था.
मुझे एक दिन शक हो गया और मैं पीछा करने लगा.
एक दिन मेरा काम बन गया.
उस दिन सुनील आया हुआ था.
मैं एकदम से अंदर चला गया तो देखा कि चाची बेड पर नंगी पड़ी हुई थी.
घर में कोई नहीं था.
मुझे देखकर सुनील चौंक गया.
चाची ने अपना चेहरा छुपा लिया.
सुनील जल्दी से उठकर कपड़े पहनने लगा और चाची भी खुद को ढकने लगी.
वो अपनी चूचियों और चूतड़ों को ढकने की कोशिश कर रही थी.
सुनील वहां से भाग गया लेकिन मैंने चाची को वहीं पकड़ लिया.
उस दिन मैंने चाची को कहा कि ये सब कब से चल रहा है तो उसने मुझे पूरी बात बताई.
उसकी चुदाई की कहानी सुनकर मेरा भी लंड खड़ा हो चुका था.
अनिकेत भैया आगे बोले- सुनील और चाची की चुदाई मैंने बीच में ही खराब कर दी थी.
उस वक्त मैं भी गर्म था और चाची भी अधूरी थी.
मैंने चाची को नीचे बेड पर गिरा लिया और उसके ऊपर चढ़ गया.
मैंने उसको चूसा और फिर उसको नंगी करके अपनी पैंट भी निकाल दी.
मैंने चूत में लंड लगाया और उसको चोदने लगा.
चाची भी लंड लेना चाहती थी इसलिए पूरा साथ देने लगी.
कुछ देर की चुदाई के बाद मैं चाची की चूत में झड़ गया.
वो खुश हो गयी और मैं भी खुश हो गया.
उस दिन मैंने पहली बार चाची को चोदा था.
तब से ही हमारा रिश्ता चला आ रहा है.
ये सब बताने के बाद अनिकेत ने लूसी की चूत में लंड पेल दिया और उसको चोदने लगा.
लूसी पहली बार अनिकेत का लंड ले रही थी और उसको दर्द भी हो रहा था.
मगर वो धीरे धीरे फिर चुदाई का पूरा मजा लेने लगी और आराम से चुदते हुए अनिकेत का साथ देने लगी.
उसको चुदते हुए देखकर अब विवेक और शिवम भी नहीं रुक पाये.
विवेक और शिवम भी मुझे पर टूट पड़े.
वो दोनों मेरी चूत और गांड को सहलाने लगे.
और कुछ देर बाद ही दोनों के लंड मेरे दोनों ही छेदों में थे.
लूसी अनिकेत से चुद रही थी और मैं विवेक और शिवम से.
पूरे रूम में चुदाई की आवाजें गूंज उठीं.
सब लोग सिसकार रहे थे.
बहुत मजा आ रहा था.
ग्रुप सेक्स में चुदते हुए मैं तो बहुत जल्दी झड़ गयी.
पहली बार इतना मजा आया.
कुछ देर में ही अनिकेत ने भी लूसी की चूत में अपना माल गिरा दिया.
फिर वो अलग हो गया और शिवम और विवेक ने लूसी को पकड़ लिया.
उन दोनों ने लूसी को भी आगे और पीछे दोनों तरफ से चोदा.
विवेक ने अपनी बहन लूसी की गांड चुदाई की और शिवम ने उसकी चूत मारी.
लूसी ने उन दोनों के लंड के माल को अपनी चूत में ही लिया.
मैं भी हैरान थी कि वो इतनी बड़ी चुदक्कड़ हो गयी थी.
पहले उसने अनिकेत का लंड लिया और फिर शिवम और विवेक का लंड भी ले गयी.
उसकी चूत उन तीनों के माल से पूरी तरह से भर गयी थी.
उसकी चूत में से सफेद गाढ़ा माल बहुत देर तक बाहर गिरता रहा जिसको वो अपनी चूत पर रगड़ती रही और मुस्कराती रही.
उस रात हम दोनों ही कई बार चुदी.
फिर सब शांत हो गये.
इस तरह उस दिन हम पांचों ने मिलकर चुदाई का मजा लिया.
मगर मम्मी की चुदाई उनके बेटे से होनी बाकी थी.
इससे आगे की कहानी मैं आपको फिर कभी बताऊंगी.
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स्रोत:इंटरनेट