. चाची ने आगे कहा- तेरे चाचा मुझको समय ही नहीं दे पाते हैं.
जब वो रात को घर आते हैं, तब खाना खाकर सो जाते हैं.
उनको चुदाई करने का कोई ज्यादा शौक नहीं है.
जब नयी-नयी शादी हुई थी, बस तभी वो मुझे जमकर चोदते थे.
मगर अब वो मुझे टच भी नहीं करते हैं.
मुझे बिना चुदाई के ही रहना पड़ता है.
इस वजह से मुझे ऐसा करना पड़ा.
मैं समझ गया कि चाची को सेक्स करने का बहुत मन होता है.
उसी कारण मजबूरन उनको पड़ोस वाले अंकल से सेक्स करवाना पड़ा.
मैंने जब उनके मुँह से चुदाई जैसे शब्दों का प्रयोग सुना तो मैंने हिम्मत बढ़ाई और उनसे पूछ लिया कि तो अब तक उन अंकल से कितनी बार चुदाई करवा चुकी हो? फिर उन्होंने सब कुछ मुझे बता दिया कि कब, कहां और कितनी बार दोनों ने मज़े किए.
ये सुनकर मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैंने कहा- मुझे भी आपसे सेक्स करना है.
चाची पहले तो मना करने लगीं.
वो बोलने लगीं- नहीं ये सब चाची भतीजा चुदाई गलत है.
मैंने उनको समझाया- चाची अगर आप मुझसे सेक्स करोगी, तो घर की बात घर में ही रहेगी.
चाची चुप हो गईं और सोचने लगीं.
वो थोड़े समय तक कुछ नहीं बोलीं.
उसी का मौका उठाते हुए मैंने चाची के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनको कसकर जकड़ लिया.
इसका चाची ने भी कोई विरोध नहीं जताया.
तो मैं समझ गया कि लाइन क्लियर है.
अब मैंने अपना एक हाथ चाची के मम्मों पर रख दिया और उन्हें दबाने लगा.
जैसा कि मैंने ऊपर भी बताया था कि मैंने कभी सेक्स नहीं किया था, मगर सेक्स के वीडियो बहुत देखे थे … उस कारण मुझे सेक्स का काफी ज्ञान था.
चाची ने कहा- पहले जाकर दरवाजा बंद करो … ताकि कोई आ ना जाए.
मैं झट से उठ कर घर का मेन दरवाजा बंद कर दिया.
इस समय वैसे भी हमारे अलावा कोई घर पर होता नहीं, चाचा तो सवेरे ही काम पर निकल जाते हैं और रात को ही लौटते हैं.
मैंने जाकर दरवाजा बंद किया.
फिर बिना समय गंवाए मैं चाची का ब्लाउज निकालने लगा.
मैं पहली बार किसी औरत के साथ ऐसा कर रहा था.
तभी चाची ने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया.
उनका हाथ का अपने लंड पर अहसास होते ही मानो मुझे जन्नत ही मिल गयी.
चाची मेरी पैन्ट के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाने लगीं.
मेरा लंड आकार लेने लगा … जिसे देख कर चाची की आंखों से वासना टपकने लगी.
फिर हमने एक दूसरे के कपड़े निकाले.
मैंने चाची का नंगा जिस्म सामने देखा तो मैं तो मानो पागल ही हो गया.
चाची ने मुझे अपनी छाती से चिपका लिया.
मैंने भी उनकी चूची के निप्पल को अपने होंठों में दबाया और चूचे चूसने में लग गया.
चाची के मुँह से गरमागरम आहें निकलने लगीं.
मैं तो बौरा गया था … बस चूचों को चूसने में जन्नत महसूस कर रहा था.
तब चाची बोलीं- अब आगे कुछ करोगे या मम्मों के साथ ही खेलते रहोगे.
यहां मेरे से रहा नहीं जा रहा है … जल्दी से मेरी चुत में अपना लंड घुसेड़ दो.
इस पर मैंने चाची से अपना लंड चूसने को कहा तो चाची मना करने लगीं और बोलीं- मैंने कभी लंड नहीं चूसा है.
मगर मुझे तो चाची की चुत चाटने का मन कर रहा था और मैंने उनको खींचकर चित्त की पोजीशन में लिटा दिया.
मैंने चाची की चुत को चाटना शुरू कर दिया.
पहले तो चाची कहने लगीं- आह छोड़ो … ये सब क्या कर रहे हो.
मगर मैं उनकी चुत पर अपने मुँह को लगाए ही रहा.
कुछ पल बाद उन्हें भी मज़ा आने लगा.
उनके मुँह से आवाज आने लगी.
मुझे भी अच्छा लगने लगा.
फिर चाची बोलीं- अपने मन की कर ली हो, तो अब मेरे मन की भी कर दो … मुझसे रहा नहीं जा रहा है … क्यों मुझे तड़पा रहे हो.
मैंने समय नहीं गंवाते हुए अपने लंड का सुपारा चाची की चुत पर रख दिया और धीरे से अन्दर पेल दिया.
चाची ने आह की आवाज करते हुए मेरे लंड को खा लिया.
मैं लंड को धीरे धीरे अन्दर बाहर करने लगा और दोनों हाथों से चाची के मम्मों को दबाने लगा.
साथ ही मैं चाची को किस किए जा रहा था.
कुछ समय ऐसा ही चलता रहा.
फिर हमने अपनी पोजीशन बदल ली.
अब चाची मेरे ऊपर आकर मेरे लंड पर बैठ गईं और गांड ऊपर नीचे करते हुए चुदाई करवाने लगीं.
करीब दस मिनट तक चुदाई चली.
मुझे ऐसे लगा कि अब मेरा निकलने वाला है.
मैंने चाची को बताया कि चाची मेरा होने वाला है … जल्दी बताओ … रस कहां निकालूं.
चाची ने मुस्कुरा कर कहा- हां, मेरा भी हो गया.
तुम अपना रस मेरे अन्दर ही छोड़ दो.
बस इतना सुनते ही मैंने आंख बंद करके फ्रंटियर एक्सप्रेस दौड़ा दी.
मुश्किल से बीस धक्के मारने के बाद मैंने अपना सारा माल उनकी चूत में ही छोड़ दिया.
चाची चुदने के बाद बहुत खुश लग रही थीं.
इस तरह से मैंने पहली बार चाची को चोदा.
उन्होंने कहा- ऐसी चुदाई मैंने अब तक नहीं की.
चाची मेरे लंड की तारीफ करने लगीं.
हम दोनों ऐसे ही नंगे थोड़े समय तक पड़े रहे.
मैंने पूछा- आपका कब हो गया था? चाची ने कहा- चुदाई के समय मेरा दो बार पानी निकला था.
वो बहुत खुश थीं.
मैंने देखा कि उनकी आंखों से आंसू आने लगे थे.
वो रो रही थीं.
मैंने उन्हें चुप कराया और पूछा- क्या हुआ चाची? चाची कहने लगीं कि ये सब जो मैं कर रही थी … मेरा उन पड़ोसी अंकल के साथ रिश्ता बना हुआ था, वो मेरी मज़बूरी थी.
मैंने चाची को किस करके कहा कि अब आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है.
आपको जब मन किया करे, तब आप मेरे पास आ सकती हो.
चाची मुझसे लिपट गईं.
उस दिन एक घंटे में हम चाची भतीजा ने दो बार चुदाई का मजा लिया.
इसके बाद मैंने चाची को लंड चूसने के अलावा और भी बहुत कुछ सिखा दिया है.
मैंने चाची को चोदा, खूब खूब चोदा.
फिर चाची ने कैसे पड़ोसी अंकल से अपना रिश्ता छोड़ा, वो मैं आपको मेरी अगली सेक्स कहानी में बताऊंगा.
मुझे उम्मीद है कि आपको चाची चुदाई की कहानी पसंद आयी होगी.
आप मुझे मेल करके बता सकते हैं.
आपके मेल का इंतजार रहेगा.
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स्रोत:इंटरनेट