. दोस्तो, मेरा नाम रोहित है और मैं काफी सालों से अंतर्वासना का नियमित पाठक हूं। मुझे अंतर्वासना की कहानियां पढ़ने में बहुत आनंद आता है। तो चलिये, मैं आपको मेरी असली जीजा साली की चुदाई कहानी सुनाता हूं जो कुछ साल पहले मेरे सामने घटी थी। पहले मैं आपको अपने परिवार के बारे में बता दूं। मेरे परिवार में मेरे पिताजी मेरी मम्मी और मैं रहते हैं। मेरे घर के पास मेरी एक मौसी रहती हैं, उनका नाम लता है। मौसी के पास एक लड़का और एक लड़की है। उनके पति यानि मेरे मौसा का स्वर्गवास 4 साल पहले हो गया था। वह हमारे घर के पास में रहती थी। दिखने में मौसी एकदम सेक्सी थी। उनकी उम्र करीबन 38 के आस-पास थी। उनका फिगर एकदम. परफेक्ट था। मौसी का साइज 36-28-34 था जिसके बारे में सोचकर कई बार मैं भी मुठ मार चुका था। उनका हमारे घर हमेशा आना-जाना लगा रहता था। मम्मी-पापा भी उनकी हमेशा मदद करते थे। सब कुछ नॉर्मल चल रहा था। फिर एक. दिन हमारी एक रिश्तेदारी में शादी थी जो शहर से बाहर थी। पापा ने मां के साथ जाने से मना कर दिया। मैं भी शादी में नहीं जाना चाहता था इसलिए मैंने भी कॉलेज का बहाना बना दिया। तो शादी के लिए मम्मी अकेली ही. चली गई। मैं भी कॉलेज जाने की तैयारी करने लगा। पापा आराम से अखबार पढ़ रहे थे। आज उनको ऑफिस जाने की भी जल्दी नहीं लग रही थी। पर मैं जल्दी से नाश्ता करके घर से निकल गया। रास्ते में जाते हुए मुझे लता. मौसी मिल गई। उन्होंने मम्मी के बारे में पूछा। मैंने बताया कि वो शादी में गई हैं.
तो मौसी ने ओके कहा और फिर हमारे घर की तरफ चल दी। मुझे ये थोड़ा अजीब लगा क्योंकि मम्मी के न होने पर भी मौसी हमारे घर जा रही थी। मौसी ज्यादातर तभी आती थी जब उनको मम्मी से कुछ काम होता था। इसी उधेड़बुन में मुझे याद आया कि मैं कुछ जरूरी नोट्स घर पर ही भूल आया हूं। तो मैं वापस घर की तरफ जाने लगा। मैं पहुंचा तो दरवाजा लॉक. नहीं था। मैं अंदर अपने रूम में गया और नोट्स लेकर वापस जाने लगा। जब मैं निकल रहा था तो मम्मी-पापा के कमरे से कुछ आती हुई मुझे सुनाई दी। मैंने पास जाकर सुना तो मौसी और पापा की आवाज थी। मुझे थोड़ा शक. हुआ। मैं धीरे से कमरे के पास गया और दरवाजे में खड़ा होकर देखा। पापा बेड पर लेटे हुए थे और उन्होंने केवल अंडरवियर पहना हुआ था। मौसी ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी होकर होंठों पर लिपस्टिक लगा रही थी। पापा. बोले- जल्दी करो, कितना टाइम लगा रही हो! अब सब्र नहीं हो रहा है। मौसी- बस जरा सा और … बहुत दिनों के बाद ये मौका मिला है, आज तो पूरा दिन है हमारे पास! ये सुनकर पापा उठे और मौसी के पास गए। उन्होंने मौसी को पीछे से जाकर पकड़ लिया और उनसे लिपट कर चूचियों को दबाने लगे। एक दो बार चूचियों को दबाने के बाद वो उनको उठाकर बेड के पास ले आए। अब दोनों वहीं खड़े होकर एक दूसरे के होंठों से होंठ मिलाकर चूमने लगे।. मौसी बड़े प्यार से पापा के होंठों को चूस रही थी और पापा भी मौसी के होंठों का रसपान कर रहे थे। पापा के हाथ मौसी के चूचों पर जाकर डटे हुए थे जो उनको लगातार भींच रहे थे। मैं ये नजारा देखकर ठिठक सा गया. और वहीं पर खड़ा हुआ उन दोनों की रासलीला को देखने लगा। ये सब देखकर मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था और मैं भी वहीं पर लंड को सहला रहा था। फिर पापा मौसी की साड़ी उतारने लगे और कुछ ही पलों में मौसी. ब्लाउज-पेटीकोट में थी। पापा का लंड उनके अंडरवियर में एकदम तना हुआ था जिसे देख मौसी मंद मंद मुस्करा रही थी। मौसी- तुम्हारा पप्पू तो बड़ा खुश लग रहा है आज! पापा- हां, बस पूछो मत मेरी जान … तुम्हारी चूत में जाने के लिए तरस गया था ये। पापा ने मौसी का पेटीकोट भी खोलकर नीचे कर दिया। फिर वो उनको दूसरी तरफ घुमाकर उनका ब्लाउज भी खोलने लगे। हुक खोलते हुए वो अपने लंड को मौसी की गांड पर लगा रहे थे जिस पर. मौसी ने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी। लंड को गांड पर लगता देख मौसी पीछे हाथ ले गई और लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही सहलाने लगी। ब्लाउज खुल चुका था और मौसी की चूचियां एकदम से हवा में झूल गईं। पापा ने. मौसी को सामने की ओर घुमाया और उनकी नंगी चूचियों में मुंह लगा दिया और उनको हाथों में थामते हुए जोर जोर से चूसने लगे। मौसी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … ओह्ह … स्स्स … आराम से … काटो मत …. ऊईई … दर्द हो रहा है … उफ्फ आआआ! पापा- थोड़ा सा दर्द तो झेल लो मेरी रानी, इनका दूध पीना मुझे बहुत पसंद है। मौसी- तो फिर बेड पर जाने दो मुझे, खड़े-खड़े पैर दुखने लगे हैं। पापा ने मौसी को गोद में उठाया और बेड पर लिटा दिया। वो जल्दी से ऊपर बेड पर चढ़े और मौसी को नीचे गिराकर उनकी चूचियों पर टूट पड़े। मौसी की सिसकारियां अब और तेज हो गईं। कई मिनट तक वो मौसी के बूब्स का रसपान करते रहे। मौसी पापा के सिर. को पकड़ कर अपनी चूचियों पर दबा रही थी। कुछ देर चूचियों का रस पीने के बाद पापा उठ गए और साइड में जाकर लेट गए। मौसी समझ गई कि उनको क्या करना है। वो उठी और पापा के लंड को अंडरवियर के ऊपर से ही चूमने. लगी। अब पापा की आहें निकलने लगीं- आह्ह मेरी जान … चूस ले ना जल्दी इसको। मौसी ने अंडरवियर को नीचे खींचा और पापा ने गांड उठाकर पूरा अंडरवियर निकलवा दिया। अब वो पूरे नंगे होकर बेड पर टांगें खोलकर लेटे. थे और उनका लंड तोप की तरह टांगों के बीच में मुंह उठाए खड़ा था। मौसी ने फटाफट उनके तने हुए लंड को मुंह में भर लिया और प्यासी रंडी की तरह लंड को चूसने लगी। पापा के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह. … अम्म … हाय मेरी रानी … क्या मस्त चूस रही हो। मौसी को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे पापा के लंड को खा ही जाएगी। पापा अब मौसी के सिर को पकड़ कर लंड पर दबा रहे थे। कुछ देर चुसवाने के बाद पापा ने फिर से. मौसी को बेड पर लिटा लिया और उनकी लाल पैंटी को खींचकर उतार दिया। बेड दरवाजे से ज्यादा दूर नहीं था इसलिए मौसी की चूत के दर्शन मुझे भी अच्छे से हो रहे थे। मौसी की चूत रस छोड़ छोड़कर गीली-रसीली हो चुकी. थी जैसे पाव रोटी चाशनी में भीग गई हो। पापा मौसी की रस से लिपटी चूत को दोनों होंठों के बीच में लेकर चूसने लगे। चूत पर पापा के मूछों से भरे होंठ लगे तो मौसी की चूत में ऐसी गुदगुदी उठी कि उनके बदन में. चूत से लेकर चूचियों तक करंट की लहर सी दौड़ गई, जिसने उनके भारी-भारी तने हुए स्तनों को हिलाकर रख दिया। मौसी ने चूत को पापा के मुंह की तरफ उठाना शुरू कर दिया, ऐसे लग रहा था जैसे पापा के मुंह में चूत देकर चोद रही हो। मौसी की चूत की आग हर पल बढ़ती जा रही थी। इसी उत्तेजना में उन्होंने पापा के सिर को चूत में जोर से दबाना शुरू कर दिया। उनके सिर को पकड़ कर वो चूत को पापा के होंठों पर गोल गोल घुमा रही. थी जैसे चक्की चला रही हो। पापा की मूंछें लगने से चूत में हो रही सरसरी और अंदर घुसी जीभ से मिल रहा लंड जैसा अहसास मौसी को पागल किए जा रहा था। मेरे पापा भी बड़े खिलाड़ी थी, चूत को अपनी जीभ और होंठों से ऐसा दुलारा पुचकारा कि मौसी की चूत से रस के आंसू बह निकले। पापा के होंठ, ठुड्डी और नाक के आसपास गालों का थोड़ा सा हिस्सा मौसी की चूत के रस में सन गया। चूत के उस रस को पापा ने पूरा मजा लेकर चाटा जैसे शहद की कटोरी को चाट रहे हों। मौसी कुछ देर के लिए शांत हो गई। तब तक पापा ने उनको लंड चूसने का काम पकड़ा दिया। लेटी हुई मौसी पापा के लंड को चूसती रही और पापा उनकी चूत को सहलाते रहे। थोड़ी ही देर में. मौसी की चूत में फिर से हरकत होने लगी और वो चूत को आगे पीछे करते हुए पापा के हाथ के साथ घिसने लगी। पूरी गर्म होने के बाद मौसी उठी और पापा को नीचे पट लेटाकर उनकी जांघों के बीच में दोनों टांगों को खोलकर. बैठ गई। मौसी ने पापा के लंड पर थूका और फिर एक दो बार उसको मुठिया कर लंड का सुपारा चूत पर रगड़ा। इससे पापा भी तड़प गए। वो बोले- बस मेरी जान … अब अंदर ले ले जल्दी! मौसी हल्की सी ऊपर की ओर उठी और पापा. के लिंगमुंड को चूत में लगाकर धीरे धीरे अपना वजन उस पर डालने लगी। बैठते हुए मौसी ने पापा के लंड को पूरा अपनी चूत में उतरवा लिया। लंड चूत में पूरा उतरते ही मौसी के होंठ मजे के मारे खुल गए और उनके मुंह. से एक आह्ह … निकली जिसमें लंड घुसने का थोड़ा सा दर्द और ढेर सारा आनंद मिला हुआ था। इसी आनंद को दोगुना करने के लिए वो धीरे धीरे चूत को लंड पर चलाने लगी। तीन-चार बार धीरे धीरे ऊपर नीचे होने के बाद मौसी. की चूत को लंड का पूरा मजा मिलने लगा और तेजी से लंड पर सवारी करने लगी। पापा ने मौसी के मस्त मोटे उछलते दूधों को थाम लिया और दोनों हाथों से भींचने लगे। कभी वो मौसी की गांड पर हाथ ले जाकर उसके चूतड़ों. को उछालते हुए नीचे से चोदने लगते, तो कभी चूचियों को मसलने लग जाते। ऐसा कामुक नजारा देख मैं तो पागल सा होने लगा था। ऐसा लग रहा था कि मेरा माल जल्दी ही छूट जाएगा लेकिन मैं इस नजारे का पूरा मजा ले रहा था। मुझे माल छूटने की भी अब परवाह नहीं थी। धीरे-धीरे पापा और मौसी, दोनों की मस्ती बढ़ने लगी। मौसी अब और तेजी से पापा के लंड पर उछल रही थी; बीच-बीच में वो पापा के ऊपर झुक कर उनके होंठों को चूसने लगती थी। पांच मिनट के बाद पापा ने उनको उठने के लिए कहा। मौसी को बेड पर घुटनों के बल झुकाकर उन्होंने पीछे से लंड को मौसी की चूत में चढ़ा दिया और उनकी कमर को पकड़ कर चोदने लगे। अब मौसी जोर जोर से आह्ह …. आह्ह … आईई … आह्ह … और तेज … आह्ह … जोर से … चोद दो … अम्म … आह्ह … हाय … ऊह्ह … ओह्ह … करते हुए चुदने लगी। मौसी की इन कामुक सिसकारियों के साथ पापा के स्वर भी इसी अंदाज में मिल रहे थे- हाह … आह्ह …. स्स्स … ये चूत … आह्ह … मेरी रानी … कितनी गर्म चूत है … आह्ह … चोद दूंगा … खोद दूंगा … आह्ह … हाय … चुद मेरी जान … आह्ह … आह्ह। इस तरह से दोनों इतने गर्म हो गए कि तीन चार मिनट बाद पापा ने जोर की आंह. भरी और मौसी के ऊपर झुकते चले गए। उनके धक्के लगने धीरे-धीरे कम हो गए जैसे गाड़ी इंजन धीरे-धीरे थम गया। पापा का माल मौसी की चूत में निकल गया था। कुछ पल शांति से पड़े रहने के बाद दोनों फिर से एक दूसरे. के नंगे बदन से खेलने लगे और एक दूसरे को प्यार करने लगे। जीजा साली की चुदाई देखकर मेरा अंडरवियर मेरे माल में गीला हो चुका था लेकिन मैं वहां से चुपचाप निकल गया और घर के पास वाले बगीचे में जाकर बैठ गया।. मेरे दिमाग में पापा और मौसी की चुदाई की फिल्म चल रही थी। थोड़ी देर बाद मैं घर की ओर चल दिया। इस बार मैंने डोरबेल बजाई तो दरवाजा मौसी ने खोला। शायद वह घर जाने के लिए निकल रही थी। मुझे देख वो थोड़ा. हड़बड़ा गई और बोली- अरे रोहित, तू आज जल्दी आ गया! मैं- हां, वो … क्लास जल्दी खत्म हो गई थी आज। आप यहां? कुछ काम था क्या? मौसी- हां, तुम्हारे पापा से कुछ जरूरी काम था। इतने में पापा भी बेडरूम से निकल आए। उन्होंने मेरी तरफ देखा तो थोड़ी हैरानी और थोड़ी घबराहट उनके चेहरे पर भी उभर आई। लेकिन मैंने ऐसे बर्ताव किया जैसे कुछ पता नहीं कि कुछ हुआ भी है या नहीं। फिर मौसी पापा से बोली- बाकी का काम बाद में. कर लेंगे। मौसी की ओर देखकर पापा भी मुस्करा दिए और मौसी वहां से निकल गई। पापा बोले- ठीक है बेटा, मैं भी थोड़ा थक गया हूं, सोने जा रहा हूं। तुम कुछ खा-पी लेना। वे अपने रूम में चले गए। उस रात मैंने पापा और मौसी की मस्त चुदाई के सीन के बारे में सोचकर दो बार मुठ मारी। अब मैं उनकी चुदाई के दूसरे भाग का इंतजार करने लगा। आप भी अगर इस जीजा साली की चुदाई कहानी का दूसरा भाग जानना चाहते हैं तो मुझे ईमेल. में लिखें। कहानी के नीचे दिए कमेंट्स बॉक्स में भी अपना फीडबैक दें। मैं कोशिश करूंगा कि जल्द ही आपके लिए इस कहानी का अगला भाग भी लेकर आऊं। धन्यवाद। [email protected].
स्रोत:इंटरनेट