. ‘यू आर हॉट बेबी.
’ मैं भी उन्हें गर्दन पर किस करते हुए कहने लगा- यू टू डॉल.
आंटी जब ड्रेस चेंज करने गई थीं … तो अपने बदन पर सेक्सी परफ्यूम लगाकर आई थीं.
उनकी उस महक से मैं मस्त महसूस करने लगा.
मैं उनकी सेक्सी महक से खुद को मदहोश महसूस करने लगा था.
मैंने उनको अपने से और भी ज्यादा चिपका लिया था.
वो भी मेरी बांहों में झूल गई थीं और उन्होंने अपने आपको मेरे सुपुर्द कर दिया था.
मेरे कान में आंटी बोलीं- जान मैं बहुत प्यासी हूँ … आज मुझे जम कर चोद दो.
मैं आज तेरी हूँ.
आंटी की डिमांड पर मैं क्या बोलता, मैं उनकी चाहत को सुनकर खुद बहुत खुश हो गया था.
मैं भी उन्हें खूब मजा देना चाहता था … उनमें समां जाना चाहता था.
मैं उनके होंठों को किस करते हुए उनके मम्मों को दबाने लगा … वो भी मेरे होंठों में अपने होंठ लगाते हुए अपना रस पिलाने लगीं.
वाओ क्या रस से भरे होंठ थे … मैंने जीभर कर आंटी के होंठों को चूसा.
आंटी ने अपनी जीभ भी मेरे मुँह में डाल दी थी … मैं तो एकदम से पागल ही हो गया था.
शायद प्रेम करते समय मर्द और औरत के मुँह जुड़ना लंड चूत की चुदाई से कहीं ज्यादा मजा देता है.
ऐसा मेरा अनुभव है … तब भी चुदाई को प्रकृति ने बनाया है.
उसी से सृजन होता है … तो उससे अधिक तो कुछ हो ही नहीं सकता है.
मैं आंटी के होंठों और जीभ को चूसने के साथ साथ नीचे हाथ ले गया और उनकी चूत को कपड़ों के ऊपर से रगड़ने लगा.
अपनी चूत पर मेरा हाथ पाकर वो एकदम से मस्त और गर्म हो गईं.
चुदास की गर्मी थी और पहला मिलन था, तो कुछ ही पलों में उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया.
वो मेरी बांहों में अपना वजन डालते हुए बोलीं- आंह विक्की … मेरे अन्दर बहुत दिनों की आग लगी थी.
ऊपर से तुमको याद करके मैं पिछले चार दिनों से तुम्हारे नाम से अपनी चूत में उंगली कर रही थी.
मैंने उनके गालों पर कट्टू करते हुए कहा- मुझे नहीं पता था कि आप इतनी प्यासी हो … एक इशारा तो दिया होता … वहीं पार्क में पटक कर ठंडा कर देता.
उन्होंने हंस कर बोला- अब तुम जल्दी से मुझे चोद दो.
पर अभी मैं जल्दीबाजी नहीं करना चाहता था.
मैंने कहा- जान आज तुम्हें पूरा मजा दूंगा.
वो गिड़गिड़ाने लगीं- मजा बाद में देते रहना.
पहले एक बार मुझे ठंडा कर दो.
मैंने आंटी की बात मान ली और उनको नंगी कर दिया.
आंटी का क्या मस्त बदन था मेरी तो आंखें चुंधिया गई थीं.
एकदम मक्खन सा चिकना शरीर न जाने कितने दिनों से किसी मर्द के सम्पर्क में नहीं आया था.
आंटी की चिकनी चूत को मैंने अपने हाथों से छुआ … आह क्या मखमली थी.
मैंने चूत पर अपनी हथेली को फेरा तो उनकी एक मादक ‘आह्ह..’ निकल गई.
फिर मैंने आंटी को लिटा दिया और उनकी टांगों को फैला कर उनकी चूत की चाशनी को चाट कर चखा.
क्या मस्त नमकीन स्वादभरी चूत थी ‘आह’ मैंने फिर से अपनी जीभ को चूत की फांकों में लगा दी और ऊपर से नीचे तक फेरने लगा.
वो तो मचलने लगी थीं और उन्होंने अपनी टांगों को फैलाते हुए चूत ऊपर उठा दी थी.
वो अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगीं … और एकदम जानवरों जैसे करने लगीं.
मैं भी उनकी चूत को जोर जोर से चाटने लगा.
मेरी नाक से गर्म सांसें चूत को और भी गर्म कर रही थीं.
वो तो एकदम से पागल हो गई थीं.
साथ मैं अपने हाथों को ऊपर ले जाकर उनके मम्मों को दबा रहा था.
कोई पांच मिनट में ही वो फिर से गरमा गईं और बोलने लगीं कि ये सब बाद में तुम खूब कर लेना मेरी जान … मगर अभी एक बार प्लीज मुझे चोद दो.
मैंने भी आंटी को ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और उनकी चूत के ऊपर लंड रगड़ने लगा.
आंटी लंड के और भी व्याकुल होने लगीं और अपनी गांड उठाने लगीं.
मैंने भी सुपारा चूत की फांकों में फंसा दिया और धीरे धीरे लंड चूत के अन्दर डालने लगा.
वो भी अपनी चूत को उठाने लगीं.
उनकी ये बदहवासी बता रही थी कि वो जल्द से जल्द मेरे लंड को अपनी चूत में समा लेना चाहती थीं.
पर मैं धीरे धीरे लंड पेल रहा था.
उन्होंने कहा- जल्दी से अन्दर तक घुसेड़ो न … क्यों सता रहे हो? उनका इतना कहना हुआ और मैंने एक तेज झटका मार दिया.
‘इस्सस्स … उईई … माँ मर गई..’ आंटी लंड घुसते ही बहुत जोर से चीख पड़ीं … पर मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और थोड़ा रुक रुक कर उनको किस करने लगा.
वो भी मुझे किस करने लगीं.
लंड घुसेड़ने से मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ कि उनकी चूत अभी भी टाइट थी.
मैंने पूछा, तो बोलीं- हां मैं बहुत कम चुदी हूँ, इसीलिए टाईट हूँ … और तेरी एक स्माइल पर फ़िदा हो गई थी.
मैंने समझ लिया कि इनकी चूत को कोई लंड नहीं मिला है, इसलिए ये चूत उठाए उठाए घूम रही थीं.
लंड चूत की जड़ तक पेवस्त हो चुका था.
अब वो अपनी कमर को हिलाने लगीं.
मैं उनका इशारा समझ गया तो अब मैं भी धक्का देने लगा और चुदाई होने लगी.
चुदाई के साथ में मैं कभी उनके मम्मों को मसलता, तो कभी निप्पल को होंठों में दबा कर चूसने लगता … या कभी होंठों को चूसने लगता और स्वीट बाईट भी दे देता … तो वो मचल भी जातीं.
क्या मस्त पल थे.
मैं आंटी को जोर जोर से … तो कभी धीरे धीरे पेल रहा था.
पूरी चुदाई को तीन तरह के पोज़ में अंजाम दिया.
करीब बीस मिनट तक आंटी की चूत चोदने के बाद मैं झड़ने वाला हो गया था.
मैंने आंटी से बोला, तो वो बोलीं- अन्दर ही आ जाओ … मैं तुम्हारे पानी को फील करना चाहती हूँ.
उनकी सहमति मिलते ही मैं तो मानो चूत पर पिल पड़ा … फिर एक जोर के झटके के साथ उनके अन्दर झड़ गया और उनके ऊपर ही ढेर हो गया.
वो भी इस दरम्यान दो बार झड़ चुकी थीं और काफी थक गई थीं.
आंटी मुझे अपनी बांहों में समेटे हुए मेरे बालों को सहलाने लगीं … और मेरे माथे पर चूमने लगीं.
इसी तरह से सहलाते चूमते मुझे और उनको कब नींद आ गई, कुछ पता ही नहीं चला.
बाद में हम दोनों अलग होकर प्यार करने लगे.
उस दिन मैंने आंटी को चार बार चोदा.
उसके बाद से तो जब चाहे आंटी की चूत में लंड लगा आकर चुदाई हो जाती रही थी.
तो ये थी मेरी आंटी के साथ सेक्स कहानी.
दोस्तो, आगे की चुदाई की कहानी भी लिखूंगा.
मगर अभी आपके मेल का इन्तजार है.
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स्रोत:इंटरनेट