. चूंकि शादी का माहौल था इसलिए हमने पूरे कपड़े नहीं उतारे थे.
मैं भाभी की चूत को चोदने में लगा हुआ था.
दोनों को ही बहुत मजा आ रहा था.
उसके बाद मैं जल्दी ही भाभी की चूत में झड़ गया.
मैं शांत होकर भाभी के ऊपर लेटा रहा.
मेरा लंड भाभी की चूत में ही था और वो सिकुड़ कर बाहर आने लगा.
जब लंड पूरा सिकुड़ गया तो चूत से बाहर आकर बिल्कुल छोटा हो गया.
मैं एक तरफ आकर लेट गया.
भाभी ने फिर से मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
कुछ देर तक भाभी मेरे लंड को अपने हाथ से सहलाती रही.
मगर उनके सहलाने से अभी लंड में तनाव नहीं आ पा रहा था.
उसके बाद भाभी नीचे रजाई में घुस गई और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी.
सर्दी के मौसम में भाभी के गर्म मुंह में जाकर लंड में कुछ गुदगुदी सी हुई और मुझे मजा आने लगा.
कुछ देर में भाभी ने चूस-चूस कर मेरा लंड फिर से खड़ा कर दिया.
शायद भाभी का पानी अभी नहीं निकला था इसलिए वो दोबारा मेरे लंड को लेने के लिए इतनी मेहनत कर रही थी.
जब मेरी लंड पूरा खड़ा हो गया तो भाभी मेरे ऊपर आकर लेट गई.
उनका वजन बहुत ज्यादा था.
मगर मैं फिर भी उनके वजन को सहने की कोशिश करने लगा.
भाभी ने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ा और पीछे से अपनी चूत मेरे लंड के पास लाकर पीछे से मेरे लंड को अपनी चूत में घुसा लिया.
भाभी मेरे लंड पर अपनी गांड को चलाने लगी.
भाभी के चूचों की दरारें मेरे मुंह को ढके हुए थी.
मैं भाभी के ब्लाउज को खोलने की कोशिश करने लगा लेकिन भाभी ने ब्लाउज नहीं खोलने दिया.
मगर वो अपनी गांड को मेरे लंड पर चलाती रही और मेरे लंड से चुदती रही.
काफी देर तक भाभी ने मेरे लंड पर अपनी चूत इसी तरह रगड़ कर मजा लिया.
उसके बाद मैंने भाभी को साइड में गिरा लिया क्योंकि काफी देर से मैं भाभी के नीचे दबा हुआ था.
मैंने रजाई एक तरफ हटाई और भाभी की टांगों को एक हाथ में उठा कर उनकी चूत पर लंड को सेट करके उनकी चूत में लंड को धकेल दिया.
भाभी की उठी हुई टांगों को थामे हुए मैं नीचे से भाभी की चूत को चोदने लगा.
फच-फच की आवाज होने लगी.
भाभी की चूत से कामरस निकल रहा था जिससे चूत बिल्कुल चिकनी हो गई थी.
भाभी की चूत को इस पोजीशन में चोदते हुए बड़ा मजा आ रहा था क्योंकि इस पोजीशन में उनकी चूत थोड़ी टाइट सी लग रही थी.
मैं जोर जोर से भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा.
भाभी के मुंह से अंदर ही उम्म्ह… अहह… हय… याह… की दबी हुई सी आवाज आ रही थी.
भाभी मुंह खोलने से बचना चाहती थी क्योंकि अगर आवाज बाहर जाती तो किसी को भी हमारी चुदाई के बारे में शक हो सकता था.
मैं तेजी के साथ भाभी की चूत को चोदने लगा.
भाभी को और ज्यादा मजा आने लगा और वो अपने हाथों से मेरी गांड को अपनी चूत में धकेलने लगी.
मेरा जोश और ज्यादा बढ़ गया और मैंने भाभी की चूत की चुदाई और तेजी से करनी शुरू कर दी.
मशीन की तरह मैं भाभी की चूत में लंड को पेल रहा था.
कुछ ही देर में भाभी की चूत ने पानी छोड़ दिया जो मुझे मेरे लंड पर महसूस हुआ.
उसके बाद भी मैंने चुदाई जारी रखी क्योंकि अभी मेरा पानी नहीं निकला था.
भाभी ने अपने हाथ मेरी गांड से हटा लिये और अब वह शांत होकर आराम से चूत में लंड को ले रही थी.
मैंने और जोर पकड़ते हुए पूरी ताकत के साथ भाभी की चूत को चोदते हुए दूसरी बार उनकी चूत में अपना माल गिराना शुरू कर दिया.
हाँफता हुआ मैं भाभी के ऊपर लेट गया.
भाभी ने मेरी पीठ को सहलाया.
कुछ देर हम ऐसे ही नंगी चूत और लंड के मिलन के साथ रजाई में लेटे रहे.
उसके बाद हमने उठ कर अपने कपड़े पहन लिये.
भाभी ने उठ कर कमरे की लाइट फिर से जला दी.
भाभी ने अपने कपड़ों को ठीक किया और अपने बालों को सही करने लगी.
तभी भाभी की बहन अंदर कमरे में आ गई.
एक बार तो उसको देख कर मैं सकपका गया क्योंकि मैंने अभी अभी तक पैंट नहीं पहनी थी.
मैं अंडरवियर में ही था और मेरी पैंट भी रजाई में ही निकली हुई कहीं पड़ी थी.
भाभी की बहन भी एक बार तो भाभी की तरफ अजीब सी नजरों से देखने लगी.
इधर मेरी भी हवा टाइट हो गई थी.
लग रहा था कि हमारी चोरी कहीं पकड़ी न जाये.
मगर रजाई होने के कारण कुछ पता नहीं लग पा रहा था कि मैंने नीचे से पैंट निकाल रखी है.
मगर मैंने अपना चेहरा सामान्य बनाने की कोशिश की.
मैंने भाभी की तरफ देखा और एक हल्की सी मुस्कान दी तो भाभी भी नॉर्मल हो गई.
उसके बाद भाभी की बहन भी नॉर्मल हो गई.
भाभी की बहन मेरे पास आकर बैठने लगी.
भाभी की बहन बेड पर मेरे साथ ही बैठी थी और मैं नीचे से नंगा था.
उनकी बहन ने कुछ बात छेड़ना चाही मगर भाभी भी खतरे को भांप गई थी.
उसी वक्त भाभी ने दिमाग से काम लिया और अपनी बहन का ध्यान अपनी तरफ बंटाने की कोशिश करने लगी.
भाभी उसको वहां से उठाते हुए किसी काम के बहाने से कमरे से बाहर लेकर चली गई.
तब जाकर मेरी सांस में सांस आई.
उस रात भाभी की चूत चोद कर मेरा सारा नशा उतर गया था.
मगर नशे में चूत मारने में मजा बहुत आया.
सुबह हुई तो भाभी का चेहरा खिला हुआ था.
उस दिन के बाद मैंने भाभी को खुश करने की जिम्मेदारी ले ली थी.
मगर हम दोनों को इतना मौका नहीं मिल पाता था कि हम पूरे नंगे होकर चुदाई का मजा ले सकें.
हमने चुदाई तो कई बार की लेकिन वह हमेशा जल्दी-जल्दी में ही हो पाई.
उसके बाद मैं अपने घर चला गया.
मगर चुदाई की शुरूआत तो हो चुकी थी.
कई बार भाभी की चूत चोदने के बाद उसने अपनी सहेलियों से भी मेरा परिचय करवाया.
भाभी की सहेलियों की चुदाई की कहानी मैं आपको फिर कभी बताऊंगा.
फिलहाल के लिए इस कहानी में इतना ही बताना चाहता था कि किस तरह मेरे और भाभी के बीच चुदाई की शुरूआत हुई.
अगली कहानी में मैं अपनी भाभी के साथ चुदाई की अन्य घटनाएं भी लिखूंगा.
वो कहानियां मैं विस्तार से लिखूंगा.
इस कहानी को पढ़ कर आप लोगों को मजा आया या नहीं, आप कहानी पर कमेंट करके बताना और अगर आप मैसेज करना चाहते हैं तो मुझे मेल भी कर सकते हैं.
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स्रोत:इंटरनेट