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पड़ोसन भाभी की ननद भी चुद गई

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पड़ोसन भाभी की ननद भी चुद गई 1

. मुझे लगा कि आज इसको चोदने का ये सही मौका है.
मैंने उसके पैरों से ऊपर होकर उसके मुँह पर किस किया और बोला- देखा कैसा टेस्ट है तेरी चूत का … तूने अपनी चूत को कभी टेस्ट किया है? उसने हंस कर मुँह फेर लिया.
अब मैंने उसके पैरों पर पैर रखकर थोड़ा और फैलाया और उसकी चूत में अपना पूरा लंड उतार दिया.
वो एक पल के लिए कसमसाई और उसकी हल्की कराह भी निकली, मगर दो तीन पल में ही पूरा लंड अन्दर जाते ही वो मेरी पीठ के ऊपर हाथ रखकर जोर से दबाव डालने लगी.
मैंने कमीज़ को ऊपर उसके करके उसके मम्मों को नंगा कर दिया.
सच में उसके मम्मे थे तो 35 इंच साइज़ के … पर उन्हें वो ब्रा में फंसाकर छोटा दिखाती थी.
आज उसके फंसे हुए कबूतर मुझे आज़ादी की मांग कर रहे थे.
मैंने थोड़ा रुक कर उनकी मांग पूरी करने का सोचा और नीचे उसकी चूत में अपनी दम लगाने लगा.
आज पता नहीं मेरे लंड को क्या हुआ था … अभी पिछले आधे घंटे से तो लंड एकदम से खड़ा था और अभी दस मिनट में ही उसके पेट पर लंड ने उलटी करते हुए सारा माल निकाल दिया.
मैं झड़ कर उसके बाजू में लेट गया.
कोई पांच मिनट तक ऐसे ही पड़े रहने के बाद अर्चना उठी और बाथरूम में चली गयी.
उसके जाने के बाद बाथरूम से फव्वारा चलने की आवाज आने लगी.
मुझे लगा क्यों न मैं भी उसके साथ फव्वारे का मजा ले लूं.
मैंने उठकर दरवाजा खटखटाया और बोला- खोल यार … मुझे भी नहाना है.
तो अर्चना बोली- बस 5 मिनट रुको … मेरा हो गया है.
मैंने खटखटाना तेज़ कर दिया, तो अन्दर से दरवाजा खुल गया.
मैंने देखा तो उसका बदन भीगा हुआ था, पर ब्रा पैंटी सूखी थी.
वो एक कोने में खड़ी रहकर अपने हाथ ब्रा के सामने पकड़े हुए खड़ी थी.
मैंने अन्दर जाते हुए दरवाजा बंद किया और बोला- क्या हुआ … ऐसे घूर क्यों रही हो? इतना कहकर मैंने फव्वारा चालू किया और उसे अपनी ओर खींच लिया.
उसकी पीठ पर और उसकी पैंटी के अन्दर हाथ डालकर घुमाने लगा.
मेरी टी-शर्ट पूरी भीग गई थी, तो मैंने उसे उतार दिया.
मैं पूरा नंगा होकर फिर से उसे कसके पकड़ने लगा.
वो बिना कुछ बात किए मेरा साथ दिए जा रही थी.
मैंने उसके पीछे हाथ डालकर उसके कबूतरों को आजाद किया और कहा- ये क्या यार … मैंने तो सारे कपड़े उतार दिए … तुम अभी भी पैंटी पहने खड़ी हो.
उसने पैंटी निकाल दी.
अब मेरा लंड पूरे जोश में आकर उसके चूत की ओर मुँह करके खड़ा था.
मैंने कहा- अपना पैर जरा उस नल पर रखके खड़ी हो जाओ ना … थोड़ी ना नुकुर के बाद उसने अपना पैर एक नल पर रख दिया.
मैं घुटनों के बल बैठकर उसकी खुली हुई चूत रस पीने लगा.
फव्वारे का पानी उसके बदन से नीचे आकर चूत से नीचे गिरने लगा था.
पहले तो उसने अपना हाथ दीवार पर लगा दिया था.
पर जैसे ही मैंने चूत के दाने को रगड़ना चालू किया, उसने अपना हाथ मेरे सर पर रखा और कभी मेरे मुँह को बाहर धकेलती, तो कभी अन्दर घुसाने की कोशिश करने लगी.
कुछ देर चूत चूसने के बाद मैंने कहा- अब तुम्हारी बारी … मेरा भी लंड खड़े रहकर अब दर्द करने लगा है.
उसने लंड चूसने से मना कर दिया.
मैंने कहा- बस थोड़ा सा मुँह में ले लो न.
मेरे बहुत जोर देने के बाद आखिर वो घुटनों पर आ गयी और एक हाथ से लंड पकड़कर मेरी ओर देखने लगी.
मैंने कहा- चलो जानू थोड़ी देर.
पता नहीं इससे पहले वो कभी चुद गयी थी या नहीं … मैंने भी नहीं पूछा, क्योंकि वो लंड को चूस नहीं रही थी … बस अन्दर बाहर करने की कोशिश करने लगी थी.
इस कारण उसके दांत मेरे लंड को काट रहे थे.
मैंने भी थोड़ा जोर उसके सिर पर लगाया और लंड को उसके गले में उतार दिया.
वो खाँसने लगी और मेरी तरफ गुस्से से देखने लगी.
मैंने भी सोचा बेकार में फ़ोर्स करना ठीक नहीं, मजा खराब हो जाएगा.
मैंने उसको धक्का देकर नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया.
मैं फव्वारे की फुहारों के नीचे उसे दबाने मसलने लगा.
कुछ देर के बाद उसके पैरों को फैला कर लंड को चूत में सैट करने लगा, लेकिन वो भी अब अन्दर आसानी से उतर नहीं रहा था.
मैंने उसके पैरों को अपने कंधे पर लिया और लंड से चूत में दबाने लगा.
लंड आधा अन्दर गया और उसके मुँह से पहली बार चीख निकल पड़ी.
थोड़ा सा और जोर लगाकर मैंने पूरा लंड उसकी चुत में उतार दिया और शुरूवात में हल्के धक्के देने के बाद मैंने स्पीड पकड़ ली.
अब उसके मुँह से उम अह की आवाजें निकलने लगीं.
उसके पैर मेरे कंधे पर होने के कारण वो ज्यादा हिल भी नहीं पा रही थी, बस अपने दोनों हाथों से बाथरूम की फर्श रगड़ने में लगी थी.
कुछ देर धक्के देने के बाद मैं थोड़ा और झुक गया.
मैंने उसके मुँह में अपना मुँह घुसा दिया और उसके होंठ चूसने लगा.
साथ ही नीचे से और धक्के तेज़ करने चालू कर दिए.
मेरे हर धक्के पर उसके मुँह की आवाज मैं अपने मुँह में महसूस करने लगा था.
फव्वारे के पानी की वजह से मेरा लंड भी अपना पानी रोके रखा था.
करीब 15-20 मिनट धक्के देने के बाद मैं रुक गया और उसके पैर नीचे लेकर एक पैर नीचे रखकर एक पैर उठाकर अन्दर डाल दिया.
कुछ देर ऐसे ही शॉट लगाने के बाद वो बोली- अब इसका निकल क्यों नहीं रहा है? मैंने कहा- पता नहीं … शायद इसको तेरी चुत कुछ ज्यादा ही पसंद आ गई होगी … तुम मुँह में लेकर चूसोगी तो निकल जाएगा.
पता नहीं वो थक गई थी या कुछ और था.
वो बिना कुछ सोचे ‘ठीक है..’ कह गयी.
अब मैं छत की तरह मुँह करके लेट गया और उसने मेरे लंड को चूसना चालू कर दिया.
कुछ देर लंड चूसने के बाद बोली- नहीं निकल रहा है.
मैंने कहा- तुम घोड़ी बन जाओ … मैं पीछे से डालता हूँ.
वो घोड़ी बन गयी.
उसकी 35 इंची गांड मेरे लंड के सामने थी.
मैंने उसकी गांड पर लंड लगाया और थोड़ा जोर लगाया, तो वो आगे की तरफ गयी.
वो बोली- यहाँ नहीं.
मैंने कहा- ठीक है.
मैंने फिर से चुत पर लंड लगाकर उसके दोनों हाथ पीछे ले लिए, जिससे उसका मुँह फर्श पर रख गया और उसके चूचे फर्श पर रगड़ खाने लगे.
हमारी चुदाई फिर से चालू हो गयी.
कुछ देर होने के बाद में उसे बेड पर लेकर गया.
हम दोनों चूमा-चाटी करने लगे.
चूत में से लंड बाहर निकला पड़ा था.
वो भी कभी कभी लंड चूस कर मुझे मजा देने लगती थी.
जैसे ही मेरा लंड फुंफकार मारने लगता था.
मैं उसे चोदना शुरू कर देता था.
उसकी चूत को गैप मिल जाने से मजा आने लगा था.
कुछ बीस मिनट बाद मेरा लंड झड़ने को हुआ, तो मैंने उससे कहा कि मैं निकल रहा हूँ.
वो कुछ नहीं बोली तो मैंने चूत से लंड खींच कर पेट पर रस निकाल दिया.
चुदाई के बाद हम दोनों थक कर लेट गए.
करीब 5 बजे वो उठी और सलवार कमीज पहनने लगी.
मैंने कहा- आई लव यू अर्चना.
तो बोली- ये सब करने से लिए ही आई लव यू है … दिन भर लेकर नहीं है.
मैं हंस दिया.
वो बोली- इसी लिए लाये थे क्या फ्लैट पर … कॉफी तो जल गयी … ये कॉफी पिलाने लाए थे.
मैं हंस दिया और ये कॉफ़ी मलाई मार कर थी मेरी जान.
तुझे मजा नहीं आया क्या? इस पर वो हंस दी और मुझे चूम कर चली गई.
बस तब से हम दोनों ने कुछ दिन और एन्जॉय कर लिया.
फिर वो और भाभी पुणे से चली गईं.
तो दोस्तो, ये थी मेरी नई सेक्स कहानी, आपको कैसी लगी.
मेल करके जरूर बताना.
[email protected].
स्रोत:इंटरनेट