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पड़ोसन भाभी की मस्त चिकनी चुत की चुदाई

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पड़ोसन भाभी की मस्त चिकनी चुत की चुदाई 1

. मैंने बोल तो दिया था … पर मेरी गांड फट गई कि मैं ये क्या बोल गया.
तभी भाभी ने बोला- हम्म … अब समझी कि जो बाइक पर हुआ था, वो गलती से नहीं हुआ था … वो तुमने जानबूझ कर किया था.
ये कहते हुए भाभी जी सामने वाले सोफे पर बैठ गईं.
मैंने उनकी इस बात के जबाव देने से बचने के लिए इधर उधर भाभी के बच्चे को ढूंढने की कोशिश की.
जब मुझे वो नहीं दिखा, तो मैं उसी को ढूँढने की बात कहता हुआ उठा और भाभी के पास जाकर बैठ गया.
मैंने भाभी का एक हाथ हाथ में लिया और बोलने लगा- भाभी जी आप मेरी बात का बुरा मत मानना, मैंने जब से आप को देखा है, तब से ही मैं आपका दीवाना हो गया हूँ.
मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ.
मेरा कोई दिन ऐसा नहीं गया होगा, जब मैंने आपके बारे में न सोचा हो.
भाभी भी मेरी फिरकी लेने लगीं.
वो बोलीं- तो मैं क्या करूँ? मैं तो तुम्हें इस तरह से नहीं देखती.
मैंने तो तुम्हें एक अच्छा लड़का समझा था और बताओ तो तुम मेरे बारे में क्या सोचते हो? ये सब बोल कर भाभी चुप हो गईं.
दो मिनट तक हम दोनों में से कोई कुछ नहीं बोला.
तभी भाभी जोर से हंसने लगीं.
भाभी की हंसने की देर थी कि मैंने समय न गंवाते हुए भाभी के होंठों पर होंठ रख दिए और उनको चूमने लगा.
भाभी ने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया.
अब हम दोनों एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में एक दूसरे को चूम चूस रहे थे.
इसी चूमाचाटी में हम दोनों एक दूसरे से गुत्थम गुत्था होने लगे.
कभी भाभी मेरे नीचे, कभी मैं भाभी के नीचे.
भाभी की तरफ से हरी झंडी मिलते ही मेरे भी हाथ चलने शुरू हो गए.
भाभी के जिन मम्मों को मैं इतने दिनों से देख रहा था, अब वे भाभी के वे मदमस्त मम्मे मेरे हाथ में आ गए थे.
पहले तो मैं भाभी के उरोजों को धीरे धीरे दबा रहा था.
फिर थोड़ा दबाव दिया, तो भाभी को भी मजा आने लगा.
भाभी की मादक सिसकारियां निकलना शुरू हो गयी थीं.
मैं भाभी के दोनों मम्मों को बारी बारी से दबा रहा था.
मैंने देखा कि भाभी अपने एक हाथ से अपनी चूत को सहला रही थीं.
मैंने भाभी की मैक्सी उतारनी चाही, तो भाभी ने मना कर दिया.
वे बोलीं कि अभी ऊपर ऊपर से ही कर लो.
अभी तुम्हारे भैया आते ही होंगे.
उसी वक्त मुझे भाभी के बच्चे की याद आयी.
मैंने भाभी से उसके बारे में पूछा, तो वो बोलीं- उसे नींद आ रही थी, तो उसे कमरे में सुला दिया है.
भाभी का इतना कहना था कि फिर से मैं शुरू हो गया.
मैंने भाभी से कहा- भैया क्या इतनी जल्दी आ जाएंगे … और क्या आज भी मैं आपके घर से भूखा ही जाऊंगा? उन्होंने हंसते हुए मेरा लंड पैन्ट से निकाला और मेरा खड़ा लंड देखते ही खुश हो गईं.
भाभी बोलीं- अरे वाह … तेरा आइटम तो तेरे भैया से भी बड़ा और तगड़ा लग रहा है.
मैंने भाभी का सर अपने लंड की तरफ किया, तो भाभी ने भी देर न लगाते हुए मेरे लंड को अपने मुँह में भर लिया.
भाभी लंड ऐसे चूसने लगीं, जैसे उनको कभी लंड मिला ही न हो.
जिस तरह से भाभी मेरा लंड चूस और चाट रही थीं, उससे पता लग रहा था कि भाभी लंड चूसने में काफी अच्छी खिलाड़ी हैं.
कुछ ही देर में मैं भाभी के मुँह में ही झड़ गया और भाभी ने भी मेरा सारा का सारा माल लंड के ऊपर से साफ करके चाट लिया.
भाभी ने लंड से निकली एक बूंद भी नीचे नहीं गिरने दी.
लंड का रस चूसने के बाद भी उन्होंने लंड को नहीं छोड़ा था.
भाभी ने मेरे झड़े हुए लंड को लगातार चाटना जारी रखा.
इससे हुआ ये कि थोड़ी ही देर में मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा.
मैंने भाभी से कहा- भाभी अब मुझे आपकी चूत में झड़ना है.
भाभी बोलीं- तेरे से ज्यादा मुझे आग लगी हुई है … लेकिन अगर तेरे भैया आ गए, तो मज़ा बीच में अधूरा रह जाएगा.
मैं इसी लिए बोल रही हूं कि अभी तुझे जो मिल रहा है, उसके मजे ले ले.
पर मैं कहां मनाने वाला था.
मैंने भाभी से कहा कि आप एक बार फोन करके भैया की पोजीशन मालूम कर लो.
भाभी ने तुरंत फोन लगाया और भैया से पूछा कि आपकी गाड़ी सुधर गई.
कितनी देर में घर आओगे? भैया बोले- मुझे अभी कुछ देर लगेगी.
तुम घर पहुंच गईं? भाभी ने हां कहते हुए कहा- जब आप आने लगो, तो एक बार फोन कर देना.
मुझे कुछ सामान मंगवाना है.
भैया ने ओके कह दिया.
मैंने फोन कटते ही भाभी को चूम लिया और कहा- वाह भाभी, तुम तो कमाल की चीज हो.
भाभी हंस दीं और मुझसे लिपट गईं.
अब मैंने भाभी को लिटाया और उनकी मैक्सी कमर से ऊपर कर दी.
आह बिना पैन्टी के भाभी की मस्त चूत मेरी आंखों के सामने खुली हुई थी.
एक गुलाब के फूल की पंखुरियों की तरह चुत की फांकें फूली हुई थीं.
चुत भी एकदम साफ चकाचक थी.
चुत पर झांट का एक भी बाल नहीं था.
भाभी की चिकनी चुत देखते ही मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपने होंठ सीधे भाभी की चूत पर लगा दिए.
भाभी अब बस सिसकारियां लिए जा रही थीं.
मैंने समय न गंवाते हुए अपना फनफनाता हुआ लंड उनकी चूत के मुँह पर जैसे ही लगाया, नीचे से भाभी खुद गांड उठा कर धक्का लगाने लगीं.
मैंने भी एक जोर का धक्का लगाया और मेरा लंड उनकी चूत के अन्दर घुस गया.
भाभी ने अपने होंठों को दांतों से दबा रखा था.
उनको लंड लेने में बहुत मज़ा आ रहा था.
भाभी की चूत इतनी गर्म थी कि मेरा लंड अन्दर की गर्मी पाकर और भी मोटा हो गया था.
मैंने दूसरा धक्का देते हुए अपना पूरा लंड भाभी की चूत में डाल दिया और धक्के मारने लगा.
नीचे से भाभी अपनी कमर ऊपर उठा रही थीं और मेरा साथ दे रही थीं.
पांच मिनट में ही भाभी ने मुझे कसकर जकड़ लिया और बोलीं- मेरा माल आने वाला है.
मैं धक्का मारता ही जा रहा था.
मैंने सोचा कि भाभी झड़ने वाली हैं.
मैं भी साथ में झड़ जाऊं.
मगर भाभी झड़ गई थीं.
वे हांफते हुए बोलीं- आह बस करो.
मैंने कहा- मैं अभी नहीं झड़ा हूँ.
भाभी- तो जल्दी करो.
मैंने गति तेज़ कर दी और थोड़ी देर बाद मेरे लंड का रस भी भाभी की चूत में गिरने लगा था.
मुझे बहुत मज़ा आया.
थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे.
फिर दोनों अलग-अलग हुए.
जैसे ही भाभी की चूत से मैंने अपना लंड निकाला, ढेर सारा वीर्य उनकी चूत से बाहर निकलने लगा.
चूत से सफ़ेद-सफ़ेद रस बाहर निकलते देख, मुझे बहुत खुशी हुई.
तभी भैया का फोन आ गया और उन्होंने कहा- क्या लाने का कह रही थीं? भाभी ने कहा- एक किलो आलू लेते आना … बाकी सामान मैं बाद में बता दूंगी, तो कल ले आना.
इसके बाद हम दोनों अलग हुए और एक दूसरे को साफ करने लगे.
मुझे पता था कि भाभी के पति कभी भी आ सकते थे.
हमने जल्दी जल्दी एक दूसरे को संभाला और अपने अपने कपड़े ठीक करके बैठ गए.
भाभी ने एक सलवार सूट पहन लिया.
भाभी के चेहरे पर एक अलग ही खुशी झलक रही थी.
मैंने पूछा- भाभी अभी से इतना खुश हो गईं … अभी तो मैंने आपको अच्छी तरह चोदा भी नहीं है.
भाभी ने हंसते हुए कहा- फ़िल्म का ट्रेलर ऐसा है … तो पूरी फिल्म कितनी अच्छी होगी.
उनके ये बोलते ही हम दोनों हंसने लगे.
कुछ देर बाद भैया भी आ गए.
फिर मैंने उनसे थोड़ी देर बात की … ताकि उन्हें कोई शक न हो.
इसके बाद मैं अपने घर आ गया और भाभी को अच्छी तरह से चोदने का मौका ढूंढने लगा.
फिर जल्दी ही हमें एक मौका भी मिल गया.
उस दिन भाभी की चुदाई की कहानी जरा विस्तार से लिखूँगा, तो आपको भी मजा आएगा.
वो पूरी सेक्स कहानी मैं किसी और दिन बताऊंगा.
आपको मेरी यह सच्ची सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करें.
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स्रोत:इंटरनेट