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पड़ोस की भाभी सेक्स की चाह 1

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पड़ोस की भाभी सेक्स की चाह 1 1

. मैं- भाभी, क्या आप एक कप चाय लेंगी! भाभी- हां ले लूंगी, लेकिन कप अच्छे से साफ कर लेना.
मैं- मैं हमेशा किचन साफ़ ही रखता हूँ.
भाभी- हा हा … बैचलर के कमरे जरा यूं ही अस्त व्यस्त रहते हैं … इसलिए कहा.
मैंने मन में सोचा कि आज कितना नाटक कर रही हो कि कप साफ़ कर लेना.
एक दिन वो भी आएगा, जब आप मेरा लंड चूसोगी और मैं आपकी चूत.
उस समय सारी साफ़ सफाई गांड में घुस जाएगी.
खैर … मैंने चाय बनाई और दो कप में लेकर छत पर आ गया.
हम दोनों ने चाय पी.
उस दिन काफ़ी देर तक भाभी से बात होती रही.
फिर भाभी बेबी को लेकर नीचे चली गईं.
उसी दिन शाम को मुझे पता चला कि भैया बाहर से 15 दिन तक नहीं आने वाले हैं और आया भी कुछ दिन नहीं आएगी.
इसी तरह कुछ दिन बीत गए, भाभी और मैं बहुत बात करने लगे थे.
एक दिन जब मैं ऑफिस से आया, तो भाभी का गेट खुला था.
मैंने दरवाजा खटखटाया, तो भाभी बेडरूम से बाहर आईं.
शायद वो बेटे को सुला रही थीं.
मैं- भाभी, आप कहो तो आज डिनर करने बाहर चलें? भाभी- नहीं, रजत मना कर देंगे.
अभी बेटा छोटा है ना! मैं- तो उनसे मत कहो कुछ भी.
हम लोग जल्दी वापस आ जाएंगे और वैसे भी हर बात हज़्बेंड को नहीं बतानी चाहिए.
आप इतने दिन अकेली रहती हो, थोड़ा घूम लोगी, तो मन भी बहल जाएगा.
थोड़ा सोचकर भाभी ने हां कर दिया और कहा कि हम 8 बजे से पहले वापस आ जाएंगे.
मैंने गाड़ी निकाली और हम दोनों पड़ोस के एक रेस्ट्रोरेंट में चले गए.
मैंने ऑर्डर कर दिया.
भाभी- तुमने ऐसा क्यों कहा कि सारी बात हज़्बेंड को नहीं बतानी चाहिए.
मैं- अरे भाभी, आदमी का दिमाग़ ऐसा ही होता है … कितना भी विश्वास हो, लेकिन कुछ भी सोच सकता है.
इसीलिए मैं तो कहता हूँ कि आप हम दोनों की बातें उनके सामने कभी मत किया करो.
हो सकता है … उनको बुरा लग जाए.
उनको उतना ही बताओ, जितना ज़रूरी है.
भाभी- लेकिन अगर तुमने बताया तो! मैं- अरे, मैं क्यों बताने लगा.
वैसे भी मेरी खुशी इसमें है कि आप मुझसे बात करती रहें … और आपका घर परिवार भी अच्छा चले.
मैं आपको खुश देखना चाहता हूँ, खुश रखना चाहता हूँ ना कि दुखी.
तब तक खाना आ गया और हम खाने लगे.
भाभी- वैसे संजय, तुम्हारी गर्ल फ्रेंड तो खुश रहती होगी, कितने समझदार हो तुम, कितना ध्यान रखते हो.
मैं- मेरी कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है भाभी, कॉलेज में एक थी, उसकी शादी हो गयी.
उसके बाद मैं यहां आ गया.
बाकी सब आपको पता ही है.
वैसे बुरा नहीं मानो तो एक बात कहूँ.
भाभी- हां कहो न! मैं- आप बहुत सुंदर हो, समझदार हो.
मेरा मन करता है कि आपको ही गर्लफ्रेंड बना लूं … हा हा हा हा.
भाभी- हा हा हा हा … अरे पागल मैं तो शादीशुदा हूँ.
मैं- तो क्या हुआ, क्या शादीशुदा गर्लफ्रेंड नहीं हो सकती! भाभी- किसी बिना शादीशुदा को पटाओ … हा हा हा हा … वैसे भी रजत को पता चलेगा तो जान ले लेंगे … हा हा हा हा.
मैं- अरे भाभी उनको कौन बताएगा.
मैं तो कभी भी उनके होते हुए आपको ना तो मैसेज करूंगा और ना ही मिलूंगा.
आपकी इज़्ज़त और आदर हमेशा बना कर रखूंगा, आप हमेशा खुश रहें … यही तो मैं चाहता हूँ.
भाभी- तुम्हारे होते हुए मैं खुश ही रहती हूँ, मुझे अकेलापन नहीं लगता.
इतना बहुत है मेरे लिए … गर्ल फ्रेंड बना लेने से क्या अलग हो जाएगा.
हा हा हा.
मैं- भाभी मेरे मन में बहुत सारी बातें होती हैं, जो मैं कह नहीं पाता हूँ.
अगर आप मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओगी, तो दिल की बातें आपके साथ करने में मुझे हिचक नहीं होगी.
वैसे भी आपको गर्लफ्रेंड के रूप में पाने वाला इस दुनिया का सबसे लकी आदमी होगा.
भाभी- अच्छा … हा हा हा … चलो अब चलते हैं बहुत देर हो गई है.
आठ भी बजने वाले हैं.
रजत का भी फोन आने वाला है … उनको बुरा लगेगा.
मैं- ठीक है भाभी, चलते हैं.
मैंने समझ लिया था कि भाभी ने मेरी बात को घुमा दिया और कोई रिप्लाई नहीं किया.
इस विषय पर मेरी दुबारा बात करने की हिम्मत नहीं हुई.
इसी तरह करीब एक महीना और बीत गया, लेकिन मैंने फील किया कि भाभी अब कुछ ज्यादा ही बिंदास रहने लगी थीं.
मैं बहुत बार उनके घर चाय पीने चला जाता था और वो भी ऊपर आ जाती थीं.
उस समय रजत भैया एक हफ्ते से बाहर गए हुए थे, फ्राइडे का दिन था.
रजत भैया को अगले हफ्ते वापस आना था.
मैं घर पहुंचा, भाभी का दरवाजा खटखटाया.
भाभी किचन में कुछ काम कर रही थीं.
उन्होंने साड़ी पहनी हुई थी … गजब माल लग रही थीं.
मैं- भाभी आज तो गजब ढा रही हो आप! भाभी- अच्छा, ऐसा क्या है आज? मैं- साड़ी में आप गजब लगती हो.
भाभी- हर कोई गजब लगती है.
मैं- आप कुछ ज़्यादा ही लगती हो, भगवान ने आपको फुर्सत में बनाया है, लिमिटेशन है वरना … भाभी- वरना क्या … हा हा हा हा! मैं- वरना, मैं आपको बांहों में ले लेता, आपको किस करता और बहुत प्यार करता … हा हा हा हा.
भाभी ने इस पर कुछ नहीं कहा और मुस्कुराते हुए किचन में काम करने लगीं.
मैं सोफे पर बैठकर उन्हें पीछे से देख रहा था, उनके चूतड़ मस्त हिल रहे थे और वो काम किए जा रही थीं.
मैंने सोचा कि बेटा आज मौका है, हिम्मत करके चौका मार दे, देखा जाएगा.
भाभी नहीं मानी, तो सॉरी बोल देना.
ये सोचकर मैं उठा और भाभी के पीछे खड़ा हो गया.
मैंने उनको कंधे पर हाथ लगाया.
उन्होंने कुछ नहीं कहा, तो मैं समझ गया.
मैंने उनको अपनी तरफ घुमाया, वो आराम से घूम गईं और सर नीचे करके खड़ी हो गईं.
मैने झटके से उनको गले लगा लिया, उन्होंने कुछ नहीं कहा.
मेरी तो लॉटरी लग गई कि भाभी सेक्स के लिए तैयार हैं.
आगे भाभी की चुदाई की कहानी कैसे हुई, पूरे विस्तार से भाभी सेक्स का वर्णन करूंगा.
आप मुझे मेल कर सकते हैं.
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स्रोत:इंटरनेट