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फकीर ने मेरी बीवी की चूत चोद दी

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फकीर ने मेरी बीवी की चूत चोद दी 1

. नमस्कार दोस्तो, यह एक सच्ची घटना है.
एक फकीर ने मेरे ही घर में मेरी ही बीवी के साथ मेरे ही रूम में जिस्मानी ताल्लुकात बनाए और उन दोनों ने चुदाई करके निकाह की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया.
मैं चाह कर भी समाज और इज्जत के डर से कुछ ना कर सका.
मेरा नाम जुल्फिकार है.
मेरी उम्र 29 साल है और मैं रायपुर में रहता हूं.
मेरी बीवी बड़ी ही हॉट है और उसका नाम इसराना है.
इसराना की उम्र 26 साल है.
हमारे घर में एक फकीर का आना जाना था, वह लगभग 50 से 55 साल के बीच में होगा.
हम सभी घर वालों का उस फकीर के प्रति पिछले दस सालों से बहुत ही अधिक झुकाव था और हम सब उसे फ़रिश्ते की तरह मानते थे बल्कि यूं कहें कि फ़रिश्ते से भी ज्यादा बढ़कर मानते थे.
वह हमारी जिंदगी में शामिल था.
उस फकीर ने पता नहीं क्या सोच कर मेरी बीवी को सैट करके उसके साथ जिस्मानी ताल्लुकात बना लिए.
उन दोनों ने चुदाई करके मेरी इज्जत को तार-तार कर दिया.
दोस्तो यह देसी बाबा सेक्स कहानी 2014 की है.
मेरे निकाह को लगभग 4 साल हो गए थे और अभी तक हमें औलाद का सुख नहीं मिला था.
जैसा कि मैंने आपको बताया कि हमारे घर में एक फकीर का आना जाना रहता था.
वह अक्सर हमारे घर रुका करता था.
उसके आने पर घर में प्रोग्राम होते थे.
फकीर के साथ 8-10 लोग हमेशा ही बने रहते थे.
वो सब हमारे यहां रुकते थे.
उन सभी का हमारे घर में ही खाना पीना और सब इन्तजामात होते थे.
उस फकीर ने जब से मेरी बीवी को देखा तो पता नहीं क्यों उसका व्यवहार कुछ बदल सा गया था.
पहले वह हमारे घर साल में एकाध बार आया करता था.
मगर मेरे निकाह के बाद वह जल्दी जल्दी हमारे घर आने लगा.
मैं अपनी बीवी के बारे में आपको बता दूं कि वह एक बहुत ही खूबसूरत अच्छे दिल वाली मासूम और अपने शौहर के लिए वफादार औरत है.
फकीर के मन में पता नहीं क्या चल रहा था कि वह हमेशा किसी ना किसी बहाने अक्सर मेरी बीवी के करीब होना चाहता था.
हमेशा उससे बातें करना चाहता था.
किसी ना किसी बहाने वह मेरी बीवी से बात करता, तो उसे शायद यह सब अच्छा लगता था.
एक बार रायपुर के ही पास एक छोटे मजार पर फकीर आया हुआ था और उसी के कहने पर मेरी बीवी उस जलसे में शामिल होने गई थी.
उधर फकीर जिस कमरे में रुका हुआ था, उसने अपने उसी रूम में मेरी बीवी को बुलाया.
वह उस समय एक पलंग पर बैठा हुआ था.
मेरी बीवी उसी पलंग पर बैठ गई.
उन दोनों में बातें होती रहीं.
फकीर मेरी बीवी से मेरे घर वालों के बारे में कुछ बातें करता रहा.
मेरी बीवी समझ रही थी कि यह फकीर जी तो उसके अब्बा की उम्र के हैं, इसलिए वह अपने मन की बातें उनसे साझा कर रही थी.
मगर उसे यह नहीं पता था कि फकीर के मन में क्या चल रहा है.
बीवी ने फकीर से औलाद के सुख की बात भी कही.
फकीर ने समझ लिया था कि ये औरत उसके लंड के नीचे आसानी से आ जाएगी फकीर इसराना से थोड़ी देर औलाद को लेकर बातें करता रहा.
इसके बाद फकीर ने मेरी बीवी के हाथों को छूना चालू कर दिया और बोला कि तुम्हारे हाथ तो बहुत खूबसूरत हैं.
इसी तरह वह बात बात में गालों को छूता, हाथों को छूता और हाथों को चूम लेता.
इस पर भी मेरी बीवी को कोई संदेह नहीं हुआ.
फिर थोड़ी देर बाद उसने बिस्तर पर लेट कर मेरी बीवी के दोनों हाथों को पकड़ा और उसे अपने सीने पर लिटा लिया.
फकीर मेरी बीवी से बात करने लगा.
इतना सब होने के बाद भी मेरी बीवी समझ ना सकी कि यह फकीर उससे क्या चाह रहा है.
उसके सीने पर लेटे हुए मेरी बीवी के मम्मों पर उसके हाथ घूमने लगे.
तभी उसने मेरी बीवी को अपने ऊपर पलटा लिया और अब इसराना के मम्मे पूरी तरह से फकीर के सीने पर रख गए थे.
वह यहां वहां की बातें करता रहा और मेरी बीवी की कमर को सहलाता रहा.
थोड़ी देर बात करने के दरमियान बाहर से कुछ आवाज आ गई और बात आगे ना बढ़ सकी.
कुछ दिनों के बाद उस फकीर का हमारे घर फिर से आना हुआ.
दिन भर घर में मजहबी प्रोग्राम होता रहा, फिर रात में खाना पीना खाकर सभी लोग हमारे घर में ही सो गए थे.
रात के कुछ लगभग 11-00 या 11-30 बजे हुए थे.
मेरी अम्मी ने मेरी बीवी से कहा- जाओ इसराना, फकीर की सेवा करो, थोड़ा उनके पैर दबा दो.
मेरी बीवी ने कहा- ठीक है अम्मी, मैं अभी जाती हूं.
फकीर जिस रूम में सोया था, उसमें उसके अलावा और कोई नहीं था.
कमरे में मोटे मोटे पर्दे पड़े हुए थे, कहीं से भी बाहर से अन्दर या अन्दर से बाहर देखने का कोई रास्ता नहीं था.
मेरी बीवी उस रूम के अन्दर गई तो फकीर डबल बेड पर लेटा हुआ था.
मेरी बीवी ने उसके पैरों को दबाना शुरू किया.
मेरी बीवी का स्पर्श पाते ही वह जैसे विचलित हो गया.
थोड़ी देर पैर दबाने के बाद उसने मेरी बीवी को इशारा किया कि थोड़ा और ऊपर जांघ के पास दबा दो.
दिन भर बैठे रहने से यहां पर दर्द होता है.
मेरी बीवी बहुत भोली थी, उसकी समझ में नहीं आया.
उसने सोचा यह तो ऊपर वाले का भेजा हुआ फ़रिश्ता है.
ऐसा सोचकर उसने फकीर की जांघ वाले हिस्से को दबाना शुरू कर दिया.
जब वह अपने हाथ फकीर की जांघ पर लगाती और वहां दबाती, तो वो फकीर अपनी टांगों को और फैला देता.
इसी बीच मेरी बीवी के कोमल हाथ फकीर के लंड को लगने लगे थे.
लेकिन मेरी बीवी के मन में ऐसा कुछ भी भाव नहीं था.
थोड़ी देर और दबाने के बाद फकीर ने मेरी बीवी को इशारा करके बोला- बीच में हाथ लगाओ.
मेरे मर्दाना अंग का जो ऊपरी हिस्सा होता है, उसके आस पास जरा सहला दो.
मेरी बीवी ने हाथ वहां पर लगाया, तो फकीर का लंड खड़ा हुआ था.
तो मेरी बीवी ने किनारे-किनारे दबाया.
उसका लौड़ा आउट ऑफ कंट्रोल हो रहा था.
तभी फकीर को पता नहीं क्या सूझी, उसने मेरी बीवी का हाथ पकड़ा और सीधे लंड के ऊपर रख दिया.
वो इशारा करने लगा कि इसे ऊपर नीचे करो.
फकीर ने केवल लुंगी पहनी हुई थी.
उसने अन्दर अंडरवियर पहनी हुई ही नहीं थी.
थोड़ी देर में उसने अपनी लुंगी को एक तरफ हटा दिया.
अब उसका नंगा लंड मेरी बीवी के सामने तन्ना रहा था.
फकीर ने अपने हाथों से मेरी बीवी का हाथ पकड़ा और लंड पर रख दिया और मुठ मारने के लिए बोला.
मेरी बीवी भी समझ नहीं सकी, उसे लगा कि यह तो बूढ़ा आदमी है, शायद दर्द हो हो रहा होगा.
इसलिए मेरी बीवी ने फकीर के लंड को 5-6 बार ऊपर नीचे किया.
उतने में ही फकीर का वीर्य निकल गया.
फकीर शायद कंट्रोल नहीं कर पाया था.
लंड से रस टपकने के बाद फकीर उठकर बाथरूम की ओर चला गया.
इसी दौरान मेरी बीवी भी मेरे रूम में आ गई और उसने मुझे यह सारी बात बताई कि फकीर उससे इस प्रकार से सेवा करवा रहा था.
मैं अपनी बीवी के मुँह से ये सब सुनकर भौचक्का रह गया.
मगर न जाने क्यों मुझे उस फकीर पर खुद से भी ज्यादा भरोसा था.
मैंने कहा- नहीं इसराना, ऐसा नहीं हो सकता.
वह शायद हमारी परीक्षा ले रहे हैं.
वह ऐसे कतई नहीं हैं.
मैं उन्हें पिछले लम्बे अरसे से जानता हूं.
वह एक बहुत ही महान हस्ती हैं.
वह सेक्स के नजरिये से तुम्हारे साथ वो सब नहीं कर रहे होंगे, वह जरूर हमारी परीक्षा ले रहे हैं.
हम दोनों में बातें होती रही कि हमें क्या करना चाहिए.
मैंने अपनी बीवी से कहा- तुम फिर कल उनके पास जाना.
वह क्या करते हैं और क्या कहते हैं, ये देखना और वैसा करते जाना, जैसा फकीर कहें.
उसने कहा- ठीक है.
फिर दूसरे दिन मेरी बीवी पुनः फकीर के रूम में गई और उसने फकीर के पैर दबाना शुरू कर दिया.
फकीर तो मानो इंतजार ही कर रहा था.
वह मेरी बीवी को देख कर बड़ा खुश हो गया.
उसने तुरंत मेरी बीवी को अपनी बांहों में भर लिया और बिस्तर पर खींच लिया.
बिस्तर पर गिरते हैं वह मेरी बीवी के मम्मों से खेलने लगा.
वह बार-बार मेरी बीवी से यह कह रहा था कि जल्दी से अपनी ब्रा खोल दो … मेरे ऊपर शै आ रही है.
जल्दी खोल.
तुझे औलाद का सुख देने शै आ रही है.
आज ये शै तेरे साथ तेरा शौहर बनकर तुझे औलाद का सुख देगी.
मेरी बीवी ये सुनकर जरा घबरा गई कि शै उसको चोदेगी.
उधर वो फकीर मेरी बीवी को चूमे जा रहा था.
कुछ ही देर में मेरी बीवी एकदम से सम्मोहित सी हो गई.
उसे इस बात का इल्म ही नहीं रहा कि यह फकीर कैसी हरकतें कर रहा है.
फिर उस फकीर ने कहा- क्या तुम मेरे नीचे लेटकर संभोग करने के लिए राजी हो? मेरी बीवी ने सहमते हुए कहा- पहले मैं अपने खाबिंद से पूछूंगी, यदि मेरे शौहर बोलेंगे तो फिर मैं आपके साथ संभोग कर लूंगी.
ऐसा सुनने पर वो फकीर भड़क गया और बोला- नहीं नहीं, अपने शौहर से इस बारे में कुछ मत कहना, नहीं तो तुम्हारा शौहर नाराज हो जाएगा.
मगर मेरी बीवी नहीं मानी और वह वहां से उठकर चली आई.
उसके बाद उसने मुझे सारी बातें बताईं.
अब तो दोस्तो, मुझे भी कुछ अजीब सा लगने लगा.
लेकिन मेरी धार्मिक आस्था होने के कारण मेरा मन अभी भी मानने के लिए तैयार नहीं था कि मैं जिस इंसान को फ़रिश्ता की तरह मानता हूं वह मेरी बीवी के साथ कैसे संभोग कर सकता है.
वो कैसे मेरी बीवी के शरीर को पाना चाहता है.
अब बात शै की थी कि क्या हम दोनों मियां बीवी की औलाद की ख्वाहिश वो शै के जरिये पूरी हो रही है.
हम दोनों ने आपस में बात करने लगे कि अब हमें क्या करना चाहिए.
आखिर मैंने इसराना से कहा- कल तुम फिर से फकीर के पास जाओ और फकीर जैसे जैसे बोलता जाए, तुम वैसे वैसे करती जाना और यदि फकीर अपनी हद पार करता है, तो तुम मुझे इशारा कर देना.
मैं तुरंत वहीं पर लाइट चालू कर दूंगा.
मैं दरवाजे के पास ही खड़ा रहूंगा.
इसराना ने कहा- ठीक है.
मेरी बीवी अगली रात में पुनः फकीर के रूम में गई.
आज उसने सफेद पजामी कुर्ता पहन रखी थी और वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी और उसके दूध तो मानो कयामत ही ढा रहे थे.
रूम के अन्दर जाते ही मेरी बीवी ने फकीर के पैरों को दबाना शुरू कर दिया.
मैं दरवाजे के बाहर खड़ा था और अन्दर झांक कर देखने की कोशिश करने लगा.
मगर अन्दर बहुत ज्यादा अंधेरा होने के कारण मुझे सिर्फ सफेद पोशाक दिख रही थी.
मैं, फकीर या अपनी बीवी को स्पष्ट रूप से जरा सा भी नहीं देख पा रहा था.
आगे उनकी क्या बातें हुईं और उनके दरमियान क्या हुआ, वो मेरी बीवी ने मुझे आकर बताया.
वो मैं आप लोगों को बीवी की जुबानी बता रहा हूं: जैसे ही मैं फकीर के रूम में पहुंची और मैंने उसके पैरों का बोसा लिया.
मेरा स्पर्श पाते ही फकीर ऐसे उठ गया, जैसे वह जैसे मेरा इंतजार ही कर रहा था.
वो मुझे देख कर इतना खुश हो गया था, जैसे उसे जीवन का सब कुछ आज मिलने जा रहा है.
उसने मेरे दोनों हाथों को पकड़ा और मुझे अपने बिस्तर पर बगल में लिटा लिया.
मैं उसके लौड़े के आगे अपनी गांड करके लेटी हुई थी.
फकीर पीछे से ही अपने लंड को मेरी गांड में रगड़ रहा था.
मुझे यह बहुत अजीब सा लग रहा था, मैं अपने शौहर को इशारा करना चाह रही थी लेकिन कैसे करती, मुझे कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था.
और यदि मैं हल्ला करती तो बगल के रूम में और जो 8-10 लोग सोए हुए थे, वह भी जाग जाते और हमारी इज्जत का क्या होता.
इसी कशमकश में मैं लेटी रही और सोचती रही कि मैं क्या करूं.
अंदर से मैं चाहती थी कि मुझे औलाद का सुख मिले जाए.
क्योंकि मेरे शौहर की अम्मी मुझे हर दिन बेऔलाद होने के ताने देती थी.
अगर मेरे शौहर मुझे औलाद दे सकते तो अब तक दे चुके होते.
मैंने तय कर लिया था कि मैं आज यह काम करके ही रहूँगी.
काफी देर तक फकीर अपना लंड पीछे से मेरी गांड पर रगड़ता रहा.
कुछ देर लंड रगड़ने के बाद उसने अपना एक हाथ मेरे पेट के पास लगाया और मुझे अपनी दूसरी साइड लिटा दिया.
फकीर बहुत खुश नजर आ रहा था.
वह मानो आज सारी सीमाओं को तोड़ देना चाहता था.
अब फकीर के हाथ मेरे जिस्म के अंग अंग को छू रहे थे.
फकीर के हाथ कभी मेरे गालों को, कभी होंठ को, कभी गर्दन को, कभी मेरे मम्मों को, कभी मेरी नाभि को छू रहे थे.
वह इस तरह मेरे जिस्म का मुआयना कर रहा था कि मानो न जाने कितने साल से वह इसी दिन की तलाश में था कि कब मैं उसकी इच्छाओं को पूरा करूंगी.
फकीर के हाथ धीरे-धीरे अपनी मर्यादाओं को लांघ कर मेरे जिस्म को टटोल रहे थे.
वह कभी मेरे पैरों को छूता, फिर धीरे-धीरे हाथ बढ़ाकर मेरी कमर पर ले आता.
वह कभी अपने होंठों से मेरी गर्दन पर किस करता, कभी अपने होंठ मेरे होंठों पर रख देता.
उसके हाथ मेरे मम्मों पर बार-बार आ जा रहे थे.
फकीर ने आप सबसे पहले मेरी चुन्नी का पल्ला हटा दिया और वह कुर्ती के ऊपर से ही मेरे मम्मों को ऐसे मसलने लगा मानो वो मेरे दूध खा जाना चाहता था.
कुछ देर मेरे मम्मों से खेलने के बाद उसने मुझसे कहा कि कुर्ती उतार दो.
मैंने उससे कहा- आप जो कर रहे हैं वह निहायत ही गलत कदम है.
मेरे शौहर आपको फ़रिश्ता मानते हैं और आप उनके साथ ही ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं? उसने मेरी इस बात का कोई उत्तर नहीं दिया.
उसके ऊपर तो मेरे जिस्म को पाने का जुनून सवार था.
वह किसी न किसी तरीके मेरे जिस्म में उतर जाना चाहता था.
मैंने कोशिश की कि मैं अपने शौहर को इशारा कर सकूं या उन्हें जरा सा भी देख सकूं.
लेकिन रूम में अंधेरा होने के कारण मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था.
मैं सिर्फ फकीर को स्पर्श कर पा रही थी.
यदि मैं आवाज करती हूं और घर के दूसरे लोगों को बुलाती हूं, तो घर के सारे सदस्य इस फकीर की ही बात सुनेंगे.
क्योंकि वो सब उसको फ़रिश्ता की तरह मानते हैं.
सारा लांछन मेरे ऊपर ही लगा दिया जाएगा और मेरा समाज में जीना दूभर हो जाएगा.
यही सोच कर मैं बिस्तर पर किसी तरह पड़ी रही.
अब फकीर ने अपने हाथों से मेरे कुर्ती को खोल दिया और फिर पीछे हाथ डालकर उसने मेरी ब्रा के हुक को भी खोल दिया.
मेरी ब्रा का हुक खुलते ही मेरे दूध पूर्ण रूप से आजाद हो गए.
फकीर बड़े मजे से अपने हाथों को मेरे दूध के ऊपर फिरा रहा था.
वह बार-बार मेरे शौहर का नाम लेकर मुझसे कहता- जुल्फिकार ऐसा नहीं करता है क्या, जुल्फिकार तुम्हारे साथ कैसे सेक्स करता है.
तुम्हें अपने शौहर का क्या अच्छा लगता है.
उसके शरीर में तुमको उसका कौन सा अंग सबसे ज्यादा अच्छा लगता है और तुम्हारे शौहर को तुम्हारे शरीर की कौन सी बात सबसे अच्छी लगती है.
मैं खामोश रही, कुछ नहीं बोली.
मेरी तरफ से फकीर को कोई भी सहयोग या विरोध नहीं मिल रहा था.
वह अपनी मनमर्जी से मेरे साथ सब कुछ कर रहा था.
कुछ देर तक मेरे दोनों दूध पीने के बाद उसने मेरी पजामी को नीचे सरका कर पैरों के ऊपर तक ला दिया.
अब मैं फकीर के नीचे अर्धनग्न अवस्था में पड़ी हुई थी और फकीर मेरे पूरे शरीर से खेल खेल रहा था.
थोड़ी ही देर में फकीर ने मेरी पैंटी को खींचा और मेरे पजामी को दोनों पैरों से बाहर कर दिया.
उसने मेरे पैरों को घुटनों के बल मोड़ दिए.
अब फकीर का मुँह मेरी चूत के मुँह के ऊपर आ गया था.
फकीर बार-बार अपने होंठों से मेरी चूत को किस कर रहा था, बीच बीच में वह मेरी चूत के ऊपर अपनी उंगलियों से कुरेदता और कभी अपनी जीभ को अन्दर डालकर मेरी चूत चूसने लगता.
मेरी कसमसाहट बढ़ने लगी थी.
अपनी चूत पर उसका चाटना मुझे कहीं न कहीं लज्जत देने लगा था.
उसके दोनों हाथ मेरे दोनों मम्मों पर जमे हुए थे.
वह बार-बार उन्हें दबाए जा रहा था.
ऐसा करने पर लग रहा था मानो उसे जन्नत की हूर से खेलने की अनुभूति हो रही थी.
वह मुझे बेतहाशा चूमे जा रहा था.
उसने मेरे शरीर से अटके हुए सारे कपड़े कुछ ऐसे हटा दिए कि उसे मुझे चोदने में दिक्कत न हो.
अब मैं नंगी फकीर के नीचे पड़ी हुई थी.
अब उसने अपनी पूरी जीभ को मेरी चूत में डालना शुरू किया.
फकीर की जीभ का स्पर्श मुझे बार-बार परेशान कर रहा था.
मुझे रह-रहकर अपने शौहर की याद आ रही थी और उनका मासूम चेहरा मेरे सामने आ रहा था.
मैं तो मानो शर्म से गड़ी जा रही थी.
मगर मैं क्या करती मेरे सामने औलाद पाने का कोई रास्ता नहीं था.
अब तक फकीर ने मेरी चूत को जीभ डाल कर गीला कर दिया था.
वह मेरे ऊपर बैठ गया था.
उसके लंड का स्पर्श मेरी चूत को बार-बार हो रहा था.
मैं उसके लंड को महसूस कर रही थी.
वह अपने लंड को मेरी चूत में डालने को बेकरार हो गया.
कई प्रयास करने के बाद भी उसका लंड मेरे छेद में नहीं जा रहा था.
दो तीन बार कोशिश करने पर उसका लंड मेरी चूत के संकरे छेद में जाने लगा, तो मुझे बहुत दर्द होने लगा.
मैंने बार-बार उसे कहा कि दर्द हो रहा है मगर वह मुझे चोदने की कोशिश करता रहा.
वह पूरी कोशिश कर रहा था कि किसी भी तरह मेरी चूत में उसका लंड समा जाए.
उसके लंड का गर्म सुपारा मुझे गर्म करने लगा था और मुझे खुद अन्दर से चुदाई की लगने लगी थी.
बहुत कोशिश करने के बाद जब उसका लंड मेरी चूत में नहीं गया तो मैंने उसके लंड को खुद ही अपनी चूत के छेद में लगा दिया.
तभी फकीर ने धक्का दे दिया.
उसका लंड चूत में पेवस्त हो गया.
मेरी जोर की आह निकल गई और मैंने किसी तरह से अपनी चीख दबा ली.
फकीर का लंड मोटा था.
उसके कारण मुझे दर्द हो रहा था.
कुछ धक्कों के बाद उसका लंड पूरी तरह मेरी चूत में समा चुका था.
फकीर मुझे बेतहाशा चोदे जा रहा था और मेरे मम्मों को चूस रहा था.
थोड़ी ही देर में फकीर का वीर्य मेरी चूत में समा गया और फकीर ढीला पड़ गया.
उसके झड़ने के तुरंत बाद मैं उससे अलग हुई और अपने कमरे में चली गई.
इस सारी घटना का जिक्र मैंने अपने शौहर से कर दिया.
मैं उन्हें धोखा नहीं देना चाहती थी.
मेरे शौहर ने भी मेरा साथ दिया और मुझे सब कुछ भूल जाने को कहा.
अगले दिन मेरे शौहर ने मुझे हमल रोकने की दवा लाकर दी क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि मेरे पेट में किसी गैर मर्द का बच्चा आये.
लेकिन उस रात को जो भी हुआ, मैं भूल नहीं पाती हूँ.
रह रह कर मुझे वो बाबा सेक्स याद आ जाता है.
उसके कुछ दिनों के अन्दर ही हम लोगों ने रायपुर छोड़कर नागपुर शिफ्ट हो जाने का निर्णय ले लिया और हमेशा के लिए उस फकीर की करतूतों से आजाद हो गए.
मुझे दुख इस बात का रहा कि हमारे ही घर में, हमारे ही लोगों के बीच मेरे शौहर की मौजूदगी में, उस फकीर ने मेरी मर्यादा को तार-तार किया और हम लोग कुछ भी ना कर पाए.
दोस्तो, मेरा आप सभी लोगो से निवेदन है कि किसी भी ऐसे फकीरों के चक्कर में ना पड़ें और ना ही अपने घर की बहू बेटियों को फकीर के पास में जाने दें.
इनसे खुद को दूर ही रखें.
आप लोगों को मेरी इस घटना ने कितना टच किया और आपको ये देसी बाबा सेक्स कहानी कैसी लगी, रिप्लाई जरूर कीजिएगा.
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स्रोत:इंटरनेट