. अब तक मैंने भाभी के शरीर से उनके कपड़ों को अलग करना चालू कर दिया था.
पहले मैंने भाभी की साड़ी को खींचा.
फिर ब्लाउज़ और अंत में पेटीकोट उतार कर उन्हें सिर्फ ब्रा और पेंटी में ले आया.
सच में बड़ा ही कमाल का दृश्य था.
मेरी भाभी मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेंटी में थीं.
मैंने भी अपने सारे कपड़ों को 2 मिनट में उतार फेंका.
मेरा 7 इंच का लंड मानो आज मुझे ही बहुत बड़ा दिखने लगा था.
भाभी मेरे लंड को चोर नज़रों से निहार रही थीं.
मैंने इशारे से पूछा- क्या देख रही हो? भाभी ने शरमा के हाथों से मुँह छुपा लिया.
फिर मैंने भाभी के स्तनों को ब्रा से अलग किया और उनके छोटे छोटे स्तनों पे मुँह लगा दिया.
भाभी अब बल खाने लगीं.
मैं उनके स्तनों से नीचे कमर और पेट पर चुम्बन करने लगा.
उनके शरीर पर इतनी उत्तेजना चढ़ गई थी कि वो कांपने लगीं.
मैंने अपने दांतों से उनकी पेंटी उतारी और उनकी बिल्कुल साफ क्लीन शेव चुत देखी, तो मुझसे रहा नहीं गया.
उनकी चूत लगभग गीली हो गई थी.
उस पर टूट पड़ा.
मैंने जैसे ही उनकी चुत पर मुँह लगाया, वो एकदम से उछल पड़ीं.
मैंने पूछा- क्या हुआ? भाभी ने बोला- पहली बार किसी ने मेरी चुत पर अपने होंठों से प्यार किया है.
उनकी ये बात सुन कर मुझे और जोश आ गया.
मैंने अपनी जीभ से उनके दाने को छेड़ना शुरू कर दिया.
बस दो मिनट ऐसा करने से ही भाभी झड़ गईं.
उनकी चुत से नमकीन पानी निकलने लगा.
मैंने सारा पानी पी लिया.
अब मैंने भाभी को बोला- भाभी, आप मेरे लंड को प्यार नहीं करोगी? उन्होंने मुझसे कहा- मैंने कभी ऐसा नहीं किया.
मैंने बोला- अगर आप की इच्छा नहीं है, तो रहने दो.
पर प्रेमवश उन्होंने मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
कुछ पल बाद भाभी ने मेरे लंड का ऊपरी भाग अपने मुँह में ले लिया.
उनके दाँत मुझे मेरे लंड पर महसूस हो रहे थे.
मैं समझ गया कि भाभी सच में पहली बार किसी लंड को मुँह में ले रही हैं.
मैंने उन्हें अपनी ओर खींचा और अपने ऊपर लेटा लिया.
मैंने भाभी को लम्बा लिप किस किया.
फिर मैंने जैसे ही उनकी गर्दन पर किस किया, तो भाभी मदहोश होने लगीं.
शायद वो उनका हॉट-स्पॉट था.
भाभी अब बड़ी तेजी से गर्म होने लगीं और मुझे किस करने लगीं.
भाभी कभी मेरे होंठों पर, कभी गालों पर और सीने पर चूमे जा रही थीं.
इसके साथ ही भाभी मेरे लंड को पूरे मनोयोग से मुँह में लेकर अच्छे से चूसने लगी थीं.
मैंने भाभी को 69 की पोजीशन में ले लिया और उनकी चुत चाटने लगा.
कुछ देर ऐसे ही करने के बाद मैंने भाभी को बोला- भाभी अब असली काम के लिए तैयार हो जाओ.
मैंने उन्हें सीधा लेटा दिया और उनकी गांड के नीचे तकिया लगा दिया.
फिर भाभी की चुत के ऊपर वैसलीन लगा कर उसे चिकना कर दिया.
साथ ही मैंने अपने लंड पर भी खूब सारी वैसलीन मल ली.
फिर मैं भाभी की चुत पर अपने लंड को रगड़ने लगा.
भाभी अब तक पूरे जोश में आ गई थीं.
वो बोलीं- दीपक अब और न तड़पाओ … जल्दी से डाल दो अपना लंड मेरी प्यासी चुत में.
मैंने लंड को चुत पर सैट किया और एक झटका दे मारा.
मेरे लंड का सुपारा भाभी की चुत में घुस गया था.
भाभी ने इतनी मस्त अहह भरी कि मजा आ गया.
उनकी चुत मुझे काफी तंग लग रही थी.
इसलिए मैंने बिना रुके दूसरे झटके में लगभग आधा लंड मेरी भाभी की चुत में डाल दिया.
भाभी की आंखों से आंसू आने लगे, पर उन्होंने कमाल का कन्ट्रोल कर रखा था.
मैंने पूछा- भाभी आपको दर्द हो रहा हो, तो मैं रुक जाता हूँ.
उन्होंने इशारे से ना बोलते हुए मुझे आगे करने की परमिशन दे दी.
एक झटके में मैंने अपना पूरा लंड भाभी की चुत की गहराई में उतार दिया.
भाभी इस बार अपने कंट्रोल पर कंट्रोल नहीं कर पाईं और जोर से चिल्ला उठीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मार डाला रे दीपक … अहह अहह मर गई … निकालो इसे बाहर! सच में दोस्तो, भाभी की चुत इतनी टाइट थी कि मेरे लंड का सुपारा भी छिल गया था और मुझे भी जलन महसूस होने लगी थी.
पर मैंने उसी अवस्था में भाभी के होंठ पर अपने होठों को लगा दिया.
जिससे कुछ ही पलों में उन्हें थोड़ा आराम मिल गया.
भाभी थोड़ी बेसुध सी हो गई थीं, अभी भी उनकी आंखों से आंसू आ रहे थे.
उनका बदन थर थर कांप रहा था.
मैं ऐसे ही उन्हें एक मिनट तक किस करता रहा.
उन्हें अब अच्छा लगने लगा था.
उन्होंने अपनी आंखों से आंसू पौंछे और मुझे किस करने लगीं.
भाभी मुझसे बोलीं- दीपक तुम सच में मर्द हो … तुमने आज मुझे पूरा कर दिया.
अब से मेरे इस शरीर पर सिर्फ़ तुम्हारा राज होगा.
मैंने अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा और वापस अन्दर तक डाल दिया.
भाभी फिर ‘अहहह..’ के साथ उचक गईं.
भाभी बोलीं- थोड़ा आराम से जान … उनके मुँह से जान शब्द सुन कर मुझे भी बड़ा अच्छा लगा और मैं धीरे धीरे भाभी को चोदने लगा.
अब वो भी मेरे लंड का स्वागत अपनी चुत उठा कर कर रही थीं.
मेरा लंड उनकी बच्चेदानी से टकरा रहा था.
मैंने थोड़ी स्पीड तेज कर दी.
भाभी भी मजे से ‘अहह अहह … चोदो दीपक … और अन्दर तक चोदो … अहह हम्म्म … उइईई … सीईईई..’ कहने लगीं.
कुछ ही धक्कों में भाभी चरम तक पहुंच गईं और कांपने लगीं.
उनकी आंखें चढ़ गई थीं और वो मदहोश होकर झड़ने लगी थीं.
उनका झड़ना मुझे साफ महसूस हो रहा था.
मैंने धक्के मारना बंद नहीं किया बल्कि और तेजी से उन्हें चोदने लगा.
उनकी गर्मी से मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं भी उनकी चुत में झड़ने लगा.
मैंने भाभी की चुत को अपने वीर्य से भर दिया और उसी अवस्था में भाभी पर गिर गया.
कुछ देर के बाद हम लोग उठे और बाथरूम में गए.
मैंने उन्हें सुसु करते हुए देखा.
हम दोनों ने साथ नहाया और मैंने भाभी को शॉवर के नीचे घोड़ी बना कर चोदा.
अब तक शाम के 6 बज गए थे.
हमें पता भी नहीं चला.
मैंने लगातार भाभी को उस दिन चार बार चोदा.
उनकी गांड भी मारने की कोशिश की, पर उनकी गांड बहुत ज्यादा ही टाइट थी, इसलिए उसे छोड़ दिया.
फिर मैं तैयार होकर भाभी को किस दे कर वापस अपने घर भोपाल आ गया.
उसी महीने मेरी बुआजी खूब बीमार पड़ गईं और मुझे सनी ने भाग दौड़ के लिए हनुमानगढ़ बुला लिया.
इसी बीच में भाभी को लगभग 20 दिनों तक रोज चोदता रहा.
उनकी गांड को भी खोल दिया.
एक दिन भाभी ने मुझसे बोला कि मेरा महीना नहीं आ रहा है.
टाइम भी निकल गया है.
मैंने बोला- डॉक्टर को बताओ.
दूसरे दिन ही भाई और भाभी उसी हॉस्पिटल में गए, जहां बुआजी थीं.
वहीं भाभी का चेकअप कराया.
डॉक्टर सनी से बोली- खुश खबरी है … आपकी बीवी प्रेग्नेंट हैं.
भाई को तो यकीन ही नहीं हुआ और जब हुआ, तो उनकी और बुआजी की खुशियां देखते बन रही थीं.
भाभी को भी मैंने इतना खुश, बस चुदाई के टाइम ही देखा था.
भाभी ने आंखों से मुझे बहुत शुक्रिया किया.
आपको मेरी ये सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज़ अपने कमेंट्स कीजिएगा.
लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दी जा रही है.
स्रोत:इंटरनेट