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बचपन में माँ को ताऊ जी के लंड से चुदते देखा Hindi Sex Story

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बचपन में माँ को ताऊ जी के लंड से चुदते देखा Hindi Sex Story 1

. बचपन में माँ को ताऊ जी के लंड से चुदते देखा Hindi Sex Story लेकिन धीरे धीरे मुझे उन पर कुछ शक हो रहा था कि आखिर ताऊ जी और मेरी माँ एक साथ करते क्या हैं.
एक दिन मुझे कुछ देखने का हल्का सा मौका मिला.
ताऊ जी उन दिनों भैंसों के बाड़े में सोते थे, जब मैं एक रात को चुपके से अपने घर की छत पर जाकर मेरी माँ का इंतजार करने लगा कि कब मेरी माँ ताऊ जी के पास जाती है.
बाहर ठण्ड भी थी, फिर भी मैं वहीं पर जमा रहा कि कब ये लोग अपना खेल शुरु करते हैं.
और मेरी मेहनत रंग लाई, रात के करीब 10 बज रहे थे, मेरी माँ ने घर का दरवाजा खोला और उसे धीरे से बंद करके ताऊ जी जहाँ सो रहे थे उस बाड़े में चली गई.
अंदर काफी अंधेरा था और बाहर दरवाजे पर एक फूस का बना टाटा लगा था इस वजह से मुझे अंदर कुछ भी नहीं दिख रहा था.
मैं चुपके से छप्पर के पीछे के आले जहाँ गोबर के बने कण्डे से उन्हें बंद किया गया था ताकि अंदर सर्दी ना जाए, उनके पास गया तो केवल अंदर की खुसर फुसर की आवाज सुन रहा था.
कभी ताऊ जी तो कभी मेरी माँ की हल्की-हल्की सिसकारी निकल रही थी.
मैं किसी भी तरह अन्दर का नजारा देखना चाहता था लेकिन मुझे आज वो नसीब नहीं हुआ.
लेकिन एक बात तो मेर दिमाग में घर कर गई कि ताऊ जी और मेरी माँ कुछ ऐसा वैसा करतें जरूर हैं.
( हिंदी सेक्स कहानियाँ XXX Story Hindi Sex Stories )बस मेरे दिमाग में हमेशा उनका ही ख्याल रहने लगा.
आगे की हिन्दी सेक्स कहानी बताने से पहले मैं आपको अपने बारे में बता देता हूँ कि मेरे परिवर में ताऊ जी, मेरी माँ, मेरे पापा, मैं एवं मेरी बुड्डी दादी हैं.
जी शहर में काम करते हैं इस लिये वो शहर में ही रहते है.
गांव में खेतीबाड़ी का काम है जो ताऊ जी और मेरी माँ संभालते हैं.
तब मेरे पापा और की शादी हुए करीब 13 साल हुए थे जिनके मैं इककौती औलाद हूँ.
उन दिनों मैं की ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ने जाता था.
मेरे ताऊ जी की उम्र करीब 45 साल हो चुकी थी लेकिन शादी अभी तक नहीं हुई थी.
मेरी माँ दसवीं तक पढ़ी हैं लेकिन मेरे ताऊ जी एकदम अनपढ़ गंवार आदमी है.
दिखने में बहुत सुन्दर है वो एक दम गौरी पतली है, पतली कमर, गोरे-गोरे गाल, गोरा रंग ! मेरे ताऊ जी उल्टे तवे जैसे काले रंग के, चौड़ी छाती उस पर काले-काले घुंघराले बाल.
दादी अक्सर घर पर ही रहती थी.
उस दिन के बाद तो मेरा मन पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं लगता था, मन करता था कि हमेशा मेरी माँ के साथ ही रहूँ.
मैं किसी भी तरह उनका खेल देखना चाहता था और हर संम्भव प्रयास कर रहा था कि उनका खेल देखूँ.
आखिर मैंने एक दिन स्कूल ना जाकर उनका खेल देखने का फ़ैसला किया क्योंकि मैं जानता था कि मेरी माँ-ताऊ जी का खाना लेकर खेत पर जाती हैं, अब तो सरसों भी बड़ी हो रही है इसलिये ये दोनों पक्का वहाँ कुछ करते होंगे, यही सोच कर मैं स्कूल ना जाकर चुपके से खेत पर पहुँच गया जहाँ सरसों के खेत के बीच एक बड़ा भारी पेड़ है, उसके नीचे काफी दूर तक सरसों नहीं थी.
मैं उस पर चढ़ कर बैठ गया.
लेकिन में उस दिन मेरी माँ को ताऊ जी के लंड से चुदते हुए नहीं देख सका क्योंकि मेरे काफी इंतजार के बाद भी उन्होंने कुछ नहीं किया और मेरी माँ ताऊ जी के साथ सेक्स करे बिना घर वापस आ गई.
मैं आज फिर निराश ही लौटने वाला था.
इस तरह तीन-चार दिन बीत गये और उन्होने कुछ भी नहीं किया.
मैं सोच रहा था कि यह शायद मेरी गलत फहमी है.
करीब चार दिन बाद मैंने ताऊ जी को मेरी माँ से कुछ कहते देखा, मेरी माँ कह रही थी- ठीक है, आज रात को मैं खेत पर ही आ रही हूँ.
मेरे दिमाग में फिर से कीड़ा कुलबुलाने लगा.
शाम को मेरी माँ ने खाना बनाकर हमें खिलाया और दादी से कहने लगी- सासूजी, आज रात को जेठ जी का खाना खेत पर ही जायेगा क्योंकि रात को बिजली का नम्बर है.
दादी बोली- ठीक है बहू, सुरेश को मेरे पास ही छोड़ जाना, बच्चा इतनी दूर क्या करेगा.
मेरी माँ ताऊ जी का खाना लेकर खेत पर चली गई, इधर मैं भी वहाँ जाना चाहता था लेकिन ये बहन की लौड़ी बुड्ढी मुझे अकेले वहाँ नहीं भेजती तो मैंने एक बहाना बनाया और कहा- अम्मा, हमारे पेपर आने वाले हैं आप कहो तो मैं मेरे दोस्त के यहाँ पढ़ने चला जाऊँ? पहले तो नहीं मानी लेकिन काफी मनुहार करने के बाद उन्होंने जाने की अनुमति दे दी.
मैं जल्दी-जल्दी अपने खेत की ओर चल दिया जो गांव से काफी दूरी पर थे.
मेरा तो बचपन था इस लिये मुझे रास्ते में से डर भी लग रहा था पर मैं किसी धुन में उधर खिंचा चला जा रहा था.
बाहर काफी अंधेरा व सर्दी थी.
मैं जैसे तैसे करके हमारे लगे ट्यूबवैल के पास पहुँच गया तो सोचने लगा कि शायद मेरी माँ ताऊ जी खेत में पानी मोड़ रहे होंगे.
मैं जैसे ही टयूबवैल के पास पहुँचा तो देखा कि मोटर तो बंद है और कोठरी भी अंदर से बंद है, कोठरी में अन्दर बल्ब जल रहा है.
मैं धीरे-धीरे कोठरी के पास पहुँचा तो लगा कि मेरी माँ ताऊ जी अंदर ही हैं.
मैं अंदर देखना चाहता था कि वे दोनो क्या कर रहे हैं.
यही सोच कर मैं टयूबवैल की तरफ एक छोटी सी खिड़की जहाँ से मोटर को देखते थे, उसके पास जाकर अन्दर देखा तो मेरा शक यकीन में बदल गया.
ताऊ जी और मेरी माँ तख्त पर आपस में एक दूसरे से लिपटे पड़े हैं.
कोठरी ज्यादा बड़ी नहीं थी, केवल 8X8 फीट की ही थी, उसमें एक छोटा तख्त डाल रखा था जिस पर ताऊ जी मेरी माँ लिपटे पड़े थे.
मेरे 45 साल के ताऊ जी मेरी जवान और खुबसूरत माँ के गोर गोर गालों पर अपना मुंह टिका कर चुम्मा चाटी कर रहे थे.
मेरी माँ ने भी ताऊ जी को कसके जकड़ रखा था.
यह सब देख कर मुझे कुछ समझ ही नहीं आया की आखिर ये सब चल क्या रहा है.
दोनों काफी देर तक इसी अवस्था में पड़े रहे, फिर ताऊ जी ने मेरी माँ को छोड़ा और बोले- बहु, कितने दिनों से तुम्हारी मारने को मन कर रहा है, एक तुम हो कि अपने जेठ जी के का जरा भी ख्याल नहीं रखती हो.
मेरी माँ बोली – जेठ जी, मैं भी क्या करुँ, यह साला पीरियड भी तो आ जाता है.
ताऊ जी- बहु, अब जल्दी से अपनी साड़ी ब्लाउज और पेटीकोट उतार कर मेरे लौड़े से अपनी गांड मरवाने के लिये और चूत चुदवाने के लिये नंगी हो जाओ.
मेरी माँ तो जैसे ताऊ जी के कहने का ही इंतजार कर रही थी, झट उठी और पहले अपनी साड़ी खोली फिर अपना ब्लाउज और उसके बाद पेटीकोट ऐसे उन्होंने एक एक कर अपने सेक्सी जिस्म से सारे कपरे उतार दीये और चुदवाने के लिये एक दम नंगी हो गई.
मैं आज पहली बार मेरी माँ को नंगी देख रहा था दोस्तों मेरी माँ नंगी बहुत प्यारी लग रही थी.
क्या गजब का बदन था मेरी माँ का ! एकदम गोरी छाती पर गोलगोल और मोटी मोटी चूचियाँ, उनके बोबों की गुलाबी रंग की निप्पल तो मैंने पहले भी कई बार देखी है.
लेकिन उससे नीचे का भाग पहली बार देख रहा था.
कोठरी काफी छोटी होने की वजह से और उसमें 200 वाट का बल्ब जलने के कारण अन्दर काफी रोशनी ओर गर्मी थी.
ताऊ जी ने मेरी माँ को पकड़ कर तख्त पर बैठा लिया और मेरी माँ की दूध से भरी मोटी मोटी चूचियाँ को बहुत जोर जोर से मसलने लगे और मेरी माँ आह… उमह… उमह करने लगी और आंहे भरने लगी.
फिर एक दम से मेरे ताऊ जी ने बहुत ही और से माँ के बूब्स दबाए जिस वजह से अचानक ही मेरी माँ के मुँह से सिसकारी निकल गई- सीइइ अई इइइ क्या कर रहे हो जेठ जी, जरा धीरे भींचो ना ! कितना दर्द कर रहे हो.
ताऊ जी- अरे बहु, मेरी जान, आज कितने दिनों बाद मौका मिला है तुम्हे चोदने का.
मेरी माँ- हाँ जेठ जी, मैं भी तो तुम्हारे लंड की दिवानी कई सालों से हूँ.
मैंने मेरी माँ को पहली बार नंगी देखा था, मेरी माँ की पतली कमर के नीचे दोनों जांघों के बीच में हल्के-हल्के काले बाल दिखाई दे रहे थे.
जहाँ ताऊ जी का हाथ बार बार फिसल रहा था.
मेरी माँ तो मस्त होती जा रही थी.
फिर ताऊ जी उठे ओर अपने कपड़े उतारने लगे.
जैसे ही ताऊ जी ने अपनी धोती खोली तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गई, ताऊ जी का क्या गजब का लंड था.
करीब 11 इंच लम्बा और करीब 4 इंच मोटा उसकारंग बिलकुल काला था.
उस तगड़े लंड को ताऊ जी ने मेरी माँ के हाथ में पकड़ा दिया, बोले- बहु, लो तुम्हारा दीवाना.
मेरी माँ उसे हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी और मेरे ताऊ जी की मुठ मारने लगी.
कुछ देर बाद ताऊ जी ने मेरी नंगी माँ को तख्त पर लिटा दिया और बोले- बहु अब और सहन नहीं हो रहा है, चलो चुदवाने के लिये तैयार हो जाओ.
मेरी माँ भी अब चुदास से भर चुकी थी थी वो बोली- हाँ जेठ जी, मैं भी तो कब से तडप रही हूँ इसे लेने को आप के भाई तो शहर जाकर मुझे भूल ही गए है आप आप ही उनकी कमी पूरी करोगे.
मेरे ताऊ जी नें मेरी माँ को तख्त पर लिटा दीया और उनकी दोनों टांगों को चौड़ा किया तो मैंने देखा कि उनके बीच काले बालों के बीच में एक लाल रंग की दरार है जिसे अर्थात चूत कहते है मैं अब उस खड्डे को स्पष्ट देख रहा था.
तभी ताऊ जी ने अपने लंड का सुपारा मेरी माँ की चूत के मुँह पर रगड़ा तो मेरी माँ गनगना उठी.
ताऊ जी लगातार उसे रगड़ते रहे.
थोड़ी देर बाद मेरी माँ की चूत से चिपचिपा पानी दिखने लगा.
मेरी माँ चुदासी सी होते हुए बोली – हाय जेठ जी, क्यों तडपा रहे हो, इसे जल्दी से अन्दर डाल दो ना.
ताऊ जी- ठीक है मेरी जान, अभी इसे तुम्हारे अन्दर करता हूँ.
मुझे बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा था कि मेरी माँ इतने विशाल लंड को अपनी छोटी सी दिखने वाली चूत के अन्दर ले जायेगी और अगर ताऊ जी ने जबरदस्ती अंदर डाल भी दिया तो क्या मेरी माँ इसे सम्भाल पायेगी.
तभी ताऊ जी ने मेरी माँ की टाँगों को थोड़ा ऊपर करके लंड का सुपारा मेरी माँ की चूत के मुंह पर रखा तो मेरी माँ ने अपने दोनो हाथों से चूत के होंठ फ़ैला दिये, अब ताऊ जी ने नीचे खड़े होकर मेरी माँ के चूतड़ों को तख्त के किनारे पर रखा और अपनी कमर का दबाव बढ़ाया तो लंड आधा अन्दर सरक गया और मेरी माँ के मुँह से एक मस्ती भरी सिसकारी निकली- सी ईइइ इइइ… उउउइइइ !तभी ताऊ जी ने दूसरे झटके में तो पूरा का ही अंदर घुसेड़ दिया.
अब लंड जड़ तक मेरी माँ की चूत की गहराई में समा चुका था.
मेरी माँ के मुँह से फिर से सिसकारियाँ निकलने लगी- आहह हहह… सीइइइ उइई ! ताऊ जी ने अब दोनों हाथों से मेरी माँ की कमर पकड़ी और लगे लंड को अन्दर बाहर करने ! पहले ताऊ जी लंड को धीरे से बाहर खींचते फिर एक ही झटके में पूरा अन्दर कर देते.
फिर ताऊ जी ने अपनी की स्पीड बढ़ाई और लगे ठाप पर ठाप मारने.
मेरी माँ चूतड़ उचका-उचका कर हर ठाप का स्वागत कर रही थी.
मेरी माँ रह रह कर हाय यय उईइ इइ सीइ मर गई रे ! जेठ जजजी मजा आ रहा है पेलो और जोर से पेलो मेरे राजा हाय ययय ! ताऊ जी भी मेरी माँ की चुदाई में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे.
ताऊ जी का काला मोटा लंड मेरी नंगी माँ की गुलाबी चूत की फांकों तक आता, आकर एक ही झटके में अंदर चला जाता.
अचानक मेरी माँ के मुँह से जोरदार सिसकारियाँ निकलने लगी, मेरी माँ ने अपने दोनों पैर ताऊ जी की कमर पर लपेट लिये और ताऊ जी से लिपट कर सीइ इइ सीइइइ हायय उईइ की मादक आवाजें करते हुए चुदने लगी.
मैंने देखा कि माँ की चुदाई के दौरान उनकी चूत से फचाफच की आवाज निकलने लगी.
ताऊ जी के काले काले और मोटे मोटे अण्डकोष के थैले पर टकरा रहे थे.
फिर थोड़ी देर में ही मेरी माँ शांत हो गई, कहने लगी- जेठ जी, थोड़ा आराम करने दो, मैं तो कई बार झड़ गई हूँ.
लेकिन ताऊ जी कहाँ माननें वाले थे, ताऊ जी ने एक बार मेरी माँ को छोड़ा और उसको तख्त पर ही सीधा करके खुद भी ऊपर ही आ गये.
मैंने देखा कि ताऊ जी का विशाल लंण्ड मेरी माँ की चूत का पानी पीकर तो ओर भी ज्यादा भंयकर लग रहा था.
दोनों इतनी सर्दी में भी पसीने से नहा रहे थे.
फिर ताऊ जी मेरी माँ के ऊपर सवार होकर पेलने लगे.
अब चूत एक छल्ले की तरह लंड पर कस रही थी.
ताऊ जी मेरी माँ की दोनों टाँगों को अपने हाथों में लेकर धक्के मारने लगे.
मेरी सुन्दर सी माँ मेरे ताऊ जी के से चुदते हुए आह… उमह….
आह….
आह… जैसी सिसकारियाँ लेने लगी.
ताऊ जी इसी तरह करीब आधा घंटे तक तक मेरी माँ को पेलते रहे और मेरी माँ भी किसी रंडी छिनाल की तरह ताऊ जी के लंड से चुदती रही.
अब वो झड़ने वाले थे की तभी तभी ताऊ जी ने चोदने की स्पीड तेज कर दी तो मेरी माँ चुदते हुए ताऊ जी से बोली जेठ जी वीर्य चूत के अंदर मत डालना प्लीज ! जेठ जी अंदर मत डालना !ताऊ जी 10-12 जोरदार झटके मारकर मेरी माँ से लिपट गये मेरी मम्मी ने तो पहले ही उन्हें अपनी बाँहों में. जकड रखा था यह इस बात को दर्शा रहा था की मेरी माँ तो बहुत पहले ही झड चुकी थी वो तो बस मेरे ताऊ की को संतुष्ट करने के लिये चुदवाये जा रही थी.
चुदाई ख़त्म होते ही मेरे ताऊ जी का माल मेरी माँ की चूत के अंदर निकल गया फिर मेरी माँ बोली “हाय जेठ जी आपने यह क्या कर दिया? मैंने मना किया था ना वीर्य चूत के अन्दर डालने के लिये.
” सेक्स ख़त्म करने के बाद दोनों बुरी तरह हांफ रहे थे जिसमें मेरी माँ की तो हालात ही खराब हो रही थी.
करीब 5 मिनट बाद ताऊ जी मेरी माँ के ऊपर से उतरे तो मैंने देखा कि अब उनका के जैसा विशाल लंड थोड़ा नरम हो गया था.
ताऊ जी ने जैसे ही मेरी नंगी लेती हुई माँ की चूत से लंड बाहर निकाला तो पूरा का पूरा लंड काम रस से लथपथ हो रहा था.
मेरी माँ की चूत मेरी तरफ होने से मैं स्पष्ट देख रहा था कि जो छेद थोड़ी देर पहले काफी छोटा दिख रहा था, वही अब काफी चौड़ा हो गया था.
मेरी माँ की में से सफेद रंग का रिस रहा था जो काफी गाढ़ा था.
ताऊ जी बिना कपड़े पहने नंगे ही मेरी माँ के बगल में निढाल होकर लेट गये.
मेरी माँ की चूत चोदने के बाद ताऊ जी सांड की तरह हाँफ रहे थे.
मेरी माँ ताऊ जी से चुदवाने के बाद बोली की जेठ जी, तुमने ये क्या किया? अपना पानी मेरी चूत के अंदर क्यों डाला? अगर मेरे बच्चा ठहर गया तो? ताऊ जी- बहु, क्या करता मुझसे तो रुका ही नहीं गया.
तुम्हारी चूत ही इतनी मजेदार है.
मेरी माँ मेरे ताऊ से थोडा घुस्सा करते हुए बोली देखो जेठ जी तुम्ही ने तो मेरे मना करने के बाद भी सुरेश को पैदा कर दिया और अब दूसरा भी शायद तुम ही करोगे.
तुम्हें पता है ना मेरा कल ही पीरीयड खत्म हुआ है.
ताऊ जी मुस्कुराते हुए मेरी माँ से बोले बहु, तुमने भी क्या गजब चूत पाई है तुम्हारी चूत की वजह से ही तो मैंने आज तक शादी नहीं करी.
फिर वो बहुत ही प्यार से मेरी माँ को गली देते हुए बोले साली मेरी छिनाल जी तो चाहता है कि अपना लंड तेरी इस गुलाबी चूत में फंसा कर पूरी जिन्दगी पडा रहूँ.
फिर मेरी माँ बोली मेरे राजा, तुम्हारा भी तो कोई मामूली लंड नहीं है.
पता है ना जब तुमने पहली बार मुझे सरसों के खेत में चोदा था तो आप से चुदवाते चुदवाते मेरी क्या हालत हो गयी थी और आप थे की मुझे छोड़ने का नाम ही नहीं ले रहे थी? ऐसे ही बातें करते-करते ताऊ जी का लंड फिर से तन कर खम्बा बन गया और फिर ताऊ जी मेरी माँ को उलटी लेटाकर उनके ऊपर. सवार हो गये और मेरी मारने लगे.
इसी तरह उस रात को ताऊ जी ने अपने तगड़े लंड से मेरी माँ की चूत को 4 बार चोदा था और दो बार गांड मरी थी.
मैंने जब बचपन में माँ को ताऊ जी के लंड से चुदते देखा था उस वक्त मुझे पहली बार सेक्स के बारे में पता चला था.
उस दिन हुई थी.
ताऊ जी के लंड से चुदते चुदते और चूत का कचूमर निकल गया था.
फिर दोनों ने अपने कपड़े पहने और अपने अपने कम पर लग गए.
दोस्तों आज मुझे बहुत बड़ा राज भी पता चल गया था की जिसे में अपना बाप समझ रहा था वो तो असल में मेरा चाचा है और जिसे में ताऊ जी समझ रहा था वो मेरा असल का बाप है.
तो दोस्तों दोस्तों मेरी जवान माँ और 45 साल के ताऊ जी के बिच की मेरी हिंदी सेक्स कहानी “ बचपन में माँ को ताऊ जी के लंड से चुदते देखा Hindi Sex Story ” यदि आप सभी को पसंद आई हो तो इस सेक्स स्टोरी को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करना/.
स्रोत:इंटरनेट