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बस स्टॉप पर एक भाभी से दोस्ती और प्यार 2

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बस स्टॉप पर एक भाभी से दोस्ती और प्यार 2 1

. तो उसने बताया कि वो छह दिन के लिए ऑफिस ट्रिप से दिल्ली गए हुए हैं.
मैंने भी मौका देखते ही चौका लगाया कि चाय ही पिलाओगी ना.
उसने हंसते हुए कहा- क्यों डर लग रहा है क्या! अब हम बात करते उसके घर पहुंच गए.
जाते ही उसने मुझे हॉल मैं बैठने को कहा और वो खुद चाय बनाने किचन में चली गयी.
मैं उसके घर को देख रहा था.
पूरा घर एकदम साफ़ और व्यवस्थित था.
मैंने कहा- घर तो बहुत साफ़ रखती हो.
तो उसने बताया कि पति नहीं थे कल दोपहर से, तो कोई काम नहीं था, तो घर की सब साफ़ सफाई की थी, इसलिए साफ़ लग रहा है.
मैंने चुटकी लेते हुए कहा- ओके तो वो होते हैं, तो इतना बिजी रखते हैं कि टाइम नहीं मिलता होगा.
या उनको ज्यादा मिस न कर सको, इसलिए सफाई में मन लगा लिया.
वो हा हा हा करके हंस पड़ी.
फिर चाय के दो कप और कुछ नाश्ता लेकर मेरे पास आकर सोफे पर ही बैठ गयी.
वो बोली- अरे कहां बिजी रखते हैं.
अब तो बात किए, साथ बैठे महीनों हो जाते हैं.
वो हमेशा ऑफिस में बिजी रहते हैं या घर आकर अपनी मां और बहन से बातों में लग जाते हैं.
हमसे तो बस काम की बात करते हैं.
मैं अनायास ही पूछ बैठा- और सेक्स? वो चुप हो गयी.
मैंने सॉरी कहा तो उसने कहा- कुछ नहीं … कभी जब उनका मन हो तब! तो मैंने पूछा कि और तुम्हारा मन हुआ तो? वो हंस दी और बोली- अभी तो सेक्स पूछने पर सॉरी कहा था … और वापस.
तुम कोई मौका नहीं छोड़ते ना … अब चाय पियो.
अब हम अच्छे दोस्त हो गए थे तो कुछ भी बोल देने में मैं या वो हिचकिचाते नहीं थे.
उसने बताया कि सब अच्छा है.
कभी कभी झगड़ा हो जाता है, तो कभी कभी ज्यादा प्यार … बस ऐसे ही चल रहा है.
पर जब वो गुस्से में ज्यादा बुरा भला कहते हैं, बस तब मन भर आता है.
मैं उन्हें कभी कुछ नहीं कहती, पर वो … ये बोल कर वो थोड़ा सहम सी गयी.
उसकी आंखें नम होने को ही थीं कि मैंने कहा- देखो प्लीज रोना नहीं, तुम रो कर गले लगोगी … और फिर मुझसे कण्ट्रोल नहीं होगा.
उसने मुझे प्यार से कंधे पर मारा और बोली- बस मौका मिला नहीं कि फ़्लर्ट चालू ना.
मैंने कहा- अरे फ़्लर्ट क्या … इतनी सुन्दर लड़की अगर इतना करीब आकर गले से लगा ले, तो क्या मन नहीं बहकेगा! उसने कहा- कुछ भी न … एक तो मैं सुन्दर नहीं, दूसरा ऐसे कोई थोड़ा पास आयी कि बहक जाओ … पागल कहीं के.
जाओ तुम्हारी बीवी वेट कर रही होगी.
मैंने उससे बताया कि मेरी वाइफ आज सुबह ही कुछ काम से मुंबई गयी है.
तो आज फ्री हूँ.
कहो तो खाना खाकर ही जाऊं.
उसने कहा- जाओ आज तुम्हारा मूड न डर्टी डर्टी चल रहा है, हम कल मिलेंगे.
हां ऑफिस जाने से पहले कॉल कर लेना.
मैं घर आ गया.
फिर जब ऑफिस के लिए तैयार होकर निकल ही रहा था कि मुझे उसकी ‘ऑफिस जाने से पहले मुझसे मिल कर जाना या बिल्डिंग के नीचे आकर कॉल करना …’ वाली बात याद आ गई.
मैंने उसे कॉल किया.
वो एक ही मिनट में हाथ में एक डिब्बा लिए मेरे सामने थी.
वो डिब्बा मुझे देते हुए बोली- ये लो … उस दिन वाला थैंक्स.
अब तो नहीं कहोगे न कि खाना खिलाओगी, तो ही थैंक्स कहूँगा.
ये कह कर वो हंसती हुई वापस चली गयी.
मैं उसे देखने लगा.
उसका वो अन्दर जाकर वापस बाहर आकर बाय करना मुझे आह वाला फील दे रहा था.
आज लंच के टाइम से पहले मुझे अजीब सी कुछ उत्तेजना थी.
मुझसे तो जैसे रहा ही नहीं जा रहा था.
मैंने 12.
30 पर ही लंच करना शुरू कर दिया.
सच में परांठे आलू की सब्जी रायता सलाद और साथ में गाजर का हलवा, सब मेरे सामने था.
ये हमारे इतने दिनों की बातों में मैंने उसे अपनी पसंद के बारे में जो जो बताया था कि मुझे ये खाना पसंद हैं, उसने वो सब रखा था.
नीचे एक पेज पर लिखा था- थैंक्स एक अच्छा दोस्त देने के लिए.
मैंने कभी किसी को ऐसे पहले खाना नहीं दिया, न ही चाय पर बुलाया … न ही डेट की.
तुम्हारे साथ सब अच्छा लगा.
एक बार वापस थैंक्स.
मैं वैसे तो बहुत अच्छा खाना नहीं बनाती हूँ, पर कैसा लगा, जरूर बताना.
हमेशा की तरह झूठी तारीफ़ नहीं करना.
खाना सच में लाजवाब बना था, मैंने फ़ौरन फ़ोन निकाला और खाली बर्तन की फोटो ली और लिखा कि खाना सच में बहुत स्वादिष्ट था.
मैंने ‘था …’ पर ज़ोर देते हुए वो फोटो टैग किया.
मैं तो मैं हूँ न … मौका कभी नहीं छोड़ता, तो ये कैसे छोड़ देता.
उसने ‘झूठ न बोलो …’ कह कर भेजा.
मैंने कहा कि इतना अच्छा लगा कि बनाने वाली के हाथ नहीं, बनाने वाले को ही चूम लूँ … ऐसा मन कर रहा है.
सच में खाना इतना अच्छा बना था.
उसने जवाब में कहा- जाओ ना … एक तो झूठी तारीफ ऊपर से चूम लूँ … कुछ भी ना … सुबह आए, चूमना तो दूर हाथ भी नहीं लगा पाए.
पूछ कर आए डरपोक कि बस चाय ही पीनी है.
उसने किस वाला इमोजी भेज दिया.
मैंने कहा- देख लो, अगली बार कहीं और कोई डरपोक ना बन जाए.
फिर हम दोनों पूरा दिन इसी तरह एक दूसरे को छेड़ते रहे.
शाम को मैंने उसके डिब्बे में एक थैंक्स का नोट, एक चॉकलेट रखी और डिब्बा देने के बहाने उसे कॉल करके नीचे बुलाया कि अपना डिब्बा ले लो.
उसने कहा- मैं नहीं आ पाऊंगी, बच्चों को सुला रही हूँ … तुम नीचे वॉचमैन को दे दो, वो दे जाएगा.
मैंने वॉचमैन को डिब्बा दिया और घर आ गया.
नहा धोकर बैठा ही था कि उसका मैसेज आया कि ये चॉकलेट क्यों रखा … पहले ही इतना मोटी हूँ और वजन बढ़ जाएगा.
मैंने कहा- एक चॉकलेट से कोई वजन नहीं बढ़ता और दूसरी बात ये कि तुम अपनी तारीफ सुनना चाहती हो ना … मोटी, अरे एकदम सेक्सी लगती हो.
ऊपर से नीचे तक एकदम माल.
उसने कहा- तुम पूरे चालू हो और ये क्या माल … मैं कोई गन्दी लड़की हूँ, जो मुझे माल बुला रहे हो.
मैंने कहा- अरे ऐसा नहीं, सुन्दर हो तो लड़के लोगों को अक्सर जब कोई बहुत सुन्दर लड़की दिखती है, तो वो उसे माल कहते हैं.
वो मेरी इस बात पर हंस पड़ी.
इससे पहले मैं कुछ लिखता, उसका कॉल आ गया.
उसकी मीठी आवाज़ सुनकर सच में मैं एकदम से गर्मा जाता हूँ.
उसकी आवाज से ही लंड खड़ा हो जाता है.
सोचो जब वो सामने होती होगी, तो मेरा क्या हाल होता होगा.
उसने पूछा- खाना खाया? मैंने कहा- अभी तो आया हूँ यार, अभी कहां से … अब बनाऊंगा तब ना खाऊंगा.
अभी तो नहा कर आया और तुम्हारा कॉल आ गया.
उसने कहा- अब क्या बनाओगे, एक काम करो … तुम आ जाओ मैं टिफ़िन पैक कर देती हूँ.
मैंने कहा- नहीं, तुम परेशान मत हो, बच्चे भी हैं, वो क्या सोचेंगे.
उन्होंने पापा को बोला कि अंकल इतनी रात को आए थे, तो अच्छा नहीं लगेगा.
वो हंसी और बोली- फट्टू … बच्चे अगर जाग रहे होते, तो ये भी बोलते कि पापा मम्मी किसी से रात में बात कर रही थीं.
वो हंसने लगी.
मैं बस जैसे उसकी हंसी में खो गया.
मैंने कहा- एक बात कहूँ स्वीटी, तुम्हारी हंसी बड़ी लाजवाब है.
मुझे तो तुम्हारी हंसी से प्यार हो गया है.
उसने कहा- अब मक्खन नहीं लगाओ.
जल्दी से आ जाओ, मैं खाना पैक करती हूँ … और हां, बेल मत बजाना.
मैंने दरवाजा खोल कर रखा है, सीधा अन्दर आ जाना.
टिफिन लेना और चले जाना.
मैंने कहा- बेल क्यों नहीं? वो बोली- बस बातें बनानी आती हैं कुछ दिमाग नहीं चलता.
मैंने बताया न कि बच्चे सो गए हैं, बेल की आवाज़ से जग जाएंगे.
मैंने कहा- ओके मैं आता हूँ.
मैं दस मिनट में उसके घर पर था.
अब उसके घर पहुंचने पर क्या हुआ … वो सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूंगा.
आपके मेल का इन्तजार भी रहेगा.
[email protected] कहानी का अगला भाग: बस स्टॉप पर एक भाभी से दोस्ती और प्यार- 3.
स्रोत:इंटरनेट