. मैं बोला- बेटीचोद वेश्या, आया पसंद तुझे यह लंड? कुतिया, अब से यही तेरा मालिक है माँ की लौड़ी… अब से तू इसकी गुलामी करेगी हरामज़ादी… समझ गयी ना.
’ रेखा ने फंसी फंसी आवाज़ में कहा- बहुत सुन्दर है यह नाग… एकदम कोबरा जैसा… मैं तो हो गई इसकी गुलाम… मैं तो तुम्हारी गुलाम उस दिन ही हो गई थी जिस दिन तुम्हे पहली बार शादी में देखा था… लेकिन तुम इतनी गन्दी भाषा क्यों बोलते हो.
“सुन मादरचोद रंडी की औलाद… ये प्यार की भाषा है… सच बोल तुझे अच्छी लगी न मेरी गालियां? आज से मैं तुझे रेखा रानी कहा करूँगा… ठीक है न? और तू मुझे राजे कहा करेगी.
” “जब तुम्हारी गुलामी ही कर ली तो जो तुम कहो सब मंज़ूर है… राजे राजे राजे… अब वो पाठ भी तो पढ़वाओ जिसके लिए यहाँ लेकर आए थे.
” मैं हंसकर बोला- क्यों, बहुत बेसब्री हो रही चुदने की… रुक ज़रा सा पहले तुझे अपनी जीभ का करिश्मा तो दिखा दूँ.
जवाब में रेखा रानी ने सिर्फ मुंह से आह आह आह की.
मैंने रानी के कान के पीछे अपनी जीभ गीली करके फिराई तो रेखा रानी कसमसाई.
मैंने उसके कान की लौ को चूसा और फिर जीभ कान के अंदर घुमाई.
रेखारानी मस्ती में आकर ऊँ… ऊँ… .
ऊँ… करने लगी.
उसका बदन अब बार बार कंपकंपाने लगा था.
मैंने उसका मुखड़ा हाथों में लेकर उसके रसीले होंठ चूसे तो उसने भी आनन्दमग्न होकर चुम्मे में मेरा पूरा साथ दिया.
उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और उसके मुखरस का मज़ा लेते हुए मैं उसकी छोटी सी जीभ चूसने लगा फिर मैंने उसकी चूचियाँ निचोड़नी शुरू कीं.
पहले मैं हौले हौले निचोड़ रहा था.
रानी ने आहें भरनी शुरू कर दीं.
उसने अपनी टांगें मेरी टांगों से कस के लपेट दीं.
मैंने चूची अब थोड़ा ज़ोर से दबाईं.
रेखा को और मज़ा आया और वो सिसकारियां भरने लगी.
मैंने चूचियाँ निचोड़ते हुए रेखा रानी के पेट को चाटना आरंभ किया.
पेट पर जीभ गीली कर मैं दाएं से बायें चाटता, एक सिरे से दूसरे सिरे तक.
उस सिरे पर पहुंच कर फिर चाटता हुआ वापस आता.
इस चटाई ने तो रानी को बौरा दिया और वो अजीब अजीब सी आवाज़ें ऐसे निकाल रही थी जैसे उसका गला भिंच गया हो.
अब वो कामावेश से तीव्र रूप से ग्रस्त थी.
मैं अब चूचियों को पूरी ताक़त से दबा रहा था, साथ साथ रेखा रानी के पेट को चाटते हुए अब मैं उसकी उभरी हुई नाभि तक जा पहुंचा था.
नाभि को मुंह में लेकर मैंने चूसना शुरू कर दिया.
फिर क्या था मज़े से पागल होकर रानी ने टांगें छटपटानी शुरू कर दीं.
मैंने अपने दोनों अंगूठे रानी की चूचुक में पूरी ताक़त से गाड़ दिये.
वो मस्ता के बार बार राजे राजे राजे पुकारने लगी, बोली- अब कितनी देर और इंतज़ार करवाओगे तुम? नीचे सारा जूस निकल गया… आहहह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… राजे राजे राजे… कमीने… हाय हाय हाय… किस ज़ालिम से फंसी मैं… ओ… ओ… ओ… ओ… हो.
आप से तुम और तुम से तू पर आ गयी थी रेखा रानी और एक गाली भी दी थी, हा हा हा आ गई हरामज़ादी लाइन पर.
मैं बोला- चुप रह कुतिया… अब पड़ी रह और मज़ा भोग… फालतू बक बक की तो हरामज़ादी की मां चोद दूंगा.
अब उसकी चूत पर ध्यान देने के इरादे से मैंने उसकी पैंटी से नाक लगा कर गहरी सांस लेते हुए सूंघा.
चूत की विशेष सुगंध से मेरे नथुने भर गए.
आआह आआह आआह… दुनिया की सबसे नशीली सुगंध होती है चूत की सुगंध.
मैंने नाक और भीतर घुसाने के कोशिश की तो कुछ सख्त सख्त सा महसूस हुआ.
रेखा रानी ने सैनिटरी पैड लगाया हुआ था.
क्या रेखा रानी माहवारी में थी? लेकिन चूत से माहवारी वाली खास गंध तो नहीं आयी.
मैंने फिर से अच्छे से सूंघा.
नहीं, माहवारी वाली सुगंध नहीं थी.
फिर क्यों लगाया इस कुतिया ने पैड? इसका उत्तर तुरंत ही मिल गया.
जब मैंने पैंटी उतारी तो पाया कि वो पैड पूरी तरह से सना हुआ था.
यहाँ तक की पैंटी का भी कुछ भाग सना हुआ था.
समझ में आ गया कि चूत का रस है.
लेकिन बहुत गाढ़ा गाढ़ा.
इसके पहले मैंने सिर्फ नंदा रानी की चूत में गाढ़ा जूस देखा था.
नंदा रानी के बारे में जानने के लिए कहानी पढ़ें चंदा रानी की कुंवारी बहन की नथ लेकिन रेखा रानी का जूस कोई सामान्य जूस नहीं था, यह तो शहद जैसा गाढ़ा था.
यह कह लो कि मर्द के लौड़े के लावा जैसा.
इसी लिए रांड ने सेनेटरी पैड लगाया हुआ था वर्ना साली की पैंटी और सलवार में पिच्च पिच्च हो जाती.
मैंने मस्त होकर उछलते हुए कहा- रेखा रानी… यार तेरी चूत का जूस नहीं है, मलाई है… क्रीम है… रुक ज़रा चख के देखता हूँ.
मैंने पैड को ही अच्छे से चाटा.
मादक स्वाद से भेजा भन्ना गया, शरीर में चुदास की ज़ोरदार तरंगें अपना ज़ोर मारने लगीं.
चिकना चिकना, बहुत ही तेज़ नशे में टुन्न कर देने वाली मलाई थी.
मैंने पैंटी को भी सूंघ सूंघ के चाट डाला.
रानी की चूत और गांड की सुगंधों से नाक और मलाई के ज़ायके से मुंह के मज़े लग गए.
भयंकर उत्तेजना से अंडे भारीपन से भर गए.
“आह आह आह… रेखा रानी तू तो हरामज़ादी सच मच में मर्द मार क़ातिल है.
बहनचोद ऐसा जूस, जिसके सेवन से आदमी की रूह फड़क उठे! माँ की लौड़ी इसको रस कहना तो सरासर ग़लत होगा… ये तो मधु कहलाना चाहिए.
” इतना बोल कर मैंने रेखा रानी के झांट प्रदेश को चाटना आरम्भ किया.
झांटें पांच छह रोज़ पहले साफ की गई थीं.
बाल थोड़े थोड़े उगे हुए थे, किन्तु यह दिख रहा था कि बहुत गहरे काले रंग के झांटों के रोयें हैं.
इसके अलावा झांटों का प्रदेश भी काफी बड़ा था.
रानी के मुंह से बेसाख्ता सिसकारियाँ निकल रही थीं.
रानी बार बार मेरा नाम पुकारे जा रही थी.
अब मैंने रानी की चूत के होंठों पर ध्यान दिया.
चूत के होंठ काफी बड़े थे और गुलाबी गुलाबी थे.
देखते ही अब मुझ पे पागलपन छा गया.
मैंने होंठ चौड़े किये तो पूरी तरह मलाई से भरी गुलाबी चूत के जो दर्शन हुए तो यारों मेरा क्या हाल हुआ मैं बता नहीं सकता.
बुर से रस फफक फफक कर बहे जा रहा था.
चूत के होंठों के ऊपर उसके स्वर्ण रस का प्यारा छोटा सा छेद दिखा जो कि ढका हुआ था.
स्वर्ण रस के छेद की खाल को ज़रा सा ऊपर खींच कर छेद को नंगा कर दिया और अपनी जीभ अकड़ा के ज़ोर से छेद पर टुकुर करके मारी.
बस क्या था रेखा रानी तो जैसे बिदक गई.
इतनी ज़ोर से सीत्कारें भरीं कि मैं डर गया कि होटल वाले दूसरे यात्री शिकायत ना कर दें कि इस कमरे में बहुत चोदाई का शोर हो रहा है.
मैंने जीभ से बार ज़ोर ज़ोर से स्वर्ण रस के छेद पर प्रहार किये तो रानी दसियों बार झड़ी.
गिड़गड़ाने लगी- राजे, अब तो बख्श दे अब इतना तो मज़ा भी बर्दाश्त नहीं हो रहा.
मैंने गुर्रा कर कहा- अच्छा… तो बिल्कुल भी सबर नहीं हो रहा हराम की चुदक्कड़ पैदाइश… चल तू भी क्या याद करेगी अब ठोक ही देता हूँ तेरी मलाई वाली चूत को… भोसड़ी वाली रांड, अब हो जा तैयार इस लौड़े को झेलने! जीजा साली सेक्स की कहानी जारी रहेगी.
चूतनिवास [email protected]
स्रोत:इंटरनेट