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भाभी की प्यासी चूत और बच्चे की ख्वाहिश 6

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भाभी की प्यासी चूत और बच्चे की ख्वाहिश 6 1

. दोस्तो, मैं हर्षद एक बार फिर से अपने दोस्त की बीवी सरिता भाभी की चुदाई की कहानी में आपका स्वागत करता हूँ.
कहानी के पिछले भाग दोस्त की बीवी के साथ गंदा खेल में अब तक आपने पढ़ा था कि विलास के जाने के एक घंटा बाद सरिता ने मुझे जगाया और हम दोनों फिर से एक दूसरे के साथ मस्ती करने लगे.
अब आगे प्रेग्नेंट लेडी सेक्स कहानी: सरिता अपने दोनों हाथों से मेरी गांड सहलाती हुई मेरी गांड की दरार में अपनी उंगलियां फिराने लगी.
मेरे लंड का सुपारा सीधा सरिता की चूत के छेद पर रगड़ खा रहा था तो सरिता सीत्कारने लगी.
अब सरिता बहुत उतावली हो रही थी, मेरा लंड अपनी चूत में उतरवाने के लिए गर्म होने लगी थी.
दस मिनट के बाद मैं सरिता को बेड के पास लेकर आ गया.
बेड की तरफ उसका मुँह करके मैं उसकी गांड की दरार में लंड डाल कर अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियां सहलाने लगा.
मैं अपना सर सरिता की गर्दन पर रखकर चूमने लगा.
सरिता मदहोश होकर अपनी गांड से मेरे लंड को मसल रही थी और अपनी टांगें फैलाकर लंड का सुपारा चूत के मुँह पर रगड़वा रही थी, साथ ही वो मुँह से सिसकारियां ले रही थी.
अब मेरा लंड भी बहुत जोश में आने लगा था.
सरिता भी जल्दी से मेरा लंड अपनी चूत में लेना चाहती थी.
मैंने सरिता का एक पैर बेड पर रख दिया और एक हाथ से तना हुआ लंड का सुपारा सरिता की चूत में डाल दिया.
सरिता कसमसाने लगी.
अब मैं दोनों हाथों से उसकी चूचियां रगड़ने लगा तो सरिता जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी.
इससे मेरा जोश और बढ़ गया.
मैं पीछे से धक्के लगाकर लंड सरिता की चूत में उतार रहा था.
सरिता की कामवासना और बढ़ गयी थी और वो पूरी शिद्दत से लंड का मजा लेने लगी थी.
इधर मैं लगातार धक्के देकर सरिता की चूत में पूरा लंड बाहर अन्दर कर रहा था.
अब सरिता भी अपनी गांड हिलाकर मुझे साथ देने लगी थी.
ऐसे ही बीस मिनट चोदने के बाद सरिता जोर से सिसकारियां लेते हुए झड़ गयी.
उसका चूतरस मेरे लंड को नहलाकर बाहर बहने लगा.
चूत का रस हमारी जांघों को भिगोने लगा था.
गीली चूत में लंड अन्दर बाहर करने से पच पचा पच की आवाजें गूंज रही थीं.
सरिता के पूरी तरह से झड़ने के बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और सरिता का मुँह अपनी तरफ करके नीचे घुटने के बल बैठ गया, उसके पैर फैलाकर मैं उसकी चूत चाटने लगा.
इससे सरिता सिहर उठी, वो अपने हाथों से मेरा सर सहलाकर मेरा मुँह अपनी चूत पर दबा रही थी.
उसकी चूत का सारा रस मैंने पीकर चूत साफ कर दी.
अब मैं उसकी मांसल जांघों पर बहने वाले चूतरस को चाटने लगा.
मैंने सारा रस चाटकर साफ कर दिया और खड़ा हो गया.
अब सरिता अपने घुटने के बल बैठकर मेरा लंड का सुपारा अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
मेरे लंड को उसके मुँह का स्पर्श मिलते ही मेरे बदन में बिजली के करंट जैसी लहर दौड़ने लगी थी.
मैं अपने दोनों हाथों से उसका सर पकड़कर कर आगे पीछे करने लगा.
उत्तेजना में अपना आधा लंड सरिता के मुँह में डाल दिया तो सरिता कसमसाने लगी.
उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी.
‘उन्हहंह गंग गों …’ अगले ही पल वो अपने मुँह से मेरा लंड निकालकर एक तरफ खड़ी हो गयी.
सरिता जोर जोर से हांफ रही थी.
मेरा लंड मोटा होने के कारण और एकदम से गले तक पेल देने के कारण उससे सांस लेना मुश्किल हो रहा था.
मैंने सरिता का सर अपने कंधे पर रखकर, उसे सहला कर शांत करने लगा.
फिर उसे अपने दोनों हाथों से उठाकर चूमते हुए बेड पर लिटा दिया.
उसकी कमर के नीचे एक पुराना तौलिया बिछा दिया.
मैं बेड पर जाकर अपने घुटने के बल उसकी टांगों के बीच बैठ गया, फिर नीचे झुककर उसकी चूत में अपनी जीभ डालकर गोल गोल घुमाने लगा.
इससे सरिता सिहरने लगी, वो अपनी गांड उठाने लगी.
मैं उसको पूरी तरह से गर्म कर रहा था.
थोड़ी ही देर बाद सरिता सिसकारियां लेने लगी थी.
मैं सरिता की दोनों चूचियां सहलाने लगा और उसके होंठों को चूमने लगा.
नीचे मेरा लंड सरिता की चूत पर ठोकर मार रहा था तो सरिता मदहोश होने लगी थी.
वो अपने एक हाथ से मेरे निप्पल को सहलाने लगी और दूसरे हाथ से मेरा लंड पकड़कर चूत में लेने की कोशिश कर रही थी.
मुझे भी बहुत जोश आ रहा था.
जैसे ही मेरे लंड का सुपारा सरिता के छेद पर आया, तो मैंने एक जोरदार धक्का मारकर आधे से अधिक लंड सरिता की चूत में पेल दिया.
सरिता भले ही मेरे लंड से कई बार चुद चुकी थी, लेकिन अभी भी मेरा मोटा लंड उसकी चूत में घुसता था तो उसकी दर्द भरी आह निकल जाती थी.
‘आंह मर गई मां … एकदम से पेल दिया … आंह धीरे करो न.
’ एक दो झटकों के में वो सैट गई.
अब सरिता अपने दोनों हाथों से मेरी गांड को सहलाने लगी और नीचे से अपनी गांड हिला रही थी.
मैं आहिस्ता आहिस्ता अपना लंड पूरा अन्दर डालकर बाहर निकाल रहा था.
दस मिनट तक मैं सरिता को यूं ही चोदता रहा था.
सरिता की चूत अन्दर से पूरी तरह से गर्म हो गयी थी, पूरी चूत गीली होकर मेरे लंड को भी गीला कर रही थी.
अब मैंने अपने धक्के देने की गति बढ़ाई तो चूत और लंड के घर्षण से पच पचा पच फच फच की आवाजें गूंजने लगी थीं.
हम दोनों के मुँह से मादक सिसकारियां निकल रही थीं.
सरिता जोर जोर से अपनी गांड उठाकर मेरा लंड चूत में अन्दर तक ले रही थी.
हम दोनों ही जल्दी ही अपनी चरम सीमा पर पहुंचने वाले थे.
इतने में सरिता अपने दोनों हाथों से मेरी गांड को दबाकर मुझे रोकने लगी और लंड को अन्दर खींचने लगी.
वो अब झड़ने लगी थी.
उसने अपना गर्म चूतरस का लावा मेरे लंड पर छोड़ना शुरू कर दिया.
मुझसे भी रहा नहीं गया तो मैंने भी जोरदार तरीके से अपनी पूरी ताकत से आठ दस धक्के मारे और मैं भी झड़ गया.
मेरा लंड अपना वीर्य का फव्वारा सीधे सरिता के गर्भाशय के मुँह पर छोड़ रहा था.
सरिता मेरे गर्म वीर्य को अपनी चूत में महसूस कर रही थी.
हम दोनों के मुँह से गर्म सिसकारियां और मादक आवाजें निकल रही थीं.
सरिता ने मुझे अपनी ओर खींच लिया तो मैंने अपना सर उसके कंधे पर रख दिया और अपनी टांगें लंबी कर दीं.
उसने अपने दोनों पैरों से मेरी गांड को जकड़कर लंड का पूरा दबाव अपनी चूत में बनाए रखा.
सरिता ने अपने दोनों हाथों से मुझे जकड़ लिया था.
सरिता मेरे लंड का वीर्य लगातार अपनी चूत से निचोड़ रही थी.
इधर सरिता की कसी हुई चूचियां मेरे सीने पर चुभ रही थीं.
थोड़ी देर बाद सरिता सामान्य हो गयी, उसने अपनी पैरों की पकड़ ढीली कर दी और पैर लंबे करके मेरे पैर पर रखे.
मैंने सरिता के होंठों पर अपने होंठ रखकर उसे चूम लिया.
सरिता के चेहरे पर अजीब सी खुशी थी, वो बहुत संतुष्ट दिख रही थी.
मेरी पीठ कमर और गांड को सहलाती हुई सरिता बोली- हर्षद, आज मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूँ.
तुमने मुझे हर खुशी देकर संतुष्ट कर दिया है.
आई लव यू हर्षद.
मैंने सरिता को कहा- आई लव यू टू सरिता.
तुम्हें खुश रखना मेरा फर्ज है.
अब तुम मेरी पत्नी हो … मैं इधर से तुम्हारी बच्चे की ख्वाहिश पूरी करके ही जाऊंगा.
ना जाने फिर हमारी मुलाकात कब होगी.
सरिता मेरे होंठों को चूमती हुई बोली- ऐसा मत कहो हर्षद.
तुम हमेशा आते रहना.
तुम कितने भी दूर रहो हर्षद लेकिन शरीर और मन से हमेशा तुम्हारे पास ही रहूँगी.
सरिता मेरे होंठों को चूसने लगी तो मैंने कहा कि मेरे जाने के बाद जल्द ही खुशखबरी बताना.
मैं तुम्हारे फोन का इंतजार करूंगा.
खुद को कभी अकेली मत समझना.
मुझे फोन करते रहना सरिता.
मैं जिंदगी भर तुम्हें भूल नहीं सकता.
तुमने मुझे अपना सर्वस्व अर्पण किया है और ढेर सारी खुशियां दी हैं, जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.
सरिता की आंखों में आंसू आ रहे थे, तो मैंने उसे शांत किया.
वह बहुत भावुक हो गयी थी.
हम दोनों कितने समय एक दूसरे के बाहुपाश में पड़े रहे थे, पता ही नहीं चला.
फिर सरिता ने घड़ी देखी तो पौने बारह होने को थे.
सरिता बोली- उठो हर्षद, अब बहुत देर हो गयी … मुझे बहुत काम है.
मैं उठकर बाजू में लेट गया.
सरिता उठकर बैठ गयी तो हम दोनों का कामरस उसकी चूत से बह रहा था, नीचे तौलिया गीला हो रहा था.
सरिता ने अपनी चूत उसी तौलिया से साफ कर ली और मेरा गीला लंड भी साफ कर दिया.
वो मुझसे बोली- चलो हर्षद, बाथरूम जाकर अच्छे से साफ करते हैं.
हम दोनों बाथरूम में गए.
सरिता बोली- मेरी चूत के आजू बाजू और जांघों में बहुत दर्द हो रहा है.
कितने जोर से धक्के मारते हो तुम.
मैंने कहा- सरिता क्या करूं यार … मैं अपने आपको रोक ही नहीं पा रहा था और मुझे तुम्हें खुशियां भी देनी थीं ना सरिता.
तो वो हंसती हुई बोली- बहुत बदमाश हो तुम.
‘अच्छा मैं ही बदमाश हूँ और तुम? मैंने कहा, तो सरिता बोली- अब चुप करो.
अब मैंने गर्म पानी छोड़कर सरिता की चूत और जांघें साफ करने लगा.
फिर मैं गर्म पानी जग में लेकर सरिता की चूत सेंकने लगा तो सरिता को आराम महसूस होने लगा.
सरिता भी मेरा लंड और अच्छे से साफ करके सेंकने लगी.
पन्द्रह मिनट बाद हम दोनों बाहर आए और अपने अपने कपड़े पहनकर तैयार हो गए.
बारह बज चुके थे.
सरिता बोली- हर्षद, आज तुम जा रहे हो लेकिन मुझे बहुत सूनापन महसूस होगा.
जब मैं अकेली रहूँगी, तो तुम्हें फोन जरूर करूंगी.
मैंने कहा- ऐसा मत कहो सरिता … मैं हमेशा ही तुम्हारे पास रहूँगा.
हम दोनों की खुशियों से भरे ये दो दिन के साथ हमें हमेशा ताजगी देंगे.
सरिता बोली- हां वो तो ठीक है.
वो नीचे चली गयी और मैं बेड पर लेटकर आराम करने लगा.
मेरी आंख लग गयी.
विलास ने आकर मुझे जगाया तो दो बज चुके थे.
वह बोला- उठो हर्षद, फ्रेश हो जाओ.
सरिता ने हमें खाने पर बुलाया है.
हम दोनों फ्रेश होकर नीचे आ गए.
सरिता खाना लगा रही थी तो हम सब बैठ गए.
हम सबने बातें करते करते खाना खाया तो तीन बज चुके थे.
विलास बोला- चलो ऊपर चलते है तुम्हें चार बजे निकलना है ना.
मैंने कहा- हां चलो विलास.
मुझे बैग भी लगाना है.
हम दोनों ऊपर आ गए.
मैंने अपने रूम में जाकर सब कपड़े आदि सामान भरके बैग पैक कर लिया.
हम दोनों भी तैयार होकर बातें करने लगे और चार बजे नीचे आ गए.
मैंने विलास की मां और पिताजी को नमस्कार किया और सरिता को ‘बाय भाभीजी’ बोलकर बाहर निकला.
सरिता की आंखों में आंसू दिखने लगे थे.
इतने में विलास अपनी बाईक लेकर आया और मैं पीछे बैठकर सबको बाय करके आगे बढ़ गया.
हम दोनों निकल गए, बस स्टैंड गांव में ही था.
हम दस मिनट में पहुंच गए.
साढ़े चार बज चुके थे.
बस लगी हुई थी, मैं बस में बैठ गया.
थोड़ी ही देर में बस निकल पड़ी और विलास भी चला गया.
मेरा ढाई घण्टे का सफर था.
करीब शाम को सात बजे मैं अपने घर पहुंच गया.
मैंने विलास को फोन करके बता दिया.
अब दूसरे दिन से मेरा दिनक्रम चालू हो गया.
घर से ऑफिस और ऑफिस से घर.
बीच बीच में विलास का फोन आता था तो कभी मैं उसे फोन लगा करके बातें कर लेता था.
अब सरिता भी मुझे फोन करने लगी थी.
कभी जब वो अकेली होती तो वीडियो कॉल भी करती थी.
अब हम सेक्सी बातें भी करने लगे थे.
सरिता बहुत खुश होती थी.
कभी कभी हम दोनों नंगे होकर सेक्स चैट करते थे.
सरिता मेरे लंड को चूमती और मैं उसकी चूत को चूमता था.
ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहा और हम दोनों एक दूसरे की खुशियां आपस में बाँट लेते थे.
समय बीत रहा था.
ऐसे ही एक महीने के बाद सरिता का फोन आया, वो बहुत खुश थी- हर्षद, आज में बहुत खुश हूँ.
तुम्हें कैसे बताऊं मेरे राजा! मैंने उससे कहा- अरे सरिता, अब बता भी दो ना.
क्या बात है? “हर्षद मैं मां बनने वाली हूँ और ये सब तुम्हारी मेहरबानी है हर्षद.
तुमने मेरी ख्वाहिश पूरी कर दी.
तुम्हारा ये अहसान मैं!” उसके इतना बोलते ही मैंने सरिता की बात काटकर कहा- ऐसा मत कहना … मेरी जान ये हमारे प्यार की अमानत है.
इसे सम्भाल कर रखना.
अभी से उसकी देखभाल अच्छी तरह से करना.
आज तुमने बहुत खुशी की बात बतायी है.
अगर मैं तुम्हारे पास होता, तो ना जाने क्या क्या करता.
सरिता बोली- हां हर्षद, अगर तुम मेरे पास होते तो, ना जाने क्या करते … ये सोचकर ही मैं पागल हो रही हूँ हर्षद.
मैं उसे फोन पर ही चूमने लगा.
“अच्छा हर्षद मैं फिर आराम से फोन करूंगी.
अभी मैं अस्पताल में आई हूँ.
चैक करवाने आयी थी.
सबसे पहले तुम्हें खुशखबरी सुनाना चाहिए, इसलिए फोन किया.
” मैंने कहा- शुक्रिया और अपना ख्याल रखना.
उसने फोन रख दिया.
सरिता की खुशी देखकर मैं भी बहुत खुश था.
उसी दिन शाम को विलास का फोन आया और उसने कहा- हर्षद, तुम चाचा बनने वाले हो.
मैंने अनजान होकर बोला- क्या बात कर रहा है विलास … क्या सच में? तो विलास बोला- हां यार हर्षद, तेरी भाभी मां बनने वाली है.
आज ही पता चला.
मैंने कहा- यार, ये तो बहुत खुशी की बात है विलास.
अब तो तुम्हें पार्टी देना ही पड़ेगी.
विलास बोला- यार तुम कभी भी आ जाओ.
मस्त पार्टी करेंगे.
तुम जो चाहो, दे दूंगा.
वह बहुत खुश था.
थोड़ी देर बातें करके विलास ने फोन बंद कर दिया.
ऐसे ही एक दिन दोपहर को सरिता का फोन आया.
तब मैं अपने ऑफिस में था.
फोन उठाया तो सरिता बोली- हर्षद, तुम्हारी बहुत याद आ रही है.
तुम एक दिन के लिए आओ ना! मैंने कहा- वीडियो कॉल करो ना … हम आमने सामने बातें करेंगे.
सरिता नाराज होकर बोली- तुम नहीं समझोगे.
मैं बोला- तुम बताओगी तो समझूँगा ना! “हर्षद, साढ़े तीन महीने हो गए हैं.
अब मैं नहीं सहन कर पाती.
मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है.
मैं एक बार तुम्हारा लंड अपनी चूत में लेना चाहती हुँ.
बहुत मन कर रहा है.
” मैंने कहा- इतनी सी बात सरिता, मैं अगले हफ्ते ही आऊंगा.
सरिता ने खुश होकर ‘आई लव यू हर्षद …’ कहकर फोन रख दिया.
इस तरह अगले हफ्ते ही शनिवार को ऑफिस से हाफ डे निकाल कर शाम को विलास के घर पहुंच गया.
मुझे देख कर सब खुश थे.
उस दिन रात भर सरिता को उसके गर्भ का ख्याल रखते हुए चोदकर संतुष्ट किया और दूसरे दिन शाम को अपने घर वापस आ गया.
मैं भी बहुत खुश था.
ऐसे ही महीने बीतते गए और एक दिन विलास का सुबह फोन आया कि सरिता को लड़का हुआ है और दोनों ही ठीक हैं.
विलास और उसका परिवार बहुत खुश थे.
आखिर खुश क्यों नहीं होंगे, उनके खानदान को वारिस जो मिला था.
मेरी और सरिता की खुशी तो अलग ही थी जो शब्दों में नहीं बताई जा सकती ये प्रेग्नेंट लेडी सेक्स कहानी आपको कैसी लगी दोस्तो … मेल से जरूर बताना.
धन्यवाद दोस्तो.
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स्रोत:इंटरनेट