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भाभी ने मेरी ख्वाहिश पूरी की

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भाभी ने मेरी ख्वाहिश पूरी की 1

. भाभी ने फिर से कहा- जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डाल दो, नहीं तो मैं मर ही जाऊंगी आज! मैंने भाभी से कहा – भाभी, मेरे पास कॉन्डॉम नहीं है.
भाभी बोली- कोई बात नहीं, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, बस तुम अपना लंड मेरी चूत में डाल दो.
अब तक मैं भाभी की पैंटी को उतार चुका था.
मैंने भाभी की चूत को देखा और पल भर की देर किए बिना ही भाभी की चूत पर अपने होंठ रख दिए.
भाभी ने मेरे सिर के बालों को पकड़ा और अपनी चूत में मेरे होंठों को रगड़वाने लगी.
वह इतनी ज़ोर से दबा रही थी कि मैं सही तरीके सांस भी नहीं ले पा रहा था.
भाभी ने कहा- जीतू, मैं झड़ने वाली हूँ.
इतना कहकर भाभी झड़ ही गई और मेरे होंठ उसकी चूत के रस से भीग कर बिल्कुल गीले हो गए.
मेरा सारा मुंह भाभी की चूत के रस से सराबोर हो गया था.
मैंने देखा कि भाभी हांफ रही थी.
उसके बाद भाभी ने मुझे अपने ऊपर खींचा और मेरे लंड को हाथ में पकड़ लिया; लंड को हाथ में लेकर भाभी ने मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया.
भाभी ने मुझे होठों पर किस करना शुरू कर दिया और साथ में मेरे लंड को भी सहलाती जा रही थी.
उसके बाद भाभी नीचे की तरफ आई और उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और मेरे मुंह से कामुक आवाज़ निकल गई- आह्ह्ह … मैंने कहा- शारदा भाभी बहुत मज़ा आ रहा है … ओह्ह्ह् … आज से आप मेरी भाभी नहीं बल्कि मेरी वाइफ हो.
इतना कहते ही मेरा कंट्रोल खत्म हो गया मेरे लंड से माल की पिचकारी छूट गई.
थोड़ा सा वीर्य भाभी की मांग में भी जा लगा.
भाभी बोली- तुमने तो मेरी मांग भर दी.
उसी वक्त भाभी के फोन पर मेरे भाई का वीडियो कॉल आना शुरू हो गया.
भाभी अपना चेहरा साफ करते हुए नंगी ही अपने कमरे की तरफ भागी.
कुछ देर बाद भाभी मेरे रूम में वापस आई.
मैं भाभी की पेंटी को अपने लंड पर डालकर व उनकी ब्रा को अपने मुंह पर डाले हुए लेटा था.
मेरे रूम में आने के बाद भाभी से फिर बात होने लगी.
मैंने पूछा- भाई से क्या कहा आपने? भाभी बोली- मैंने कह दिया कि मैं उनको याद करके अपनी चूत में उंगली कर रही थी.
उसके बाद भाभी मेरे पास बेड पर वापस आ गई और मेरे लंड और मेरे मुंह से अपनी ब्रा और पेंटी हटाकर कहने लगी कि अब इसकी क्या ज़रूरत है मेरे राजा … जब मैं खुद तुम्हारे पास हूँ तो … भाभी ने अपने अंडरगार्मेंट्स उठाकर एक तरफ फेंक दिए और मेरे होठों पर किस करने लगी.
फिर भाभी मेरे पेट पर बैठ गई और अपनी चूत को मेरे लंड पर रगड़ने लगी.
साथ ही वह मेरे होंठों को भी चूस रही थी.
मुझे कमाल का मज़ा आ रहा था.
भाभी की चूत ने फिर से गीला पदार्थ छोड़ना शुरू कर दिया था और मेरा लंड काफी चिपचिपा हो चुका था.
अब मैंने भाभी की चूचियों को चूसना शुरू कर दिया था.
उसके बाद मैंने धीरे से भाभी की चूत में लंड को डाल दिया और भाभी ने मेरे कंधे को नोच लिया.
उनके नाखून की खरोंच से मेरे कंधे पर खून निकल आय़ा था.
वह बहुत ही ज्यादा गर्म हो चुकी थी.
वह निशान आज तक मेरे कंधे से गया नहीं है.
उसके बाद मैंने ज़ोर से भाभी की चूत में एक धक्का मारा तो भाभी ने मेरा कंधा छोड़ दिया.
भाभी अब मेरे निप्पल्स को अपनी जीभ से चाटने लगी.
उनकी इस हरकत से मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ने लगा.
भाभी को भी पूरा मज़ा आ रहा था और मुझे भी.
उसके बाद हमने पॉजीशन बदल ली और हम डॉगी स्टाइल में चुदाई करने लगे.
उसके बाद मैंने लंड को बाहर निकाल लिया और भाभी की टांगों को थोड़ी चौड़ी करते हुए उनकी चूत को चाटने लगा.
भाभी फिर से पागल होने लगी.
जैसे-जैसे मैं भाभी की चूत पर जीभ चला रहा था वैसे-वैसे भाभी का सेक्स के लिए पागलपन बढ़ता ही जा रहा था.
भाभी बोली- बस करो जीतू … मार ही डालोगे तुम तो आज मुझे … आज तक तुम्हारे भाई ने भी मुझे इतना मज़ा नहीं दिया.
उसके बाद मैंने भाभी की चूत में अपना लंड फिर से डाल दिया.
मैं भाभी की चुदाई करने लगा.
उसके बाद मैंने लंड को निकाला और भाभी की गांड में डाल दिया.
भाभी उचक गई.
लेकिन मैंने उनको पकड़े रखा.
जब भाभी थोड़ी सहज हो गई तो मैंने भाभी की गांड चुदाई करना शुरू कर दिया.
कुछ देर के बाद मैंने भाभी की गांड में ही अपना माल छोड़ दिया.
भाभी ने कहा- तुमने अपना माल मेरी चूत में क्यों नहीं छोड़ा.
मैंने कहा- अभी हमारी शादी नहीं हुई है भाभी … शादी होनी तो अभी बाकी है.
उसके कुछ देर बाद हम फ्रेश हुए और भाभी ने चाय-नाश्ता बना दिया.
फिर शाम को हम बाहर घूमने निकल गए.
मेरे दिमाग में भाभी के लिए एक और सरप्राइज़ था.
मैं भाभी को एक मंदिर में ले गया और वहां जाकर मैंने भाभी की मांग में सिंदूर लगा दिया.
भाभी ने मंदिर में मुझसे कुछ नहीं कहा लेकिन वह खामोश हो गई थी.
कार में बैठने के बाद मैंने भाभी से पूछा कि कहीं वह मुझसे नाराज़ तो नहीं हो गई है.
भाभी ने कहा कि वह नाराज़ नहीं है लेकिन उसको घर जाना है.
उसके बाद मैं भाभी को घर पर छोड़कर अपने दोस्तों के साथ कहीं चला गया.
शाम को जब वापस आया तो रात हो ही चुकी थी.
मैंने घर में घुसकर देखा कि सारी लाइट्स बंद हैं.
भाभी के रूम में जाकर देखा तो उनका कमरा भी लॉक था.
मैंने घबरा कर उनके फोन पर फोन किया तो उसने मेरा फोन नहीं उठाया.
जब मैं अपने रूम में जाने लगा तो दरवाज़ा खोलते ही हैरान रह गया.
मेरे कमरे को दूल्हे के कमरे की तरह सजा दिया गया था.
पूरा कमरा मोमबत्तियों की रौशनी में जगमग हो रहा था.
बेड पर गुलाब की पत्तियां सजी हुई थीं.
भाभी एक नई नवेली दुल्हन की तरह बेड पर बैठी हुई थी.
मैंने भाभी से पूछा- यह सब क्या है? भाभी ने मेरे मुंह पर हाथ रखा और कहा- आज हमने मंदिर में शादी की है और अब सुहागरात है.
अब तुम मुझे भाभी नहीं बुलाओगे … तुम्हारे लिए एक और सरप्राइज है मेरे पास! मैंने पूछा- क्या … शारदा बोली- मैं अभी तक आधी कुंवारी ही हूँ.
मैंने कहा- तो क्या आपके पहले पति ने आपकी आधी सील ही तोड़ी थी? वह बोली- हां, बाकी की आधी भी वह तोड़ना चाहते थे लेकिन मैंने मना कर दिया था.
मैंने शारदा से कहा- तो फिर मैं आज अपनी इस सुहागरात को इतनी यादगार बना दूंगा कि आप इसे कभी नहीं भूल पाओगी.
इतना कहकर मैंने शारदा को फिर से किस करना शुरू कर दिया.
हम दोनों किस करने लगे.
धीरे-धीरे हम दोनों ही अपने कपड़े उतारकर नंगे होते जा रहे थे.
उसके बाद वह बेड पर लेट गयी.
मैं उसकी चूची को चाटने लगा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ जा रहा था तो शारदा ने अपने हाथ से चूत को ढक लिया और कहने लगी कि पहले मेरी वर्जीनिटी खत्म करो.
उसके बाद मैंने अपने लंड को तैयार कर लिया और उसकी गांड पर लंड को लगाकर अंदर धकेलने की कोशिश करने लगा.
लेकिन उसकी गांड काफी टाइट थी तो इतनी आसानी से अबकी बार लंड नहीं जा पा रहा था.
फिर उसने मुझे वैसलीन की शीशी दे दी.
मैंने थोड़ी सी वैसलीन अपने लंड पर लगाई और थोड़ी उसकी गांड पर.
उसके बाद मैंने लंड को अंदर धकेला तो लंड केवल एक इंच ही अंदर जा पाया.
उसको बहुत ज़ोर से दर्द होने लगा था; मुझे लंड वापस बाहर निकालना पड़ा.
अबकी बार मैंने थोड़ी सी क्रीम अपनी उंगली पर लगाई और उसकी गांड में उंगली डालकर अंदर-बाहर करने लगा.
उसके बाद मैंने धीरे से लंड को फिर उसकी गांड पर सेट किया और एक ज़ोर का धक्का दिया तो अबकी बार आधा लंड उसकी गांड में घुसा दिया.
मैंने शारदा को कमर पर किस करना शुरू कर दिया ताकि उसका दर्द कम हो जाए.
उसके बाद जब वह सामान्य हो गई तो मैंने उसकी गांड को चोदना शुरू कर दिया.
धीरे-धीरे करके वह मेरा पूरा लंड अपनी गांड में लेने लगी.
अब मैंने साथ ही उसकी चूत में भी उंगली करना शुरू कर दिया.
दोनों को सेक्स का नशा चढ़ने लगा था.
उसके बाद मैंने अपनी स्पीड को तेज़ कर दिया और लगभग 30 मिनट तक उसकी गांड की चुदाई करने के बाद मेरा माल शारदा की गांड में ही निकल गया.
जब मैंने लंड को उसकी गांड से बाहर निकाला तो माल के साथ-साथ थोड़ा खून भी लगा हुआ था मेरे लंड पर.
उस पदार्थ के कारण बेड की चादर भी खराब हो गयी थी.
शारदा ने कहा- आज से आप ही मेरी गांड के मालिक हो और मेरी चूत के दूसरे हक़दार भी.
उसके बाद हम दोनों बाथरूम में जाकर फ्रेश हुए और नंगे ही एक-दूसरे के साथ चिपक कर सो गए.
मैं उसकी चूत में रात भर अपना लंड डालकर सोता रहा.
अगली सुबह हम काफी देर से जगे और उठकर दोनों ने एक दूसरे को गुड मॉर्निंग विश किया.
उसके बाद हम अक्सर घर में नंगे ही रहते थे.
भाई जब तक एक महीने की छुट्टी से वापस आए तो भाभी प्रेग्नेंट हो गई थी.
भाभी को यह भी पता था कि वह बच्चा मेरे भाई का ही है.
भाभी ने यह बात मुझे बताई और कहने लगी कि उनको मेरा ही बच्चा चाहिए.
उसके बाद शारदा भाभी ने अबॉर्शन करवा लिया.
फिर जब शारदा दोबारा मेरे लंड से चुदकर प्रेग्नेंट हुई तो उसने मेरे बच्चे को पैदा किया और अब मेरे बच्चे को भाई का नाम दे दिया है.
हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं लेकिन हमारे रिश्ते को हम किसी के सामने बता नहीं सकते हैं इसलिए मैंने यह कहानी यहाँ पर पोस्ट की है.
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स्रोत:इंटरनेट