. तभी अजय उठा और रसोई में से तीन मग बियर डाल कर ले आया- लो पम्मी जान, तुम्हारे आने की ही खुशी में मंगंवा रखी थी.
उसने मेरी चुनरी उतार फेंकी, जिस वजह से मेरे पहाड़ जैसे चूचे और उनके बीच का चीर … और चीर के बीच मेरा लॉकेट खेल रहा था.
‘लो मेरी जान … चियर्स!’ सभी ने ग्लास होंठों पर टिकाये.
सुनील मेरी बग़ल में बैठ गए थे.
उन्होंने अपने होंठ मेरी गर्दन से रगड़े, तो मेरे बदन में वासना की तरंगें उठने लगीं.
वो खेला हुआ खिलाड़ी था, औरत कहां से गर्म होती है, उसका स्टार्टर किस जगह होता है.
उन्हें इस सबका बखूबी पता था.
मैंने बियर का मग खाली कर रखते हुए अपना हाथ सुनील की गर्दन पर रख दबाव देते हुए उनके होंठ अपने चूचों के चीर पर टिका दिए.
मैंने अजय की तरफ देखा, जो वहीं बैठा, अपने लंड को लोअर के ऊपर से मसल रहा था.
मुझे नशा सा हुआ तो मैंने सुनील को कहा- उफ आह मेरे राजा … खुलकर खेलो न मेरी जान.
उन्होंने आगे बढ़कर मेरी कमीज उतार फेंकी.
अन्दर लाल रंग की ब्रा में कैद मेरे कबूतर देख वो पागल से हो गए और मेरी पीठ को चूमते हुए दांतों से मेरी स्ट्रिप खोल दी.
फिर उन्होंने दांतों से ही मेरी सलवार के नाड़े को खोल दिया.
सलवार को नीचे सरका कर उन्होंने मेरी रेशमी जांघों को सहलाते हुए, चूमते हुए मेरी फुद्दी को पैंटी के ऊपर से चूम लिया.
मैं तो मानो मदहोश हो गई.
वो मेरी जांघों को चूमते रहे.
तभी मैंने देखा कि अजय अपना बड़ा सा काला लंड निकाल कर हिला रहा था.
इधर सुनील जी ने भी मेरी पैंटी भी उतार दी और मेरी फुद्दी पर जुबान फेर दी.
मैं तड़पने लगी.
मैंने अजय को देख अपने होंठ काटते हुए होंठों पर जुबान फेरी और उसे अपनी तरफ बुलाया.
वह जैसे मेरे करीब आया, मैंने झपट कर उसके काले लंड को पकड़ लिया और सुपारे पर ज़ुबान फेर दी.
उसने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया.
अब सुनील जी ने मुझे उठाया औऱ बिस्तर पर पटक दिया.
मेरी नंगी पजाबी जवानी दो दमदार मर्दों के सामने बिस्तर पर लुटने को तैयार पड़ी थी.
अजय अब मेरे चूचों को दबाने चूसने काटने लगा.
मेरे मुख से उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकल रहा था.
मैंने सुनील जी को अपनी तरफ खींचा और उनके लोअर को उतारने लगी- मेरे राजा, तुम भी तो दिखाओ अपना हथियार … जिसकी कल मैंने तस्वीर देखी थी और देखने के बाद फुद्दी में आग लग गई थी.
उनका लंड नाग की तरह मेरे सामने फनफना रहा था.
‘उई मेरे राजा..’ मेरे होंठ उनके लंड को चूसने के लिए तड़पने लगे.
बिना समय गंवाए मैंने उनके आधे लंड को मुँह में भरकर चूसना चालू किया.
उधर अजय भी मेरे रेशमी बदन को चूमता जा रहा था.
लंड चूसते चूसते मैंने अपनी गांड उठा फुद्दी को ऊपर किया, जिसको अजय समझ गया और उसने अपने होंठ मेरी गर्म फुद्दी पर टिका दिए.
“आह ओह चाट और चाट.. घुस जा मेरी फुद्दी में.. फौजी..” इधर सुनील ने मेरे बालों को खींचते हुए पूरा लंड मेरे मुँह में फंसा दिया.
मैं खांसने लगी.
कभी वो लंड बाहर निकालते, कभी अन्दर तक डाल देते.
अजय की फुद्दी चटाई की वजह से मेरी फुद्दी की आग बढ़ गई और मैंने लंड मुँह से निकाल लिया.
मैं फुद्दी में लंड डलवाने का वास्ता देने लगी.
सुनील बोला- डालते हैं मेरी जान.. क्यों तड़प रही हो? सुनील जी ने लंड मुँह से निकाला और अजय को हटा कर मेरी टांगें उठा बीच में आ गए- ले पंजाबी कुतिया अब तेरी फुद्दी फटने वाली है.
यह कह उन्होंने झटका मारा औऱ मोटा लंड घुसा दिया.
एक बार तो दर्द हुआ, पर मैं भी चुदासी कुतिया थी, लंड सहन कर गई.
उन्होंने भी बेदर्दी से पूरा लंड जड़ तक डाल दिया.
अजय ने आकर मेरे मुँह में लंड ठूंस दिया और उधर सुनील जी ने मेरी फुद्दी पर ऐसे झटके लगाने शुरू किए.. मानो बुलेट ट्रेन चल रही हो, झटकों से मेरे चूचे उछल रहे थे.
कमरे में मेरी मीठी चीखें गूंज रही थीं उधर अजय मेरे थूक से गीला लंड निकाल कर मेरे गालों पर मल देता, कभी आंखों पर लगा देता.
आह क्या गरम सीन था.
“आह सुनील चौड़ी कर दे.. फाड़ दे फुद्दी ओह.. तेज़ आह..” दस मिनट की अलग अलग तरीकों से चुदाई के बाद, जिस बीच में मैं एक बार पानी छोड़ चुकी थी, सुनील जी के लंड की पिचकारी ने मेरी फुद्दी की आग को ठंडा कर दिया और मैं भी दुबारा झड़ गई.
सुनील जी ने मेरी फुद्दी से गीला लंड निकाल मेरे मुँह में दे दिया और मैंने भी चाट चाट लंड साफ कर दिया.
सुनील जी एक तरफ लुढ़क गए, पर अजय तो अभी बाकी था.
उसने मुझे घोड़ी बना दिया.
मेरी फुद्दी पर लंड टिकाकर झटका देकर लंड फुद्दी में घुसा दिया.
उसकी मजबूत जांघें जब मेरे नरम चूतड़ों पर टकरातीं, तो मुझे और मज़ा आता.
कुछ देर घोड़ी बना कर चोदने के बाद उसने मुझे अपनी गोदी में बिठा लिया.
मेरे चूची उसकी चौड़ी छाती से दब गईं.
मैं उसके गले में बांहें डाल कर उछल उछल चुदने लगी.
जब उसका छूटने वाला था, तो उसने मुझे बिस्तर पर पटक लंड घुसाकर तेज़ झटके दिए और दोनों एक साथ झड़ गए.
वो मेरे ऊपर लेट हांफने लगा.
मेरी फुद्दी में जो आग लगी थी, उन दोनों के लंड ने बुझा दी.
हम तीनों नंगे ही बैठ बियर पीने लगे.
सुनील जी ने गिलास में लंड डुबो कर मेरे मुँह में लंड घुसा दिया.
अजय ने मुझे लिटाया और मेरी नाभि पर बियर डाल चाटने लगा.
सुनील जी का लंड भी दुबारा खड़ा हो गया.
उन्होंने फिर से मेरी फुद्दी चाटते हुए मेरी गांड पर उंगली फेरी और बोले- पम्मी अबकी बार तेरी पजाबी गांड मारूँगा.
मैंने कोई आपत्ति नहीं की तो उन्होंने मुझे पलटा दिया.
मेरी गांड पर थूक कर उस पर लंड रख आगे धकेल दिया.
दर्द से मेरी चीख निकल गई.
वो बोला- अजय इस कुतिया का मुँह बंद कर.. अजय ने अपना लंड मेरे मुँह में घुसा दिया और पीछे से सुनील जी ने जोर से झटका मार दिया.
मेरी गांड फट गई.
उन्होंने थोड़ा रुक फिर से एक तगड़ा झटका दे दिया, कुछ देर ऐसा करने के बाद मुझे सकून मिला और अब मुझे भी गांड मराने में मज़ा आने लगा.
मेरी गांड चुदाई एक बड़े लंड से हो रही थी और दूसरी तरफ कुतिया की तरह मैं फौजी का लंड चाट रही थी.
अजय बोला- राठौड़, इसका सेंडविच बनाते हैं.
मैं समझ गई कि एक साथ फुद्दी और गांड एक साथ बजने वाली है.
वही हुआ.
सुनील जी ने लंड निकाला और सीधा लेट गए.
उन्होंने अपनी तरफ मेरी पीठ करवा मुझे लंड पर बिठा लिया.
ऊपर से मेरी फुद्दी मुँह खोल कर अजय के लंड को डलवाने के लिए तैयार थी.
अजय ने भी लंड घुसा दिया और मेरी कामुक मीठी सिसकारियों से रूम गूंजने लगा.
धमाकेदार चुदाई का खेल चलने लगा.
फिर पहले सुनील जी ने मेरी गांड में माल गिराया और फिर कुछ देर बाद अजय ने भी पानी फुद्दी में भर दिया.
उन धाकड़ फौजियों से चुद कर हल्की हो चुकी थी.
मैं- क्यों सुनील जी मज़ा आया था ना आपको.
आपके भूखे लौड़ों को मेरी भूखी पंजाबन फुद्दी ने कैसे खाया.
सुनील- सच में पम्मी यार तू मस्त पंजाबी माल है.
चुदाई के बाद मैं अपने घर ऑटो से आ गई.
दोस्तो, यह थी मेरी अन्तर्वासना के ज़रिए मेरी पंजाबी चुदाई.
अभी तक दुबारा सुनील जी से नहीं मिली.
जल्दी अपनी कोई नई चुदाई लेकर हाजिर होऊंगी.
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स्रोत:इंटरनेट