. मैंने उन्हें दीवार के साथ लगा दिया और उनको किस करने लगा.
वो मुझसे छूटने की कोशिश करती रहीं.
मैंने एक हाथ उनके मम्मों के ऊपर हाथ रख दिया और उन्हें दबाने लगा.
वो थोड़ी ढीली पड़ गयी थीं, मैं उनके होंठों का रस-पान कर रहा था और मेरा हाथ उनके शरीर की पैमाइश कर रहा था.
अभी वो मेरा साथ तो नहीं दे रही थीं, पर मेरा विरोध भी नाममात्र का कर रही थीं.
मेरा लौड़ा तना हुआ लोवर फाड़ के बाहर निकलने को हो रहा था.
मैंने अपना लौड़ा हिना भाभी के शरीर से रगड़ना शुरू कर दिया और हाथ उनकी गांड पर चलाने लगा.
तभी बेल बजी और वो मुझसे छूट कर देखा कि कौन है, फिर ऋषि को लेने चली गईं.
ऋषि के सामने तो मैं कुछ करना नहीं चाहता था, तो मैं घूमने चला गया.
खेल मैं खेल रहा था, पर इसका पूरा प्लान हिना भाभी का रचा हुआ था, जो मुझे उन्होंने बाद में बताया.
जब मैं घर लौट कर आया तो मकान मालिक जल्दी घर आ गए थे.
उन्हें देख कर मेरी गांड फट गयी कि कहीं भाभी ने मेरी शिकायत तो नहीं कर दी.
मैं चुपचाप अपने कमरे में चला गया और पढ़ने का बहाना करने लगा.
हिना भाभी ने अपनी पति को कुछ भी नहीं बताया था.
तभी मुझे मालूम हुआ कि मकान मालिक भैया को दो दिन के लिए शहर से बाहर जाना था, तो इसी वजह से आज वो जल्दी आ गए थे.
उन्होंने अपनी तैयारी की और मुझे स्टेशन तक छोड़ के आने को कहा.
मैं मन ही मन ख़ुश हो रहा था कि आज मेरी कामना पूरी हो सकती है.
मैं घर आया, खाना खा कर थोड़ी देर ऋषि के साथ खेला.
अभी हिना भाभी भी नॉर्मल व्यवहार कर रही थीं.
वो ऋषि को सुलाने अपने कमरे में चली गईं.
मैं अपने मन में सोच रहा था कि बेटा आज कुछ कर ले मौक़ा है, वरना हाथ मलता रह जाएगा.
मैं थोड़ी देर बाद भाभी के कमरे में झाँकने की कोशिश करने लगा, अन्दर ऋषि सोया हुआ था.. पर हिना भाभी कहीं दिख नहीं रही थीं.
तभी पीछे से आवाज़ आयी- क्या झाँक रहे हो? मैं हक्का बक्का रह गया.
चोर की चोरी पकड़ी गयी थी.
मैं पीछे घूमा, तो देखा भाभी ने पिंक रंग की नाइटी पहनी हुई थी, उसमें उनके मम्मों का उभार क़हर ढा रहा था.
मैं तो उन्हें देखता ही रह गया.
क्या ग़ज़ब माल लग रही थीं.
मुझ पर कामवासना हावी हो रही थी.
मैंने उनको पकड़ लिया और उनके होंठों को फिर से चूम लिया.
उन्होंने मेरे मुँह पर थप्पड़ दे मारा, जिससे मुझे ग़ुस्सा आ गया.
मैंने उनके दोनों हाथ कस के पकड़ लिए और उनके निचले होंठ को दांतों के बीच में पकड़ लिया.
वो दर्द से सिसकी लेने लगीं.
मैंने अपना हाथ कमर में डाल कर भाभी को अपने से चिपका लिया.
उनके शरीर की ख़ुशबू मुझे पागल कर रही थी.
मैं उनके होंठ चूस रहा था और हाथ से उनके चूतड़ दबा रहा था.
इस वक्त उनकी सांसें बहुत तेज़ चल रही थीं और वो भी गर्म हो रही थीं.
धीरे धीरे उन्होंने भी मेरा साथ देना शुरू कर दिया था.
मैं समझ गया कि लोहा गर्म है, बस सही से हथौड़ा मारने की ज़रूरत है.
मैंने अपना हाथ भाभी के मम्मों के ऊपर रखा और उन्हें नाइटी के ऊपर से ही रगड़ने लगा.
मैं उन आमों को अपने हाथों में पकड़ना चाहता था तो मैंने ज़ोर से नाइटी को खींच दिया, जिस कारण वो फट गयी.
मैंने भाभी को जकड़ा और गोदी में उठा कर उन्हें अपने रूम में ले जाकर बेड पे गिरा दिया और पूरी नाइटी आगे से फाड़ दी.
मैं उनके ऊपर आ गया और उनके दोनों हाथों में हाथ फँसा कर पकड़ लिए.
लड़कियों की कामवासना का एक महत्वपूर्ण अंग होता है.. उनके कान के पास और गर्दन की जगह.
मैं उन्हें वहां चूमने लगा.. बीच बीच में मैं उनके कान पर दांतों से हल्का सा काट देता था, जिससे वो सिहर रही थीं.
भाभी अपनी टांगें रगड़ रही थीं.. उनकी चूत तड़प रही थी.
मैंने उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा ऊपर कर दी.
आह.. क्या तराशे हुए मम्मे फुदक रहे थे.. वो बिल्कुल टाइट थे, उन मम्मों के ऊपर हल्के भूरे गुलाबी रंग के निप्पल तने हुए थे.
ज़िंदगी में मैंने बहुत मोमे दबाए थे, पर उस जैसा कसाव किसी में भी नहीं था.
यक़ीन मानो दोस्तो, टाइट मम्मों का जो मज़ा होता है, वो कहीं नहीं है.
मैंने अपना मुँह उनके एक मम्मे पर रख दिया और धीरे धीरे उसे चूसना शुरू किया.
मैं कभी जीभ से निप्पल छेड़ता तो कभी मम्मे को मुँह में लेके चूसता, तो कभी हल्के से काट लेता.
उनके मुँह से कामुक सिसकारी निकल रही थी.
ऐसा ही मैंने दूसरे मम्मे के साथ किया.
हिना भाभी मज़े से आंखें बंद करके पूरी मस्त हो रही थीं.
उनका शरीर आग बरसा रहा था.
शायद उन्हें कई दिन बाद इतना प्यार मिला था.
अब मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए.
वो भी मेरा साथ देने लगीं.
उन्होंने मेरा एक होंठ दांतों में दबाया और उसे चूसने लगी.
कभी वो मेरी जीभ चूसतीं, कभी मैं उनकी.
फिर मैंने अपना हाथ उनकी पेंटी पर रखा वो बिल्कुल गीली हो गयी थी.
उन्होंने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और अपनी चूत दबवाने लगीं.
मैंने अपनी टी शर्ट और लोअर उतारा, बस अंडरवियर रहने दिया.
मैं उनके पैरों पे किस करता हुआ उनकी टांगों पर किस करने लगा.
उनकी क्या मस्त गोरी टांगें थीं.
मैंने उनकी पेंटी उतार दी.
उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था.
मैंने उनकी चूत को किस किया और उनकी चूत को जीभ से ऊपर से नीचे तक चाटा.. तो उनके मुँह से ‘आह.. ऊह.. सीईईई… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ह्म्म्म्म्..’ निकलने लगा था.
मैंने उनकी चूत चूसी और उनके दाने से खेलने लगा.
भाभी पागल हुए जा रही थीं, उन्होंने मेरे सिर को अपनी चूत पे दबा दिया.
फिर बहुत जल्दी ही उनकी टांगें काँप उठीं और उनकी चुत का सारा माल निकल गया.
मैंने चाट कर चूत को साफ़ कर गया.
अब भाभी बहुत शर्मा रही थीं.
उन्होंने मुझे होंठों पे बहुत ज़ोर से किस किया.
मुझे बेड पे लेटा कर उन्होंने मेरे पूरे शरीर पर किस किया.
मुझे बहुत मज़ा आया वो मेरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगीं.
उनकी क़ातिल अदाएं मुझे उनका और अधिक दीवाना बना रही थीं.
वो उठीं और मेरे लंड के ऊपर बैठ गईं.
उनकी चूत गीली थी और लौड़ा भी गीला था.. तो बड़े आराम से चूत में जा रहा था.
पर साथ ही साथ रगड़ भी खा रहा था, जिस वजह से वो बहुत आराम आराम से मज़े लेकर लौड़ा अन्दर ले रही थीं.
हिना भाभी की ‘आह… ह्म्म्म्म्म.. सीईई..’ की आवाज़ें मुझे उत्तेजित कर रही थीं.
मुझे पता था कि ये कई सालों की भूखी हैं, तो मुझे ख़ुद से ज़्यादा उन्हें संतुष्ट करना था.
जब मेरा लौड़ा भाभी की चूत में पूरा चला गया, तो उन्होंने मुझे होंठों पर बहुत ज़ोर से किस किया और उछल-उछल कर लौड़ा अन्दर बाहर करने लगीं.
क़रीब 10-15 मिनट वो मेरे ऊपर बैठ कर चुदती रहीं और थक गईं.
मैंने उनको एकदम से पकड़ा और लौड़ा चूत के अन्दर समेत ही उनके ऊपर आ गया.
अब जोश दिखाने की बारी मेरी थी.
मैंने भाभी की दोनों टांगें अपने कंधों पर रखीं और उनको चोदना चालू कर दिया.
भाभी के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं- हां.. ऐसे ही.. ऊई माँ.. और तेज़.. हाय मर गयी.. उम्मम.. लव यू.. मैं कब से इस दिन का इंतज़ार कर रही थी.. रोज़ तुम्हारे बारे में सोच के चूत में उंगली करती थी.. उनकी बात सुनकर मैं चौंका तो पर मैंने दिमाग न लगाते हुए बस अपनी स्पीड बढ़ा दी.
थोड़ी ही देर में भाभी का पूरा शरीर अकड़ा और उनका माल निकल गया.
साथ ही साथ थोड़ा सा उसका मूत भी निकल गया.
मैंने अपना लौड़ा निकाला और भाभी की चूत चाटने लगा.
मैंने उनको घोड़ी बनने को कहा और पीछे से लौड़ा उनकी चूत में फ़िट करके शुरू हो गया.
मैंने अपने लंड को क़ाबू में रखा और तब तक पानी नहीं छोड़ा, जब तक वो पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो गईं.
जैसे ही मेरा काम होने वाला होता, मैं रुक जाता और उनको चूमने लग जाता.
आखिर मैं हुंकार भरते हुए झड़ गया.
मैं भाभी के ऊपर ही लेट गया और वो मुझे बहुत प्यार से किस करने लगीं.
जब वो बेड से उठने लगीं तो उनकी टांगों में दम नहीं बचा था.
वो लड़खड़ाते हुए उठीं, तो मैंने भाभी को सहारा दिया.
उस रात हमने क़रीब 10 पोज़िशन में कई बार सेक्स किया और भाभी की चूत ने कई बार पानी छोड़ा.
अगले दो दिन भाभी ने अपनी चूत खूब चुदवाई.
उसके बाद जब भी हमें मौका मिला, हमने ख़ूब मज़े किए.
आज भी हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं.
बाक़ी की चुदाई की कहानी अगले भाग में लिखूंगा.
धन्यवाद.
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स्रोत:इंटरनेट