. मैं ऊपर चला गया और वहां जाकर देखा तो मौसम बहुत ही सुहावना था.
मेरे मन में बार बार बसंती की चुदाई के खयाल आ रहे थे.
मेरा 8 इंच का लंड पूरे शबाब पर था.
मेरा लंड उस मादक मकान मालकिन को चोदने के लिए फड़फड़ा रहा था.
बार-बार मैं सीढ़ी के पास जाकर देख रहा था कि बसंती आ रही है या नहीं.
लगभग 15 मिनट के बाद वो छत पर आई और थोड़ा नखरा दिखाते हुए बोली- छत पर क्यों बुलाये हो सर हमको? कुछ खास काम है क्या आपको? मैंने उसको अपने पास आने के लिए इशारा किया और खुद मैं छत पर दीवार के सहारे बैठ गया.
बसंती अपनी कमर को लचकाते हुए मेरे पास आई और मेरे बगल में बैठते हुए बोली- जी, अब बताइये क्या इरादा है? उसके हाथ को पकड़कर मैंने उसको बांहों में लेते हुए कहा- खास बात यह है कि मुझे तेरे इस संगमरमरी जिस्म के रस के समंदर में डुबकी लगानी है। अब चाहे तो तुम खुद अपने आप को मेरे हवाले कर दो या फिर मैं तुम्हारे जवाँ. जिस्म से सारे कपड़े उतारकर इसमें खुद ही डुबकी लगा लूँगा। बताओ, तुम्हें क्या अच्छा लगेगा? वह थोड़े नखरे दिखाते हुए मेरे लंड पर हाथ रखते हुए बोली- तैरना आता है आपको? बहुत गहराई है इस झील में, डूब जायेंगे आप। ये शब्द उसके मुँह से निकलने भर की देरी थी और मैंने उसके गुदाज व मांसल स्तनों को दबोचकर बसंती को वहीं छत के फर्श पर लिटाकर उसके उपर चढ़ गया। उसके बाद उसकी नाइटी को उसकी मांसल जांघों तक उपर उठाकर. उसकी चूत के अंदर अपनी दो उंगली घुसा दी जिससे वह तड़प उठी और सिसकार उठी.
उसकी जवानी की आग एकदम से भड़क सी गयी.
उसके मुंह से निकल गया- आह… आह….
उई… मां… आहह… हहह… मर जाऐंगे सर हम तो इस तरह। पता नहीं कितने दिनों की प्यासी थी वो कि उसके बाद तो जैसे वह पागल सी हो गई। उसने मुझे अपने से अलग किया और मुझे नीचे लिटाकर मेरे निक्कर को मेरी टांगों से निकाल कर मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। उसने. मुंह में लंड लिया तो मैं जैसे आनंद के गहरे सागर में उतर गया.
धीरे धीरे करके बसंती ने मेरे पूरे लंड को जैसे अपने मुंह की गहराई में उतार लिया.
ऐसा लग रहा था जैसे कि उसने मेरे लंड को निगल ही लिया है.
वह लगातार मेरे लंड को चूसती रही.
उसको दांतों से काटती रही.
मुझे मजा भी आ रहा था और हल्का दर्द भी हो रहा था.
करीबन 10 मिनट के बाद मैं तो झड़ने को हो गया.
मैंने कहा- बसंती, मेरा लंड अब बरसात करने वाला है.
वो बोली- इसी बारिश का इंतजार तो मैं कितने दिनों से कर रही हूं.
कर दो बरसात सर जी.
थोड़े ही समय में मेरे लंड ने सारा वीर्य उसके मुँह में ही खाली कर दिया। वह मजे से मेरे लंड के सारे वीर्य को पी गई और फिर मेरे लंड को अपनी जीभ से चाटने लगी। फिर वह मेरे उपर आकर लेट गई। मैंने उससे पूछा- मजा आया मेरे केले को खाकर या अभी भी आग बची हुई है तेरे जिस्म में? वह मेरे गाल पर अपने दांत गड़ाते हुए बोली- अभी तो. बात शुरू हुई है सर। पूरी रात खाऐंगे हम तो तुम्हारे केले को। बड़ा ही मजेदार और तगड़ा है तुम्हारा ये मोटा केला। जिस लंड के लिए मैं तड़प रही थी सालों से, वह आज जाकर मिला है, तो इतनी जल्दी हमारी आग कैसे मिट जाएगी? हम दोनों बातें कर ही रहे थे कि तभी बारिश होने लगी.
मैंने कहा- चलो नीचे बिस्तर पर जाकर मजे लेते हैं.
वो बोली- कितना मस्त मौसम है.
इस बारिश में ही तो चुदाई का असली मजा आयेगा सर। वह मेरे से अलग हुई और उसने मेरी बनियान भी निकाल दी.
उसके बाद उसने अपनी खुद की नाइटी भी अपने जिस्म से अलग करके एक ओर फेंक दी.
अब हम दोनों ही मादरजात नंगे हो गये थे.
अब चुदाई का असली खेल शुरू होने वाला था.
बसंती ने जंगली बिल्ली की तरह मुझे काटना शुरू कर दिया.
वो मुझे ऐसे नोंच रही थी जैसे खा ही जायेगी.
मैं भी उसके जिस्म के हर एक अंग को ऐसे ही नोंच रहा था.
उसको हर जगह से काट रहा था.
उसके स्तनों को जोर जोर से मसल रहा था और वह मेरे जिस्म से बेल बन कर लिपट रही थी.
यह खेल लगभग 25 से 30 मिनट तक चलता रहा। फिर वह अचानक मुझे नीचे लिटा कर मेरे ऊपर आ गयी.
उसने मेरी जांघों पर बैठ कर अपनी चूत पर मेरे लंड को लगा लिया और धीरे धीरे दबाव बनाने लगी.
जब उसकी चूत के अंदर मेरा पूरा लंड चला गया तब मैंने उसे नीचे लिटा लिया और उसकी एक टाँग को घुटने से मोड़ कर उठाया और फिर मैं अपना घोड़ा उसके सपाट मैदान में पूरी स्पीड से सरपट दौड़ाने लगा। जहां तक मुझे लग रहा था कि मेरे मकान मालिक यानि कि उसके पति का लंड न तो ज्यादा लंबा था और न ही ज्यादा मोटा था.
जिसके कारण उसको मेरा लंड लेने में दिक्कत हो रही थी.
यहां तक की उसकी आंखों से पानी आने लगा था.
इस दर्द में भी उसके चेहरे पर लंड लेने का मजा अलग से दिखाई दे रहा था.
वह अब लगातार बड़बड़ा रही थी- सर मुझे रंडी बना दो… इस तरह से मेरी चुदाई करो कि मैं खुश हो जाऊं.
मैं बहुत दिनों से प्यासी हूं.
मैं आपका लंड लेकर अपनी प्यास को मिटाना चाह रही हूं.
आपका लंड ही मेरी चूत की आग को शांत कर सकता है.
आह्ह … सर … चोद दो मुझे … जल्दी जल्दी चोदो.
मैंने उसकी चूत में लंड के धक्के लगाना शुरू कर दिया और मेरे लंड व उसकी चूत के मिलन से फच फच… थप-थप… फट-फट… की आवाज होने लगी.
यह आवाज उस बारिश की रात में और भी ज्यादा मादकता भर रही थी.
15 मिनट तक हमारी चुदाई चलती रही। कभी मैं बसंती के ऊपर हो जाता था तो कभी बसंती मेरे ऊपर हो जाती थी.
जब मुझे लगा कि मैं अब झड़ जाऊँगा तो बसंती से मैंने बोला- रानी मेरा पानी निकलने वाला है। तुम्हारी चूत के अंदर डाल दूँ क्या अपने माल को? वह सिसकारते, कराहते हुए बोली- बहनचोऽऽद, आऽह… उसे फालतू में अंदर मत गिराना। उसे हम पीऐंगे। मेरा भी होने वाला है। तब हम दोनों 69 की पोज में आ गए और फिर मेरे होंठ उसकी चूत की फाँकों के ऊपर लग गये और मेरा लंड उसके मुँह के अंदर चला गया। फिर 4 से 5 मिनट बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए। थोड़ी देर तक हम दोनों एक दूसरे को चाटते रहे। आप सभी तो यह अच्छी तरह से जानते हैं कि एक अच्छी और मजेदार चुदाई के बाद थकावट हो जाती है और वही हुआ हम. दोनों के साथ भी। थक कर हम दोनों एक दूसरे को प्यार करते रहे और चूमते रहे.
मैं उसके स्तनों को सहलाता रहा और वह मेरे लंड से खेलते हुए वहीं छत पर सो गयी। एक घंटे बाद ठंड के कारण मेरी नींद खुली तो मैंने बसंती को उठाया और बोला- चलो यार नीचे। यहाँ ठंड लग रही है। फिर हम दोनों अपने कपड़े उठा कर नीचे आए। कपड़े बसंती के रूम में एक तरफ फेंक कर बसंती से मैंने बोला- बसंती, चाय बना लो, चाय पीने का मन कर रहा है। वह हाँ बोलकर उसी तरह नंगे बदन ही किचन में चली गई। मैं भी नंगे बदन ही बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर वापस बेडरूम आकर लेट गया और एक सिगरेट जलाकर पीने लगा। थोड़ी देर के बाद बसंती चाय लेकर आई। चाय पीने के बाद. वह बाथरूम में चली गई फ्रेश होने के लिये। तब तक मेरा लंड फिर से अपने पूरे उफान पर आ गया था यानि बसंती की चूत की चुदाई के लिए पूरी तरह से एक बार फिर से तैयार हो गया था। बसंती मेरे लंड को देखकर बोली-. बड़ा ही चोदू है तुम्हारा लंड सर जी। यह बोलकर वह मेरे उपर आ गई और मेरे लंड से खेलने लगी। मैंने उससे पूछा- बसंती, कैसा लगा मेरा लंड? मजा आया मेरे लंड से चुदकर? वह बोली- सर आज बहुत दिनों के बाद मेरी चूत की चुदाई हुई है एक तगड़े लंड से। आपको हम कभी भूल नहीं पाऐंगे सर। आज से हम आपके गुलाम हैं। आपको जब भी मन करे हमें चोदने के लिये बेहिचक यहाँ आकर मेरे कपड़े उतार कर हमारी चूत को बिना किसी रहम के चोद. लीजिएगा। उसके बाद उस रात मैने बसंती की चूत की चुदाई के साथ साथ उसकी गाँड भी मारी.
उसने गांड मरवाने के लिए भी मना नहीं किया.
अब वह पूरी तरह से रांड बन गई थी। सुबह लगभग 5 बजे मैं कपड़े पहन कर अपने रूम पर आ गया। उसके बाद से जब भी मुझे मौका मिला मैं बसंती की चुदाई करता रहा और बसंती मेरे लंड से चुदती रही और चुद कर मजा लेती रही.
उसकी चुदाई करके मैंने उसकी राण्ड बनने की इच्छा पूरी कर दी थी.
दोस्तो, आप सभी को यह चोदन स्टोरी कैसी लगी? अपनी प्रतिक्रिया मेरे ईमेल आईडी पर अवश्य दें.
मुझे आप लोगों की प्रतिक्रिया से ही अपनी मेहनत का पता लगेगा.
कमेंट बॉक्स में भी अपनी राय देना न भूलें.
[email protected]
स्रोत:इंटरनेट