. उनको आकर्षित करने के लिए मैंने नहाकर कुछ ही दिन पहले खरीदा हुआ मिनी स्कर्ट पहना और ऊपर मैचिंग टॉप पहना। अंदर रेड कलर की पैंटी और पुशअप ब्रा पहनी हुई थी। बाहर जाने से पहले मैंने अपना रूप आईने में. निहारा, स्कर्ट मेरी जांघों को ढकने में असमर्थ था और उसपर छोटी से पैंटी पहनी थी तो लोगों को यही लगने वाला था कि स्कर्ट के अंदर कुछ भी नहीं पहना। और मेरे टॉप के गले से अच्छी खासी क्लीवेज दिख रही थी। अच्छा सा परफ्यूम लगा कर बाहर आ गयी, पापा पहले से ही जीन्स और टीशर्ट पहन कर तैयार बैठे थे। मुझे देख कर उन्होंने धीरे से सीटी मारी। “कम ऑन पापा, मैंने पहली बार नहीं पहने ऐसे कपड़े!” “हाँ… पर हम पहली बार अकेले घूमने जा रहे हैं ना!” उनके बोलने से और हावभाव से मुझे लगने लगा था कि उन्हें पटाने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, और वैसे भी उनके वह चोरी चोरी स्पर्श करना और डबल मीनिंग बोलना यही दर्शाता था कि वो भी मुझमें इंटरेस्टेड हैं। मैं बस शर्म की खातिर पहल नहीं करना चाहती थी पर अगर वह पहल करेंगे तो मैं झूठमूठ का भी ना नहीं करने वाली थी। घर से पब आधे घंटे की दूरी पर था, उस आधे घंटे में कई बार पापा का हाथ गियर से फिसलकर मेरी जांघों पर पड़ जाता, मैं भी विरोध न करते हुए उस स्पर्श से रोमांचित हो रही थी। आखिर हम पब में दस बजे पहुँच गए, बार कॉउंटर के रास्ते में बहुत सारे लड़के लड़कियां नाच रहे थे, कुछ सिंगल्स कोई ग्रुप में तो बहुत सारे कपल्स भी नाच रहे थे। पब कम डिस्कोथेक होने की वजह से पीकर नाचने वालों की संख्या ज्यादा थी। सब की नजरें मेरे स्तनों पर और नितम्बों पर टिकी हुई थी, भीड़ में चलते हुए बहुत सारे लड़कों ने मेरी गांड पर भी हाथ साफ किया पर मैंने सब को बिना कुछ बोले सिर्फ स्माइल करके घायल किया। फिर काउंटर पर जाकर हमने वाइन पी, फिर डान्स फ्लोर पर बहुत डांस किया। पापा का स्टैमिना बहुत था, 45 साल के होकर भी जब तक मैं नाच रही थी उन्होंने मेरा साथ दिया। सारे लोग लगभग थक गए थे पर हम दोनों आधी रात तक नाचते रहे। डान्स फ्लोर पर नाचते हुए हमारे बदन कई बार आपस में टकरा जाते, कभी मेरे स्तन उनके सीने पर तो कभी उनका लंड मेरी गांड पर रगड़ खाता। कभी उनके हाथ मेरे पेट पर तो कभी कभी मेरी गांड पर … पर मैं उस बात पर कोई विरोध न जताते हुए उनको साथ देती रही। कुछ लोगों ने तो नाचना छोड़ कर हमें देखना शुरू. कर दिया था; ‘एक कमसिन लड़की एक 45 साल के आदमी के साथ है!; सोच कर वे पापा के नसीब पर जल रहे थे और मैं भी उन्हें ज्यादा जलाने के लिए पापा से और चिपक कर नाच रही थी। अंततः हम रात डेढ़ बजे अपने घर पहुँचे, नाच नाच कर हम दोनों ही बहुत थक गए थे। बदन पसीने से पूरा भीग गया था और हम दोनों भी डान्स करते समय हुए स्पर्श की वजह से उत्तेजित हो गए थे। मैं सोच रही थी कि घर आने के बाद पापा अवश्य ही कुछ करेंगे और मैं. भी उसके लिए तैयार थी.
पर घर आते ही पापा गुड नाईट बोलकर अपने रूम में चले गए और मेरे सारे अरमानों पर पानी फिर गया; मायूस होकर मैं अपने रूम में चली गयी और बिना कपड़े बदले ही बेड पर लेट गयी, सोने का प्रयास करने लगी पर नींद ही नहीं आ रही थी। पापा के स्पर्श से मैं पागल हो गयी थी, उसकी याद आते ही मैं फिर से उत्तेजित हो गई। और कल रात का मम्मी और पापा का जंगली सेक्स भी याद आने लगा। फिर उत्तेजना में मैंने अपने मोबाइल में एक पोर्न फिल्म लगाई, फ़िल्म के सीन और डिस्कोथीक के प्रसंग को याद करते हुए चुत के ऊपर से पैंटी को हटाते हुए चुत पर उंगली घूमाने लगी। फ़िल्म का हीरो हिरोइन की चुत में जीभ घुसाकर चाट रहा था, कभी उंगलियों से उसकी पंखुड़ियाँ खोल कर जीभ से उसके दाने को चूसता तो कभी दाने को अंगूठे से छेड़ता, उनकी सिसकारियों से अब कमरा गूंजने लगा। वह सीन देख कर मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी और मैं भी उँगलियों से मेरी चुत के दाने को घिसने लगी। मैं अपने काम में इतनी व्यस्त हो गयी थी कि पापा कब दरवाजा खोल कर अंदर आ गए, यह पता भी नहीं चला। मैंने जब आँखें खोली तब मुझे पता चला कि पापा दरवाजे पर खड़े होकर मेरी हरकतें देख रहे थे। मैंने चकित होकर मोबाइल बंद किया और कम्बल ओढ़कर कमर के नीचे का भाग ढक दिया। “सौ… सौ… सॉरी पापा…” उनको देख कर मैं बोली और अपने कपड़े ठीक करने लगी। “ईट्स आल राइट नीतू… तुम्हारे उम्र में यह सब. कॉमन है… इसमें शर्माने की कोई भी जरूरत नहीं!” मैं थोड़ा रिलैक्स हुई पर उन्होंने मुझे क्या करते हुए पकड़ लिया यह समझने के बाद मुझे खुद की शर्म आ रही थी। “थैंक्स पापा…पर मम्मी को कुछ मत बताना…” “ओके बेटा…. पर आइंदा ध्यान रखना… कम से कम दरवाजा तो बंद कर लिया करो।” “सॉरी पापा… ध्यान नहीं रहा… बहुत थक गई थी…” “अच्छा… पर थका हुआ आदमी तो जल्दी सो जाता है पर तुम तो…” “सॉरी पापा… वो … तो…” “ईट्स ओक… पर तुमने. मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया.
” “कौन सा सवाल पापा?” “वह सुबह का… कल का शो कैसा लगा?” “कम ऑन पापा… मुझे नहीं समझ में आ रहा कि आप क्या पूछ रहे हो?” “ओके… ओके… लीव इट … हमें तो दिखाओ कि तुम क्या देख रही थी?” “पापा प्लीज… मुझे ऐसे अपसेट मत फील कराओ.
” “अरे इसमें शर्माने की क्या बात है… आज कल सभी देखते हैं… मैं और तुम्हारी मम्मी भी …” “ईट्स ओके पापा … वह आप की पत्नी है… आप उनके साथ कुछ भी कर सकते हो.
” “ईट्स ओके नीतू… तुम अब बड़ी हो गई हो … तुम मुझसे सब शेयर कर सकती हो, मुझे पता है तुम मुझे अपना पापा नहीं मानती … कम से कम हम अच्छे दोस्त तो बन सकते हैं.
” “पापा … पर …” “ईट्स ओक… लीव इट!” कहानी जारी रहेगी.
दोस्तो मेरी पापा से चुदाई कहानी कैसी लग रही है? मुझे अपने विचार मेल करें। मेरा मेल आई डी है [email protected] कहानी का अगला भाग: मम्मी से बदला लिया सौतेले बाप से चुदकर-3
स्रोत:इंटरनेट