. फ्रेश होकर मैंने माँ से कहा- आप मेरे लिए दोपहर का खाना मत बनाना.
मैं आज अपनी सहेली के घर जाने वाली हूँ, उसी के घर खा लूंगी.
आपको तो पता ही होगा कि ऐसी परिस्थिति में वक़्त जल्दी से कटता नहीं है.
मेरे साथ भी वैसा ही हुआ.
वक़्त काफी धीरे धीरे कट रहा था.
आखिरकार बारह बज गए.
मैं ज्यादा सजधज कर तैयार नहीं हुई थी.
मैंने एक सिंपल सलवार कमीज पहनी ताकि माँ को शक न हो.
मैंने माँ से कहा- मैं अपनी सहेली के घर जा रही हूँ और अभी अभी रात में भी खाना खाने का प्लान बना है, तो मैं रात का खाना खाकर ही आऊंगी.
मैं तो मन ही मन कह रही थी कि खाना तो खाऊंगी ही … लेकिन साथ में अपनी चूत को शान का लंड भी खिलाऊंगी.
चुत लंड का ख्याल आते ही मेरा हाथ मेरी चूत पर आ गया.
तभी माँ ने कहा- अरे बेटी, तुम्हारे पिताजी तो आज घर देरी से आने वाले हैं.
तुम्हें आने में देर भी हो जाए, तो कोई चिंता नहीं है.
बस खाना खाने घर ही आ जाना.
मैं- नहीं माँ … अभी दोस्तों के साथ बाहर खाने का प्लान बना है.
आज रात का खाना मैं उनके साथ ही खाऊंगी … प्लीज! मेरे काफी मनाने के बाद माँ मान गईं.
इन सब बातों में मेरे दस मिनट चले गए थे.
अब मुझे जल्दी जाना था.
मैंने जल्दी से ऑटो ली और उसके बताये हुए होटल के बाहर रुक गई.
मैंने ऑटो वाले को रुकने को कहा और शान को फ़ोन किया.
फोन उठते ही मैंने कहा कि मैं होटल के नीचे तुम्हारा वेट कर रही हूँ.
उसने कहा- ओके मैं आ रहा हूँ.
मैं होटल के गेट की तरफ देखते हुए उसके आने का इंतज़ार कर रही थी.
कुछ पांच मिनट बाद शान गेट से बाहर आया.
उसने मुझे सामने खड़ा पाया और वो मेरी तरफ आने लगा.
जैसे जैसे वो मेरे पास आ रहा था, वैसे वैसे मेरी दिल की धड़कनें तेज़ हो रही थीं.
वो मेरे पास आया और उसने मुझे बड़े प्यार से हाय कहा.
जैसा कि मैंने पहले भी कहा था कि शान दिखने में ज्यादा हैंडसम नहीं था.
साधारण सा दिखने वाला था.
लेकिन उसकी आंखें किसी को भी आकर्षित कर करने वाली थीं.
चेहरे पर एक दिलकश मुस्कान थी.
मैंने भी उसे हाय कहा.
चूंकि हम वहां खड़े रह कर बातें नहीं कर सकते थे, इसलिए मैंने उसे ऑटो में बिठाया और मैं उसे नजदीक के ही अपने पसंदीदा रेस्टोरेंट में ले गई.
वहां हमने अच्छे से खाना खाया और ढेर सारी बातें भी की.
बिल पे करने के बाद जब हम बाहर आए, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया.
उसने कहा- तो क्या तुम अब अपनी बात को साबित करना चाहोगी? मैंने उसकी तरफ देखा और अपनी कोहनी मारते हुए उससे कहा- अच्छा तुम्हें इतनी जल्दी है.
अभी तो खाना खाया है … कुछ देर रुक तो लो.
मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ.
मेरी इस बात पर वो भी मुस्कुराया और सहमति दिखाई.
हमने फिर से ऑटो लिया और उसके होटल में आ गए.
वो मुझे अपने कमरे में ले गया.
शान- अगर तुम फ्रेश होना चाहती हो, तो हो सकती हो.
मैं- नहीं, मैं फ्रेश ही महसूस कर रही हो.
इतना कह कर मैं बेड पर लेट गई.
शान ने अपनी कमीज के दो बटन खोलते हुए मुझे देखा.
मैंने उसकी नग्न होती छाती पर अपनी मादक नजर टिका दी.
वो कपड़े उतार कर धीरे धीरे मेरे ऊपर आने लगा.
मेरे ऊपर आने के बाद उसने मेरे आँचल पर पड़े दुपट्टे को हटाया … और बड़ी नफासत और प्यार से मेरे माथे को चूमा.
उसके होंठों का स्पर्श मुझे अन्दर तक सनसनी दे गया.
फिर धीरे धीरे नीचे आते हुए उसने मेरे ऊपरी होंठ को अपने दोनों होंठों के बीच में दबाया और मेरे होंठों को चूमने लगा.
या यूँ कहूँ कि वो मेरे होंठ चूसने लगा.
वो बड़े प्यार से मेरे होंठ चूस रहा था.
मुझे ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया था.
शान पूरी तरह से मेरे ऊपर लेट चुका था.
जिसकी वजह मैं उसके खड़े लंड को महसूस कर पा रही थी.
बिना रुके पांच मिनट तक उसने मुझे हर खुले अंग पर चूमा … मेरे होंठों को चूसा.
फिर वो खड़ा हुआ और अपने बाकी के कपड़े उतारने लगा.
मैंने उसे रोका.
उसे कुछ समझ नहीं आया.
वो संदिग्ध नज़रों से मुझे देख कर बोला- क्या हुआ? क्या तुम ये सब करना नहीं चाहती? मेरी जान मैं तुम्हें जबरदस्ती नहीं करूंगा.
अगर तुम्हें ये सब ठीक नहीं लग रहा है, तो कोई बात नहीं मैं तुम्हारे साथ कुछ नहीं करूंगा.
मैं … मैंने उसे बीच में ही रोका और कहा- शान ऐसी कोई बात नहीं है.
मैं बस ये सब होटल में नहीं करना चाहती.
मैं यहां असुविधाजनक महसूस कर रही हूँ.
तुम जानते हो होटल में … मेरे इतना कहते ही वो समझ गया कि मेरे कहने का क्या मतलब है.
मुझे होटल में सेक्स करना उचित नहीं लगता.
शान ने अपने दोनों हाथों को मेरे कंधों पर रखा और पूछा- तो मेरी जान, अब हम क्या करें? मैं उसके पैंट के ऊपर से ही लंड पर हाथ फेरा और उसे जोर से दबाते हुए कहा- चिंता न करो.
मैंने सारा इंतजाम कर दिया है.
हम दोनों मेरी एक सहेली के घर चलते हैं.
उसके घर में अभी उसके अलावा कोई नहीं है.
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आपकी मोना डार्लिंग [email protected] कहानी का अगला भाग: माँ बेटी दोनों एक ही लंड से चुदीं-2.
स्रोत:इंटरनेट