डार्क

मालिक की बेटी को चोदा फिर उसकी बहन की चुदाई

🇮🇳 हिंदी
गति: 1.0x
स्थिति: तैयार
×

प्लेबैक सेटअप सहायता

यदि आप पहले से ही Chrome/Edge का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन फिर भी प्ले नहीं हो रहा है, तो अपने फ़ोन/पीसी सेटिंग्स की जाँच करें।
सुनिश्चित करें कि TTS इंजन सक्रिय है, उस भाषा का उपयोग कर रहा है जिसे आप सुनना चाहते हैं।

Android और अन्य OS उपयोगकर्ताओं के लिए

Android, Harmony, Lineage, Ubuntu Touch, Sailfish, ColorOS / FuntouchOS, hyperOS आदि के उपयोगकर्ताओं के लिए
मेनू एक्सेस: सेटिंग्स खोलें > एक्सेसिबिलिटी > टेक्स्ट-टू-स्पीच आउटपुट
यदि नहीं है, तो सेटिंग्स > ऊपर सर्च बॉक्स > "text-to-speech" या "text" दर्ज करें
फिर टेक्स्ट-टू-वॉयस या टेक्स्ट-टू-स्पीच, या ऐसा ही कुछ चुनें।
भाषा जोड़ने के लिए, गियर आइकन ⚙ पर क्लिक करें > वॉइस डेटा इंस्टॉल करें और अपनी इच्छित भाषा चुनें।

iOS उपयोगकर्ताओं के लिए

सेटिंग्स > एक्सेसिबिलिटी > स्पोकन कंटेंट पर जाएं
या सेटिंग्स > ऊपर सर्च बॉक्स > "स्पोकन कंटेंट" दर्ज करें और एंटर करें
भाषा जोड़ने के लिए वॉइस चुनें और आवाज़ चुनें

MacOS पीसी उपयोगकर्ताओं के लिए

मेनू एक्सेस: एप्पल मेनू पर क्लिक करें () > सिस्टम सेटिंग्स > एक्सेसिबिलिटी > स्पोकन कंटेंट

Windows उपयोगकर्ताओं के लिए

Windows 10 & 11
मेनू एक्सेस: स्टार्ट खोलें > सेटिंग्स > समय और भाषा > स्पीच
Windows 7 & 8
कंट्रोल पैनल > ईज़ ऑफ़ एक्सेस > स्पीच रिकग्निशन > टेक्स्ट टू स्पीच
Windows XP
स्टार्ट > कंट्रोल पैनल > साउंड, स्पीच और ऑडियो डिवाइस > स्पीच
Windows 2000 & ME
स्टार्ट > सेटिंग्स > कंट्रोल पैनल > स्पीच
अन्य प्रकार के पीसी उपयोगकर्ताओं के लिए, जैसे लिनक्स, क्रोमओएस, फ्रीबीएसडी, आदि।
कृपया Google, Bing आदि जैसे सर्च इंजन में टेक्स्ट-टू-स्पीच को सक्षम करने के लिए सेटिंग्स खोजें

नोट वर्तमान में, यह पृष्ठ आपके डिवाइस के इंजन के अनुसार काम करता है।
इसलिए उत्पन्न होने वाली आवाज़ आपके डिवाइस के TTS इंजन का अनुसरण करती है।

मालिक की बेटी को चोदा फिर उसकी बहन की चुदाई 1

. उन्होंने इलेक्ट्रिक केतली में पानी गरम करते हुए चाय की डिप डालते हुए चाय बनाई और कप हाथ में लेकर वो बेड पे बैठ गईं.
मैं नीचे बैठ गया.
“पहले तो कभी मन नहीं हुआ था, सोचती थी कि सब शादी के बाद करूँगी, लेकिन जब से अनु का पता चला है, मन तो करता है कुछ, लेकिन बहुत डर लगता है कि कुछ ग़लत ना हो जाए, अगर तुम ना होते तो अनु तो बेचारी फंस जाती.
” “हां, बात तो आपकी सही है, लेकिन जो मन में हो, वो करके देखना चाहिए.
जिंदगी में जाने कैसा कोई मिलेगा.
आपको डरने की बजाए ऐसा कोई देखना चाहिए, जिस पर आपको विश्वास हो कि उसके साथ सब ठीक रहेगा.
” “कह तो तुम ठीक रहे हो, लेकिन ऐसा कहां से लाऊं.
मैं तो कॉलेज भी नहीं जाती, वैसे भी एकाध साल में शादी हो ही जानी है.
” “अगर आप कहें तो मैं हेल्प करूँ?” “नहीं रे, मैं ऐसे ही किसी के साथ कुछ नहीं करना चाहती.
” “अरे नहीं दीदी, मैं किसी और की नहीं अपनी बात कर रहा हूँ, आप कहें तो मैं आपकी हेल्प कर सकता हूँ.
” “पागल हो क्या, अभी तो अनु के साथ थे, अब मुझे कह रहे हो, दोनों हाथों में लड्डू चाहिए क्या तुम्हें?” “ऐसी बात नहीं है दीदी, आपको तो पता है.
अब मैं अनु से बात नहीं करता और ना ही करूँगा, आप मुझ पे यकीन कर सकती हैं.
” “अभी तुम जाओ, बाद में बात करते हैं.
” “वैसे दीदी, एक बात कहना चाहता हूँ, आप बहुत सुंदर हो, भगवान ने आपको तसल्ली से बनाया है.
आपका अंग अंग देखने लायक है.
जो आपको पाएगा किस्मत वाला होगा.
” यह कहकर मैं आ गया, मैं जानता था कि जल्दी से कुछ नहीं मिलने वाला, बस थोड़ा टाइम और लगेगा.. फिर सब उछल उछल कर मिलेगा, अपनी किस्मत में ही इनकी चूत चोदना लिखा है.
कमरे में आ कर बड़ी दीदी के नाम की मुठ मारी.
अनु से नॉर्मल बात की.
उसे बताया कि दीदी ने कुछ नहीं कहा है, थोड़ा टाइम और अलग रहना ज़रूरी है.
अगले दिन फिर बड़ी दीदी ने बुलाया.
आज उन्होंने मस्त सलवार सूट पहना था और चाय बना रखी थी.
“सतीश, तुम मेरे बारे में कल क्या कह रहे थे झूठ मूट ही सब कहते रहते हो.
” मैं समझ गया कि इसकी चूत में खलबली मच रही है- अरे दीदी, झूठ नहीं.. सब सच कह रहा था, भगवान कसम आप बहुत सुंदर हो.. गजब की सुंदर हो आप.. पूरा शरीर ऊपर से नीचे मस्त है आपका.
“अच्छा, तुम्हें मेरे शरीर में सबसे सुंदर क्या लगता है?” “सच कहूँगा तो आप मुझे मारोगी.
” “कुछ नहीं कहूँगी, लेकिन जो भी मन में हो सच सच बताना.
” “दीदी, आप सच में बहुत सुंदर हो, आपके गाल बहुत प्यारे हैं, आपका गोरा रंग है, होंठ गुलाबी हैं.. एकदम मस्त, कितनी प्यारी गर्दन है आपकी सुराही जैसी.. दीदी.. आप कहें तो मैं छू कर बताता हूँ.
” “ठीक है.. बता!” मैं उनके पास बेड पैर जा के बैठ गया और उनके गालों को हाथ में लिया, उन्होंने अपनी आंखें बंद कर लीं.
“दीदी, आपकी गर्दन कितनी प्यारी है और आपके कानों की लौ तो और भी मस्त है.. आपके कंधे कितने प्यारे हैं.
जानती हो दीदी, आपकी ये चुची बहुत प्यारी है.
” मैंने उनकी एक चुची को हाथ में ले लिया और वो “आअहह..” करने लगीं.. आँख बंद करके काँपने लगी थीं, मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए, उन्होंने कुछ नहीं कहा.
उन्होंने मुझे अपनी बांहों में ले लिया और चूमने लगा.
“सतीश रहने दो ना प्लीज़, कुछ हो रहा है.
” “होने दो ना दीदी, मज़ा लो ना जिंदगी का, अनु तो पूरा खा पी के बैठी है, आप ही ऐसे रह रही हो बस.
” उन्होंने कुछ नहीं कहा, मैंने उनके बदन पे हाथ फिराना शुरू कर दिया, वो तड़पने लगीं और मुझे अपनी साथ चिपका लिया.
मैंने उनको चूमना शुरू किया, गाल पे, गर्दन पे खूब चूमा.
फिर धीरे धीरे उनके कुर्ते को ऊपर उठाया, गजब की सुंदर थी वो.. एकदम गोरी, आंखें बंद करके बस मज़ा ले रही थी.
मैंने दीदी की ब्रा को ऊपर उठाया और दोनों कबूतरों को आज़ाद किया, गजब का नशा था.
एकदम गोल गोल चुची और उनका दाना भूरे रंग का.. आह.. मज़ा आ गया.
मैंने धीरे से एक निप्पल चूसा तो दीदी ने आहह भरी- “सतीश, प्लीज़ रहने ना कुछ हो रहा है, आहह… आह.. प्लीज़ रहने दो ना.
“दीदी आज मत रोको, तुम तो सच में गजब का माल हो, अनु ने तो फिर भी लंड का मज़ा लिया हुआ था, तुम तो कुँवारी हो दीदी, तुम्हारी चुत की सील तो मैं ही तोड़ूँगा.
” “नहीं सतीश, प्लीज़ रहने दो ना, ये सब शादी के बाद करूँगी मैं.. प्लीज़ रहने दो ना..” लेकिन दीदी कहते हुए मुझे अपनी बांहों में ही खींच रही थीं, वे छोड़ ही नहीं रही थीं.. बस जबरदस्त मज़ा ले रही थीं.
मैंने धीरे धीरे उनका शर्ट और ब्रा निकाल दी और अपना शर्ट बनियान भी उतार दिया.
उनके नंगे बदन को अपने नंगे बदन से चिपकाया, तो आग लग गई.
दीदी की मस्त मस्त चुचियां मेरी छाती से लगी थीं.
दीदी आहें भर रही थीं और आंखें बंद किए बस मज़ा ले रही थीं- नहीं सतीश, प्लीज़ कुछ मत करो ना, मेरी बात मान जाओ ना, फिर कभी कर लेना, आज रहने दो, देखो कोई आ जाएगा, बहुत बदनामी होगी.
“दीदी, प्लीज़ आज मत रोको मुझे.. कुछ हो जाने दो ना, प्लीज़ पूरे कपड़े निकाल दो ना एक बार.
” “प्लीज़ दीदी, करने दो ना.
” मैं ऐसे कहता जा रहा था और वो मना करती जा रही थी, लेकिन मैंने बिस्तर पे लिटाकर उनकी सलवार का नाड़ा ढीला कर दिया था.
जब मैं उनकी सलवार निकालने लगा तो उन्होंने उसको पकड़ लिया- प्लीज़ सतीश और नहीं करो, इतना ही बहुत है, मैं मर जाऊंगी.
मैंने उनके हाथ को हटाया और धीरे से उनकी सलवार को निकाल दिया, गजब की जांघें थीं उनकी, केले के तने की तरह चिकनी, उस पर जरा सी पेंटी गजब ढा रही थी.
दीदी सिर्फ़ आंखें बंद किए लेटी थीं और कांप रही थीं.
मैंने धीरे से अपनी पेंट और अंडरवियर भी उतार दिया और धीरे से दीदी की पेंटी भी निकाल दी.
हम दोनों अब नंगे हो चुके थे, लेकिन दीदी आंखें बंद करके ही लेटी रहीं.
मैंने उनको पैरों से चूमना शुरू किया, उनके पैरों की उंगलियों को मुँह में ले के चूसा, वो आहह आहहा करने लगीं.
धीरे धीरे मैं उनकी जाँघों तक पहुँचा, वो मचल रही थीं.
फिर आहिस्ते से उनकी चुत पे अपना मुँह रखा तो उस वक्त वो बहुत काँपने लगीं.
सच में ये उनका पहली बार था, क्योंकि अनु भी इतना नहीं काम्पी थी.. वो तो बड़े आराम से लंड खा गई थी.
मैंने दीदी का हाथ अपने लंड पे रखा, उन्होंने झटके से हटा लिया और आंखें खोल कर देखा- हाय, ऐसा होता है क्या आदमियों का? कितना अलग सा है ना.. गिलगिला सा! उन्होंने लंड हाथ में भर लिया और ऊपर नीचे करने लगीं, जैसे खिलौना मिल गया हो.
“दीदी, मुँह में ले कर देखो ना मज़ा आएगा, अनु तो गजब का चूसती है.
” उन्होंने लंड मुँह में ले लिया, क्या जन्नत थी.
दीदी ने थोड़ी देर ही लंड चूसा.
तब तक मैं उनको हर जगह से चूम रहा था.
उनका शरीर गजब का खुशबूदार था.
धीरे धीरे मैं उनके ऊपर आ गया, उनकी टाँगें चौड़ी कर लीं और अपना मूसल उनकी कुँवारी चूत पे लगा दिया.
उन दीदी की चूत गर्म गर्म थी और वो आंखें बंद करके बस लंड के घुसने इंतजार कर रही थीं.
“प्लीज़ सतीश, मत करो ना इतना सब कुछ.. रहने दो ना, फिर कभी कर लेना तुम्हें मना नहीं करूँगी मैं.. कसम से.
” “दीदी, प्लीज़ अब मत रोको, जो हो रहा है हो जाने दो.. अब तो आप सिर्फ़ मज़ा लो.
” मैंने धीरे से अपना लंड उनकी कुँवारी चूत में घुसाया, बहुत टाइट थी.
वो चिल्लाने लगीं- आह बाहर निकालो सतीश.. बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़ रहने दो.
लेकिन मैं जानता था कि आज अगर नहीं किया तो फिर नहीं मिलेगी.
मैंने ज़बरदस्ती लंड चूत में घुसा दिया.
दीदी चिल्लाने लगीं, मैंने उनका मुँह बंद किया और पूरा लंड अन्दर घुसा दिया.
थोड़ी देर रुकने के बाद धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू किया.. तब उनको थोड़ा ठीक लगना शुरू हुआ.
उसके बाद मैंने उनको चोदना शुरू किया, उनकी चुची को चूसा.
काफ़ी समय तक चोदा.
मैंने दीदी को चोद कर कली से फ़ूल बना दिया था.
मैंने अपना माल उनके पेट पे निकाला, वो भी दो बार डिसचार्ज हुईं.
काफी देर के बाद हम उठे, देखा तो खून निकला हुआ था, कुँवारी चूत की सील भंग हो गई थी.
“तुम रुके क्यों नहीं सतीश, ऐसा करना ज़रूरी था क्या?” “दीदी.. सच बताओ, मन तो आपका भी बहुत था ना?” “हां, मन तो था.. ख़ासकर अनु के किस्से के बाद तो बहुत था.. वैसे सेक्स बड़ा मजेदार होता है.
जब आदमी ऊपर आता है, औरत के शरीर को मसलता है, तो मज़ा आ ही जाता है यार.
” अब मैं दीदी का यार बन गया था.
उनकी चूत में लंड जो पेल चुका था.
“दीदी.. अब कभी भी परेशान नहीं रहना, जब तक शादी नहीं होती.. हम एक दूसरे हो ऐसे ही मज़े देंगे.
” “ठीक है सतीश.. लेकिन तुम प्लीज़ साथ रहना.. वैसे तुम्हारा बदन बहुत अच्छा है.
अनु तो ठीक तुम्हारे नीचे आई थी, वैसे तुमने उसको तसल्ली से मसला होगा.
” “हां दीदी, अनु ने मुझे सिखाया है ये सब.. उसकी मैं बहुत तसल्ली से लेता था.
दीवानी है मेरी वो.. उसको मेरे लंड की बहुत प्यास थी.
” “मैं मानती हूँ, अच्छा चलो फटाफट कपड़े पहनो.. बहुत टाइम हो गया है.
” उसके बाद मैं कपड़े पहनकर अपने रूम में आ गया.
दोस्तो, मैंने शादी होने तक अनु को और बुआ जी को बहुत चोदा.
लेकिन बुआ जी कभी पता नहीं चला कि मैं अनु को चोदता हूँ और ना ही कभी अनु को पता चला कि मैं उसकी बुआ की लेता हूँ.
लेकिन एक दिन भांडा फूट ही गया और आगे क्या हुआ, उसके लिए अगली कहानी का इंतजार कीजिएगा.
अपने कॉमेंट मुझे भेजें, कोई भाभी या लड़की लिखेगी तो और अच्छा लगेगा.
[email protected] आगे की कहानी: मालिक की बेटी के बाद उसकी बहन की चुदाई-2
स्रोत:इंटरनेट