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मुझे अपनी चुत गांड चुदवाने को लंड चाहिए 4

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मुझे अपनी चुत गांड चुदवाने को लंड चाहिए 4 1

. नमस्ते दोस्तो, मैं अरुणिमा एक बार फिर से चुदाई की कहानी में आपको अपने कामरस से सराबोर करने आ गई हूँ.
मेरी सेक्स चुदाई कहानी के पिछले भाग टेलर मास्टर को चूत देकर काम करवाया में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं ड्रेस बदल कर आई तो डॉक्टर रोहित ने मेरे सेक्सी लुक की तारीफ की.
अब आगे मेरी सेक्स चुदाई कहानी: इस कहानी को सेक्सी लड़की की आवाज में सुनकर मजा लीजिये.
वो मस्त हो गया और मेरा सर पकड़ कर अपने लंड पर दबाने लगा.
उसका लम्बा लंड मेरे गले गले तक जाने लगा था.
कुछ देर लंड चुसाने के बाद उसने मुझे खड़ा किया और सामने पेशेंट बेड पर मुझे लिटा कर मेरी स्कर्ट उठा कर मेरी पैंटी उतार दी.
मेरी नंगी चुत देख कर उसने अपना मुँह मेरी चुत पर लगा दिया मेरी चूत चाटने लगा.
उसके कुछ मिनट की ही चटाई मैं झड़ गयी.
इसके बाद उसने लंड चुत में पेल दिया और लगभग आधे घंटे में मुझे बहुत फटाफट … लेकिन बढ़िया से चोद दिया.
मैं उसके साथ चुदाई करके नीचे आ गयी और उसकी बीवी को पहले दिखा दिया.
ये अब मेरे रोज़ का काम हो गया था.
मैं रोज उस भीड़ में से किसी को भी चुन लेती, जो मुझे पसंद आ जाता.
फिर उसे उसी कमरे में ले जाकर उससे चुद लेती.
एक दिन सुबह जब मैं क्लिनिक पहुंची, तो रोहित अपने केबिन में नहीं थे.
मैं अन्दर बाथरूम में चली गयी और अपने सारे कपड़े उतारने के बाद उनको तह करके बैग में रख कर जैसे घूमी, तो रोहित ने बाथरूम का दरवाजा एकदम से खोल दिया.
मैं भी एकदम हक्की बक्की रह गयी.
उन्होंने भी कम से कम आधे मिनट तक मुझे पूरी नंगी देखा और मुझे सॉरी बोल कर दरवाज़ा बन्द कर दिया.
मैं कुछ देर में अपने कपड़े बदल कर बाहर आई तो आज रोहित की आंखों में मुझे कुछ अजीब सी वासना दिखी.
शायद मुझे नंगी देखने की वजह से था.
उस दिन उन्होंने मुझे एकदम अलग नज़रिये से देखा.
दोपहर में जब हम दोनों साथ में खाना खा रहे थे तो उन्होंने बोला- आज घर नहीं जाना … एक मरीज की फ़ाइल देखनी है.
कुछ देर में मैंने घर पर भी फ़ोन करके बता दिया- आज घर आने में देर हो जाएगी.
शाम को पांच बजे सबकी छुट्टी हो जाती थी.
साढ़े पांच बजे तक पूरा अस्पताल खाली हो गया.
बस बाहर एक गार्ड बैठा था.
रोहित ने मुझसे एक मरीज़ की फ़ाइल निकालने को बोला और वो ऊपर चले गए.
वहां उनके कपड़े और आराम करने के लिए रूम था.
कुछ देर बाद वो वहां से लोअर और टी-शर्ट में आए.
उन्होंने लोअर बिना अंडरवियर के पहना हुआ था जो लंड के उभार से साफ़ पता चल रहा था.
मुझे इस बात का पूरा आभास पहले से ही हो गया था, तो मैंने अपनी स्कर्ट के नीचे हाथ डालकर अपनी पैंटी को उतार कर अपने बैग में रख लिया था.
वो अपनी कुर्सी पर बैठ गए और मुझे अपने एकदम बगल स्टूल पर बिठा दिया.
वो मुझे उस मरीज़ के बारे में बताने लगे.
उनका हाथ मेरी पीठ पर चलने लगा था और बीच बीच में वो मेरी जांघ पर भी अपना हाथ रख देते.
कुछ देर बताने के बाद उन्होंने मुझसे वही बात दुबारा से पूछी, तो मैंने पहला उत्तर गलत बताया.
रोहित बोले- अगर अबकी गलत बताओगी तो तुमको सजा मिलेगी.
लेकिन फिर से वही हुआ और मैं नहीं बता पाई.
उन्होंने मुझसे खड़े होने को बोला और मेरे खड़े होते ही मेरे नीचे से स्टूल हटा दिया.
रोहित मुझसे बोले- झुक जाओ.
जब मैं हल्की सी झुकी, तो उन्होंने मुझे मेरे दोनों हाथ मेज़ पर टिकाने को बोला.
मैं अपने दोनों हाथों को मेज़ पर टिका कर झुक गई.
उन्होंने मेरी गांड पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिया.
कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे फिर से सवाल पूछा.
उत्तर फिर गलत हो गया.
अब जब भी सवाल का उत्तर गलत होता तो वो मेरी गांड पर एक बहुत जोर का झन्नाटेदार चमाट मार देते.
उनकी इस हरकत से मुझे दर्द भी हो रहा था लेकिन मज़ा भी बहुत आ रहा था.
कुछ देर बाद वो बोले- लगता है तुम्हारी स्कर्ट मोटी है … इसी लिए तुमको चोट नहीं लग रही है.
इसी लिए तुम बार बार गलत उत्तर बता रही हो.
ये कहते हुए डॉक्टर रोहित ने मेरी स्कर्ट उठा दी और मेरी गोरी गोरी गद्देदार गांड नंगी हो गयी.
मेरी बिना पैंटी की गांड देख कर वो खुश हो गए और फिर से गांड सहलाने लगे.
अगली गलती पर जब उन्होंने मेरी गांड पर हाथ मारा, तो बहुत तेज़ से चट की आवाज़ आयी.
इसी तरह उन्होंने कई सारे थप्पड़ मेरे दोनों चूतड़ों पर बरसा कर उन्हें एकदम लाल कर दिए.
इसके बाद उन्होंने मुझसे बोला- आओ बहुत देर से खड़ी थक गई होगी, बैठ जाओ.
इतना बोल कर उन्होंने मेरी कमर पकड़ कर मुझे अपनी गोद में बिठा लिया.
उनकी गोद में बैठते ही मेरी गांड में रोहित का खड़ा लंड गड़ने लगा.
अबकी बार उन्होंने मेरी दोनों चुचियों को अपने हाथ में थाम लिया और फिर से एक सवाल पूछा.
जब मैंने गलत उत्तर बताया, तो रोहित ने मेरे दोनों चुचे कसके भींच दिए, जिसकी वजह से मेरी हल्की सी आह निकल गयी.
इसी तरह कुछ देर मेरे मम्मे दबाने के बाद उन्होंने मेरी शर्ट उतार दी और मेरी ब्रा के ऊपर से मम्मों को दबाया.
फिर उसको भी निकाल दिया.
मैं उस कमरे में एकदम नंगी थी.
कुछ देर बाद रोहित ने वो फ़ाइल सामने से हटा दी और मुझे झुका कर बिठा दिया और मेरे हाथों को अपने सिर के ऊपर से ले जाकर मेरी एक चूची को पीने लगे.
इसी तरह डॉक्टर रोहित ने मेरी दूसरी वाली चूची को भी पिया.
फिर उन्होंने मुझे खुद पर से हटाया और मेरा हाथ अपना लंड पर रखवा दिया.
मैंने झट से उनका लोअर खोल कर उनका लंड चूसना शुरू कर दिया.
कुछ देर बाद उन्होंने मुझे उल्टा ही मेज़ पर हाथ टिका कर झुका दिया और मेरी गांड और चूत को चाटने लगे.
फिर उन्होंने पहले मेरी गांड चोदी.
बाद में चूत चोद कर अपना सारा माल मुझे पिला दिया.
अब तक 7 बज चुके थे, तो मैं अपने कपड़े बदल कर बाहर आने लगी.
मैंने देखा कि उनके यहां तीन और डॉक्टर आए हुए थे.
इन्हें वो जब बुलाते थे, जब कोई ऑपरेशन या अलग मर्ज के लिए केस आता था.
उन तीनों में से एक डॉक्टर बाहर खड़ा था.
उसने मुझे वासना भरी नज़र से देखा और मुस्कुरा दिया.
मैं भी मुस्कान बिखेर कर चली गई.
अगले दिन मैंने एक आदमी चुन कर अपनी चूत चुदवाई और मजा लेकर नीचे आ गई.
फिर दोपहर को डॉक्टर रोहित ऑपरेशन करने चले गए तो एक कंपाउंडर मुझे बुलाने आया.
उसने कहा- एक डॉक्टर साब आए हैं, वो आपको याद कर रहे हैं.
मैंने जाकर देखा तो ये वही डॉक्टर था, जो कल शाम को मुझे चोदने की नजर से देख रहा था.
कुछ देर बाद मैं उसके केबिन में गयी, तो वो मुझे एक केस के बारे में बताने लगा.
केस के बारे में बताते हुए ही उसने एकदम से मेरी पीठ पर हाथ फेर दिया.
मैं उस पर चिल्लाने लगी.
वो बोला- देखो अरुणिमा जी, आज घर जाकर अपने पापा से मेरा नाम पूछ लेना.
वो मुझे बहुत अच्छे से जानते हैं.
कल जब आप रोहित जी के साथ केस समझ रही थीं, मतलब उनका लंड मुँह में लेकर चूस रही थीं, तो मैं गेट पर ही था … अब आप देख लो.
उसने मुझे घुमा फिरा कर ये बता समझा दी थी कि अगर मैं उससे चुदवाने में नाटक करूंगी … तो वो रोहित से हुई मेरी चुदाई की बात को पापा से बता देगा.
मैं चुपचाप खड़ी रही.
उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अन्दर बॉथरूम में ले जाकर बहुत जोर से चोदा.
जाते समय वो बोल कर गया- कल वाले उन दोनों डॉक्टरों को भी तुम्हारी चुदाई की बात पता है … तो आप उनका भी देख लेना.
अगले दिन दोपहर के बाद वो एक इमरजेंसी के लिए बाहर चले गए तो उसी आदमी ने आज मुझे मीटिंग हाल में बुलवाया जहां वो दोनों डॉक्टर पहले से बैठे थे.
मेरे अन्दर आते ही उन्होंने दरवाज़ा बन्द कर दिया और उन तीनों मेरे साथ सामूहिक सेक्स किया.
उसमें मुझे भी मज़ा आया और मेरी भी हां थी.
इन तीनों ने मुझे शाम सात बजे तक चोदा.
इसके बाद ये सब चले गए लेकिन मेरी गांड और चूत में एकदम दर्द और जलन हो रही थी.
क्योंकि इन सालों ने एक साथ दो दो लंड मेरे हर छेद में घुसेड़े थे.
ये लोग तो तीनों लंड एक ही छेद में डालने के चक्कर में थे, लेकिन तीन के खड़े होने की जगह ही नहीं थी, सो लंड घुसा ही नहीं.
मैं कुछ देर बाद जब कुछ ठीक हुई तो घर आ गयी.
अब ये सब चलने लगा कि क्लीनिक की भीड़ में से कोई एक मेरी मार लेता.
फिर कभी रोहित या वो तीनों डॉक्टर मेरे ऊपर चढ़ जाते.
इसी तरह वहां मैंने एक साल काम किया.
लेकिन जब मेरे पेपर शुरू हुए तो मैंने वहां काम छोड़ दिया.
आपको मेरी सेक्स चुदाई कहानी कैसी लगी, प्लीज़ मेल करके बताएं.
अरुणिमा [email protected]
स्रोत:इंटरनेट