. मैं मुश्किल से एक दो कदम आगे बढ़ी फिर वही बेड पर बैठ कर राजू को आवाज दी। राजू दौड़ता हुआ ऊपर आ गया- जी मेमसाब? “राजूssss आज खाना यही लगाओ… मुझे चलना न…” नशे की वजह से मुझे चलना नहीं हो रहा यह भी बता. नहीं सकती थी। और मैं वही बेड पर गिर गई। थोड़ी देर बाद मुझे ऐसा लगा के राजू मुझे बेड पर सुलाने की कोशिश कर रहा था, मैं उसको देख कर मुस्कुराई। वह बहुत सावधानी लेकर मुझे सुलाने की कोशिश कर रहा था, मेरे खुले बदन को और खास अंगों को स्पर्श ना हो इसकी कोशिश कर रहा था। मैंने उसके कंधे पर हाथ रख कर उसको अपने ऊपर खींचा, अचानक हुई इस घटना से वह संभल नहीं पाया और मेरे शरीर पर गिर गया। पर अगले ही पल उसने खुद को संभाला और मेरे ऊपर से उठ गया। वह मुझसे दूर जाते हुए बोला- मेमसाब तनिक ठीक से सो… तकिया उधर है! वह बोल रहा था… पर मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, मैं बस उसको देख कर मुस्कुरा रही थी। वह कुछ बोलता जा रहा था और मैं सिर्फ मुस्कुरा रही थी। वह और पीछे हुआ और अचानक नीचे गिर गया। मैंने देखा यो वह मेरी गीली पैंटी पर फिसल कर गिर गया था। उसने मेरी पैंटी को उठाकर अपने हाथों में पकड़ी। “राजूsssss… तुमने भांग. पिलाई… बहुत बढ़िया थी… बहुत अच्छा लगा पी कर!” मैं अब बड़बड़ाने लगी। “मेमसाब आप ठीक से सो जाइये.
” वह फिर से बोला पर मुझे होश कहाँ था। “राजू… मेरा एक और काम करोगे?” मैं नशे में बोली। “क्या मेमसाब?” उसने पूछा। “मुझे अपना मक्खन खिलाओगे ना राजू??” सुनते ही वह चौंक गया। “क… क… का” उसने पूछा वैसे ही मैं जोर जोर से हँसने लगी। “मुझे भी तुम्हारा मक्खन चाहिए जैसे तुमने सीमा को खिलाया है.
” कह कर मैं छोटी बच्ची की तरह रोने लगी। “मेमसाब आप को ज्यादा हो गयी है… आप सो जाओ… सुबह अच्छा लगेगा.
” कहकर वह जाने लगा वैसे ही मैं लड़खड़ाते हुए उठी और उसका कुर्ता पकड़कर उसे रोकने की कोशिश करने लगी। पर नशे की वजह से ठीक से खड़ी नहीं हो सकी और उसका कुर्ता हाथों में पकड़े रख कर ही नीचे गिर गई। उसका पूरा कुर्ता फट गया। वह डर कर पीछे मुड़ा, मैं उसके पैरों के पास ही घुटनों के बल गिर पड़ी थी। उसके मेरी तरफ मुड़ते ही उसका लंड मेरे मुँह के सामने आ गया। मैंने हंसते हुए उसके लंड को पकड़ा, धोती और निक्कर के अंदर छुपा उसका लंड धीरे धीरे फूलने लगा था। मैं उसके लंड को सहलाने लगी वैसे ही वह बोला- मेमसाबssss ईह का कर ही हो… उसके बोलते ही मैं और जोश में आ गयी और धीरे से उसका लंड सहलाने लगी, वह भी सिसकारियाँ लेने लगा। उसका लंड धीरे धीरे फूलने लगा था मेरी चुत भी पानी छोड़ रही थी और मेरे गाउन को भीगो रही थी। “मेमसाब, छोड़ो मुझे!” कहकर वह अपने लंड से मेरा हाथ हटाने की कोशिश करने लगा। पर मैं उसका लंड छोड़ने को तैयार नहीं थी। उसने एक झटका दे कर मेरा हाथ हटा दिया पर वह वहाँ से गया नहीं। उसकी भी हालत ‘चाहिए… चाहिए… नहीं…’ हो रही थी। मैं. उठने की कोशिश करने लगी पर अचानक गिर पड़ी, तभी उसने मुझे संभालने की कोशिश की। उसी वक्त मेरा एक स्तन उसके हाथ के नीचे आ गया। उसके मजबूत हाथों के नीचे मेरा स्तन मसल गया था और मेरा पूरा शरीर रोमांचित हो गया। मैंने उसे अपनी बाहों में ज़ोरों से पकड़ लिया। मैंने अपने स्तन उसकी छाती पर दबाए रखे हुए थे और नीचे से कमर हिलाते हुए मेरी चुत उसके लंड पर रगड़ रही थी। उसका प्रतिकार अब कम हो गया था। कितना भी ईमानदार. क्यों न हो वह भी एक पुरुष था, वह अपने हाथ मेरी पीठ पर ले कर आ गया। मैं भी उसको ज़ोरों से भींचते हुए मेरी चुत को उसके लंड पर घिसने लगी। अचानक ही उसने मुझे धक्का दे दिया और बेड पर गिरा दिया, फिर उसने अपना फटा हुआ कुर्ता निकाल फेंका। उसके शरीर पर हल्के बाल थे, उसकी मजबूत छाती पर एक दो जगह काटने के निशान थे। साँवले रंग के छाती पर उसका छोटा काला ऐरोला चमक रहा था और उसके बीच में उसका निप्पल किसी मनी की तरह फूला हुआ था। वह कमर के उपर से नंगा ही मेरे पास आ कर खड़ा हो गया, उसने बदन की मादक खुशबू मेरी नाक में भर गई। मैंने उसके लंड को फिर से पकड़ कर सहला दिया और आगे झुकते हुए उसको चूमा। “सsssss” सिसकते हुए उसने अपनी कमर आगे की जैसे बिना बोले कह रहा हो कि ‘मेमसाब मेरा लंड खोल दो।’ दोस्तो, मेरी कामुकता और चुदाई कहानी कैसी लग रही है? मुझे मेल करके बतायें! मेरा मेल आई डी है [email protected] कहानी का अगला भाग: मेरा नौकर राजू और मैं-3.
स्रोत:इंटरनेट