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मेरा पहला प्यार सच्चा प्यार 8

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मेरा पहला प्यार सच्चा प्यार 8 1

. मैं एक बात यहां बताना चाहती हूं, मैंने आशीष को बहुत प्यार किया है … सच्चे मन से, सच्चे दिल से.
… मैं उसे बेइंतहा प्यार करने लगी थी.
उसके लिए मैं कुछ भी कर सकती थी … वह मेरा पहला प्यार था.
मैं आशीष से बोली- आशीष मैं अब सिर्फ तुम्हारी हूं … तुम मुझे जो भी कहोगे मैं करूंगी … आई लव यू.
आशीष ने भी मुझसे बोला कि आई लव यू मेरी जान … मेरी खूबसूरत सेक्सी बंध्या.
फिर उसने मुझे अपनी बांहों में भर कर मेरे बालों में जो बैंड लगा था, उसे खोल दिया और बोला- तुम्हारी जुल्फें बहुत खूबसूरत हैं, इन्हें खोल दो बंध्या … तुम बहुत सेक्सी हो.
वह अपने दोनों हाथों से मेरे पिछवाड़े को मेरी गांड को जींस के ऊपर से ही दबाने लगा.
आशीष मुझसे बोला- आज हमारी पहली सुहागरात है, खुल के होगी.
मैं बोली- हां आशीष, जो तुम्हारा मन करे, जिससे तुम्हें खुशी मिले, सब करो.
मैं उसके ऊपर पूरी तरह से फिदा थी.
आशीष मेरे बालों को सहलाने लगा.
फिर वो मुझसे बोला- बंध्या, हम दोनों आज बहुत खुलकर प्यार और सेक्स करेंगे … तुम्हें कोई दिक्कत तो नहीं? मैं बोली- नहीं आशीष में तो तुम्हारी हूं.
… बस तुम्हें जो अच्छा लगता है, वह करो … मैं तुम्हारा साथ दूंगी.
आशीष बोला- तो तुम मुझे अब तुम नहीं तू बोलो … और प्यार में जितना खुल के बिल्कुल जानवरों जैसा जिसे वाइल्ड सेक्स कहते हैं … वैसा करना चाहिए.
तो बहुत मजा आता है.
मैं बोली- ठीक है आशीष.
वैसे मैं सब कुछ पहले से जानती थी, सब कुछ पढ़ चुकी थी सेक्सी कहानियों में, कमलेश सर मुझे सब पहले ही पढ़वा चुके थे.
मैं सेक्स वीडियो भी कई देख चुकी थी, पर आशीष के सामने बिल्कुल अनजान बन रही थी.
मेरा भी मन वैसा ही था.
तो आशीष ने बोला- अब तुम मुझे खुल के गाली देना … गंदी से गंदी बातें बोलना.
मैंने कहा- जो हुकुम मेरे आशीष.
उसने बोला- अब हम दोनों के बीच इन कपड़ों का कोई मतलब नहीं है.
तो सेक्सी बंध्या तुम मेरे कपड़े खोलो, मैं तुम्हारे उतारूंगा.
मैंने कहा- ठीक है.
तो आशीष बोला- पहले तुम शुरू करो बंध्या.
मैंने कहा- चलो … जो तुम कहो, पर मुझे कुछ पता नहीं है, मेरा यह फर्स्ट टाइम है.
यह मैं आशीष से झूठ बोली थी.
तो आशीष मेरे सामने आ गया वह व्हाइट शर्ट और जींस पहना था.
वो मेरे सामने हाथ उठा कर खड़ा हो गया.
मैं आशीष के शर्ट की बटन खोलने लगी.
जैसे ही आशीष की बटन खोलने लगी, आशीष मेरी वाइट कलर के टॉप के ऊपर से मेरे सीने को दबाने लगा.
मेरे मम्मों को पकड़ते ही आशीष ने बोला- बंध्या, पहले से तुम्हारे दूध बहुत बड़े हो गए हैं … इन पांच-छह महीनों में किसी से दबवाई हो क्या? मैं बोली- नहीं आशीष, मैंने किसी को हाथ नहीं लगाने दिया, तुम पहले हो जो उस दिन किए थे, फिर तुम्हारी याद जब आती थी, तो सच सच कहूं अपने हाथों से खुद ही दबा लेती थी.
वो भी ये इमेजिन करके कि तुम दबा रहे हो.
उस समय ज्यादा दबाती थी, जब तुम फोन में मुझे करते थे.
आशीष फिर जोर से पकड़ के मेरे मम्मों को दबाकर बोला- तुम बहुत अच्छी हो, यह तेरे दूध और बड़े कर दूंगा, मैं तुमसे मिलने आता रहूंगा और अब तुम्हें कभी नहीं छोडूंगा.
मैंने आशीष की शर्ट खोल कर अपने हाथों से उतार दी.
उसने बनियान पहनी थी, तो बोला- इसे भी उतार दो.
मैं अपने हाथ से आशीष की बनियान उतारने लगी.
जैसे ही बनियान उतारना शुरू किया, उसका नंगा पेट और सीना मेरे सामने आ गया.
वह भी मेरी तरह स्लिम था, बहुत दुबला पतला, पर लंबा उसकी मंजी भूरी आंखें और मस्त सीना देखकर में गरम होने लगी.
आशीष बोला- मेरी सेक्सी बंध्या, अब मेरी पैंट को भी उतारो.
मैंने उसके बेल्ट को पहले खींचा, फिर उसकी जींस का बटन खोला और अपने हाथों से उसकी पैन्ट उतारने लगी.
उसका जो अंडरवियर था, उसके अन्दर उसका छुपा हुआ लौड़ा बहुत फूला हुआ दिखा.
एकदम फाड़कर उसका लौड़ा बाहर आने को तैयार था.
मैं अब उसके कपड़े उतार चुकी थी, सिर्फ अंडरवियर उसके शरीर पर रह गया था.
आशीष ने बोला- जान इसको भी उतार दो.
मैं बोली- मुझे शर्म आ रही है.
तभी आशीष ने कसके मेरी जींस के ऊपर से ही मेरी चुत को दबा दिया और बोला- उतार ना साली सेक्सी … और मुझे गाली भी दे … मैं बहुत पागल हो रहा हूं.
मेरे हाथ पकड़ कर आशीष ने अपनी अंडरवियर पर रख दिया.
मैं अब आशीष का अंडरवियर उतारने लगी.
मैंने उसे जैसे ही नीचे खिसकाया, आशीष का लौड़ा मेरे सामने आ गया.
वह बहुत कड़क लंबा फनफना रहा था.
आशीष ने बोला- यह मेरा लौड़ा तेरी अमानत है.
तू बहुत सेक्सी है साली बंध्या … तू भी मुझे गाली बक.
मैं बोली- आशीष तेरा लौड़ा बहुत मस्त है.
तो आशीष बोला- इसे चूस ले.
मैं बोली- आशीष मैंने आज तक ऐसा नहीं किया.
उसने मेरे खुले बाल से मुझे पकड़ा और बैठा कर बोला- ले इसे चूस बंध्या.
मैंने आशीष का लंड अपने हाथों से पकड़ कर अपने मुँह में होंठों पर लगाया, तो आशीष तड़प उठा और जोर से पकड़ कर मेरे मुँह में अपना लंड दबाने लगा.
मैंने मुँह खोल दिया, तो आशीष का लंड मेरे मुँह में घुस गया और उसे मैं चूसने लगी.
आशीष अब बिल्कुल हांफने लगा, मैं करीब दो-तीन मिनट तक उसका लंड चूसती रही.
तब आशीष बोला- चल साली कुतिया बिस्तर में आ जा.
मैं बोली- ले चल हरामी मुझे बिस्तर में.
उसने जोर का धक्का दिया, पीछे ही बिस्तर था.
मैं उस पर गिर गई.
आशीष अब बिस्तर में चढ़ गया और बोला- अब मैं तेरे एक-एक कपड़े उतारता हूं.
वो मेरे व्हाइट टॉप को पकड़ कर उतारने लगा.
उसने टॉप को उतार कर फेंक दिया.
उसके बाद में अब समीज और नीचे जींस में थी.
आशीष मेरी समीज को देख कर बोला- बंध्या तू तो पागलपन की हद है … वाह क्या मस्त उठे हुए तेरे बूब्स हैं … वो भी कड़क.
जब पहली बार गांव में पांच महीने पहले तू मिली थी, तो तेरे ठीक से दूध ही नहीं थे और अब तो कमाल के हैं.
ऐसा लगता है कि बहुत दबवाई हो यार … कुछ तो किया है.
मुझे सच बता दे, मैं बिल्कुल बुरा नहीं मानूंगा.
मैं बोली- सच बोल रही हूं आशीष मुझे तुम्हारे अलावा किसी ने नहीं छुआ.
मैं आशीष से यह सफेद झूठ बोली क्योंकि जब आशीष और मैं उसकी मामी के घर में पकड़े गए थे.
उसके बाद कमलेश सर और फिर मेरे जीजा के भाई और उनके मकान मालिक के साथ इन 5 महीनों में बहुत कुछ हो चुका था.
पूरी बात जानने के लिए पढ़ें मेरी कहानी भाई की कुंवारी साली की सील तोड़ी आशीष का शक सही था, पर मैंने उससे सब छुपा लिया.
मेरी प्रेमकथा और चुदाई की कहानी आपको अच्छी लग रही होगी.
मुझे मेल कीजिएगा.
[email protected] कहानी जारी है.

स्रोत:इंटरनेट