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मेरा सच्चा दोस्त बाबा एक गे स्टोरी

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मेरा सच्चा दोस्त बाबा एक गे स्टोरी 1

. वो दर्द से बिलबिला उठा, चिल्लाने लगा- उम्म्ह… अहह… हय… याह… ये क्या कर रहा है … निकाल बे.
पर मैंने उसकी एक न सुनी.
मुझे तो चुदाई का बुखार चढ़ा था.
मैंने बगल के टेबल पे रखी नारियल के तेल की शीशी उठाई और उसको उसकी गांड पे धार लगा कर तेल डाल दिया.
गांड में चिकनाहट हो गई और मैंने चुदाई शुरू कर दी.
वो कुछ देर चिल्लाता रहा, उसके मुँह से जोर जोर से आह आह की आवाजें निकल रही थीं.
कुछ देर के बाद वो भी जैसे मेरा साथ देने लगा, उससे लगा कि शायद इसे भी मज़ा आने लगा था.
मैंने करीब 20 मिनट तक उसे चोदा.
बीच में कुछ थपेड़े भी मारे.
उसके बाद अपना माल उसकी गांड में ही निकाल के छोड़ दिया.
उस दिन उसने मुझसे शाम तक बात नहीं की, शायद वो सदमे में था.
यह कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज पर पढ़ रहे हैं, इस पे आप रोजाना नई, रोचक और सेक्स से जुड़ी कहानियां पढ़ सकते हैं.
दूसरे दिन से फिर वही शुरू हो गया.
मैं रोज उसे चोदने लगा.
उसके मम्मे भी दबाता था, उसके गांड के गोलों पे थपेड़े भी लगाता और उसकी प्यारी तोंद तो इतनी सेक्सी थी कि क्या कहना.
क्या मज़ा आता था दोस्तों, उसकी गांड को भी मेरे लंड की आदत हो चुकी थी.
वो भी पक्का गांडू बन चुका था.
उसकी गांड को भी चुदाई की मौज लग चुकी थी.
मेरा भी चुदाई का सपना पूरा हुआ और किसी लड़की की चूत चोदने के लिए पैसे भी नहीं खर्चने पड़े.
मैं रोज़ उसकी गांड चोदता उसके मम्मे दबाता, उसके निप्पल को रगड़ता.
उसके मुँह में अपना लंड डाल के उसे मुख मैथुन कराता.
मैं कभी कभी उसके मुँह में ही अपने लंड का माल निकाल दिया करता था.
हालांकि ये बात उसे पसंद नहीं आती थी.
ये गांड चुदाई का सिलसिला करीब एक साल चला.
मैंने उन एक सालों में जो मज़े किए, जो प्यार मुझे मिला, वो दिन मैं कभी भूल नहीं सकता.
सच में दोस्तो, एक दोस्त जो कर जाएगा, वो कोई और दुनिया में कभी नहीं करेगा.
बाबा जैसा दोस्त दुनिया में हर एक इंसान की जिंदगी में होना चाहिये.
एक बार हम लोग बाथरूम में साथ में नहाये और नहाते हुए सेक्स भी किया.
उस दिन भी मैंने जमकर उसकी गांड मारी पानी.
उसके तन पर टप टप करके गिर रहा था और मैं पीछे से उसके शॉट पर शॉट लगा रहा था.
बीच में कुछ थपेड़े मार के उसके चूतड़ों को लाल भी कर दिया.
मैंने आपको एक बात अपने बारे में नहीं बताया कि मुझे चूतड़ों पर थप्पड़ मारना बहुत पसंद है.
मैं जब भी किसी कजरेली माल को देखता हूं, तो उसको देख यही सोचता था कि मैं उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारूंगा, तो कितना मजा आयेगा.
मुझे भरे हुए चूतड़ बहुत पसंद हैं.
मेरा मन करता था कि उसकी गांड के गोलों ही लाल कर दूँ.
मैं रोज अपने दोस्त बाबा को नए नए स्टाइल में चोदता था, कभी डॉगी बना के, कभी उल्टा लिटा कर, कभी-कभी मैं उसे यह भी कहता कि मेरा मुँह में लेकर चूसते रहो, जब तक कि मेरा लंड माल ना छोड़ दे.
मैं ऐसे लेटा आराम से मैगजीन पढ़ता रहता, वह भी बहुत मन लगाकर मेरे लंड को चूसता … पूरा-पूरा लंड अपने मुँह में गप से रख लेता.
लेकिन खाली मुँह में लंड चुसा कर पूरा मजा कहां आता, कुछ देर बाद में उठ कर मैं उसे चोद दिया करता.
अब तो यह बातें हम लोगों के लिए आम हो चुकी थी, लेकिन मेरा मन अभी तक नहीं भरा था.
क्या करूं मेरे मूसल लंड की जान ही ऐसी थी कि मैं जितना अपने दोस्त को चोदता, उतना ही मन करता था कि मैं बाबा को और चोदूं.
फिर कभी-कभी मन में यह भी आता कि कहीं मैं अपने दोस्त बाबा के साथ गलत तो नहीं कर रहा हूँ.
अगले ही पल मन में यह भी आता कि यह तो मेरा अपना ही दोस्त है और दोस्तों के बीच में ना कोई पर्दा होता है ना कोई संकोच.
मैं तो उसे सिर्फ प्यार बांट रहा हूं.
यह तो मेरा हक है.
उसे भी अब कोई आपत्ति नहीं थी, वह भी अब पूरे मजे ले रहा था.
लेकिन उसका भी चूत का शौक मरा नहीं था.
बाबा को आज भी इस मौके की तलाश रहती थी कि वह कैसे भी चूत चोद सके.
कानपुर आकर उसने पड़ोस वाली आंटी को सैट कर लिया था और कभी-कभी उन्हें चोद भी दिया करता था.
कानपुर में मेरे साथ रहते हुए ही ऋषभ बाबा को भगंदर हो गया था.
फिर एक दिन बाबा ने कहा- अब मैं शहर छोड़ रहा हूँ.
मैंने भी उसे नहीं रोका.
वो कानपुर से चला गया, पर जाने से पहले उसे भगंदर हो गया था.
शायद वो मेरे प्यार का परिणाम था.
लेकिन उसके जैसा दोस्त मुझे शायद इस जन्म में और अगले किसी जन्म में कभी नहीं मिलेगा.
मैं भगवान से दुआ करता हूं कि हर जन्म में बाबा जैसा ही एक मेरा दोस्त जरूर हो, जो मेरी हर जरूरत को समझे और मेरी जरूरत को पूरा करने के लिए वह अपनी दोस्ती पूरे मन से निभाए.
आज भी वो मेरे प्यार का फोड़ा अपनी गांड में लिए घूम रहा है.
अब मुझे भी एक लड़की मिल गयी है उसका नाम नेहा है.
मैं उसे खूब चोदता हूँ.
हम दोनों के बीच बहुत अच्छी बनती है.
पर आज भी मैं अपने दोस्त बाबा को बहुत मिस करता हूँ.
उसके जैसा प्यार मुझे दुबारा नहीं मिला.
आज भी जब मुझे कभी अपने दोस्त की याद आती है, तो मैं उसे फोन पर बातें कर लिया करता हूं.
अब उसकी शादी हो चुकी है.
वह अपनी जिंदगी में एक नया जीवन शुरू कर चुका है.
वो अपने रास्ते पर आगे बढ़ चुका है.
मेरी यही प्रार्थना है कि उसका शादीशुदा जीवन बहुत सुखी हो और उसे अपनी बीवी से बहुत सारा प्यार मिले.
जितना प्यार उसने मुझे दिया है … उसका 10 गुना प्यार उसे अपनी बीवी से मिले.
तो दोस्तो, आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं.
आपका दीपक आप सभी पाठकों को धन्यवाद करता है कि अपने मेरी कहानी पढ़ी.
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स्रोत:इंटरनेट