. कुछ देर यह सब होने के बाद पापा ने अपना लंड मम्मी के मुँह में डाल दिया.
मम्मी बैठी रहीं और पापा खड़े हो गए और अपने लंड को मम्मी के मुँह में अन्दर बाहर करने लग गए.
तब मम्मी ने पापा से कहा कि लाइट तो ऑफ कर लिया करो वरना कभी लड़की जाग गई तो उसे नज़र आ जाएगा.
पापा को शायद समझ में आ गया और उन्होंने लाइट बंद कर दी.
इसके बाद मुझे कुछ नज़र नहीं आया.
मगर मम्मी और पापा की आवाजें ज़रूर सुनने को मिल रही थीं.
मम्मी पापा से बोल रही थीं कि राजा तुम्हारा लंड बहुत मस्त है.
आज पड़ोसन कह रही थी कि उसका पति तो एक मिनट में ही खलास हो जाता है.. साले के लंड से कुछ मज़ा नहीं आता.
मैंने उससे कहा कि आ जा मेरे आदमी के पास आ जाओ.. हमारे आदमी के पास दिन में ही तेरी चूत को तारे नज़र आ जाएंगे.
एक बार चूत में घुस गया ना तो फिर उसको चूत से बाहर निकलवाने के लिए हाथ जोड़ोगी.
इस पर पापा कह रहे थे कि तेरी चूत मस्त है रानी.. मैं इसके पीछे पागल होता हूँ.
तुम जब नहीं होती तो मेरा लंड रो रो कर तुम्हें याद करता है.
इस तरह के बातें सुन सुन कर मुझे चुदाई का पता लग गया और फिर एक दिन असली चुदाई भी हो गई.
मैंने पिंकी के निप्पल मींजते हुए पूछा- वो कैसे हुआ? पिंकी भी मेरी चूत में उंगली देते हुए बोली- मैं अपनी माँ के साथ मामा के यहाँ किसी शादी में गई थी.
तब मेरी उम्र जवानी की दहलीज पर आ गई थी.
वहाँ मामा का लड़का जो कि मेरी उम्र का ही था.
वो मुझे एक दिन कहीं घुमाने ले गया.
वहाँ पर एक कुत्ता कुतिया की चूत को चाट रहा था.
उसने कहा कि देख इनको.. साले खुले में ही लगे हैं.
मैंने देखा कि मुँह से चाटते ही कुत्ता कुतिया के ऊपर चढ़ गया और अपना लंड उसकी चूत में फंसाने लगा.
कुछ देर धक्के मारने के बाद वो रुक गया और फिर देखा कि वो दोनों अपना अपना चूतड़ मिला कर एक हो गए हैं और दोनों का मुँह एक दूसरे से उल्टी तरफ था.
अब वो अलग अलग होना चाहते थे मगर हो नहीं पा रहे थे.
मुझे भी यह सब देखने में मज़ा आने लगा.
मैंने उससे पूछा कि यह कब अलग होंगे.
उसने कहा कि बैठ जाओ और देखती जाओ.
कुछ देर बाद तक, जब वो अलग अलग ना होने पाए तो मैंने देखा कि वो चुपचाप खड़े हो गए.
फिर कोई 10 मिनट बाद वो अलग अलग हो गए.. मगर कुत्ते का लंड जब बाहर निकला तो मैंने देखा कि नीचे से तो ठीक था मगर ऊपर से पूरा गेंद जैसा बना हुआ था.
मामा के लड़के ने कहा कि यही गेंद इसको जल्दी अलग होने नहीं देता है.
मैंने पूछा कि ये आदमियों में भी होता है.
तो उसने कहा कि क्या तुम देखोगी कि कैसा होता है.
जब मैंने कुछ नहीं कहा तो वो मुझे किसी सुनसान जगह पर ले आया और अपनी पैन्ट खोल कर बोला कि देख ले आदमी का ऐसा होता है.
उसका वो लटका हुआ था.
मैं उसको हाथ लगा कर पकड़ने लगी, मगर मेरे हाथ लगाते ही उसमें बिजली का करंट दौड़ने लगा और उसका लंड एकदम से खड़ा होने कर झटके मारने लगा.
वो बोला कि मेरा तो देख लिया, अपना छेद भी तो दिखाओ.
मैंने कहा- मुझे शरम आती है.
तो उसने कहा- जब मुझसे कहा था, तो शरम नहीं आई.. इसको हाथ लगाया तो शरम नहीं आई.
अब अपनी बारी आई तो शरम आती है.
उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और बोला कि दिखा ज़रा मुझे भी.
मैंने अब पूरी सलवार नीचे करके उसे अपनी देसी चुत के दर्शन करा दिए.
उसने भी मेरी चूत पर हाथ लगा लगा कर देखा.
फिर बोला- हम्म.. तो यह चूत है, जिसमें लंड जाता है.
ज़रा डाल कर देखूं.
मैंने कहा- हां देख लो.
उसने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पेर रख कर अन्दर करना चाहा मगर वो अन्दर नहीं जा पाया.
मैंने कहा- छोड़ो भाई… कभी बाद में किसी और के साथ कर लेना.
वो बोला- नहीं जी.. मैं तो आज ही तुम्हारी चूत के अन्दर ही करूँगा.
मेरे बहुत से दोस्त चूत में अपना लंड डाल चुके हैं.
मैं ही एक बचा हूँ.. जिसने अब तक चूत ही नहीं देखी थी.
आज तो मैं तेरी चूत में लंड डालकर ही मानूंगा.
मैं कुछ नहीं बोली क्योंकि मेरी भी चूत चुदवाने की इच्छा हो रही थी.
इतने दिनों से मम्मी को इस खेल का मजा लेते देखा था.
तभी वो लंड हिला कर बोला- तुम अपना थूक इस पर लगाओ.
मैंने अपना थूक उसके लंड पर डाल दिया.
उसने भी अपना थूक मेरी चूत के ऊपर लगा दिया.
अब उसका लंड और मेरी चूत थूक की लिसलिसी से फिसलन पैदा कर रही थी.
उसने इसी का फ़ायदा उठा कर अपना लंड मेरी चूत में घुसेड़ना शुरू कर दिया.
मगर चूत मेरी अब भी अपने अन्दर लंड को लेने के लिए तैयार नहीं थी.
अब भाई ने मुझे लिटा दिया और मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया और चूत को खोल खोल कर अपनी लार से भर दिया.
फिर उसने अपने खड़े लंड को चूत के मुँह पर रखकर एक बहुत जोर का झटका मारा.. उसका नतीजा निकला कि लंड का अगला हिस्सा चूत में समा गया और मेरी चूत से खून निकलना शुरू हो गया.
मैं एकदम से घबरा गई और रोने लगी.
मगर उसने कहा- मुझे सभी दोस्तो ने बता दिया था कि जब पहली बार चूत में लंड जाएगा तो उसमें से खून निकलेगा मगर थोड़ी देर बाद दोनों को पूरा मज़ा आएगा.
मैं चिल्लाती रही, मगर वो अपना लंड चूत में घुसेड़ता रहा और तब तक उसने अपने मन का किया, जब तक कि पूरा लंड मेरी चूत की जड़ तक अन्दर नहीं कर दिया.
जब पूरा लंड अन्दर जा चुका, तब वो आराम से मुझ पर लेट गया और साँस लेने लगा.
मगर खड़ा लंड उसको आराम करने नहीं दे रहा था.
उसने अब धक्के मार मार कर लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
मुझे सिवा दर्द के कुछ मज़ा नहीं आया और कुछ नहीं मिला मुझे.
जब उसने अपना लंड बाहर निकाला तो वो अपने मुँह से पिचकारी निकालने लगा.
मैं दर्द से बिलबिलाती हुई शांत पड़ी थी.
आधे घण्टे बाद उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और वो बोला- अबकी बार तुम्हें भी मज़ा आएगा.
मैंने कहा- नहीं मुझे अब कोई मज़ा नहीं लेना.
पहले ही से मेरी जान जा रही है.
मगर उसने कहा- एक बार और करवा लो अगर नहीं आया तो मैं बीच में ही छोड़ दूँगा.
मुझे मालूम था कि जरूर इस खेल में मजा आता होगा, तभी तो मम्मी पापा इस खेल को खेलते हैं.
ये वासना से युक्त सेक्स स्टोरी आपको कैसी लगी, प्लीज़ मुझे मेल करें.
[email protected] कहानी जारी है.
स्रोत:इंटरनेट