. “बस … हो गया … मेरा अच्छा बच्चा … ” अंकल मुझे किस करकर बहला रहे थे.
अब अंकल ने धक्के देना बंद किया था.
एक तरफ वे मेरे गालों पर किस कर रहे थे, तो दूसरे हाथ से मेरा स्तन दबा रहे थे और निप्पल भी सहला रहे थे.
मुझे थोड़ा आराम मिला, तो मैंने इशारे से मुँह पर से हाथ हटाने को बोला.
“ठीक है हाथ निकालता हूँ … पर चिल्लाना नहीं … किसी ने सुन लिया, तो आफत आ जाएगी..” कहकर उन्होंने अपना हाथ हटा दिया.
अंकल के हाथ हटते ही मैंने जोर की सांस ली और अंकल के ऊपर चिल्लाने लगी- अंकल … आप बहुत बुरे हो … मुझे कितना दर्द हो रहा है.
मैं यह कह कर उनके सीने पर हाथों से मारने लगी.
पर उनको कुछ फर्क नहीं पड़ा, वे मेरे दोनों हाथों को मेरे सर के ऊपर ले आये और अपने एक हाथ से पकड़ लिया, दूसरे हाथ से मेरा स्तन मसलते हुए हल्के हल्के धक्के देना शुरू कर दिया.
मुझे अब वेदना और सुख दोनों का अहसास हो रहा था और धीरे धीरे मजा आने लगा था.
अंकल मेरे स्तन मसल रहे थे और मुझे किस कर रहे थे, इस वजह से मेरी कामवासना भड़कने लगी थी.
मुझे अब उनके धक्कों से मजा आने लगा था.
मैं भी नीचे से कमर हिलाकर उनको साथ देने लगी और उनके सीने को दाँतों से काटने लगी.
अंकल को पता चल गया कि मुझे अब मजा आ रहा है.
उन्होंने अपने धक्कों की गति कम कर दी और मेरे स्तन को मुँह में लेकर चूसने लगे.
अंकल मेरे निपल्स को अपने दाँतों से काटते हुए मेरा पूरा स्तन मुँह के अन्दर लेने की कोशिश करने लगे.
मैं भी उनके सिर के बालों में और उनके कूल्हों पर हाथ फिराकर उनको प्रोत्साहित कर रही थी.
मेरी सीत्कारियां उनके अन्दर जोश भर रही थीं- “सश्स … आहह … अंकल … कितना सता रहे हो … उम्म … आह … काटो मत … चूसो परर … प्लीज … काटो मत.
अंकल ने मेरा मुँह अपने होंठों से बंद किया और अपने धक्कों की गति बढ़ा दी.
तूफानी स्पीड से उनका लंड मेरी चुत के अन्दर बाहर होने लगा.
मेरी चुत का बुरा हाल हो गया था, पर हम दोनों कामवासना के वश में खो चुके थे.
पता नहीं … कितनी देर से अंकल मुझे चोद रहे थे, मेरी चुत ने तीन चार बार अपना पानी छोड़ दिया था, पर अंकल रुकने का नाम नहीं ले रहे थे.
आखिरकार अपनी टॉप स्पीड पकड़ते हुए अंकल चिल्लाने लगे- आह … नीतू … कितनी टाइट चुत है तुम्हारी … मेरा लंड पूरा छिल गया … अब सब्र नहीं हो रहा … आह … मैं आ रहा हूँ.
अपना लंड चुत के जड़ तक घुसाकर अंकल एक के बाद एक वीर्य की पिचकारी मेरी चुत में छोड़ने लगे.
उनकी पिचकारी किसी चाबुक की तरह चुत में अन्दर तक गरमागरम वार कर रही थी.
एक वार … फिर एक वार … अंकल रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे.
पहली दो तीन पिचकारियों में ही मैं होश खो बैठी थी.
जब मुझे होश आया, तब अंकल मेरे पास ही लेटे थे और मेरे चुचे चूस रहे थे.
मैंने उनकी तरफ मुड़ने की कोशिश की, तो मेरे पेट में तेज दर्द उठा.
मैं फिर से उसी पोजीशन में बेहोश हो गयी.
थोड़ी देर बाद जब होश आया, तो अंकल नैपकिन गर्म पानी में गर्म कर कर के मेरी चुत की सिकाई कर रहे थे.
मेरी आंखें खुली देख कर उन्होंने पूछा- नीतू … अब कैसा लग रहा है.
? मैं सिर्फ हां में सिर हिलाकर वैसे ही पड़ी रही.
थोड़ी देर की सिकाई के बाद ही मैं खड़ी हो पाई.
मैंने उठकर देखा तो चादर पर खून के धब्बे थे.
“अंकल … खून?” मैंने डर कर अंकल से पूछा.
“नीतू … डरो मत … पहली बार ऐसा होता है … मैं तुम्हें दवाई ला दूंगा … फिर सब ठीक हो जाएगा.
” अंकल ने मुझे बाथरूम ले गए और मेरी चुत को अच्छे से साफ किया और किचन में ले जाकर दूध के साथ एक गोली दी.
मैंने उसे बिना कोई सवाल किए गटक ली.
मुझे अब भी बहुत दर्द हो रहा था, जैसे तैसे मैं अपने घर गयी और बेड पर लेट गयी.
शाम की मम्मी और भाई दोनों घर पर आ गए.
मम्मी को मैंने दोपहर जो ही बोला था कि मेरी तबियत खराब है, इसलिए मम्मी ने मुझे आराम करने दिया.
अगले दो दिन शनिवार रविवार वैसे ही मेरे कॉलेज की छुट्टी थी.
अंकल ने चुपके से मुझे और गोलियां लाकर दीं, जिसे मैं दो दिन छुप छुप कर लेती रही.
दो दिन मिले आराम और अंकल की दी हुई गोलियों की वजह से मैं ठीक ठाक होकर सोमवार से कॉलेज जाने लगी.
पर एक बार किसी चीज की आदत लग जाती है, तो फिर जल्दी से छूटती नहीं, कॉलेज में रहकर भी मन अंकल के ख्यालों में ही डूबा रहता.
अंकल ने किस तरह मेरे बदन को मसला था, किस तरह मेरे होंठों की चुसाई की थी, कितनी बेदर्दी से मेरे स्तनों को रगड़ा था और आखिर में किस तरह उन्होंने अपना विशाल लंड मेरी कमसिन चुत में घुसाकर मेरी चुदाई की … ये सभी प्रसंग याद आते ही मेरी चुत पानी छोड़ने लगती है.
मेरे निप्पल खड़े हो जाते हैं.
हमारी कामक्रीड़ा के एक हफ्ते बाद ही मुझे पीरियड्स हुए और मेरा बहुत बड़ा टेंशन चला गया.
अंकल से चुदते वक्त पेट से रहने का ख्याल मेरे दिमाग में नहीं आया, पर दो तीन दिन बाद उसका डर मुझे सताने लगा था.
वो डर भी अब चला गया.
एक बार चोरी करने के बाद अगर पकड़ा न जाए, तो चोर रिलैक्स हो जाता है … वैसे ही मैं रिलैक्स हो गयी थी.
उस दिन के बाद मैं टेंशन से अंकल के सामने जाने से भी कतरा रही थी, पर कुछ भी करो, ये सब इतनी जल्दी नहीं भुलाया जा सकता है.
उस पर अंकल की दी हुई गोलियां काम करती हैं, पता चलने पर मैं फिर से बिंदास हो कर अंकल के नजदीक जाने लगी.
एक दिन अंकल ने मुझे अकेले में पूछा भी- क्यों नीतू … सब ठीक है ना? उनकी आवाज से ही पता चल रहा था कि वो भी टेंशन में हैं.
“हां अंकल … मुझे कहां कुछ हुआ है..” मैं मजाकिया अंदाज में बोली.
“नहीं … तुम्हारे … पीरि..य..ड्स … सब कुछ टाइम से है ना?” उनका चेहरा देखकर मुझे हंसी कंट्रोल नहीं हो रही थी.
मैं उनके कान के नजदीक अपना चेहरा ले जाकर बोली- आज चौथा दिन है.
यह कह कर मैंने उनके कान को काटा.
मेरी बात सुनकर अंकल इतने खुश हुए कि उन्होंने मुझे गोद में उठाकर एक जबरदस्त किस किया.
अब मैं और अंकल मौका ढूंढते रहते हैं.
मेरे जिद करने पर उन्होंने अपने साथ कंडोम रखना शुरू कर दिया.
उनके उस लंबे हथियार को तीन चार बार चुत में लेने के बाद अब दर्द होना बंद हो गया.
अंकल की वजह से मम्मी और आंटी अब हर हफ्ते फ़िल्म देखने जाने लगी हैं.
एक बार आंटी और मम्मी फ़िल्म देखने जा रही थीं, अंकल गैलरी में खड़े होकर उन्हें बाई बाई कर रहे थे.
मैं चुपके से जाकर उनकी लुंगी में घुस गई और उनकी चड्डी नीचे खींच ली.
अंकल तो शॉक हो गए.
गैलरी की घनी बाउंड्री की वजह से नीचे क्या हो रहा है, आंटी को दिखना नामुमकिन था.
मैं मजे से उनका लंड सहला रही थी, चूस रही थी.
उधर अंकल बड़ी मुश्किल से आंटी से बात कर पा रहे थे.
आंटी कुछ दूर जाने तक अंकल ने मुश्किल से खुद को कंट्रोल किया, लेकिन फिर उन्होंने मुझे ऐसा चोदा कि पूछो मत.
वे बेडरूम में भी नहीं गए, गैलरी के पास वाले रूम में ही मुझे जमीन पर लिटाया और दनादन धक्के देने लगे.
अंकल करीब आधे घंटे तक मुझे उसी पोजीशन में चोदते रहे, चुत में वीर्य की सात आठ पिचकारी मारने के बाद ही वो शांत हुए और दस पंद्रह मिनट वो वैसे ही मेरे बदन पर पड़े रहे.
बाद में अंकल सोसाइटी के चेयरमैन बन गए, फिर तो शाम को सेक्युरिटी को किसी काम के लिए बाहर भेज कर पार्किंग के पास एक बंद कमरे में हमारा चुदाई का कार्यक्रम चलने लगा.
अगले तीन चार साल पार्किंग की लाइट रिपेयर ही नहीं हुई … और वो रूम खाली ही पड़ा रहा.
उधर हम दोनों का चुदाई का खेल खूब मस्ती से चलता रहता था.
अंकल ने मुझे चुदाई की कला में एक्सपर्ट बना दिया है.
मेरी कमसिन जवानी और उनकी अनुभवी वासना हर बार हमें एक नए शिखर पर ले जाती थी.
वैसे तो मुझे लंड चूसना पहले अच्छा नहीं लगता था, पर अब अच्छा लगने लगा है.
अब तो जब अंकल ढीले पड़ जाते हैं, तो मैं उनका लंड चूस कर उनके ऊपर घुड़सवारी करती हूं.
अंकल ने मुझे सेक्स के बहुत से गंदे शब्द भी सिखा दिए हैं.
हम दोनों को जब भी मौका मिलता है, हम तूफान मचा देते हैं.
अब अंकल मेरी गांड खोलने की फिराक में हैं.
इसके लिए आजकल वे मेरी चूत में लंड पेलने के समय अपनी उंगली को थूक से गीला करके मेरी गांड में चलाते रहते हैं.
इससे अंकल मेरी गांड को ढीला कर रहे हैं.
जब गांड मारने लायक हो जाएगी, तो मेरी गांड भी अंकल के लंड से ही खुलेगी … उसका किस्सा आपको जरूर सुनाऊंगी.
मेरी कमसिन चूत की चुदाई की कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करके जरूर बताइएगा.
मेरी मेल आईडी है.
[email protected]
स्रोत:इंटरनेट