. तब तक मैंने थूक लगा कर लंड का टोपा उसकी गांड पर टिका दिया.
वह गांड को इधर उधर हिलाने लगा.
शायद उठने की कोशिश कर रहा था.
मगर मैंने उसकी कमर को पकड़ लिया और थोड़ा जोर लगाकर आधा लंड उसकी गांड में उतार दिया.
मैंने कहा- देख भाई, अगर अब ज्यादा नौटंकी करेगा या हिलाई-डुलाई करेगा तो दर्द तुझे ही होना है.
अब लौड़ा फिट हो चुका है.
चुपचाप टांगें चौड़ी करके गांड को ढ़ीली छोड़ दे और गांड चुदवाने का मजा ले ले.
उसे मेरी बात समझ में भी आ गयी.
फिर मैंने उसके कंधों के नीचे से बांहें निकाल कर उसके सीने को जोर से कस लिया और जोर का धक्का दिया.
अब पूरा लंड उसकी गांड में चला गया.
वह भी अब चुपचाप लेटा हुआ था.
मैंने उसके नर्म से गाल पर एक गीला सा जोरदार चुम्मा लिया और कहा- बस मेरे राजा, ऐसे ही लेटा रह, दोनों को जन्नत का मजा आने वाला है.
ज्यादा देर नहीं लगेगी, जल्दी ही निपटा दूंगा तुझे.
वो हंसते हुए बोला- आप भी न … बहुत पटाते हैं.
मैंने धक्का देते हुए कहा- जानेमन, लग तो नहीं रही न? उसने कुछ जवाब न दिया.
संकेत साफ था.
उसको मजा आ रहा था.
फिर मैं भी धीरे धीरे रेल के इंजन की तरह चालू हो गया.
चोदते हुए मैंने पूछा- मजा आ रहा है क्या? वो बोला- जब लंड गांड में घुसा है तो मजा तो आयेगा ही.
न भी आये तो अपने आप आने लगता है.
दो मिनट के बाद धीरे धीरे उसकी गांड में हरकत होने लगी थी.
मैं समझ गया कि अब यह गांड चुदवाने का पूरा आनंद ले रहा है.
मैं दे दना दन, धच्च-धच्च, पच्च-पच्च शुरू हो गया.
गांड चोदने में भी पूरी ताकत लगती है इसलिए जल्दी ही सांस फूलने लगी.
मेरा पसीना निकलने लगा.
कुछ ही देर में पानी भी निकल गया.
मजा आ गया उसकी गांड चोद कर.
हम दोनों अलग अलग हो गये.
फिर थोड़ी देर वैसे ही नीचे से नंगे पड़े रहे.
उसके बाद दोनों ने पैंट पहनी.
उस दिन के बाद तीन-चार बार मैंने उसकी गांड मारी.
एक बार मैं दुकान में ही उसकी गांड मार रहा था कि उस्ताद जी आ धमके.
हम जल्दी से अलग हो गये.
उस वक्त तो उन्होंने देख कर भी कुछ नहीं कहा.
दो चार दिन के बाद मैं और उस्ताद जी दुकान में अकेले ही थे.
वो बोले- तो तुमने वो लौंडा पटा ही लिया.
मगर इसका टैक्स तो तुम्हें मुझको भी देना होगा.
उनकी बात सुनकर मैं भी मुस्करा दिया लेकिन गांड पहले ही फट रही थी.
सोच रहा था कि आज तो अपनी भी चुदवानी पड़ेगी.
उस्ताद जी बोले- तो फिर आज रुकें? मैं सोच में था.
कुछ कहने की स्थिति में नहीं था.
जानता नहीं था कि टेलर मास्टर का औजार कितना बड़ा होगा.
ये भी नहीं मालूम था कि गांड चोदने की उनकी शैली कैसी है.
मैं सोच ही रहा था कि उस्ताद जी मुझे एक कोने में ले गये.
मेरे पैंट की चेन खोल कर मेरा लंड अपने हाथ से आगे पीछे करने लगे.
लौड़ा जब खड़ा हो गया तो उन्होंने लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
मुझे मजा आने लगा.
मैंने खुद ही फिर अपनी पैंट को नीचे कर लिया और अंडरवियर भी नीचे कर लिया.
फिर संगीत मास्टर ने भी अपने कपड़े उतार डाले.
उनकी गांड मेरी ओर ही थी.
गांड बहुत मस्त थी उनकी.
कपड़ों में इतनी सुडौल नहीं लग रही थी जितनी नंगी होकर लगी.
अगले ही पल वो जमीन पर औंधे लेट गये.
अपनी गांड को मेरे सामने ऊपर उठा दिया.
मैं भी जैसे मेंढक की तरह कूद कर उनके ऊपर चढ़ गया और अपना लंड उस्ताद की गांड पर टिका दिया.
जैसे ही टोपा गांड में लगा कर हल्का सा जोर दिया तो लौड़ा गांड में उतर गया.
गांड का छेद ढीला था.
एक ही धक्के में पूरा लंड गांड में घुस गया.
मैं अंदर-बाहर, अंदर-बाहर करते हुए शुरू हो गया.
मगर उस्ताद जी की गांड का रिदम मुझसे भी ज्यादा मजेदार था.
मेरे धक्कों से तेज तो उनकी गांड चल रही थी.
झड़ने में देर लग रही थी.
गांड मैं उनकी मार रहा था लेकिन गांड मेरी भी फट रही थी.
बड़ी देर लगी छूटने में लंड का पानी.
उस्ताद जी खुश हो गये.
उसके दो दिन बाद फिर से उन्होंने अपनी गांड की खुजली मेरे लंड से मिटवाई.
फिर एक दिन मैंने कहा- ज़रा मुझे भी खुश कर दो मास्टर जी? उनके कुछ कहने से पहले ही मैं उनके सामने पैंट और अंडरवियर उतार कर लेट गया.
उस दिन पहली बार मैंने ध्यान से उनका दस इंची हथियार देखा.
बहुत ही मस्त था.
कुछ करने से पहले वो बोले- बीच में कुछ मत बोलना.
लौंडे गांड मरवाने के लिए तैयार तो हो जाते हैं लेकिन फिर बीच में चिल्लाने लगते हैं.
मास्टर जी को नहीं पता था कि मैं भी पुराना खिलाड़ी रह चुका हूं.
कई मोटे और लम्बे लंडों की ठोकरें अपनी गांड पर झेल चुका हूं.
मेरे चूतड़ देख कर उस्ताद जी बोले- तेरे चूतड़ तो मस्त हैं.
फिर वो मेरी जांघों को चूमने लगे.
फिर चूतड़ों को मसलने लगे.
फिर सिसियाते हुए बोले- आह्ह … बहुत दिनों के बाद ऐसा मस्त माल देखा है.
तभी वो उठे और अपनी अलमारी से एक तेल की शीशी निकाल कर ले आये.
अपनी उंगलियों से मेरी गांड में तेल अंदर तक लगाने लगे.
बड़ी देर तक अंदर उंगली घुमाते रहे.
फिर अपने लंड को तेल से चुपड़ते रहे.
उसके बाद दोनों हाथों से मेरे चूतड़ों को फैला कर अपना लंड मेरे छेद पर टिकाया और धक्का दिया.
बोले- थोड़ा ढीला कर! मैं जानबूझ कर आआ .. ईई … आई.. आई .. करने लगा.
वो धीरे धीरे डाल रहे थे.
मैं चाहता था कि वो जल्दी से अपना पूरा हथियार पेल दें.
बहुत दिनों से इतने मस्त लंड से गांड मरवाने का मौका नहीं मिला था.
उस्ताद बोले- शाबाश! ऐसे ही ढीली करे रहो बस…अह्ह। इतना कह कर उन्होंने पूरा लंड मेरी प्यासी गांड में पेल दिया.
वे धीरे धीरे अंदर-बाहर अंदर-बाहर करने लगे.
मगर इस तरह से कब तक बैलगाड़ी की चाल चलते.
दे दनादन, दे दनादन हो गये शुरू.
लग गये पूरे जोर से चोदने.
मेरी गांड को पूरे जोश में रगड़ने लगे.
मुझे मजा आने लगा.
मैं भी उचका उचका कर मरवाने लगा.
वे मारते मारते बोले- लग तो नहीं रही? धीरे करूं? मैं कहना चाहता था- ‘उस्ताद और जोर से।’ मगर कह नहीं पाया.
हां मगर बार बार गांड को ढीली छोड़ता और कस देता.
इस तरह से उस्ताद का पूरा साथ दिया.
दस मिनट तक मेरी गांड को बुरी तरह से रगड़ने के बाद उस्ताद मेरी गांड में ही झड़ गये.
उस्ताद जी मेरी गांड में खाली होकर मेरे ऊपर ही लेटे रह गये.
बहुत दिनों के बाद किसी से गांड मरवाकर इतना मजा आया मुझे.
लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दी जा रही है.
स्रोत:इंटरनेट