. उधर मेरे पीछे एक धोती वाला बाबा टीका लगाए हुए खड़ा था.
वो मुझे हाथ पर टच करने लगा.
मैंने भी उसको कुछ नहीं बोला और उसी के आगे शांत खड़ी रही.
इससे उसका हौसला बढ़ गया और वो पहले तो धीरे से … फिर कुछ तेज़ से मेरी गांड को टच करने लगा.
मुझे भी मज़ा आने लगा.
मेरी किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया न होने पर उसने अपना हाथ मेरी कमर पर रख दिया और मेरी प्रतिक्रिया का इन्तजार करने लगा.
मैंने अब भी कुछ नहीं कहा, तो वो मेरी कमर को दबाने और सहलाने लगा और फिर कमर से हाथ आगे मेरी नाभि पर लाकर उसमें उंगली करने लगा.
उसकी इस हरकत ने तो मुझे पागल सा कर दिया.
मैं एकदम पीछे हो कर उससे सट गयी और अपनी गांड से उसके लंड को दबाने लगी.
कुछ ही देर बाद उसने एक हाथ से मेरे एक चूचे को पकड़ा और ज़ोर से दबा दिया.
मुझे हल्का सा दर्द हुआ, तो मैंने उसको हल्का सा पीछे धकेल दिया.
इससे वो समझ गया कि मुझे लग रही है.
कुछ पल बाद उसने फिर से हाथ को मेरे दूध पर रखा और धीरे धीरे से मेरे दूध को मसलने लगा.
मैंने ब्लाउज के नीच ब्रा नहीं पहनी थी.
मेरा ब्लाउज भी पतले कपड़े का था, जिसमें से मेरे निप्पलों ने कड़क होना शुरू कर दिया था और झीने से ब्लाउज में मेरे चूचुक एकदम तन गए थे.
वो बूढ़ा बाबा अपने दोनों हाथों से मेरे निप्पलों को सहलाने और मींजने लगा.
उसका लंड मेरी गांड की दरार में आग लगा रहा था.
कुछ देर तक हम दोनों ने वहां पर यूं ही मस्ती मजा किया.
फिर उस धोती वाले आदमी ने मुझे कान में धीमे स्वर में अपने पीछे आने को बोला.
तो मैंने भी हां कर दी.
वो एक तरफ को जाने लगा, तो मैं भी उसके पीछे चलने लगी.
स्टेज से थोड़ी दूर पर ही कुछ कमरे बने थे, जहां पर सब प्रतिभागी तैयार हो रहे थे.
मैं उधर आ गयी.
वो बाबा मुझे तीसरे फ्लोर पर ले गया.
वहां से चढ़ कर ऊपर गए तो सीढ़ी से साथ के ही सामने पहले एक कमरा था.
वो मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर ले गया.
उस कमरे के अन्दर एक और कमरा था.
वहां ज़मीन पर गद्दा बिछा था.
मैं उसके साथ अन्दर चली गयी और एक तरफ खड़ी हो गई.
उसने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया और मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुरा दिया.
मैं भी मुस्कुरा दी.
मेरी मुस्कान देखते ही वो मुझ पर टूट पड़ा.
मुझे पूरे शरीर पर हर जगह उसने चूमा और चाटा.
मेरा पल्लू हटा दिया और मेरा ब्लाउज उतार कर साइड में रख दिया.
अब मेरी चौंतीस इंच की बड़ी बड़ी चुचियां उसके सामने नंगी थीं.
जिसको देख कर वो खुद को ना रोक सका और मेरी चूचियों को चूसने लगा.
मुझे भी अपने मम्मे चुसवाने में मजा आने लगा.
उसने मेरी चूचियों को चूस चूस कर लाल कर दिया.
मैंने उसके लंड पर हाथ लगा दिया.
ये देख कर वो अपनी धोती उठा कर ज़मीन पर सीधा लेट गया और मुझे अपना लंड चूसने को बोला.
मैं बैठ गई और उसका आठ इंच का लंड पकड़ कर सहलाने लगी.
उसने लंड चूसने का कहा, तो मैंने उसके मोटे लंड को अपने होंठों से लगा लिया और उसके लंड का मज़ा लेने लगी.
मैंने पांच मिनट तक उसके लंड को बड़े प्यार से चूसा.
वो एकदम खौल गया था.
उसने अपनी कमीज की जेब से एक दारू का अद्धा निकाला और नीट ही हलक से नीचे उतारने लगा.
मैंने उसके हाथ में दारू देखी, तो मैंने भी उससे अद्धी लेकर दो घूंट खींच लिए.
साली बहुत तेज दारू थी, अन्दर आग की लकीर सी खींचती चली गई.
मैं मुँह का स्वाद सही करने के लिए उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी.
कुछ ही देर में नशा हावी होने लगा और उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने ऊपर बैठा लिया.
अब वो मेरी गरमागरम चूत में अपना लंड डालने लगा.
मैंने भी उसके लंड को अपने हाथ से पकड़ कर अपनी प्यासी चुत में सैट कर लिया.
उसका लंड सरसराता हुआ मेरी गीली हो चुकी चुत में घुस गया.
मेरी एक मस्त आह निकल गई.
वो लंड अन्दर करते ही मुझे चोदने लगा.
उसका लंड मेरी बच्चेदानी तक चोट कर रहा था.
मुझे भी चुदने में मज़ा आ रहा था.
मैं अपने कंठ से कामुकता भारी आवाजें निकाल कर और अपनी गांड उठा उठा कर उससे चुदवाने लगी.
कुछ देर तक मुझे चोदने के बाद वो खड़ा हुआ और अपना लंड मेरे मुँह में डाल कर ज़ोर ज़ोर से धक्का देने लगा.
कुछ देर में वो मेरे मुँह में ही झड़ गया.
उसका पानी मेरे गले की प्यास बुझाने लगा.
अब मेरी चुत और मेरे गले की प्यास उसके लंड ने बुझा दी थी.
हमारी चुदाई को करीब आधा घंटा हो गया था.
अब मैं वहां से उठ कर अपने कपड़े पहनने लगी और बाहर निकल आई.
जैसे ही मैं बाहर आई, तो मैंने देखा कि मेरे बेटे का एक दोस्त सामने खड़ा था.
उसे देख कर मैं एकदम से चौंक गई और अपने मुँह को ढकने लगी.
इस सेक्स कहानी के अगले भाग में आपको आगे बताऊंगी कि बेटे के दोस्त ने मेरी चुदाई कैसे की.
आपके मेल मुझे उत्तेजित और उत्साहित करते हैं.
प्लीज़ जरूर लिखिएगा.
[email protected] कहानी का अगला भाग: मेरी चूत की प्यास कैसे बुझी-2
स्रोत:इंटरनेट