. चूंकि मैं अब जाग रही थी, लेकिन आंखें मूंदे हुए थी, तो उसे ये बात नहीं पता थी.
कुछ देर तक मेरी जांघ सहलाने के बाद वो अपना हाथ मेरी चुचियों पर ले आया.
पहले तो कुछ देर वो अपना हाथ मेरी चूचियों पर बस यूं ही रखे रहा.
शायद वो ये देख रहा था कि मैं सो रही हूँ या नहीं.
मैंने अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं क्या तो वो समझ गया कि मैं गहरी नींद में सो रही हूँ.
वो धीरे से मेरे चूचों को सहलाने लगा … फिर दबाने लगा.
एक मिनट बाद वो मेरा हाथ अपने लंड पर रख कर लंड सहलवाने लगा.
मैं भी गहरी नींद में सोने का नाटक कर रही थी.
कुछ देर बाद उसका लंड पूरा खड़ा हो गया और उसने अपना लंड बाहर निकाल कर मेरे हाथ से पकड़ा दिया और धीरे धीरे से हिलाने लगा.
वो दूसरे हाथ से मेरा पल्लू नीचे करके मेरी चुचियों का मानो नाप ले रहा था … मतलब दबा रहा था.
कुछ देर मज़ा लेने के बाद वो थोड़ा साइड में हुआ और तिरछा होकर बैठ गया.
उसने मेरा सर पकड़ कर धीरे से अपनी गोद में यूं ले लिया जैसे वो मुझे सुलाने के लिए झुका रहा हो.
ऐसा करके उसने मेरे मुँह को अपने तने हुए लंड पर रख दिया.
फिर उसने अपने हाथ से मेरे गाल दबा कर मुँह खोल कर अपना लंड मेरे मुँह में घुसाने लगा.
मैंने अपने मुँह में उसका लंड ले लिया.
वो धीरे धीरे अपने लंड से मेरे मुँह को मानो चोदने लगा.
कुछ देर बाद वो मेरे मुँह में ही झड़ गया और फिर उसने मुझे सीधा करके मेरे कपड़े सही कर दिए और मुझे लिटा दिया.
मेरे मुँह में उसका वीर्य का खट्टा स्वाद मुझे वासना से भर रहा था.
कुछ देर में मैं फिर से सो गयी.
सुबह जब मेरी आंख खुली, तो देखा कि मेरे बेटे का दोस्त उसको ब्रेड खिला रहा था.
कुछ देर मैं भी उसी के पास रही और उसके दोस्त से बोली कि इसका ध्यान रखना … मैं कुछ देर के लिए घर से होकर आती हूँ.
जैसे ही मैं निकलने लगी, तो उसका वही दोस्त सामने खड़ा था, जिसने मुझे रात को अपना लंड चुसाया था.
उसको तो ये मालूम नहीं था कि मुझे भी मालूम है कि रात को क्या हुआ था.
उसने पूछा कि आंटी आप कहां जा रही हैं? मैंने बोला कि घर जा रही हूँ.
उसने कहा कि चलो मैं आपको छोड़ देता हूँ.
मैं उसके साथ घर आ गयी.
वो बाहर ही खड़ा रहने का कहते हुए बोला कि आप जल्दी से काम खत्म करके आ जाओ, मैं बाहर खड़ा हूँ.
मैंने बोला- अरे बाहर क्यों हो … आओ अन्दर आ जाओ.
मेरे कहने से वो अन्दर आ गया.
मैंने उससे कहा कि बेटा मैं तुम्हारे लिए चाय बना कर लाती हूँ.
मैं किचन में गयी और चाय चढ़ा कर कमरे में आ गई.
मैंने कपड़े बदल लिए.
मैं घर में हमेशा नाईटी ही पहनती हूँ.
आज मैंने जानबूझ कर एकदम सेक्सी वाली नाइटी को पहन लिया.
इसमें मेरे चौंतीस इंच के चूचे एकदम बाहर थे.
मैंने ब्रा जानबूझ कर नहीं पहनी थी.
कुछ देर बाद में उसके लिए नाश्ता और चाय बना कर ले आई.
मैंने जानबूझ कर उसके सामने झुक कर टेबल पर ट्रे को रखा.
जैसे ही उसकी निगाह मुझ पर पड़ी, तो वो बस मेरे मम्मों को देखता ही रह गया.
मैं वहीं बैठ गई और हम दोनों ने चाय पी.
मैं- क्या अब तुम घर जाओगे? वो- नहीं मैं घर नहीं जा सकता.
मेरा घर दूर है … मैं हॉस्पिटल में जाकर नहा लूँगा.
मैं- अरे नहाना ही है, तो यहीं पर नहा लो.
मेरे बेटे के कपड़े पहन लेना.
वो- हां, ये ठीक है आंटी.
मैंने उसको तौलिया दे दिया और उसको बाहर वाला बाथरूम इस्तेमाल करने को बोल दिया.
वो एक ही मिनट बाद बाथरूम में से बाहर निकल कर आ गया और बोला कि आंटी इसमें तो पानी ही नहीं आ रहा है.
तभी मुझे भी याद आया कि इसका नल खराब है.
मैंने उससे कहा- कोई बात नहीं, तुम मेरे बेटे के कमरे वाले बाथरूम में बाथरूम में चले जाओ.
तब तक मैं तुम्हारे लिए कपड़े निकाल देती हूँ.
वो चला गया और नहाने लगा.
मैं भी अपना काम खत्म कर चुकी थी, इसलिए अपने रूम में आ गयी.
मुझे इस समय ये बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि मेरा बाथरूम कोई इस्तेमाल कर रहा है.
मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपने पूरे शरीर पर तेल लगाने लगी.
उसी समय एकदम से बाथरूम का दरवाज़ा खुला और वो मेरे सामने तौलिया में खड़ा था.
मैं उसके सामने पूरी नंगी थी.
उसको देखते ही मैं तुरंत खड़ी हुई और अपने एक हाथ से बूब्स को, तो दूसरे हाथ से अपनी चूत को छुपाने लगी.
वो मुझे नंगा देख कर मेरे पास आया और उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया.
मैंने उससे अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा- ये क्या कर रहे हो तुम? तुम तो बेटे के कमरे वाले बाथरूम में नहाने गए थे! उसने बोला- मुझे आपके कमरे वाले बाथरूम में ही नहाना था.
प्लीज़ आंटी एक बार कर लेने दो … बहुत दिन से आपको पटाने की कोशिश कर रहा हूँ … आज मौका मिला है.
मैंने उससे बोला- नहीं … ये सब ग़लत है.
उसने बोला- कुछ ग़लत नहीं है.
इतना बोलते हुए वो मुझे किस करने लगा.
अब मर्ज़ी तो मेरी भी थी, लेकिन मैं तुरंत तो उससे नहीं चुदवा सकती थी … तो पहले मैंने थोड़ा नाटक किया.
लेकिन उसने मेरी एक ना सुनी और मुझे बेड पर लिटा कर मेरी चूत चाटने लगा.
मैंने भी खुद को उसके हाथों में छोड़ दिया और आंख बंद करके मज़ा लेने लगी.
तकरीबन दो मिनट तक उसने मेरी चूत चाटी और अपनी तौलिया खोल कर मुझे लंड चुसवाने लगा.
मुझे भी उसका लंड एक बार चूस कर बहुत मज़ा आया था.
अब दुबारा से मैं खुद ही बड़े प्यार से उसका लंड चूसने लगी.
कुछ देर की लंड चुसाई के बाद वो खड़ा हो गया.
उसने मुझे भी दीवार के सहारे खड़ा कर दिया.
मेरी एक टांग उठा कर उसने मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया और मुझे धकापेल चोदने लगा.
कुछ देर मेरी बुर चोदने के बाद उसने मुझे उल्टा करके बेड पर लिटा दिया.
मेरे पैर को ज़मीन पर ही रखकर अपनी एक टांग ऊपर कर दी.
फिर उसने मेरी गांड के छेद पर अपना लंड सैट किया और एक झटके में पूरा अन्दर डाल दिया.
मेरी दर्द भरी कराह निकल गई.
वो बड़ी बेदर्दी से मेरी गांड चोदने लगा और कुछ देर बाद मुझे भी गांड मराने में मजा आने लगा.
कोई बीस मिनट तक हम दोनों ने ये चुदाई का खेल खेला.
फिर उसने अपना सारा माल मेरी चुचियों पर ही छोड़ दिया और मेरी बगल आकर लेट गया.
वो बोला- आंटी आपको चोद कर मज़ा आ गया.
मैंने भी उसे चूम लिया.
कुछ देर बाद हम वहां से हॉस्पिटल चले आए.
अगले दो दिन तक मेरा बेटा वहां पर भर्ती रहा.
उसके उसी दोस्त ने बारी बारी अपने सभी दोस्तों को मुझे चोदने के लिए बताया, तो उन सभी ने मुझे कभी हॉस्पिटल में, तो कभी मेरे घर में मुझे कुतिया बना कर चोदा.
अब वो सब मेरे चोदू यार बन गए हैं.
अब उनमें से कोई भी दोस्त जब भी मेरे घर आता, मुझे कुतिया बना कर चोद कर चला जाता.
इससे मेरी चुत के लिए कई लंड उपलब्ध हो गए थे और मुझे चुत की आग के साथ अपनी गांड मरवाने का सुख भी मिलने लगा था.
मेरी चूत की प्यास की कहानी पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया.
मुझे मेल जरूर करें.
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स्रोत:इंटरनेट