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मेरी बहन की जवानी की प्यास

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मेरी बहन की जवानी की प्यास 1

. उसने आगे बोला- दादा जी भी मुझसे खुश थे, तो मुझे कभी 100 कभी 200 रुपये दे दिया करते थे, पर मेरा इतने पैसों से मन नहीं भरता था, तो मैंने उनको एक दिन बोला कि आप मुझे नया मोबाईल दिला दो, मैं आपको धीरे धीरे करके सारे पैसे वापस कर दूंगी.
दादाजी बोले- तू मोबाईल कहाँ रखेगी … तेरे घर वाले पूछेंगे कि किसने दिलाया, तो क्या बोलेगी.
मैंने बोला कि मैं घर में किसी को नहीं पता लगने दूंगी, बस आप मुझे मोबाईल दिला दो.
“फिर?” बहन बोली- उन्होंने मुझसे बोला कि तुझे मोबाईल दिला कर मुझे क्या मिलेगा.
मैंने सोचा शायद बात बन सकती है, तो मैंने उनसे बोल दिया कि आप जो चाहो, मैं आपको दूंगी.
तब उन्होंने मुझसे कहा- ठीक है, कल मैं तेरे लिए मोबाइल और न्यू सिम कार्ड ले आऊँगा, पर आज तुझे मेरा एक काम करना पड़ेगा.
मैंने झट से बोला जी कहिये क्या करूँ? तो उन्होंने मुझे तेल दिया और बोले- मेरी मसाज कर दे, मुझे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है.
मैं तुरंत मान गई, वो अपने अंडरवियर को छोड़ कर सारे कपड़े निकाल कर सीधा लेट गए.
मैंने खुशी खुशी उनकी खूब मालिश की.
फिर उन्होंने बोला- जरा मेरी जांघों पर भी मालिश कर दे.
मैंने तेल लिया और उनकी जांघों पर मालिश करने लगी.
तभी अचानक मेरा ध्यान उनकी चड्डी पर गया, उसमें टेन्ट बन गया था.
दादाजी बोलने लगे- थोड़ा और ऊपर कर.
मैं बोली- ज्यादा ऊपर करूँगी तो आपकी अंडरवियर खराब हो जाएगी.
मेरा इतना बोलते ही उन्होंने अपना कच्छा उतार दिया.
वे मेरे सामने बिल्कुल नंगे हो गए.
मैं एकदम से चौंक गई और पलंग से नीचे आ गई.
उन्होंने मुझे पकड़ लिया और बोले- मोबाईल चाहिए कि नहीं? मैंने बोला- मुझे घर जाना है.
उन्होंने मुझे बोला- अगर तूने मेरी मसाज नहीं की, तो मोबाईल भूल जा.
पता नहीं मुझे क्या हुआ और मैं मान गई.
फिर उन्होंने मुझसे अपने लंड की मसाज कराई और बस दो मिनट में उनका पानी निकल गया.
मैंने बोला- अब ठीक है? उन्होंने बोला- हां बेटा तूने मुझे मजा दिया है … अब तू जो भी मांगेगी, मैं तुझे ला दूँगा.
इसके बाद मैं वहाँ से आ गई.
अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
मैंने सोचा अगर मेरे मसाज करने से दादाजी मुझे मोबाईल दिला सकते हैं, तो मैं रोज उनकी मसाज किया करूँगी.
दूसरे ही दिन दादाजी ने मुझे नया मोबाईल ला दिया और मैंने फिर उनके लंड की मसाज की और घर आ गई.
अगले दिन मैं जब वहां गई, तो वो पहले से ही नंगे ही पलंग पे पड़े अपना लंड हिला रहे थे.
मैंने जल्दी से दरवाजा बन्द किया और पूछा कि आज आप ऐसे क्यों कर रहे हैं? उन्होंने मुझसे बोला- आज मुझे तेरी मसाज करना है, इसलिए ऐसे लेटा हूँ.
मैंने बोला- मुझे नहीं करवानी.
वो बोले- देख अगर तू सारे कपड़े उतार कर मुझे अपना जिस्म दिखाएगी, तो मैं तुझे 5000 हजार दूंगा और मैं जो चाहता हूँ, वो करने देगी … तो 10000 दूंगा.
इतने रुपये का नाम सुनते ही मैंने हां बोल दिया.
फिर दादाजी ने खुद एक एक करके मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे पलंग पर लेटा दिया.
वो मुझसे बोले- बहुत टाइम के बाद मैंने इतनी खूबसूरत चुत देखी है.
वो मेरी टांगें खोल कर मेरी चुत चाटने लगे.
मैं ‘आहहहह ईईईईई..’ करती रही.
मैंने बोला- आप थोड़ा जल्दी करो, मुझे घर जाना है.
वो चुत से मुँह हटा के अपने लंड को मुझे चूसने का बोले, मैंने वैसा ही किया.
फिर वो मेरी टांगों के बीच में आ कर लंड को चुत पर रगड़ने लगे.
मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं बोल उठी कि दादाजी अब डाल भी दो ना अपना लंड मेरी चुत में.
उन्होंने मुझसे पूछा कि तूने कभी चुदाई कराई है? मैंने बोला- नहीं … ये सुन कर वो बहुत खुश हो गए और उनका लंड अब मेरी चुत में घुसने को तैयार था.
जैसे ही उन्होंने लंड से धक्का मारा, तो लंड फिसल गया और मेरी ‘अहह..’ निकल गई.
उन्होंने कई बार ऐसे ही किया, पर उनका लंड इतना दमदार नहीं था कि मेरी जवान सील तोड़ सके.
तो फिर उन्होंने मुझसे उल्टा लेटने को कहा, मैं लेट गई.
अब दादा जी मेरे पीछे से डालने लगे और मैंने अपनी टांगें चिपका लीं, ताकि उन्हें लगे कि लंड चुत में जा रहा है और वैसा ही हुआ.
दादाजी 3 मिनट में झड़ गए और मुझसे बोले- तेरी चुत मारने में मजा आ गया.
मैं मुस्कुराते हुए बोली- लाइये मेरे पैसे.
तो उन्होंने वादे के मुताबिक मुझे 10000 हजार रुपये दिए और रोज मेरे साथ ऐसे ही सेक्स करने लगे, पर उन्हें आज तक पता नहीं है कि मैंने उन्हें धोखे में रखा है.
आज तक उनका लंड मेरी चुत में गया ही नहीं.
समीरा की ऐसी गर्म बातें सुन कर मेरा लंड भी आकार लेने लगा था.
फिर मैंने समीरा से कहा- तू मुझे ये सब मम्मी पापा को ना बताने के लिए क्या देगी? उसने बोला- मैं पैसे दे सकती हूँ, मेरी किसी सहेली से आपकी सैटिंग करा सकती हूं.
मैंने बोला- तू ही मेरी सैटिंग बन जा ना.
वो शरमा गई.
मैंने फिर बोला- देख समीरा … अगर तुझे लंड ही चाहिए, तो मेरा ले ले.
वो बोली- भाई ये सब गलत है.
मैंने बोला- अच्छा तुझे उस मरियल बुड्डे के साथ करते वक़्त शर्म नहीं आई.
उसने बोला- ठीक है … पर आप किसी को बताओगे तो नहीं? मैंने बोला- मेरी जान … मरते दम तक किसी को नहीं बताऊंगा.
वो मुस्कुरा दी, जिसे मैंने उसकी सहमति समझ ली.
बस फिर मैंने उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसे चूमने लगा.
वो भी मेरा साथ दे रही थी.
मैंने सोफे पर ही उसकी टी-शर्ट निकाल दी.
उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी.
उसके 32 साइज़ के मम्मे घर की लाइट में मोतियों की तरह चमक रहे थे.
मैंने उसके स्तनों का स्तनपान करना शुरू किया और वो भी बड़े प्यार से स्तन को चूसने दे रही थी फिर मैं उसे अपने रूम में ले आया और उसे पूरा नंगा कर दिया.
साथ ही मैं खुद भी पूरा नंगा हो गया.
मेरा 7 इंच का लंड देख कर उसकी आंखों में चमक आ गई.
उसने पहली बार इतना बड़ा और सख्त लंड देखा था.
मैंने भी उसे अपना लंड चूसने को बोला, वो तुरंत लंड को मुँह में ले कर किसी पोर्न स्टार की तरह लंड मुँह में लेने लगी.
क्या बताऊँ … उस पल के बारे में सोच कर मैं जोश में आ गया और मैंने उसके मुँह की जोरदार चुदाई की.
बाद में मैं उसी के मुँह में ही झड़ गया.
मेरी बहन मेरा सारा माल पी गई और उसने मेरे लंड को चाट चाट कर साफ कर दिया.
फिर मैंने भी उसकी चुत को खूब प्यार से चाटा और वो भी एक बार झड़ गई.
अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैंने अपनी बहन की चुत में निशाना लगाया.
मेरा लंड एक बार में ही आधा लंड उसकी चुत में घुस गया था.
वो लंड घुसते ही एकदम से बेड पर उचक गई और चीखी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… उसकी चुत से थोड़ा खून भी आ गया.
मुझे भी लगा बुड्डे ने मेरी बहन को सच में जरा सा भी नहीं चोदा है.
वो रोने लगी … और मैं उसे किस करने लगा.
फिर मैंने पूरी ताकत से अपना पूरा लंड अपनी बहन की चुत में डाल दिया.
वो बिलबिला उठी.
मेरा लंड उसकी चुत की पूरी गहराई में जाकर उसकी चुदाई कर रहा था.
थोड़ी देर रोने और चिल्लाने के बाद मेरी बहन अब चुत उठा कर मेरे लंड का स्वागत कर रही थी.
ये देख कर मैंने थोड़ा स्पीड बढ़ा दी.
वो मेरे झटकों से चरम पर पहुंच गई और दूसरी बार झड़ गई.
मैंने अब उससे घोड़ी बनने को कहा, वो झट से घोड़ी बन गई.
मैंने पीछे से उसकी चुत में अपना लंड पूरी ताकत से घुसा दिया और दस मिनट की दमदार चुदाई के बाद मैं और मेरी बहन साथ में झड़ गए.
मैं उसकी चुत में लंड डाले हुए ही उसके ऊपर गिर पड़ा.
अब मेरी बहन ने मुझसे बोला- भाई आज से मैं सिर्फ आपकी हूँ.
आज आपके लंड से मुझे वो सुख मिला, जिसके लिए मैं तरसती थी.
उस बुड्डे के लंड में मुझे कभी मजा नहीं आया.
फिर हम दोनों सो गए और अगले तीन दिनों तक हम लोग घर से बाहर ही नहीं निकले, बस चुदाई और चुदाई ही की.
मैंने मेरी बहन की गांड भी मारी और उसे दादाजी से चुदने में साथ दिया.
दादा जी से उसने खूब पैसे ऐंठे.
फिर कुछ महीनों के बाद मेरी बहन की शादी हो गई और वो अपनी सुसराल चली गई.
आप सभी को मेरी ये कहानी कैसी लगी, कमेन्ट करके जरूर बताइएगा.
लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दी जा रही है.

स्रोत:इंटरनेट