. उसके बाद मैंने उनकी चूचियों को चूसना स्टार्ट कर दिया.
उनकी रसीली चूची इतनी मस्त थी कि उनके बारे में सोचकर ही मेरे मुंह में पानी आ जाता है.
चूचियों को मुंह में लेते ही चाची के मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.
मगर वो खुद को काबू में रखने की पूरी कोशिश कर रही थी.
जब उनसे रुका न गया तो चाची ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ कर खुद ही अपनी चूत पर सेट करवा दिया.
वो मेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए मचल गयी थीं.
मगर मैं भी पूरा हरामी था.
मैं चाची को और ज्यादा तड़पाने का मजा ले रहा था.
मैं उनके चूचे को ही चूसता रहा.
बीच बीच में उनके निप्पल को भी काट रहा था.
वो बस धीरे से आह्ह … आऊच … सस्स … आह्ह करके रह जाती.
मगर अब बात उनके काबू से बिल्कुल ही बाहर हो चुकी थी.
वो और ज्यादा तड़प बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी.
जब मैंने चाची को पहली बार चोदा था तो उसके बाद से मैं भी काफी बोल्ड हो गया था.
मुझे इस बात का डर भी नहीं लग रहा था कि बगल में ही मेरा भाई सोया हुआ है.
मैं अपनी मस्ती में उनकी चूचियों को पी रहा था और मेरी प्यासी चाची तो जैसे मेरे गर्म लंड से चुदने के लिए मरी ही जा रही थी.
इसी तरह हम दोनों एक दूसरे को काफी देर तक चूसते रहे.
समय भी काफी बीत चुका था.
बगल में सोये दूसरे लोगों के उठने का भी डर था क्योंकि मां तो सुबह में जल्दी ही उठ जाती थी.
इस बात को मैं भी जानता था और चाची भी अच्छी तरह समझती थी.
इसलिए बिना वक्त गंवाये चाची ने मुझे पलटा और मेरे ऊपर आ गयी.
चाची ने खुद ही अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत पर लगाया और अपनी चूत को मेरे लौड़े पर सेट करके बैठने के लिए तैयार हो गयी.
जब लौड़ा चाची की चूत के मुंह पर अच्छी तरह से लग गया तो चाची ने अपना वजन मेरे लंड पर दे दिया और उनकी चिकनी चूत में मेरा लौड़ा उतर गया, या यूं कहें कि उनकी चूत मेरे लौड़े पर बैठती चली गयी.
आह्ह … बहुत ही मादक और उन्माद से भरा पल था वो.
चाची की गर्म चूत में मेरा गर्म लौड़ा जाते ही जैसे स्वर्ग सा मिल गया मुझे.
ऐसा ही हाल चाची का भी था.
उनके चेहरे पर लंड लेने के लिए हाव भाव अलग से ही आनंद के रूप में दिखाई दे रहे थे.
घप्प-घप्प की आवाज के साथ मेरा लंड चाची की चूत की गहराई को मापने लगा.
चाची भी मेरे लंड पर मस्ती में उछलने लगी.
मगर वो मजबूर थी कि वो इस चुदाई के आनंद को सिसकारियों के रूप में बयां नहीं कर सकती थी.
चाची मस्त होकर मेरे लंड पर उछल रही थी.
ऐसा लग रहा था कि हम दोनों जैसे सुबह की सैर पर निकले हैं.
अब वो गांड उठा उठा कर मुझे ही चोदने लगी.
उनकी जुल्फें मेरे चेहरे पर बिखर चुकी थीं.
वो गांड को उछाल उछाल कर मेरे लंड पर हल्की सी पट-पट की आवाज के साथ पटक रही थी.
लंड जब चूत में उतर जाता तो चाची इधर उधर हिलते डुलते हुए लंड का पूरा मजा चूत में फील कर रही थी.
जब वो थक जाती तो रुक कर मेरे चेहरे को चूमने लगती और चूत में लंड लिये हुए अपनी चूत को दायें बायें हिलाने लगती जिससे उनको बीच में कुछ आराम मिल जा रहा था.
जब चाची रुक गई तो मैं नीचे से धक्के लगाने लगा और नीचे से उनकी चूत को चोदते हुए मैं उनकी चूचियों को भी पीने लगा.
बीच बीच में उनकी चूचियों से मुंह हटा कर मैं चाची के होंठों में जीभ डाल दे रहा था.
मेरी जीभ भी जैसे चाची के मुंह को चोद रही थी.
इतनी तेजी के साथ मैं उनके मुंह में जीभ को चला रहा था.
करीब 10-15 मिनट तक ऐसे ही मदहोश कर देने वाली चुदाई चली.
जल्दी ही मैं झड़ने के करीब पहुंच गया.
चाची भी शायद झड़ने ही वाली थी.
उनकी उखड़ती सांसें और उनकी चूत के मेरे लंड पर गहरे हो रहे धक्के इस बात का सुबूत थे कि वो भी स्खलन के करीब पहुंच चुकी है.
फिर मैंने एकाएक चाची के चूचे को कस कर मुंह में लेकर काट लिया और जोर से उनकी चूत में धक्के लगाने लगा.
दो-तीन धक्कों के बाद ही मेरा लंड और लंड के साथ साथ पूरा शरीर जैसे अकड़ने लगा.
मेरे लंड से वीर्य की धार पिचकारी के रूप में चाची की चूत में पचर-पचर करके अंदर गिरने लगी.
इसी दौरान चाची के मुंह से भी सीत्कार निकल पड़ा जिसको वो दबा गयी.
उसने तुरंत मेरे होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और चाची की चूत का गर्म पानी मुझे अपने लंड को भिगोता हुआ महसूस हुआ.
दोनों जैसे पूरी तरह से संतुष्ट हो गये थे और एक दूसरे के जिस्म के अंदर ही घुस जाना चाह रहे थे.
कुछ देर तक एक दूसरे के ऊपर हम लेट कर मजा लेते रहे.
तभी मेरे भाई के खांसने की आवाज हुई और मैं तपाक से उठ कर अपने बॉक्स पर पहुंच गया.
चाची ने भी जल्दी से अपनी मैक्सी को सही कर लिया और मैंने अपनी निक्कर को ऊपर कर लिया और दोनों लेट कर सोने का नाटक करने लगे.
इस तरह से चाची के साथ चुदाई का मजा लेना मेरी रोज की दिनचर्या बन गयी थी.
चाची भी अपनी चूत चुदवाने के लिए हमेशा ही तैयार रहती थी.
उन दिनों मैं चाची की चूत को चूसने और उनकी चूत का रस चाटने के लिए बहुत पागल रहता था.
मगर चाची के चूचों को चूसते ही वो मुझे चोदना शुरू कर देती थी और मैं उनकी चूत के रसपान से वंचित रह जाता था.
फिर एक दिन मैंने उनकी चूचियों पर ज्यादा ध्यान न देकर सीधा उनकी चूत की ओर मुंह कर लिया.
उस दिन मैं पूरा मन बना चुका था कि आज तो चाची की चूत का रस पीना ही है.
मैंने जोर जोर से उनकी चूत को चूसना शुरू कर दिया.
वो मुझे हटाने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैंने अपना मुंह जैसे चाची की चूत में चिपका ही लिया था.
मैं जोर जोर से अपनी जीभ को चाची की चूत में चलाता रहा.
जब तक कि चाची की चूत ने अपना नमकीन और स्वादिष्ट रस छोड़ नहीं दिया मैंने दम नहीं लिया.
जैसे ही चाची की चूत से रस निकला मैंने उनकी चूत के रस की एक एक बूंद को चाट चाट कर अंदर पी लिया.
उस दिन मुझे बहुत संतुष्टि मिली.
जिस तरह से चाची मेरे वीर्य को पी कर संतुष्ट हो रही थी मैंने भी चाची की चूत का रसपान किया.
बहुत मजा आया दोस्तो मेरी चाची के साथ मुझे.
आप लोगों के मेरी चाची के मेरी ये मदहोश कर देने वाली चुदाई की कहानी पढ़कर कैसा लगा मुझे इसके बारे में अपने विचार जरूर बतायें.
मुझे आप लोगों की राय का इंतजार रहेगा.
तब के लिए मुझे आज्ञा दीजिये.
जल्दी आप लोगों के लिए मैं अपने जीवन की किसी और घटना के साथ फिर से लौटूंगा.
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स्रोत:इंटरनेट