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मैं बनी स्कूल की नंबर वन रंडी 3

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मैं बनी स्कूल की नंबर वन रंडी 3 1

. अब अगले दिन से उसी टाइम मैं भी मूड बना कर उनके पास पढ़ने के लिए पहुंच गयी.
मैं उनके सामने बैठ गई, तो उन्होंने मुझे बिल्कुल अपनी कुर्सी के बगल में बैठने के लिए कहा.
मैं उनसे चिपक कर बैठ गई तो वो मुझे पढ़ाने लगे.
बार बार सर की निगाहें मेरी चुचियों पर जा रही थीं, जिसको मैं अनदेखा कर रही थी.
उन्होंने कुछ देर तक मुझे पढ़ाया और फिर मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोले- कुछ समझ नहीं आया हो, तो पूछ लो.
मैंने बोला- सब समझ में आ गया सर … आप बहुत अच्छा पढ़ाते हैं.
इसके बाद मैं अपनी क्लास में चली आयी.
तीन दिनों तक ऐसा ही चलता रहा और प्रिंसीपल सर मुझे पढ़ने के बहाने हमेशा मेरे बदन को घूरते और हमेशा मुझे छूते रहते.
अब मुझे भी चुदने का भी बहुत मन होने लगा था.
क्योंकि अभी तक उदय सर भी नहीं आए थे.
उस दिन रात में मैं अन्तर्वासना पर एक स्टोरी पढ़ रही थी.
उसमें ये था कि एक औरत का पति बाहर काम से चला गया था.
उसकी बीवी घर पर अकेलेपन की आग में जल रही थी.
फिर एक दिन उसने अपने पति के दोस्त और कुछ लोगों से अपनी चुदाई की भूख को शांत करवा लिया.
जिसमें उसको खूब मजा भी आया.
जब इस औरत की ज़िंदगी को मैंने अपनी ज़िंदगी से जोड़ा.
तो पाया मैं भी उस औरत की तरह अपनी जिस्म की भूख को अब बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी.
जैसे उस औरत का पति बाहर गया था, वैसे ही उदय सर भी मुझसे दूर थे.
उस औरत ने अपनी चुदाई की आग को ठंडा करवाने का जो रास्ता अपनाया था, वो मैं भी अपना सकती थी.
मेरे पास एक सबसे आसान आदमी के रूप में मेरे स्कूल का प्रिंसीपल सर थे.
मैंने फैसला कर लिया था कि क्यों न अपनी जवानी को किसी और के हवाले करके मजा लिया जाए.
मैं भी तो देखूँ कि उसमें क्या मज़ा आता है.
मैंने प्रिंसीपल सर को याद करके अपनी बुर में उंगली करना शुरू कर दी.
उस टाइम अपनी चुत की भूख को शांत कर लिया और सो गई.
अब अगले दिन जब मैं स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगी.
तो मैंने पक्का इरादा कर लिया था कि आज ही प्रिंसीपल से चुदवा लूंगी.
ऐसा सोच कर मैंने आज जानबूझ कर स्कर्ट के नीचे पैंटी को नहीं पहना और स्कूल चली गयी.
स्कूल आते ही उसी टाइम पर मैं प्रिंसीपल सर के ऑफिस में चली गयी.
लेकिन अभी प्रिंसीपल सर आए नहीं थे.
मैं उनके आने का इंतज़ार करने लगी.
कुछ समय बाद वो ऑफिस में आ गए और बोले- आ गईं … चलो अपनी बुक लाओ.
मैंने उनके सामने झुक कर किताब निकाली और अपनी मखमली गांड के नजारे कराने का प्रयास किया.
सर ने शायद मेरी गांड देख ली थी.
उन्होंने मुझे पढ़ाना शुरू कर दिया.
आज मेरा पढ़ने में बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था.
मैं बार बार यही सोच रही थी कि क्या जुगाड़ लगाया जाए कि सर मुझे चोद दें.
कुछ देर बाद प्रिंसीपल सर के फोन पर एक फ़ोन आया.
वो फोन पर बात करने लगे.
मेरे पास में एक पेपर वेट रखा था.
मैंने उसको जानबूझ कर नीचे गिरा दिया वो लुड़का और प्रिन्सिपल सर की तरफ जाकर गिर गया.
मैं उसको उठाने के लिए उनकी तरफ गई और कुछ ज्यादा ही झुक गई.
जिससे पीछे से सर को मेरी गांड दिख जाए.
हुआ भी यही, भले प्रिंसीपल बात कर रहे थे … लेकिन उन्होंने मेरी नंगी गांड को देख लिया.
मैंने उस पेपर वेट को उठा कर रख दिया.
तभी प्रिंसीपल सर ने मेरा हाथ पकड़ा और खड़े रहने का इशारा करके फोन पर बात खत्म करने लगे.
मैं उनके पास ही खड़ी हो गई.
फिर वो मुझे देखते हुए किताब की तरफ एक लाइन को पढ़ने का कहने लगे.
मैंने अपनी गर्दन को जानबूझ कर झुकाया और सर को ऐसे घुमाना शुरू किया.
जिससे सर को लगे कि मुझे खड़े रहने में दिक्कत हो रही है.
उन्होंने बोला- क्या हुआ … खड़े होकर पढ़ने में दिक्कत हो रही है क्या..? आओ मेरे पास बैठ जाओ.
इतना बोल कर उन्होंने मुझे अपनी गोदी में बिठा लिया.
जैसे ही मैं उनके ऊपर बैठी, मुझे उनका तना हुआ लंड अपनी गांड पर महसूस होने लगा.
शायद प्रिंसीपल सर को भी पता लग गया था कि मैं भी चुदासी हूँ और इसीलिए बिना पैंटी के आई हूँ.
वो मुझे पढ़ाते हुए धीरे धीरे अपने हाथों को नीचे लाने लगे.
अब उनका हाथ मेरे पेट पर आ गया था.
मैंने उनकी गोदी में अपनी गांड को उनके खड़े लंड से टिका दिया.
ये समझते ही उन्होंने अपने दोनों हाथों को मेरे आगे कुछ इस तरह से रख लिया कि जिससे अगर मैं आगे होउन, तो मेरे चूचे उनके हाथों से टच हों.
मैंने ऐसा जानबूझ ऐसा किया भी.
मैं बार बार आगे पीछे हो रही थी.
कुछ देर बाद उन्होंने अपनी कुर्सी एकदम मेज़ से सटा ली, जिससे मैं भी बिल्कुल उनके सीने चिपक गयी और उसी पल उनके दोनों हाथों में मेरे दोनों 32 के मोटे चुचे समा गए थे.
मैंने कुछ नहीं कहा तो उन्होंने अपने हाथ से हरकत करनी शुरू कर दी.
अब तक मुझे भी बहुत तगड़ी वाली चुदास चढ़ गई थी.
मैंने धीरे से अपनी शर्ट का एक बटन और खोल दिया जिससे मेरे मम्मों की बीच की गहराई उनकी हथेलियों से रगड़ने लगी.
वो अपने दोनों हाथों से मेरी दोनों चुचियों को मसलने लगे.
उनका सिर मेरे कंधे पर टिक गया था, जिससे वो मेरी गहराइयों को देख रहे थे.
उनका लंड मुझे बहुत गड़ने भी लगा था.
मैं बिना कुछ कहे लिख रही थी और वो मेरे मम्मों से खेल रहे थे.
कुछ देर बाद उन्होंने मेरी शर्ट के सारे बटन खोल कर मेरी चुचियों को बाहर कर दिया और खूब ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे.
मेरी चूचियों की नोकों को भी खूब मींजने लगे.
मैं आह आह करने लगी.
प्रिंसीपल सर ने मेरा सिर पीछे करके मेरे होंठों पर अपने होंठ लगाए और मुझे चूमने चाटने लगे.
मैं भी मस्त होकर उनका साथ देने लगी.
वो मेरे गले को चूमने लगे.
कुछ देर तक ये सब करने के बाद उन्होंने मुझे अपनी तरफ मुँह करके खड़ा कर दिया और मेरे एक निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगे.
अब तक मेरी चुत में हाहाकार मच चुका था.
मैंने उनसे कहा- मुझे कुछ कुछ हो रहा है सर.
ये सुनकर उन्होंने मुझे मेज़ के नीचे, जो पैरों को रखने की जगह होती है, उसमें घुसा दिया.
फिर अपनी धोती को उठा कर निक्कर में से अपना गर्म गर्म सामान निकाल दिया.
उनका लंड उदय सर जितना ही मोटा और 7 इंच लम्बा था.
सर ने लंड निकाल कर मुझे पकड़ा दिया और अपनी कुर्सी आगे कर ली.
तभी दरवाज़े पर किसी ने खटखटाया, तो प्रिंसीपल सर ने मुझे दबाते हुए कहा- आ जाओ.
एक चपरासी आया था.
उसने बताया कि किसी बच्चे के माता पिता आपसे बात करने आए हैं.
प्रिंसीपल सर ने बोला- ठीक है उन्हें अन्दर भेज दो.
जैसे ही चपरासी बाहर बुलाने गया.
प्रिंसीपल सर ने अपना लंड पकड़ा और मेरे सिर को पकड़ कर आगे कर दिया सर ने अपना कड़क लंड मेरे मुँह में घुसा दिया.
मैं भी उनके लंड को बड़े प्यार से अन्दर तक लेकर चूसने लगी.
एक मिनट बाद वो लोग अन्दर आए और सामने वाली कुर्सी पर बैठ कर बात करने लगे.
ऊपर प्रिंसीपल सर उन लोगों से बात कर रहे थे और नीचे मैं बैठ कर उनका लंड चूस रही थी.
कुछ मिनट बाद वो लोग चले गए और अब प्रिंसीपल सर ने अपनी कुर्सी को पीछे कर दिया.
उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरे बालों को पकड़ कर अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मेरे मुँह के अन्दर बाहर करना चालू कर दिया.
दो मिनट बाद ही वो मेरे मुँह में झड़ गए और मैं कपड़े सही करके बाहर आ गयी.
आज प्रिंसीपल सर के लंड को चूस कर मैंने अपनी चुत के लिए मोटे लंड की खोज कर ली थी.
कैसे प्रिंसीपल टीचर ने चोदा मुझे! और इसके अलावा मेरी चुत चुदाई का मजा किस किस ने लिया, ये सब मैं आपको अगले भाग में लिख कर बताऊंगी.
मुझे मेल करते रहिएगा, न जाने किसके लंड के नसीब में मेरी चुत का मजा लिखा हो.
आपकी चुदक्कड़ अरुणिमा [email protected] कहानी जारी है.

स्रोत:इंटरनेट