. मीना मौसी को अपना मोबाईल नम्बर देकर, दोबारा आने का वायदा करके चिन्टू चला गया.
उसके बाद से तो जैसे मीना की दुनिया ही बदल गई.
पर कभी कभी उसे भय भी सताता था कि अगर भेद खुल गया तो क्या होगा.
अब चिन्टू का आना-जाना लगा ही रहने लगा.
जब भी आता, मीणा के लिए कुछ खाने पीने को लाता और कुछ बिंदी सुर्खी चूड़ी भी ले आता.
इसी दौरान एक दिन ननकू अनायास ही गाँव आ गया, उसकी तबीयत कुछ नासाज़ थी.
उस दिन तो मीना बच गयी क्योंकि उस वक्त चिन्टू नहीं आया हुआ था.
लेकिन मीना डर गई कि कहीं अब ननकू के होते हुए चिन्टू न आ जाए.
इसलिए उसने चिन्टू को फोन करके सतर्क कर दिया.
कुछ दिन रहने के बाद ननकू शहर चला गया पर मीना के दिल में भय सा बैठ गया.
इधर गाँव वालों को भी को मीना के घर चिन्टू का रोज रोज का आना-जाना अखरने लगा.
एक दिन एक पड़ोसन ने मीना को कह दिया- पराये जवान लड़के का इस तरह घर में आना-जाना ठीक नहीं … तेरी बेटी जवान हो चुकी है, उसका तो कुछ तो ख्याल कर! मीना उसकी बात तो ताना समझ कर क्रोध में बोली- अपने घर की फ़िक्र मैं खुद कर लूंगी.
तुझे क्या लेना है? चिन्टू मीना के घर अब बेखटके और बिना किसी रोक टोक के आने जाने लगा था.
आस पास रहने वाले लोगों को भी अब उन दोनों पर शक होने लगा था.
आखिर एक बार जब ननकू गाँव आया तो उसके एक पड़ोसी ने उसे बताया- ननकू, मेरी बात का बुरा मत मनाना लेकिन यह सच है कि तेरी भाभी का भानजा चिन्टू तेरी गैर-मौजूदगी में तेरे घर अक्सर आने लगा है.
मुझे लगा कि यह बात तुझे बतानी चाहिए, अब तू जान तेरा काम जाने! लेकिन यह सबके लिए अच्छी बात नहीं है.
यह बात सुन कर ननकू को भी महसूस हुआ कि कुछ ना कुछ गड़बड़ तो है.
उसने अपनी जोरू मीना से थोड़ा रौब से पूछा- ये चिन्टू का यहाँ रोज रोज आने का क्या काम? क्या चक्कर है ये? अपने पति की बात सुन मीना के हृदय की धड़कन बढ़ गई- ये आप क्या कह रहे हैं? वो आपका रिश्तेदार है तो कभी कभार आपके घर आ जाता है.
इसमें क्या गलत है? “घर में जवान बच्ची है.
वो भी जवान है, तू समझ बात को … तू उसे यहां आने से मना कर दे.
” ननकू ने कहा.
“मैं अपनी बेटी का पूरा ख्याल खुद रख रही हूँ.
पर आपने कभी मेरे बारे में सोचा कि आपके बिना मैं यहाँ कैसे रह रही हूं?” “तुम लोगों के लिए ही तो मैं बाहर रहता हूं.
जरा सोचो क्या तुम्हारे बिना मुझे वहां अच्छा लगता है क्या?” ननकू को मीना की इस बात से विश्वास हो गया कि उसके पड़ोसी ने उसे उसकी जोरू और भानजे चिन्टू के बारे में जो कुछ भी कहा है, वो सच है.
ननकू तीन दिन घर में रुका और फिर अपनी नौकरी पर कानपुर लौट गया.
पर अबकी बार काम में उसका दिल नहीं लगा.
उसे लगने लगा कि जैसे उसका घर-बार उजड़ जाएगा.
आखिर शक मन में लिए एक रोज अचानक ननकू नौकरी से छुट्टी ले गाँव आ गया.
उसने घर में कदम रखा तो घर में कोई नजर नहीं आया.
उसने अंदर के कमरे का दरवाजा खोला तो वो सन्न सा रह गया; उसकी बीवी उसके भानजे चिन्टू की बांहों में नंगी पड़ी थी और चिन्टू भी सर से पाँव तक पूरा नंगा था.
मीना ने चिन्टू के यौन अंग को हाथ में पकड़ रखा था और वो उसे धीरे धीरे सहला रही थी.
अपनी बीवी की यह घिनौनी हरकत देख ननकू से रहा नहीं गया और उसने लाठी उठा ली और अपनी नंगी बीवी मीना को खूब पीटा.
चिन्टू को भी दो चार लाठी पड़ी लेकिब वो बच कर भाग गया.
नंगी मीना कहाँ जाती भाग कर! लेकिन इतना सब होने के पश्चात भी मीना के चेहरे पर कोई खौफ न था, वह चीखकर बोली- यह जो तुम देख रहे हो, इस सबमें मेरी कोई गलती नहीं, बल्कि तुम्हारी गलती है.
मैंने पहले ही कहा था न कि मुझे अपने साथ ले चलो पर तुमने मेरी बात पर गौर नहीं किया.
लेकिन ननकू का क्रोध सातवें आसमान पर था.
वह इस बात से परेशान था कि उसकी बीवी मीना ने अपना मुंह काला करते समय रिश्तों का भी ख्याल नहीं रखा.
चिन्टू तो उसके बेटे जैसा है.
परन्तु उसने खुद पर काबू करते हुए कहा- जो हुआ सो हुआ, अब मैं आगे ये सब नहीं होने दूँगा.
मैं अब यहीं रहूँगा.
“यहीं रहूँगा … क्या मतलब?” मीना ने पूछा.
मीना को तन का जो सुख चिन्टू से मिल रहा था, वो सुख ननकू के बस में नहीं था, चिन्टू का नया खून था, नया जोश था उसमें … और फिर चोरी का फल तो ज्यादा मीठा लगता ही है.
उसे लगा कि अगर ननकू गाँव में रहा तो उसके जिस्म को प्यासा रहना पड़ेगा.
जब तक उसने गैर मर्द का स्वाद नहीं चखा था, तब तक वो अपने पति से ही खुश थी लेकिन … अब क्या होगा? “मैं आज नौकरी छोड़ के हमेशा के लिये गाँव में आ गया हूं.
यहीं रहकर किसी जमींदार के पास खेती का काम कर लूंगा.
फिर देखूंगा तुझे और उस हराम के जने चिन्टू को!” ननकू ने कहा.
ननकू के नौकरी छोड़ गाँव में रहने की बात सुन मीना परेशान हो गयी क्योंकि अब उसे चिन्टू से मिल कर अपनी कामवासना शांत करने का अवसर नहीं मिल सकता था.
मीना ने चिन्टू को सारी बात बताई और उसे होशियार रहने को कहा.
वह किसी भी हालत में चिन्टू से अपने सम्बन्ध तोड़ने की बात नहीं सोच सकती थी.
तन की आग होती ही ऐसी है.
मीना ननकू से नफरत करने लगी.
इधर ननकू को भी अपनी दुराचारी बीवी से नफरत हो गई थी.
लेकिन उसकी बेटी जवान थी तो उसकी चिंता भी थी इसलिए वह मीना की इस हरकत को पी गया.
ननकू अब चौकस रहने लगा था लेकिन फिर भी मीना और चिन्टू मौका पाकर घर से बाहर खेत खलिहान में मिलने लगे.
मौसी भांजे प्रेमी जोड़े की ये हरकतें भी ननकू को पता चल गयी.
उसने अपनी जवान बेटी की खातिर मीना को दोबारा समझाया लेकिन मीना अपनी दुराचारी हरकतों से बाज नहीं आई.
घर का माहौल काफी बिगड़ गया था.
रोज रोज की मार पिटाई से मीना को लगा कि अब वो ननकू संग और ज्यादा नहीं रह सकती.
वह चिन्टू के साथ अपनी अलग गृहस्थी बसाना चाह रही थी.
उधर चिन्टू के मन में कुछ और ही खिचड़ी पक रही थी.
उसने अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से मीना की युवा बेटी को फुसला लिया और एक दिन चिन्टू ने उसे भी अपने बिस्तर की रानी बना लिया.
आखिर मीना की आँखें तब खुली जब उसने अपनी आँखों से अपनी बेटी को अपने प्रेमी के संग हमबिस्तर होते देखा.
अब पछताये होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत … रचनाकार फुलवा की पिछली प्रकाशित रचना थी: सफ़ेद चादर.
स्रोत:इंटरनेट