. अगली सुबह मैं देर तक सोता रहा। मेरे चेहरे पर पानी की कुछ बूँद पड़ने से मेरी आँख खुल गई। मैंने आँख खोल के देखा तो मौसी मेरे सामने नग्न अवस्था में खड़ी खुद को शीशे में निहार रही थी। उनके बालों से टपकते. हुए पानी से पता चल रहा था कि वो अभी अभी नहा कर आयी हैं। मौसी अपने बालों को झटक कर सुखा रही थी जिससे पानी की छीटें मेरे चेहरे पर आ रहे थे। उनके बदन की भीनी भीनी खुशबू से कमरा महक रहा था। इस समय वो बिना. कपड़ों के संगमरमर की सफ़ेद मूर्ति की तरह लग रही थी। मैं उठा और नंगा उनकी पीठ से चिपक के खड़ा हो गया। उनके कंधे पर किस किया और उनको शीशा दिखाते हुए कहा- देखो आपकी चूचियाँ कुछ दिनों में थोड़ी बड़ी और सुडौल. हो गई हैं.
तो उन्होंने कहा- यह सब तुम्हारी शैतानी का नतीजा है। मैं अपना हाथ नीचे ले जा कर उनकी चूत को उंगली से सहलाने लगा तो मौसी ने मुझे रोका और मेरे लंड को मुट्ठी में पकड़ कर बोली- क्या तुम हर वक़्त सेक्स के लिय तैयार रहते हो? मैंने अपनी एक उंगली को मौसी चूत के अंदर डालते हुए कहा- जब से आप यहाँ आई हो, तब से ये हमेशा तैयार रहता है। वो बोली- नहीं, पहले नहा आओ, फिर बाकी काम बाद में। थोड़ी देर बाद मैं नहा कर निकला और कपड़े पहनने के बाद अपनी अलमारी से मौसी का गिफ्ट निकाला। वो कमरे में बैठी थी, मैंने गिफ्ट उनके हाथ में रखकर उनसे खोलने को बोला। उन्होंने गिफ्ट खोला और मुझसे पूछा- यह किसलिये? मैंने कहा- आज आपका यहाँ आखिरी दिन है, कल आप किसी भी वक़्त चली जाओगी। मैं चाहता हूँ कि आप मेरे लिये इसे पहन कर अच्छे से तैयार हो जैसे मौसा जी के लिये होती हो। मौसी ने कहा- इसके बदले में मुझे क्या मिलेगा? मैंने कहा- जो भी आपका मन हो! तो मौसी ने कहा- हम इतने दिनों से साथ में सेक्स कर रहे हैं लेकिन तुमने कभी मेरे अंदर अपना रस नहीं छोड़ा, मैं चाहती हूँ कि तुम आज मेरी चूत को अपने रस से भर दो। कुछ देर सोचने के बाद मैंने मौसी से हां कह दिया। थोड़ी देर बाद हर्ष स्कूल से आ गया, हमने खाया और दोपहर को सो गये। रात को मौसी आज हर्ष को खाना खिला कर जल्दी सुलाने लगी। लेकिन आज जैसे हर्ष ने कसम खा रखी हो कि आज वो हमको कुछ नहीं करने देगा। लेकिन थोड़ी देर बाद हर्ष सो गया। दस बजे मौसी मेरे पास आयी और कहा- मुझे बस थोड़ा सा समय दो, तब तक तुम आराम से दूसरे कमरे में बैठो। मैं कमरे में इन्तजार करने लगा कि कब मेरी सेक्सी मौसी मुझे बुलाएगी। धीरे-धीरे घड़ी में ग्यारह बज गये तो मेरे लिये खुद को रोक पाना अब मुश्किल हो रहा था। लेकिन कुछ मिनट बाद मौसी ने आवाज लगाई तो मैं भाग कर कमरे में पंहुचा और आखिर भागता भी क्यों नहीं… आज की. चुदाई में अलग सा मज़ा जो मिलने वाला था। कमरे में पूरा अँधेरा हुआ पड़ा था। मैंने लाइट चालू की तो देखा कि मौसी बेड के एक कोने में मेरी तरफ पीठ कर के बैठी थी। उन्होंने आज हल्के नीले रंग की साड़ी पहन रखी थी।. मैंने मौसी को आवाज दी तो वो मेरी तरफ मुड़ी। सच में यार… आज मुझे वो रोज़ से ज्यादा सुंदर लग रही थी। मैं सोचने लगा कि क्या ये वही औरत है जिसकी चुदाई मैं इतने दिन से कर रहा था। तभी मेरे कान में आवाज पड़ी-. कहाँ खो गये बेटू? मैंने देखा कि मेरी जान मौसी मेरे बगल में खड़ी थी। मैंने आगे बढ़ कर उनके चेहरे को हाथ में थाम कर उनके माथे को चूम लिया और उनको अपने हाथों में उठा कर बेड पर लिटा दिया। आँखों में काजल, चेहरे पर हल्का सा मेकअप, अच्छे से बांधे हुए बाल, होंठों पर लाल लिपस्टिक और बदन से आती हुई भीनी भीनी खुशबू… ये सब मुझे दीवाना बना रहे थे। आज मौसी अपनी सुन्दरता से किसी भी अप्सरा को टक्कर दे रही थी। मैंने उनके कान पर किस किया और उनकी झुमकी उतार कर अलग रखने के बाद कान की लौ को अपने होंठों में भर चूसने लगा। उनको गुदगुदी होने लगी थी जिससे वो अपने सिर को हिलाने लगी। थोड़ी देर बाद मैंने दूसरे के साथ भी. ऐसा किया। फिर मैं थोड़ा नीचे सरक कर उनके गालों को चूमने और चाटने लगा। मैं थोड़ी देर और उनके गालों को चूमना चाहता था लेकिन मौसी ने मेरे बाल पकड़ कर मेरा सर नीचे किया और मेरे होंठों को अपने होंठों से मिला. दिया। मैं भी मौसी के होंठों का रस पीने लगा, कभी उनके ऊपर वाले होंठ को अपने मुंह में भर कर चूसता तो कभी नीचे वाले को। बीच में अचानक से मौसी मेरी जीभ को अपने होंठ में दबा कर चूसने लगती। मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मैं उनके मुंह में पिघलता जा रहा हूँ। कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे को चूमने के बाद उनके होंठ को छोड़ कर मैं उनकी गर्दन को चूमने लगा। मौसी तो इतने में सिसियाने लगी थी, उनके मुंह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाययय… श्श्श… जैसी आवाजें निकलने लगी थी। मैंने मौसी के ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिये। फिर मैंने उनके ब्लाउज को उनके गोरे बदन से अलग कर दिया और उनके हाथ को ऊपर कर के उनकी बगलों में नाक लगा कर. उसकी गंध को नाक में भरने लगा, फिर अपनी जीभ निकाल कर बगलों को चाटने लगा। मेरी हरकतों से मौसी को गुदगुदी हो रही थी जिससे वो मचलने लगी थी। मौसी की चूचियाँ मेरी लायी हुई काली ब्रा में कैद थी, उस पारदर्शी ब्रा में उनकी सुडौल चूची साफ़ दिख रही थी। मैंने हाथ आगे बढ़ा कर उनकी चूची पर रख दिये और उनको हल्के से दबाने लगा। फिर ब्रा के ऊपर से उनके निप्पल पर जीभ चलाने लगा। थोड़ा और नीचे आने के बाद उनके चिकने पेट. पर जगह जगह किस करने लगा, फिर अपने होंठ उनकी नाभि पर रख कर उसे चाट कर गीला करने लगा। मैं उठा कर उनके पैर के पास बैठ गया, उनके पैर के तलवे को चूमने लगा। फिर मैंने उनके एक पैर के अंगूठे को मुंह में भर कर चूसते हुए ऊपर बढ़ने लगा। उनके पैर से पायल निकाल कर अलग रख दी और उनकी साड़ी को धीरे धीरे खोलने लगा। साड़ी उतारने के बाद मैंने उनके पेटीकोट को थोड़ा ऊपर कर के टांगों पर चुम्मियों की बरसात कर दी। फिर मैंने. मौसी का पेटीकोट भी निकाल दिया। मौसी की चूत पर वो तिकोने आकार की नयी पैंटी बहुत गजब की लग रही थी। मैंने हाथ आगे बढ़ा कर उनकी ब्रा उतारी और चुचियों को जोर जोर से मसलने लगा। एक को दबाता तो दूसरी को मुंह. में भर कर पीने लगता। अब उनके शरीर पर केवल पैंटी शेष रही थी जिसे मैंने हाथों से खींच कर उतार दिया। उनके सारे आभूषण और कपड़े उतारने के बाद अब मेरी मम्मी की बहन मेरे सामने मादरजात नंगी पड़ी हुई थी। यह सब. देख कर मेरे लंड में दर्द होने लगा। कामुकता से भरपूर यह कहानी जारी रहेगी, आप अपने विचार [email protected] पर भेजें!
स्रोत:इंटरनेट