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याराना का तीसरा दौर 2

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याराना का तीसरा दौर 2 1

. इतना बोलकर मैं विक्रम को अकेले छोड़कर नीचे कमरे में आकर सो गया। अगले दिन ऑफिस में विक्रम मेरे केबिन में आया और आकर मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठकर बोला- क्या भैया … सारा बिगड़ने का ठेका क्या आपने ही. लिया है? इस मजे के लिए थोड़ा अपने छोटे भाई को बिगड़ने दो ना! मैं- देखो विक्रम! बीवी की अदला-बदली एक मझधार में फंसने जैसा है। अपनी बीवी कितनी ही अच्छी हो लेकिन फिर अपनी बीवी की चुदाई करने से मन नहीं. भरता। विक्रम- अरे तो भैया कोई और थोड़ी न है यहां कि मुझे बीच मझधार में छोड़कर चला जाएगा। आप हो ना निकालने वाले.
इस मझधार का मजा दिलाने वाले। वैसे भी मझधार जब इतनी खूबसूरत हो तो कौन निकलना चाहेगा ऐसे समन्दर से? क्या भैया! रीना भाभी को उनके खुद के भाई से चुदवा सकते हो, लेकिन अपने भाई से चुदवाने में आना-कानी कर रहे हो। उनका सेक्सी चेहरा याद करके ही मेरा लन्ड चिकनाई छोड़ने लगता है। चिंता न करो भैया, वीणा की चुदाई करोगे तो पता चलेगा कि ये कोई घाटे का सौदा नहीं है। वीणा अपनी गांड उठा-उठा कर आपका लंड लेगी। बहुत प्यासी है वो सेक्स की। मैं- एक बार रीना से और वीणा से मुझे बात करनी होगी, फिर देखते हैं। विक्रम- उनसे बात करने और उनकी हां कहलवाने में शायद कठिनाई हो क्योंकि आपको वो बात नहीं पता है जो मुझे पता है। लेकिन जब आप वो बात जानोगे तो आप भी सौ प्रतिशत पक्के मान जाएंगे कि ये अदला-बदली वीणा और रीना. भाभी दोनों के लिए जरूरी है। मैं- अच्छा, मेरे प्यारे छोटे भाई! ऐसा क्या पता है तुमको? विक्रम- मेरी कहानी जो मेरे जीवन में घटित हुई। आपको आधा सच पता है, अब आप पूरा जान लो। मैं- ठीक है चलो। अगर तुम्हारी कहानी सुनने के बाद मुझे लगा कि वीणा और रीना के लिए ये अदला-बदली वाली चुदाई जरूरी है तो कुछ भी हो जाए हम अदला-बदली करके रीना और वीणा को जरूर चोद देंगे। विक्रम- भैया जैसा कि आपको पता है कि बारहवीं कक्षा. पूरी करने के बाद मैं आगे की पढ़ाई करने के लिए बेंगलूरू गया था। प्रथम वर्ष तो जैसे तैसे पूरा हो गया। कॉलेज के द्वितीय वर्ष में मेरी मित्रता कॉलेज की सबसे प्रसिद्ध सुन्दरियों में से एक, उस लड़की से हुई जिसका नाम रीनल था। वह फाइनल वर्ष की छात्रा थी। गोरी चिट्टी और आकर्षक देह वाली थी। पूरे कॉलेज के लड़के उसका नाम ले कर मुट्ठ मारते थे। उस कच्ची उम्र में उसके 34 के स्तन, 26 की पतली कमर और 34 की गांड पूरे कॉलेज पर कयामत बरसाया करती थी। चूंकि मैं दिखने में ठीक था और पिताजी के पैसों का थोड़ा फायदा मिल रहा था जिसकी वजह से कॉलेज की लड़कियों में मेरा भी बोल-बाला हो गया था। किसी तरह में रीनल से बात करने में. कामयाब रहा और रीनल ने भी मुझे अच्छा रिस्पॉन्स दिया.
उसका परिणाम ये हुआ कि 3-4 महीनों की मेहनत में रीनल ने मेरा ‘आई लव यू’ का इज़हार स्वीकार कर लिया। रीनल काफी मॉडर्न और समझदार युवती थी। उसके मेरे साथ होने से कॉलेज में मेरी एक अलग ही पहचान बन गई थी। कुछ सीनियर लड़कों ने इस मामले में मुझे पीटना चाहा लेकिन आपने ही बैंगलोर आकर उन सबको सबक सिखाया था।  मैं- अच्छा लेकिन तुमने तो कहा था कि वो लड़के तुम्हारी. रैंगिंग के लिए तुम्हें परेशान करते हैं। इसलिए मैंने बैंगलोर आकर उनकी पिटाई करवाई थी। विक्रम- नहीं भैया, असली कारण तो यही था। पर आपको तब कैसे बताता कि लड़की का चक्कर है! अब आगे की कहानी सुनो। हमारे, मतलब रीनल और मेरे रिश्ते को लगभग आधा साल हुआ था। हमने इस दौरान पार्क में, कॉलेज में मौका देखकर खूब चुम्मा चाटी की। फिर एक बार की बात है जब मेरा जन्मदिन आया। मैंने कॉलेज से बाहर आकर होटल में एक शानदार कमरा बुक किया और वहीं जन्मदिन मनाने के बहाने रीनल को बुलाया। आज मैं जन्मदिन के तोहफे के बहाने कॉलेज की सबसे सुंदर परी को चोद-चोद कर लाल करना चाहता था। अतः मेरे प्यार की खातिर रीनल आयी। उसने नीली जीन्स. और सफेद टी-शर्ट पहनी थी। भूरे और सुनहरे रंग किए हुए बाल थे उसके जो कि अच्छे खासे संयम वाले आदमी का भी लंड खड़ा कर दें। टाईट जीन्स में उसकी गांड का आकार और सफेद टी-शर्ट में उसके उभरे हुए सन्तरे लंड. में झनझनाहट पैदा करने लगे थे। उसने मुझे किस करके जन्मदिन की शुभकामना दी.
उसके बाद हमने केक काटा। उसने मुझे केक खिलाया पर मैंने मना किया और पहले उसे खाने को कहा। मैं अपने हाथ में लेकर उसे केक खिलाने लगा। लेकिन चालाकी से मैंने उस केक को उसके पूरे चेहरे पर रंग दिया और कहा कि अब मुझे तुम्हारे गालों से केक खाना है। रीनल नीचे चेहरा करके मुस्कुराने लगी और इसी मुस्कुराहट को उसकी हां समझ कर उसके गालों से. अपनी जीभ लगाकर मैं केक को खाने लगा। फिर इसी तरह से मैंने उसके पूरे चेहरे को साफ किया। फिर उसने भी अपने हाथों में केक लेकर मेरे गालों पर लगाया और मेरे चेहरे को अपने प्यारे से होंठों से साफ करने लगी।. हमने एक दूसरे के होंठों को अपने अपने होंठों में दबाकर उन्हें चूसना चाटना शुरू कर दिया। फिर मैंने अपनी जीभ को रीनल की गर्दन पर घुमाना शुरू किया। रीनल मेरी इस हरकत से सिहर उठी। उसने भी मेरे चेहरे पर. चुम्बन की बरसात कर दी। मैंने अपने हाथ को उसके स्तनों पर ले जाकर टी-शर्ट के ऊपर से दबाना शुरू किया। इस पर रीनल का गोरा चेहरा पूरा लाल हो गया। मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी। रीनल ने अपना चेहरा शर्म से झुका. लिया। लेकिन अब जो नजारा मेरी आँखों के सामने था उसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता क्योंकि यह नजारा कुछ शीघ्रपतन वाले मर्दों के पानी की पिचकारी, बिना लंड पर हाथ लगाए ही छुड़वाने के लिए काफी था। काले रंग की ब्रा में सफेद और गुलाबी रंग की मिश्रित चमड़ी वाली हसीना जिसकी कमर पर उसकी अति उत्तेजक नाभि थी। ब्रा के इलास्टिक ने उसके सफेद गोरे जिस्म पर जो गुलाबी रेखा बनाई थी उसने मेरे शरीर की नस-नस के खून. के एक-एक कतरे को एक नई सरसराहट से सिरमौर कर दिया था। मैंने आव देखा न ताव, ब्रा सहित रीनल के स्तनों को मुंह में दबा लिया। रीनल भी अपने स्तन मेरे मुंह में जोर से दबाने लगी.
थोड़े समय बाद उससे रहा नहीं गया.
उसने स्वयं ही अपनी ब्रा से अपने दोनों कबूतरों को आजाद कर दिया। रीनल के स्तनों के ऊपर के चूचुक गुलाबी रंग के थे। मैं उसके एक चूचुक को अपने हाथ में तथा दूसरे चूचुक को अपने मुंह में लेकर अपनी भड़ास उसके स्तनों पर निकालने लगा। रीनल उत्तेजना में पागल होकर अपने पूरे शरीर को मेरे मुंह के अंदर दबाने की कोशिश करने लगी थी। मैंने रीनल के स्तनों के साथ उसके पेट और कमर को भी काफी चूमा और चाटा। जब मुझे. लगा कि अब काफी समय तक फोरप्ले हो गया है और रीनल भी काफी उत्तेजित हो गई है, मैंने अपना हाथ उसके जींस के बटन पर लगाया तथा उसे खोलने का प्रयत्न करने लगा, लेकिन रीनल ने मेरे हाथ को उसके जींस के बटन से हटा दिया। मैं फिर अपना हाथ रीनल के जींस के बटन पर ले कर गया किंतु रीनल ने मेरा हाथ फिर हटा दिया। मैंने रीनल से कहा- माय डार्लिंग रीनल, आई वांट टू फक यू.
प्लीज़ कोऑपरेट मी। (प्रिय मैं तुम्हारी चुदाई करना चाहता हूँ, कृपया मेरा साथ दो)। इस पर रीनल ने जवाब दिया- डार्लिंग, वी ऑलरेडी क्रॉस्ड आवर लिमिट (प्रिय हम पहले ही हमारी सीमा पर कर चुके हैं) अब इससे ज्यादा मैं साथ नहीं दे पाऊंगी।  विक्रम- प्लीज रीनल, मैं इतना करके अधूरा नहीं रह सकता.
मुझे तुम्हारी चुदाई करनी है। रीनल- ओह मेरे विक्रम। मेरी कुछ सीमाएं हैं जो मैंने तय की हैं। मैं शादी से पहले ये नहीं कर सकती। मैं तुमसे प्यार करती हूं और शादी करने के लिए तैयार हूं। उसके बाद मैं पूरी तुम्हारी हो जाऊंगी जान। उस वक्त मेरे सिर पर हवस का शेर सवार था। कोई रीनल के साथ इतना बढ़कर पीछे नहीं हट सकता था क्योंकि रीनल चीज ही ऐसी थी। अतः पता नहीं क्यों मुझे . रीनल पर गुस्सा आ गया और मैंने उसे गुस्से में भला-बुरा कह दिया। मैंने रीनल से कहा- अगर मेरे जन्मदिन के दिन तुम एक अच्छी गर्लफ्रेंड बन कर मेरे मन की इच्छा पूरी नहीं कर सकती तो तुम क्या एक अच्छी बीवी बन. पाओगी? इस पर मुझे शक है। धन्यवाद जो तुमने मुझे इतना सब करने का मौका दिया.
न जाने कितनों के साथ ऐसी टेस्ट ड्राइव करके मुझे शादी का ज्ञान दे रही हो। मैंने यह बात गुस्से-गुस्से में गलत कह दी थी जिसका मुझे उसी क्षण अहसास हो गया था किंतु अपने घमंड वाले रवैये के कारण मैं उसे मना नहीं सका और उससे माफी नहीं मांग सका। रीनल की आंखों में आंसू थे और वह रोते-रोते अपने कपड़े पहनने लगी और मुझसे सॉरी बोल कर. चली गई। जब मेरे सिर से हवस का भूत उतरा तब मुझे अहसास हुआ की रीनल वास्तव में कितनी अच्छी लड़की है.
ऐसी लड़की पत्नी के रूप में किसी भाग्य वाले को ही मिलेगी जो कि इतनी आगे बढ़ कर भी अपने यौवन को भंग होने से बचा ले। उसके बाद मैंने रीनल से माफी मांगने की काफी कोशिशें कीं किंतु रीनल ने मुझे कभी भाव नहीं दिया.
वह मुझसे बुरी तरह से नाराज हो गई थी। अब मुझे रीनल से सच्चा प्यार होने लगा था। लेकिन उसने कभी मेरी एक बात नहीं मानी.
मैंने उसे चिढ़ाने के लिए कॉलेज के काफी लड़कियां पटाईं। लेकिन रीनल का दिल कभी नहीं पिघला। मैंने गुस्से में कई लड़कियों से संबंध बनाए लेकिन उसकी कमी को पूरी नहीं कर पाया और एक दिन ऐसा आया जब फाइनल वर्ष पूरा होने पर रीनल चली गयी। फिर क्या था, मैंने उस से अपना मन हटाया और पढ़ाई में लगाया। फिर राजवीर भैया ! मेरे फाइनल वर्ष में आपकी शादी तय हुई और छुट्टी लेकर मैं अपने घर आपकी शादी में आया।  जब स्टेज पर आपकी दुल्हन देखी तो मेरे होश उड़ गए। मुझे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि आपके साथ बैठी आपकी दुल्हन और कोई नहीं बल्कि मेरी प्रेमिका रह चुकी रीनल ही है। रोचक मोड़ पर आ चुकी. यह ‘याराना का तीसरा दौर’ तीसरे भाग में जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट