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याराना का तीसरा दौर 3

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याराना का तीसरा दौर 3 1

. विक्रम- फिर एक दिन मुझे इंटरनेट पर कुछ देखना था। मेरे फोन में रिचार्ज नहीं होने पर मैंने वीणा से उसका फोन लिया। वीणा अपने फोन से हिस्ट्री मिटाना भूल गई थी और उसने अपनी फेसबुक आईडी भी लॉगआउट नहीं की. थी क्योंकि वैसे भी उसका फोन कोई नहीं छेड़ता था। जब मेरी नजर उसके नकली नाम वाली आईडी पर पड़ी तो मैंने उसके इनबॉक्स को चेक किया और जो देखा वह देखकर दंग रह गया। हमारी वीणा एक नकली नाम से प्रोफाइल बनाकर. लड़कों से इस प्रकार की चैट करती है। एक पल तो मुझे उस पर गुस्सा आया और मन किया कि उससे जाकर लडूं। फिर शांति से सोचा कि क्यों न इसके बिगड़ने का फायदा मैं ही उठा लूं। कॉलेज में तो काफी लड़कियां पटाई थीं. लेकिन यहां गांव में आकर मेरा सेक्स जीवन सूखा था। मेरे मन में वीणा के प्रति वासना घर कर गई और उसे देखने का नजरिया बदल गया। मैंने भी फेसबुक पर एक नकली नाम से एक प्रोफाइल बनाई तथा वीणा को रिक्वेस्ट भेज. कर खुद ही उसे स्वीकार कर लिया था.
मैं उसकी मित्र सूचि में सम्मिलित हो गया और जैसा कि वीणा की मित्र लिस्ट में काफी सारे लोग थे तो मुझे विश्वास था कि उसे यह भी याद नहीं रहेगा कि ये मेरा मित्र कब बना। मैंने वीणा को उसका फोन लौटा दिया। अगले दिन वीणा जब ऑनलाइन आई तो मैंने उसे मैसेज किया। फिर उसका मुझे जवाब आया.
हमने थोड़ी देर इधर-उधर की बातें कीं और उसके बाद हम सेक्स चैट में लिप्त हो गए। मैंने अपनी सेक्सी चैट से उसे पूर्ण रूप से उत्तेजित कर दिया था और उसे यह नहीं पता था कि मैं उसके बगल वाले कमरे से ही उसके साथ गुफ्तगू कर रहा हूं। उसने काफी उत्तेजित होकर मुझसे मेरा गुप्तांग अर्थात मेरे लंड का. फोटो मांगा जो कि मैंने भेज दिया और वह इस फोटो को देखकर काफी मग्न हो गई। हम एक दूसरे को बिना देखे एक दूसरे से सेक्सी चैट करते थे और हमारी दोस्ती दिन-ब-दिन गहरी होती जा रही थी। एक दिन जब मैंने उससे पूछा. कि क्या तुमने कभी किसी को चुदाई करते हुए देखा है तब उसने चैट में ही बताया कि मैंने अपने घर में भैया-भाभी को चुदाई करते हुए देखा है मैंने उससे पूछा कि अपने भाई-भाभी के बारे में तुम ऐसा कैसे सोच सकती. हो? तब वीणा ने मुझसे चैट में कहा कि वो मेरे सगे भाई नहीं हैं। वीणा ने कहा कि जब से मैंने उन दोनों (राजवीर और रीना) को चुदाई करते देखा है मैं भाई की फैन हो गयी हूं। मन करता है कि कैसे न कैसे एक बार. मुझे वो चोद दें और वैसा ही हाल कर दें जैसा कि वो भाभी का करते हैं। वैसे तो मेरी असली पहचान से अनजान वीणा यह चैट मुझसे ही कर रही थी और उसके लिए मैं एक अजनबी था.
लेकिन यह बात हो मुझे मालूम हो गयी थी कि वीणा में ऐसा बदलाव क्यों आया है। वह राजवीर भैया! यानि कि आपसे चुदाई करवाना चाहती थी.
एक बार देर रात वीणा और मैं फेसबुक पर चैटिंग कर रहे थे। हम इतनी उत्तेजित बातें कर चुके थे कि उस समय हमारी उत्तेजना चरम पर थी। वीणा ने मुझसे मेरे लिंग का फोटो मांगा जो कि मैंने उसे भेज दिया। उस फोटो से वह बहुत सम्मोहित हुई.
उसके बाद मैंने उससे उसके स्तनों का फोटो मांगा। वीणा ने भी मेरी बात मान कर बिना चेहरे के मुझे अपने स्तनों का फोटो भेजा। उसके अति उत्तम आकार वाले गोरे स्तनों को देखकर मेरा हाल बुरा हो गया। उत्तेजना की आग दोनों तरफ लगी थी। तब वीणा ने मुझसे कहा कि अब मुझे चैट बन्द करनी होगी क्योंकि उसे हस्तमैथुन. करना है। तब मैंने उससे कहा कि अगर अपनी उंगलियों की जगह तुम्हें अभी कोई असली लिंग मिल जाए तो? इस पर वीणा ने कहा कि ऐसी मेरी किस्मत कहां। अगर मिल जाए तो क्या बात हो, मैं उस लिंग को खुद में निचोड़ लूंगी। मगर ऐसा नहीं हो सकता यार, हस्तमैथुन ही करना होगा। इस पर मैंने कहा- अच्छा चलो, जब दरवाज़ा बजे तो चुपचाप उसे खोल देना। जो भी हो उसे अंदर आने देना ताकि कोई और न जग जाए। जो बात करनी है अंदर ही करना। वीणा का चैट में जवाब आया कि क्यों मज़ाक़ करते हो यार? इतने में मैं अपने कमरे से निकल कर वीणा के कमरे की तरफ गया.
रात के करीब डेढ़ बजे थे। इसीलिए सब सो चुके थे। जैसे ही मैंने गेट बजाया, वीणा ने दरवाजा खोला। मैंने बिना कोई बात किए उसे कमरे के अंदर धकेल कर कमरे का दरवाजा लगा लिया और वीणा से कहा- लो वीणा, आ गया असली लंड लेकर … कर लो अपने मन की। वीणा- ओह माय गॉड … ये कैसे सम्भव है। मैं विक्रम तुमसे ये सब बातें कर रही थी? और तुम्हें कैसे पता चला कि वो मैं ही हूं। विक्रम- वीणा, अब मौका मिला है तो क्या ये बातें करने में समय निकाल दोगी। राजवीर भैया का तो तुम्हें शायद ही मिले। आज मेरा ही लन्ड ले लो। अब वीणा के लिए शर्म और नखरे करने की कोई गुंजाइश तो रह नहीं गयी थी। हमने करीब 1 महीने तक सेक्स संबंधी क्या क्या बातें की थी यह हम ही जानते हैं। हम दोनों ने तो एक-दूसरे से अपनी सेक्स संबंधी कल्पना भी जाहिर. की थी कि कैसे मैं अपने साथी के स्तन और चूत को चूसूंगा और चुदाई करूंगा। वीणा ने भी ऐसी कई बातें की थीं कि वह कैसे अपने साथी के लन्ड को चाट-चाट कर मजे देगी। अतः हमने आव देखा न ताव एक दूसरे को कसकर चूमने. चाटने लगे। जब चुम्बनों कि बरसात खत्म हुई तो हमने एक दूसरे के सारे वस्त्र उतारने में जरा भी समय बर्बाद नहीं किया। उस वक्त मैंने अपने सामने वीणा को खड़ा किया और उसे अच्छे से ऊपर से नीचे तक निहारा। उस समय. वीणा के 32 के स्तन और 26 की कमर और गांड का आकार भी 32 का ही था। गोरे रंग के जिस्म पर ये छरहरी काया। क्या खुशबू थी वीणा के जिस्म की। वीणा और विक्रम राजवीर को यानि मुझे उस वक़्त की कहानी सुना रहे हैं.
वीणा- मैंने भी जब विक्रम का लंड देखा तो इसकी कायल हो गई। फ़ोटो में इसका वो आकार नजर नहीं आया था जो वास्तव में था। ये फोटो से ज्यादा आकर्षक था। करीब साढ़े 7 इंच का लन्ड खड़ा-खड़ा मेरी चूत के लिए चिकना पानी. छोड़ रहा था। मुझे तो विक्रम के साथ वो सब करना था जो कि मैंने इतने दिनों तक आपको रीना भाभी के साथ करते देखा था। मुझमें सेक्स की भूख भरी पड़ी थी। मेरा बदन यह सोच-सोच कर सिहर उठा था कि आज उंगलियों की जगह. असली का लिंग मेरी चूत में धक्के देगा। मैंने विक्रम से मेरी सबसे पसंदीदा चुदाई के आसन में आने को कहा। विक्रम जानता था कि मैं 69 की बात कर रही हूं। अतः मेरे बिस्तर पर हम दोनों 69 के आसन में आकर एक दूसरे. के गुप्तांगों को चूसने लगे। विक्रम- वीणा की चूत के पानी ने मेरे पूरे चेहरे को गीला कर दिया था और तभी वीणा मेरे मुंह में अपनी लाल चूत को दबाती रही। उसने मेरा लन्ड अपने मुंह में पूरा अंदर ले लिया और बड़ी. बेदर्दी से चूस चूस के ऊपर नीचे करती रही। मैंने वीणा के स्तनों को चूसने की इच्छा जताई तो वीणा ने सीधे होकर अपना एक स्तन मेरे मुंह में दे दिया और अपने हाथ से मेरे सिर को उसके स्तनों में दबाने लगी। मैंने. उसके दूसरे स्तन को हाथ में लेकर अपने हाथों से मसलना शुरू किया। करीब 20 मिनट के इस फोरप्ले के बाद वीणा ने अपनी गीली चूत मेरे सामने करके अपनी टांगें चौड़ी कर दीं। मैंने उसके ऊपर आते हुए अपना लन्ड उसकी. चूत में डाल दिया जो कि एक बार में गुप्प से अंदर चला गया क्योंकि उत्तेजना में चिकनाई ही इतनी थी। मैंने अपनी पूरी जान लगाकर वीणा की चूत में धक्के दिए जिसे वीणा बड़ी ही शिद्दत से ग्रहण कर रही थी। कोई नहीं. कह सकता था कि यह वीणा की पहली चुदाई है। लेकिन राजवीर और रीना भाभी की चुदाई देख देख कर वीणा इतनी परिपक्व हो गयी थी। वीणा स्वयं अपने आपको मेरे लन्ड में रगड़ दिलवा रही थी.
उसकी इस अदा ने मुझे उसका दीवाना बना दिया था। करीब 20 मिनट की घमासान चूत चुदाई के बाद हम दोनों साथ में स्खलित हुए और एक दूसरे से कसकर लिपट गए। 10 मिनट बाद वीणा ने फिर से मेरा लिंग चूसना शुरू किया और खड़ा करके फिर से उस पर बैठ गयी और. अपनी चूत में मेरा लन्ड ले कर अपनी गांड को ऊपर नीचे करके लेने लगी। उसके उचकते हुए स्तनों को मैंने अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू किया। जब वह गांड हिलाते हिलाते थक गई तो मैंने उसे पेट के बल लेटाकर उसके. ऊपर आकर उसकी गदराई गांड के नीचे चूत में लन्ड ठेल कर पीछे से उसकी चूत चुदाई शुरु की और फिर से दोनों झड़ गए। अब हम दोनों का हाल बुरा था। करीब 3 बजने वाले थे इसलिए कपड़े पहन कर मैं अपने कमरे में आ गया। इस. तरह की चुदाई का मजा मैंने अपने जीवन में कभी नहीं लिया था। कॉलेज के समय में चुदाइयाँ तो बहुत की थीं मगर वीणा ने जिस तरह से अपनी चूत चुदवाई मैं उसका कायल हो गया था.
दोस्तो, कहानी अगले भाग में जारी रहेगी.
यह काम की वासना से लिप्त दास्तां आपको कैसी लग रही है इसके बारे में अपनी राय देते रहें.
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स्रोत:इंटरनेट