. रंडी बन गैंग बैंग सेक्स करा फादर के शराबी दोस्तों के साथ मेरे मदर और फादर दोनों ऑफिस चले जाते थे.
अब मेरी छुट्टियाँ थी तो वो ज़्यादा वक़्त मेरे साथ ही गुजारते थे.
वो मुझे गंदे गंदे और बहुत ही सेक्सी जोक्स सुनाते थे, मनोहर ज़्यादा ही खुला हुआ था.
मैंने पूछा कि वहाँ की जिंदगी कैसी है? तो मनोहर बोला कि तुम्हारी जितनी लड़कियाँ तो वहां सेक्स करती हैं और माँ बन जाती है और वो बोला कि मोनिका तुमने कभी सेक्स का मज़ा लिया है? तो में बोली कि नहीं.
तो वो बोला कि अच्छा वहाँ तो लड़कियाँ 16 साल की उम्र में ही अपनी चूत की चुदाई करवा लेती है और गांड भी मरवाना शुरू कर देती हैं.
अब में उनके मुँह से चूत चुदाई और गांड चुदाई जैसे गंदे गंदे शब्द सुनकर बहुत खुश हुई.
यहाँ भी देखें: में बोली कि अंकल जी मैं आप की बेटी की उम्र की हूँ और आप कैसी गन्दी गन्दी बातें करते हो एक जवान लड़की के सामने आपको बिलकुल भी शरम नहीं आती क्या…? तो इतने में नीरज और महेंद्र भी आ गये.
मनोहर ने अलग जाकर उनको कुछ समझाया.
तो वो मेरे पास आकर बोले कि हम थोड़ी देर में घूमकर आते है और मनोहर अंकल जी वहीं रुक गये.
अब घर में हम दोनों बिलकुल अकेले ही थे.
में बोली कि अंकल जी मेरी फ्रेंड तो बताती है कि सेक्स में लड़की को बहुत पेन होता है.
तब अंकल जी बोले कि वो अनाड़ी होते है पहली चुदाई में थोडा दर्द होता है बाकी थोड़े पेन के बाद मज़ा ही मज़ा है.
अब अंकल जी मेरे पास बैठकर मेरे गोर गोर गाल बड़े प्यार से सहला रहे थे.
तभी उनका एक हाथ मेरे मोटे मोटे बूब्स पर आ गया और में चुपचाप बैठी रही और चुदने के लिए गरम होती रही.
वो मेरी आँखो में देखकर मुस्कराए और हल्का सा मेरी मोटी – मोटी चूची को दबा दिया.
तब मेरे मुँह से आह, हाई माँ निकला.
जब उन्होंने देखा कि में कुछ नहीं बोल रही हूँ तो अंकल जी मेरे पास आकर बैठ गये.
अब मुझे पता चल गया था कि आज मेरी गरम चूत को खुराक मिलने वाली है.
में बोली कि अंकल जी मेरी फ्रेंड बताती है कि उसका बॉयफ्रेंड उसे बहुत ही ज्यादा खतरनाक तरीके से चोदता है.
उसका उसे बहुत गन्दी गन्दी गालियाँ बकते हुए चोदता है.
तब वो बोले कि हाँ गन्दी गन्दी गालियाँ देकर सेक्स करना बहुत अच्छा होता है इससे लड़के और लड़की दोनों के अंदर जोश आ जाता है.
अब उनका हाथ मेरी मोटी – मोटी चूचीयों को दबा रहा था.
थोड़ी ही देर में मेरे सारे कपड़े जमीन पर थे और मैं नंगी उनके सामने.
अब वो मेरे लिपिस्टिक लगे लाल लाल होंठ चूस रहे थे.
मजा तो मुझे भी बहुत आ रहा था पर अब में झूठ मूठ का विरोध कर रही थी.
मैं उनसे बोल रही थी अंकल जी छोड़ दो, कोई आ जाएगा, प्लीज मत करो.
तभी इतने में फोन की घंटी बजी, तो अंकल जी मुझे जकड़े हुए ही मेरे होंठ चूसते हुए फोन तक ले गये, वो फादर का फोन था.
फादर बोले कि क्या कर कर रहे हो? अब उन्होंने लाउडस्पीकर ऑन कर दिया था.
फादर: क्या कर रहे हो? रंडी बाज अंकल जी बोले : कुछ नहीं बस आम चूसने की तैयारी है.
(मेरी मोटी – मोटी चूचीयों पर हाथ फैरते हुए बोले)मेरे फादर बोले : यार मुझे और तेरी भाभी को तो पार्टी में जाना पड़ेगा, हम सुबह तक ही आ पाएगें, तुम मोनिका का ख्याल रखना.
रंडी बाज अंकल जी बोले : आराम से जाओ यार, इतने दिन हो गये आए हुए कोई लौंडिया नहीं मिली, कोई जवान कली से खेलने का मन कर रहा है, अब में मुस्करा रही थी.
मेरे फादर बोले : तुम्हारी आदत गयी नहीं क्या, अभी तक जवान लड़की से मज़े लेने की? अब तो सुधर जाओ यार.
रंडी बाज अंकल जी बोले : यार तुम तो पार्टी में मज़े लोगे, हम यहाँ क्या करें? किसी लड़की को भेज दो यार.
मेरे फादर बोले : देखना कहीं तुम तीनों मेरी मोनिका को ही ना रगड़ देना.
(अब में फादर के मुँह से मेरे बारे में सुनकर हैरान हो गयी थी) उसका ख्याल रखना.
रंडी बाज अंकल जी बोले : यार पूरी तरह से ख्याल रखूँगा, लो बात कर लो.
में : हाँ फादर.
मेरे फादर बोले : बेटा अंकल जी की बात मानना और जो माँगे वो दे देना, में रात को नहीं आऊँगा ओके बाए.
में : बाए फादर.
फोन रखते ही अंकल जी मुझ पर टूट पड़े और मेरी मोटी – मोटी चूचीयों को कस-कसकर रगड़ने लगे थे.
तो में बोली कि अंकल जी ये क्या कर रहे हो?वो अपना तगड़ा लौड़ा अपनी पैंट में से निकालते हुए बोले कि करना क्या है मेरी जवान रंडी? अब उनका काला मोटा लंड खड़ा था और वो बोले कि मेरी जान इससे मिल, अब ये करेगा और मेरा हाथ अपने मोटे से लंड पर रख दिया.
अब मेरा हाथ लगते ही वो उछलने लगा था.
में भी मस्ती के मूड में आ गयी थी और में बोली कि जी ये बहुत उछल रहा है.
तब अंकल जी बोले कि ये तेरी जैसे जवान रंडी छिनाल देखकर खुशी के मारे उछल पड़ता है.
तब में बोली कि अंकल जी लेकिन ये पेन बहुत देता है.
उन्होने मुझे ज़्यादा ना बोलते हुए सोफे पर लेटाया और 3-4 किस मेरी गरम चूत पर करके अपना तगड़ा लौड़ा मेरी गरम चूत के होठों पर लगा दिया और में चुदवाने के लिए ना-ना करती रही, लेकिन उन्होंने मेरी मोटी – मोटी चूची पकड़कर एक जोरदार झटका दे मारा, जिससे उनका आधा लंड मेरी गरम चूत में घुस गया था.
मेरी गरम चूत में जोरदार जलन हुई आह माँ में मरी, हाईई.
तब अंकल जी बोले कि साली माँ को याद करती है, तेरी लंडखोर तो खुद कहीं चुद रही होगी, साली ये लंड तेरी माँ ने भी अपनी चूत में लिया है, देख ले माँ बेटी दोनों इस लंड के नीचे आ गयी और यह कहते हुए अपना पूरा का पूरा लंड मेरी गरम चूत में सरका दिया.
अब मैं दर्द के मारे जोर से चीखे जा रही थी, लेकिन अंकल जी कोई तरस खाने के मूड में नहीं थे और बोले जा रहे थे साली दोनों माँ बेटी टाईट है.
कुछ देर के बाद में नॉर्मल हुई, मैंने पूछा कि अंकल जी तुमने मेरी माँ की चूत को कब चोदा है? तो वो बोले कि अकेले मैंने ही नहीं, हम तीनों ने ही गैंग बैंग चुदाई करी थी उस रंडी की चूत को हम सभी ने मिलकर एक साथ चोदा है और उस साली की गांड भी मारी है.
अब वो आगे कुछ बोलते इतने में ही नीरज अंकल जी और महेंद्र अंकल जी अंदर आ गये.
अब में डर और शरम से सब भूल गयी थी.
वो दोनों ठरकी अंकल मेरे पास आए और मेरी मोटी – मोटी चूचीयों पर अपने हाथ फैरते हुए बोले कि मान गये मनोहर, बेटी तो माँ से भी बढ़कर लगती है.
तभी सुनील अंकल जी बोले कि देखो कितनी प्यारी है? और मेरे मोटे बोबे का निप्पल ज़ोर से मसल दिया, तो मेरे मुँह से आआ निकला.
उन दोनों ने भी अपने उतार दिए.
मनोहर अंकल जी का लंड बहुत काला था पर मोटा ज़्यादा था, सुनील अंकल जी का लंड एकदम गोरा लाल टोपा बिल्कुल मशरूम की तरह देखकर मेरे मुँह में माल आ गया था.
अब सुनील और नीरज मेरे अगल बगल में बैठ गये थे और मेरे हाथों में अपना तगड़ा लौड़ा पकड़ा दिया और उन दोनों ने मेरी एक-एक चूची को अपने मुँह में ले लिया.
अब वो दोनों बुरी तरह से मेरी मोटी – मोटी चूची चूस रहे थे और में श-श अंकल जी प्लीज कर रही थी.
अब नंगे मनोहर अंकल जी मेरी गरम चूत में धकाधक लगे हुए थे.
अब चुदवाते चुदवाते मेरी गुलाबी चूत का माल निकलने वाला था.
अब में चुदते चुदते मस्ती में चूर थी आआहह अंकल जी, आह… आह… उई माँ फ़क मी हार्ड, आह, आई एम कमिंग और मेरा ज़ोर से माल निकला….
अब मनोहर अंकल जी मेरा काम लगाने में लगे हुए थे और में निढाल सी हो गयी थी.
तभी नीरज अंकल जी मेरे लाल लाल होंठ को बुरी तरह से चूसते हुए बोले कि हरामजादी बिल्कुल अपनी माँ की तरह गर्म है.
मनोहर ने अपना निकाला और मुझे नीचे अपने घुटनों पर करके मेरा सिर महेंद्र की गोदी में टिका दिया.
अब उनका काला मोटा लंड मेरे गालों पर रगड़ खा रहा था.
मनोहर जी ने पीछे से मेरी गरम चूत पर अपना तगड़ा लौड़ा टिकाकर एक ज़ोर से धक्का मारा, तो मेरे मुँह आह, हाईईईईइ माँ निकल गया.
अब उनका काला मोटा लंड पूरा मेरी गरम चूत में था.
अब महेंद्र अंकल जी मेरा सिर पकड़कर अपना तगड़ा लौड़ा मेरे मुँह में देने लगे थे.
तभी में बोली कि अंकल जी मुँह में नहीं.
तब मनोहर अंकल जी धक्के मारते हुए बोले कि आज तू किसी बात के लिए मना नहीं कर सकती साली छिनाल, आज तो सारी रात तुझे बनाकर चोदना है हम सब को मिलकर आज की रात तू एक रंडी है रंडी, ले-ले तेरी रंडी माँ भी बड़े शौक से चूसती है इन लंड को आज तेरी किस्मत ने जोर मारा और तुझे भी मिल रहा है.
तब महेंद्र अंकल जी बोले कि माँ बेटी एक जैसी ही रंडी है, वो भी लंड चूसने में पहले ना-ना करती है.
मैंने अपने मुँह में उनका काला मोटा लंड भर लिया.
अब नंगे नीरज अंकल जी का काला मोटा लंड मेरे हाथ में था और वो मेरे मोटे मोटे बोबे दबा रहे थे.
जब पीछे से मेरी गुलाबी चूत पर लंड का धक्का पड़ता तो आगे लंड पूरा मेरे गले तक घुस जाता था.
अब मेरे पापा के वो तीनों दोस्त मुझे मेरी माँ का नाम ले लेकर चोद रहे थे उन्हें मेरे अंदर मेरी माँ नजर आ रही थी.
अब मनोहर अंकल जी की स्पीड बढ़ गयी थी.
अब में समझ गयी थी वो झड़ने वाले है ऑश बेबी गुड, आई एम कमिंग और उन्होंने अपना तगड़ा लौड़ा अंदर तक मेरी गरम चूत में दबा दिया.
अब गरम गरम काम रस की गर्मी पाकर में भी झड़ चुकी थी.
नीरज अंकल जी ने एकदम से मेरी बगलों में अपना हाथ डाला और मेरा अपने लंड के पास ले आया.
नंगे महेंद्र अंकल जी ने मनोहर अंकल जी की सीट ले ली.
अब मेरे घुटने जमीन पर थे और मेरे हाथ नीरज अंकल जी की पीठ पर थे.
अब पीछे से महेंद्र अंकल जी और आगे से नीरज अंकल जी लगे हुए थे.
अब मेरी गुलाबी चूत के गीली होने के कारण पच-पच की आवाज़े आ रही थी.
10 मिनट की शानदार चुदाई के बाद नीरज अंकल जी भी झड़ गये.
अब उनका सारा काम रस मेरे मुँह पर बिखरा पड़ा था और कुछ वीर्य मेरे मुह के अंदर भी चला गया था.
अब सुनील जी लगातार धक्के मार रहे थे.
अब में संतुष्टि में चीख रही थी ओह एस, आह… आह… उई माँ फ़क मी अंकल जी और अंदर तक आह… आह…, ओह माई गॉड, अंकल जी आह… आह… उई माँ फ़क मी और थोड़ी देर के बाद में एकदम से बुरी तरह से झड़ी.
थोड़ी देर के बाद अंकल जी ने अपना तगड़ा लौड़ा बाहर निकाला और मेरे मुँह में दे दिया.
अब मुझे काम रस और मेरी गरम चूत के माल का स्वाद आ रहा था.
2-4 धक्के मुँह में मारने के बाद वो भी झड़ गये.
गैंग बैंग चुदाई खत्म करने के बाद अब हम चारों जमीन पर नंगे पड़े गहरी-गहरी साँसे ले रहे थे.
आगे की गैंग बैंग सेक्स स्टोरी फिर कभी बताउंगी.
तो दोस्तों हम उम्मीद करते हैं की आप को हिंदी सेक्स स्टोरी “रंडी बन फादर के चार दोस्तों के साथ हार्डकोर गैंग बैंग सेक्स करा New 18+ Hindi XXX Gang Bang Sex Story” बहुत पसंद आई होगी इस हिंदी सेक्स कहानी को अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करना.
स्रोत:इंटरनेट