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लंड के मजे के लिये बस का सफर 4

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लंड के मजे के लिये बस का सफर 4 1

. थोड़ी देर बाद अलसाई सी पल्लवी उठी और बोली- मैं नहाने जा रही हूँ उसके बाद तुम नहा लेना.
इतना कहकर वो बाथरूम में घुस गयी और मैं उसकी इस ताजी याद को लेकर सपने में खो गया। कुछ देर बाद पल्लवी आयी और मुझे झकझोरते हुए उठाने लगी। मैं उठ कर बैठ गया.
वो मुझसे बोली- जाओ नहा लो नहीं तो ऑफिस की देरी हो जायेगी। मैंने बिस्तर छोड़ दिया। इसी पल उसने मुझे एक पल के लिये और निहारा और बोली- देखा … तुम्हारे राजा को जंगल से निकाल कर बाहर लाई हूँ मैं, तुमने तो इतने खूबसूरत राजा को जंगल में छुपा कर रखा हुआ था। उसकी इस बात पर मुझे बड़ा प्यार आया, मैंने उसे अपने से चिपका लिया। वो मुझसे अपने आप को छुड़ाते हुए बोली- जल्दी जाओ, नहीं तो देर हो जायेगी। तब तक मैं नाश्ते के लिये बोल देती हूँ। मैं जल्दी से गया और नहा धोकर तैयार होकर आ गया। आज भी गुलाबी सूट के साथ वो बहुत खूबसूरत नजर आ रही थी। मैं अपने बैग से कपड़े निकालने जा ही रहा था तो वो बोली- बेड पर तुम्हारे कपड़े निकाल कर रख दिये हैं। उसकी इस अदा से मुझे उस पर और प्यार आ रहा था। उसके बाद हम दोनों ने नाश्ता किया और ऑफिस की तरफ निकल पड़े। दोस्तो, मुझे लगा कि मेरी और पल्लवी की कहानी इसी तरह चलेगी, लेकिन ऊपर वाले को कुछ और मंजूर था। खैर, मैं और पल्लवी ऑफिस पहुँच कर मीटिंग हॉल के अन्दर अपनी अपनी सीट पर बैठ गये। आज मेरी भी प्रेजेन्टेशन थी और मैं कुछ नर्वस भी था। तभी एक पतली-दुबली लड़की मेरे सीट के बगल वाली सीट पर बैठते हुए मुझे हैलो कहा। वो जींस और टॉप में थी। टॉप इतना छोटा था कि उसकी नाभि पूरी नुमाया हो रही थी। मेरे प्रेजेन्टेशन की बारी आयी, सभी ने मेरी बात का समर्थन किया सिवाय उस लड़की के … जिसका नाम मैं अभी तक नहीं जानता था। इसी बीच लंच का टाईम हो गया, सभी लोग धीरे-धीरे हॉल से निकल गये। मुझे और उस लड़की को सर ने रोक लिया और प्रेजेन्टेशन को लेकर डिस्कशन होने लगी। सर के मुँह से ही सुना कि उस लड़की का नाम रीतिका था। खैर काफी देर तक डिस्कशन होता रहा पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला। अन्त में सर बोले कि कल इस डिस्क्शन पर एक बार फिर बात होगी और आप लोग. अच्छे से प्रिपेयर होकर आना क्योंकि कल लास्ट डे है और मुझे रिजल्ट चाहिए। अभी तुम लोग जा सकते हो और कल तुम दोनों अपनी-अपनी बातें रखने के लिये तैयार रहना.
इतना कहकर सर बाहर चले गये.
तभी रीतिका ने मेरा हाथ पकड़ा और बोली- मुझे आपसे एक काम है, आप मेरे साथ आ रहे हैं। तभी एक बार फिर हॉल में सभी लोग इकट्ठे होने लगे। तभी मीटिंग ओवर होने की तथा दूसरे दिन किस प्लान पर बात होनी है उसकी न्यूज आयी। सभी वापिस जाने लगे.
एक बार फिर रीतिका बोली- मुझे आपका 10 मिनट का समय चाहिये। मैंने पल्लवी को होटल में जाने को बोला.
पल्लवी ने हम दोनों के देखा और बिना कोई प्रश्न किये हुए चली गयी। अब हम दोनों ही बचे थे, एक सोफे पर बैठते हुए रीतिका बोली- मिस्टर सक्सेना, मुझे आपसे यौन सुख चाहिए.
मैं सकपका गया कि एक अजनबी लड़की इतने खुले रूप में कैसे बोल सकती है। मेरे तो हाथ पैर फूल गये, यह क्या माजरा है, मैं उसकी तरफ प्रश्नसूचक दृष्टि से देखने लगा.
तो वो बोली- जो आप सुन रहे हैं, वो सही है.
परसों पूरी रात आपकी वजह से मैं सो नहीं पायी और कल रात की … और आज सुबह की भी … आपकी और पल्लवी की चुदाई के बारे में सोच कर मैं परेशान रही और अपनी चूत के अन्दर उंगली डालकर काम चलाने में मजबूर हुई.
इसलिये अब आप ही मुझे यौन सुख प्रदान करेंगे.
कहते हुए वो मेरे लंड को सहलाने लगी। “लेकिन पल्लवी और मेरे बीच में ऐसा कुछ भी नहीं है।” मेरे इतना बोलते ही उसने मेरे लंड को कस कर दबा दिया और बोली- मुझसे झूठ बोलने से कोई फायदा नहीं, तुम्हारे और पल्लवी का खेल मैंने बस में देखा है। बस मैंने शोर नहीं मचाया और इसी बात का मुझे ईनाम चाहिए। दूसरी बात तुम्हारे अगल-बगल के रूम में पल्लवी और मैं हूँ लेकिन पल्लवी तुम्हारे रूम में ही है। फिर उसने अपना परिचय दिया कि वो बनारस से है और जिस बस में मैं और पल्लवी सफर कर रहे थे उसी बस मैं वो बनारस से आयी थी।. बात खत्म करते हुए उसने अपने हाथ को मेरे लंड से हटाया और अपनी जीभ लगाकर हथेली चाटने लगी। मैंने झट से पल्लवी को फोन लगाया और बोला- मैं दो घंटे के बाद वापस आऊँगा, तुम तब तक आराम कर लो। उसने ‘ठीक है’ कहा और फोन काट दिया। कहानी जारी रहेगी.
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स्रोत:इंटरनेट