. अन्तर्वासना के सभी दोस्तों को हर्षद का नमस्कार.
दोस्तो, आपको पता है कि मैं फ्री सेक्स स्टोरीज अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक भी हूँ और अपने साथ घटी सत्य घटनाओं को सेक्स कहानी के रूप में आपको लिखता भी रहता हूँ.
बहुत सारे पाठकों ने मेरी कहानियों को सराहा भी है और हजारों की तादाद में मुझे आप सभी के ईमेल भी मिलते हैं.
कुछ ने गंदी ख्वाहिश भी लिखी लेकिन मैंने उनकी बातों को ज्यादा दिल पर इसलिए नहीं लिया क्योंकि जब लंड खड़ा होता है, तो पढ़ने वाला कुछ बहक ही जाता है.
दोस्तो, आपने मेरी पहली कहानी सौतेली मां के साथ चुदाई की लालसा पढ़ी थी.
उसका लिंक दे रहा हूँ.
आप एक बार फिर से इसे पढ़कर तरोताजा हो सकते हैं.
इसी से जुड़ी एक सेक्स कहानी आज मैं आपके मनोरंजन के लिए पेश करने जा रहा हूँ.
आपको पता है कि लॉकडाउन की वजह से बहुत सारी दिक्कतें आ गयी थीं.
मैं और पिताजी पिछले छह महीने तक घर से ही काम कर रहे थे.
लॉकडाउन की वजह से मैं अपने दोस्त विलास के बेटे के नामकरण विधि पर भी नहीं जा सका था.
उसके पहले जन्मदिन पर हम सभी 24 दिसंबर 2020 को उसके गांव गए थे और हम सभी वहां दो दिन रहे भी थे.
उधर क्या क्या हुआ था, वो सब मैंने आपको लिख कर बताया था.
अब हमारा रुटीन पहले जैसे हो गया था लेकिन मेरी मम्मी आठ दिन से कुछ उदास लग रही थीं.
आपको याद दिला दूँ कि मेरी मम्मी (मतलब मेरी सौतेली मां) का नाम अदिति है.
उम्र 35 साल की है, लेकिन वो 27-28 से ज्यादा की नहीं लगती हैं.
मम्मी का कद साढ़े पांच फीट है और उनका फिगर 34-30-38 का है जो कि बड़ा ही सेक्सी फिगर है.
बाहर को निकली हुई गांड और दूध जैसा सफेद रंग.
जो भी मां को देखे, उसका लंड खड़ा होना तय जानिए.
मैं इससे पहले भी अपनी सौतेली मां की चुदाई कर चुका था.
वो मुझसे अकेले में मां कहने की जगह अपना अदिति लेकर बुलाने को कहती थीं.
मैंने अदिति से दो तीन बार पूछा भी- क्या बात है अदिति, तुम बहुत उदास रहती हो? तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना? वो बोली- मैं ठीक हूँ … मुझे क्या हुआ है.
ये कह कर वो मेरी बात को टाल देती थी.
कुछ दिन ऐसे ही निकल गए.
उस दिन शनिवार था.
पिताजी साढ़े सात बजे ही अपने ऑफिस चले गए थे.
आठ बजे अदिति मुझे जगाने मेरे बेडरूम में आई.
वैसे भी वो हर दिन आठ बजे मुझे जगाने आती थी.
मैं सिर्फ लुंगी पहन कर ही सोता था, अन्दर से नंगा ही रहता था.
जैसे ही अदिति मुझे जगाने लगी.
मैंने उसे अपने ऊपर खींच लिया और अपनी बांहों में कस लिया.
अदिति मेरी बांहों से छूटने की कोशिश कर रही थी.
लेकिन मैं कहां छोड़ने वाला था.
अदिति बोली- छोड़ो ना हर्षद.
मुझे किचन में बहुत काम है.
सौतेली मां झूठ मूठ की छूटने की कोशिश कर रही थी और अपनी इस कोशिश में वो मेरे लंड पर अपनी चूत नाईटी के ऊपर से ही रगड़ रही थी.
मैं समझ गया कि अदिति चुदासी है.
मैंने पलटी मारकर अदिति को मेरे नीचे ले लिया.
इस छीना झपटी में मेरी लुंगी मेरे शरीर से अलग हो गई और मैं नंगा हो गया था.
अब मेरा लंड सीधा अदिति की चूत को रगड़ रहा था.
मैंने अदिति से पूछा- अदिति क्या बात है? अदिति बोली- हर्षद, तुम्हें याद है हमारा पहली बार संभोग हुआ था.
उसे एक साल हो गया है.
उसके बाद आज तक मैंने इतनी सारी रातें कैसी गुजारी हैं, तुम्हें कैसे बताऊं? मैंने कहा- देखो अदिति, लॉकडाउन की वजह मैं और पिताजी छह महीने घर से ही काम कर रहे थे.
फिर जब हमारा रुटीन पहले जैसा होने लगा, तो पिताजी की ड्यूटी लोकल ऑफिस में ही फिक्स हो गयी.
अदिति- तो? मैं- तो उन्हें काम के सिलसिले में बाहर जाने पर रोक लगा दी गई.
अब पिताजी सुबह साढ़े सात बजे ऑफिस जाकर शाम को आठ बजे घर आने लगे.
अब तुम ही बताओ कि हमें एक दूसरे के लिए समय ही कहां मिलता है.
ये सुनकर अदिति नीचे से अपनी गांड उठाकर अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ती हुई बोली- देखो हर्षद, समय निकालना तुम्हारे हाथ में है.
जैसे अभी मुझे पकड़ कर रखा है.
एक दिन ऑफिस एक घंटा देर चले जाओगे तो क्या फर्क पड़ जाएगा.
लेकिन अब तुम्हारा मुझसे प्यार शायद कम हो गया है.
अदिति की बातें सुनकर मैं दंग रह गया.
वो भी ठीक ही कह रही थी.
मैंने अदिति से कहा- मुझे माफ कर दो अदिति.
अब ऐसा नहीं होगा.
मैं तुम्हारा पूरा ख्याल रखूँगा.
बस अब हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूसने लगे.
साथ में मैं अपने लंड से अदिति की चूत रगड़ रहा था.
मैंने अदिति से कहा- अब एक शॉट हो जाए अदिति! अदिति बोली- अभी नहीं, फिर किसी दिन … आज के लिए इतना काफी है.
अब उठो मेरे ऊपर से.
मेरी चूत गीली हो चुकी है.
मैं उठकर बेड के नीचे उतरा.
अदिति मेरे पास आकर अपने दोनों हाथों से मेरा लंड रगड़ कर बोली- हर्षद ये तो और लंबा और मोटा हो गया है.
क्या बात है, इसमें कोई जादू हो गया है क्या? मैंने उसकी चूत को सहलाते हुए कहा- ये सब तुम्हारी वजह से हो गया है.
अदिति मुस्कुराकर बोली- बहुत शैतान हो गए हो.
अब जाओ नहाने हर्षद, नहीं तो लेट हो जाओगे.
मैंने कहा- पहले मेरा लंड तो छोड़ो, तब तो मैं बाथरूम जाऊं.
अदिति ने मुस्कुराकर फिर एक बार मेरे लंड को जोर से मरोड़ा और छोड़ दिया.
मैं नहाने चला गया और थोड़ी ही देर में तैयार होकर सोफे पर बैठ गया.
अदिति हम दोनों के लिए चाय नाश्ता ले आई और हमने साथ में चाय नाश्ता किया.
अब मैं ऑफिस के लिए निकलने लगा तो अदिति ने मुझे अपनी बांहों में कस लिया.
मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने भी उसे अपनी बांहों में कस लिया.
हम दोनों एक दूसरे को चूमने लगे.
मैं अपने दोनों हाथों से अदिति की कसी हुई और बाहर निकली हुई गांड को मसलने लगा.
अदिति ने भी मेरी गांड को मसला और मुझसे अलग हो गयी.
वो मुझे गेट तक छोड़ने आयी.
मैंने अपनी बाईक बाहर निकाली.
अदिति ने बाय करके गेट लगा दिया.
मैं ऑफिस आ तो गया लेकिन दिन भर अदिति के बारे में ही सोचता रहा.
सचमुच लॉकडाउन के छह महीने के बाद मैं अपना कुछ समय अदिति को दे सकता था.
लेकिन मैंने क्यों नहीं दिया, मैं यही सोचता रहा.
ये कितनी बड़ी गलती हो गयी मुझसे.
खैर अब जो हो गया सो हो गया लेकिन अब इसके आगे ऐसा नहीं होगा.
अब मैं हर दिन कुछ समय अदिति के साथ बिताऊंगा.
ये मैंने अपने दिल में ठान ली.
मैं अदिति को हमेशा खुश रखूँगा.
उसकी सब इच्छाओं को पूरी करूंगा.
ऐसे ही दिन निकल गया और शाम को सात बजे मेरी ऑफिस से छुट्टी हो गयी.
मैं ऑफिस से बाहर आया तो पिताजी का फोन आया.
मैंने फोन उठाया.
पिताजी बोले- हर्षद बेटा तुम घर पहुंच गए क्या? मैंने कहा- अभी मैं ऑफिस से बाहर आया हूँ और अब घर के लिए निकल रहा हूँ.
पिताजी बोले- मैं ऑफिस के काम के लिए बाहर जा रहा हूँ.
कल शाम को ही मैं घर आ पाऊंगा.
तब तक तुम घर का ख्याल रखना.
वैसे भी कल तुम्हारी छुट्टी ही रहेगी.
मैंने कहा- ठीक है पिताजी, आप चिंता मत करो, मैं सब सम्हाल लूंगा.
पिताजी ने फोन कट कर दिया.
मैं घर के लिए निकल पड़ा.
रास्ते में मैंने एक दुकान से केक सजाने वाली सफेद क्रीम की बड़ी ट्यूब खरीद ली और थोड़ी ही देर घर आ पहुंचा.
बाईक अन्दर रख कर मैंने गेट को ताला लगा दिया और अन्दर आ गया.
अदिति किचन में कुछ कर रही थी.
मैंने देखा उसने सफेद कलर की नाईटी पहनी थी.
अन्दर पहनी ब्लैक कलर की पैंटी और ब्लैक कलर की ब्रा पहनी हुई साफ़ दिख रही थी.
अदिति बहुत ही सेक्सी दिख रही थी.
उसकी बाहर को निकली गोरी और मांसल गांड मेरा लंड खड़ा करने लगी.
दोनों चूतड़ों के बीच की दरार मुझे साफ दिखायी दे रही थी.
मेरी आहट सुनते ही अदिति बोली- आ गए हर्षद.
मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी.
तुम्हारे पिताजी का फोन आया था.
वो आज नहीं आने वाले हैं.
कल शाम को वापस आएंगे.
वो ये मेरी तरफ मुँह करके बोली, तो मैं उसके नजदीक आ गया.
मैंने कहा- हां अदिति, मुझे भी फोन आया था.
उन्होंने कहा कि अपनी मम्मी ख्याल रखना.
मैं उसको अपने सीने चिपका कर खड़ा हो गया.
अदिति ने मुस्कुराकर अपने दोनों हाथ मेरे कंधे पर रखे और अपनी चूत मेरे लंड पर रगड़ती हुई बोली- सचमुच ऐसा कहा है उन्होंने? मैंने उसे चूमते हुए और साथ में अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ते हुए कहा- हां, सचमुच ऐसे ही ख्याल रखने का कहा है पिताजी ने.
अदिति ने मुझे दूर करते हुए कहा- हर्षद, तुम बहुत बदमाश हो गए हो.
अब जाओ जल्दी से फ्रेश होकर आओ.
मैं चाय बनाती हूँ.
मैं अपने रूम जाकर कपड़े निकालकर बाथरूम में आ गया.
मैंने जल्दी से नीचे के बाल साफ करके लंड चकाचक कर दिया और मस्त नहाया.
अब मैं लुंगी लगाकर अन्दर से नंगा ही था.
मैं डिओ और सेंट लगाकर तैयार हो गया.
तभी अदिति ने आवाज दी- हर्षद आओ ना.
चाय ठंडी हो जाएगी.
मैं जाकर सोफे पर बैठ गया.
अदिति चाय लेकर आयी और मेरे पास बैठ गयी.
हम दोनों बात करते हुए चाय पीने लगे.
अदिति बोली- हर्षद, एक बात पूछूं? मैंने कहा- हां पूछो न अदिति.
उसने कहा- विलास का बेटा कितना प्यारा है ना? हमसे कितना घुल-मिल गया था.
जैसे हम उसके कुछ अपने लगते हैं.
सबसे ज्यादा वो तुम्हारे साथ ज्यादा घुल-मिल गया था.
मैंने हूँ कहा.
अदिति ने अपना एक हाथ मेरी जांघों पर रखते हुए कहा- सोहम तो हूबहू तुम्हारे जैसा दिखता है … है ना हर्षद? मैं अदिति की बातें सुनकर हड़बड़ा गया.
मैंने अदिति से कहा- अदिति सोहम मेरे साथ ज्यादा घुल-मिल गया था लेकिन तुम जो सोच रही हो, ऐसी कोई बात नहीं है.
हमारी चाय खत्म हो गयी थी.
अदिति ने मेरे नंगे सीने को अपने हाथों से सहलाती हुई बोली- हर्षद, अब तो मुझे पूरा यकीन हो गया है कि सोहम तुम्हारा ही बेटा है.
ये बातें सुनकर मैं सोचने लगा कि अब झूठ बोलने से कुछ फायदा नहीं है.
मैंने अदिति से कहा- ओके मैं सच बता ही देता हूँ.
लेकिन वादा करो कि ये बात हमारे बीच ही रहेगी.
अदिति बोली- हां बोलो हर्षद, ये बात मैं किसी को नहीं कहूँगी.
मैंने अदिति से कहा- अदिति तुम्हें याद है न … गए साल दिसंबर 19 में हम दोनों का पहली बार संभोग हुआ था.
उसके बाद विलास ने मुझे गांव बुलाया था.
तब मैं दो दिन उधर ही था.
उस समय सरिता भाभी ने अपनी पूरी कहानी बतायी.
हम दोनों में शारीरिक आकर्षण के चलते ये सब हुआ था.
अदिति मेरी बातें सुनकर मुझे चूमती हुई बोली- हर्षद, तुमने अच्छा काम किया है.
सरिता की गोद भरके उसे मां बनने की खुशियां दी हैं.
मैं बहुत खुश हूँ हर्षद.
एक औरत ही औरत का दुःख जानती है.
इतना कहकर अदिति उठकर चाय के कप लेकर किचन में चली गयी और अपना काम करने लगी.
मैं भी उठकर किचन में आ गया और अदिति के पीछे से चिपक गया.
मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कसी हुई चुचियों पर रख दिए.
मेरा आधा तना लंड उसकी गांड की दरार में दस्तक दे रहा था.
मैंने अपने दोनों हाथों में उसकी गोल-मटोल चूचियां पकड़ रखी थीं.
अदिति झूठा गुस्सा दिखाती हुई कसमसाने लगी.
फिर अपनी गांड मेरे लंड पर रगड़ती हुई बोली- हटो ना हर्षद.
काम करने दो मुझे … अभी खाना भी बनाना है.
वो ये कहने के साथ साथ अपना सीना भी हिलाती रही ताकि उसकी चूचियां मेरे हाथ से रगड़ सुख लेती रहें.
मैंने जोर जोर से उसकी चूचियां मसलीं और साथ में लंड उसकी गांड की दरार में रगड़ता रहा.
मैं- अदिति आज मैं खाना बाहर से ले आता हूँ.
लेकिन मुझे अपने से दूर मत करो.
आज बहुत दिनों के बाद हमें एकांत मिला है.
मैं तुम्हें बहुत सारी खुशियां देना चाहता हूँ.
ये सुनकर अदिति ने अपनी गांड मेरे लंड पर जोर रगड़ी और बोली- हर्षद, प्लीज आधा घंटा रुक जाओ, मैं खाना बना दूँगी.
बाहर से मंगाने की कोई जरूरत नहीं है.
अब तुम जाकर सोफे पर बैठ जाओ मेरे राजा.
आज की पूरी रात हमारी है.
मैं मन मसोस कर सोफे पर बैठ गया और टीवी देखने लगा.
मेरा ध्यान टीवी से ज्यादा अदिति पर ही था.
काम करते समय इधर उधर हिलने की वजह से उसकी गांड भी ऊपर नीचे हिल रही थी.
जब वो नीचे झुकती, तो मुझे उसकी गांड की दरार चूत तक दिखाई दे रही थी.
मेरा हाथ अपने आप लुंगी में घुस गया और मैं लंड को सहलाने लगा.
अचानक अदिति ने मेरी तरफ देखा, तो वो मुस्कुराकर बोली- ये क्या कर रहे हो हर्षद? मैंने कहा- टीवी देख रहा हूँ.
अदिति बोली- वो तो मैं देख रही हूँ, लेकिन हाथ से क्या कर रहे हो? मैंने जवाब में कहा- बहुत फड़फड़ा रहा है … तो उसे समझा रहा हूँ कि और थोड़ी देर सब्र करो.
ये सुनकर अदिति हंस कर बोली- हां, अच्छी तरह से समझाना उसे.
बहुत बदमाश हो गया है.
आजकल इधर उधर बहुत ज्यादा कूद रहा है.
किसी भी बिल में घुस जाता है.
मैं उसकी बात सुनकर हंसने लगा और अपना लंड लुंगी से बाहर निकालकर सहलाने लगा.
मैंने अदिति से कहा- हां अदिति, आजकल ये बहुत कूदने लगा है.
किसी को देखते ही उछलने लगता है.
अदिति बोली- हर्षद एक बात पूछूं? सच सच बताना.
मैंने कहा- हां पूछो न अदिति.
अब हम दोनों ही तो हैं यहां, पूछ लो जो तुम्हारे दिल में है.
अदिति बोली- हर्षद हम अभी विलास के घर गए थे, तब तुमने सरिता के साथ संभोग किया था.
तो ये बताओ कि उसके साथ कितनी बार किया था? अदिति के इस सवाल से मैं हड़बड़ा गया.
लेकिन अब उससे क्या छिपाना.
मैंने कहा- हां अदिति, हम दोनों ने दो बार संभोग किया था.
अदिति किलक कर बोली- सच में हर्षद! किसी को कुछ पता ही नहीं चला.
मुझे भी कुछ शक नहीं हुआ.
लेकिन तुम दोनों ने ये सब कैसे किया … और सरिता फिर से पेट से हुई तो? मैंने अदिति से कहा- देखो अदिति हमने संभोग कब और कैसे किया, वो मैं फिर कभी बताऊंगा.
और रही बात प्रेंग्नेसी की, तो सरिता ने कहा है कि वो सब संभाल लेगी.
उसे भी सोहम के लिए भाई या बहन चाहिए ही है.
इस बात का खुलासा करते समय मैं सोच रहा था कि मेरी सौतेली मां अदिति मुझसे रूठ जाएगी और हो सकता है मुझे उसकी चूत चुदाई के लिए न मिले.
आगे क्या हुआ … वो मैं अपनी सौतेली मां सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूंगा.
पढ़ते रहें फ्री सेक्स स्टोरीज अन्तर्वासना पर और आप मुझे मेल करना न भूलें.
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स्रोत:इंटरनेट