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वासना का मस्त खेल 4

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वासना का मस्त खेल 4 1

. खैर ये तो अभी पता चल ही जाएगा, मैंने फिर से अपने लंड को ठीक जगह पर लगाया और अबकी बार मैंने थोड़ा जोर से धक्का दे दिया.
एक तो कामरस के निकलने से प्रवेशद्वार भीगकर चिकना हो रहां था और दूसरा प्रिया खुद भी शारीरिक और मानसिक रुप से इसके लिये तैयार थी.
इसलिये मेरा सुपारा उसकी चूत के छोटे से दरवाज़े को भेदकर अन्दर घुस गया.
प्रिया, “अआआआ … ईईईई …” कहकर फिर से कराह पड़ी.
उसकी आंखें फैलकर चौड़ी हो गईं और उसने‌ दोनों हाथों से मेरी कमर को पकड़ लिया.
“ओयय … बहुत दर्द हो रहा है, मम्मीईईई …!,ओय्यय … महेश्श्स … बहुत दर्द हो रहा है.
” प्रिया ने दर्द से कराहते हुए कहा.
सच में उसकी चूत बहुत कसी हुई थी.
अब तक जैसा कि मैं सोच रहा था कि उसने पहले भी ये सब किया होगा वैसा लग नहीं रहा था.
उसकी चूत की दीवारों ने मेरे लंड के सुपारे को पूरी तरह से जकड़ लिया था, जिससे मेरे सुपारे में एक खुजली सी होने लगी.
मैं आगे झुक कर उसके गालों को चूमने लगा और “हो गया … हो गया … अब तो बस … बस एक बार हल्का सा दर्द और होगा …” मैंने उसे ये बस तसल्ली देने के लिये कहा था.
मगर मुझे पता था असली दर्द तो अभी उसे झेलना बाकी है.
उसने भी मेरी बात मान ली और अपने शरीर को फिर से कड़ा करके वो मेरा अगला धक्का खाने के लिये तैयार हो गयी.
कुछ देर मैं ऐसे ही उसके गालों को चूमता चाटता रहा और फिर अचानक से अपनी पूरी ताकत लगाकर एक जोर का धक्का लगा दिया.
अबकी बार … अबकी बार लगभग मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी चुत की दीवारों को चीरता हुआ अन्दर घुस गया था, जिससे प्रिया के मुँह से एक जोर की चीख निकल गयी.
“अआआआ … उईईईई … मर गईईई … ईई …ई …” उसने फिर से मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया.
प्रिया की चीख कहीं उसकी मम्मी को ना सुनाई दे जाए इसलिये जल्दी से मैंने उसके होंठों को अपने मुँह में भरकर उसका मुँह बन्द कर दिया.
लेकिन उसकी घुटी घुटी सी आवाज़ अब भी निकलती रही.
मैंने उसी तरह प्रिया होंठों को चूसते हुए ही पहले तो अपने लंड को थोड़ा सा बाहर खींच लिया, जिससे प्रिया को कुछ राहत मिल गयी और मेरी कमर पर उसके हाथों की पकड़ भी कुछ हल्की हो गयी.
इसके तुरंत बाद ही मैंने एक जोरदार धक्का फिर से लगा दिया, जिससे प्रिया के मुँह से “उऊऊहू … उह … ऊऊऊई …” की आवाज निकली और उसकी आंखें बाहर को उबल आईं.
उसके हाथ मेरी कमर पर जोर से कस गए और उसकी आंखों में आंसू भर आए.
प्रिया का मुँह मेरे होंठों से बन्द था इसलिये उसने “ऊगूंगूगूगू … गूऊऊ …” कहते हुए पहले तो अपने होंठों को मेरे मुँह से छुड़वाया और फिर दर्द से बिलबिलाने लगी.
“आईईई … मम्मीईईई … बहुत दर्द हो रहा है इसे बाहर निकाल‌ लो प्लीईज, मुझसे नहीं होगा … ओययय … महेश्श … इसे बाहर निकाल ले …” ये कहते हुए वो छटपटाने लगी.
मैंने थोड़ा सा ऊपर उठकर नीचे अपने लंड की तरफ देखा तो मेरी आंखों में एक नयी चमक सी आ गयी, क्योंकि मेरा आधे से ज्यादा‌ लंड प्रिया की चुत में घुसा हुआ था और उस पर मुझे कुछ खून लगा हुआ दिखाई दे रहा था, इसका मतलब था कि सही‌ में प्रिया अभी तक कुंवारी ही थी.
प्रिया जैसी खूबसूरत लड़की और उसके कौमार्य को भंग करने का सौभाग्य मुझे मिला, ये सोचकर ही मैं उत्तेजना से भर गया.
बस, अब तो हो गया, यह आखिरी दर्द था … बस थोड़ा सा और सह लो … फिर सब ठीक हो जाएगा.
” मैंने एक हाथ से उसकी चूची को सहलाते हुए कहा और साथ ही फिर से एक धक्का और लगाकर अपना पूरा लंड उसकी चुत में घुसा दिया जिससे प्रिया फिर से तिलमिला उठी- आआईईई … मम्मीईईई … ईईई! अब उसकी आंखों से टप टप आंसू बहने लगे.
मैं उसको चूमे जा रहा था और प्रिया ने मुझे धक्के देकर हटाने की कोशिश करते हुए कहा- नहीं … मुझे नहीं करना … आईईई … मम्मीईईई … इसे तुम बाहर निकाल लो … प्प् …प्लीज! लेकिन मैं अपने लंड को प्रिया की चुत में घुसाये हुए उससे लिपटा रहा. और उसके गालों को चूमने चाटने लगा.
मैं नीचे से अब कुछ भी हरकत नहीं कर रहा था, बस ऊपर से ही उसके होंठों व गालों को चूमे जा रहा था.
कुछ देर तक मैं नीचे से बिना कोई हरकत किये ऐसे ही प्रिया के बदन पर लेटे हुए उसके होंठों व गालों को चूमता चाटता रहा और उसे सांत्वना देने के लिये उसके सिर के बालों को भी प्यार से सहलाता रहा, जिससे प्रिया कुछ शांत होने लगी.
प्रिया जब कुछ शांत हो गयी, तो मैं उस पर लेटे लेटे ही धीरे धीरे अपने लंड को चुत में अन्दर बाहर करने लगा.
मगर जैसे ही लंड ने हरकत करनी शुरू की, प्रिया को फिर से दर्द का एहसास होने लगा.
“अआआह्ह हह … महेश्श … बहुत दुःख रहा है … प्लीज मेरी बात मान लो … आईई … मुझसे नहीं होगा … ओह्ह्ह … मम्मीईई … ओय्यय … महेश्श …” मैंने अब रुकना ठीक नहीं समझा और बस यूं ही लंड को चूत में हिलाने लगा.
मेरे लंड की हरकत के साथ साथ प्रिया ने कराहते हुए मुझसे कहा- आईईई … अआआ … ह्ह्हहह … उऊऊ … ह्ह्हहह …ओय्य्यय … अआआ … ह्ह्हहह … उऊऊ … ह्ह्हहह …” वो दर्द से आवाज कर रही थी लेकिन मैं अब रूका नहीं बल्कि एक हाथ से उसकी चूचियों को भी दबोच लिया और वैसे ही धीरे धीरे को अपने लंड. को उसकी चुत में अन्दर बाहर करता रहा.
साथ‌ ही उसे फिर से उत्तेजित करने के लिये मैं उसके होंठों व गालों को चूमते चाटते हुए उसकी चूचियों को भी सहलाने‌ लगा.
कुछ देर तक तो प्रिया ऐसे ही कराहती रही.
फिर धीरे धीरे वो शांत होने लगी और मेरी कमर पर उसके हाथों की पकड़ कुछ ढीली पड़ने लगी.
वो भी अब हल्का हल्का मेरे होंठों को अपने होंठों से दबाने लगी थी, जिससे मैं समझ गया कि उसका दर्द अब कम हो रहा है.
इसलिये मैंने अपना काम जारी रखते हुए धीरे से अपनी जुबान को उसके मुँह में घुसा दिया, जिसे प्रिया भी हल्का हल्का चूसने लगी.
प्रिया अब धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी थी क्योंकि उसकी चुत में अब हल्की सी नमी आ गयी थी, जिससे चुत की दीवारें चिकनी हो गईं … और इसका अहसास मुझे अपने लंड से हो रहा था.
मेरा लंड इस समय थोड़ा आसानी से चुत के अन्दर बाहर हो रहा था.
मैं भी उसके होंठों का मजा लेते हुए वैसे ही धीरे धीरे धक्के‌ लगाता रहा, जिससे कुछ ही देर में प्रिया अपना सारा दर्द भूल कर उन मादक पलों का आनन्द लेने लगी.
उसकी कमर भी अब नीचे से धीरे धीरे हरकत करने लगी थी.
ये इस बात का इशारा था कि उसे भी अब मजा आने लगा है.
मैंने भी अब धीरे धीरे अपने कूल्हों को उठाकर धक्के लगाने शुरू कर दिए … जिससे प्रिया फिर से कराहने लगी और मेरे होंठों से अपने होंठ अलग करके सिसियाना शुरू कर दिया था.
“ओह्ह … मम्मीईईई … दुख रहा है ना … प्लीज … धीरे करो … बहुत दर्द हो रहा है … उफ्फ्फ्फ़ … मुझे अगर पता होता ना … कि इतना दर्द होता है, तो मैं ये कभी भी नहीं करती …” ये सब उसने दर्द से कराहते हुए कहा.
वो मुझसे शिकायत तो कर रही थी …‌ मगर साथ ही उसकी कमर अब भी नीचे से धीरे धीरे हरकत कर रही थी.
“अच्छा जी … और अब … अब क्या करोगी?” मैंने उसकी आंखों में देखते हुए उससे पूछा और उसके गाल पर एक चुम्मी लेकर फिर से उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.
प्रिया ने मेरी बात का कोई‌ जवाब तो नहीं दिया, मगर उसने अपना मुँह खोलकर फिर से मेरी जुबान को अपने मुँह में खींच लिया और उसे जोरों से चूसने लगी.
उसके दोनों हाथ भी मेरी कमर पर से मेरे सिर पर आ गए और वो अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों व जीभ को जोरों से चूसने लगी.
धीरे धीरे प्रिया की‌ कराहें, मादक सिसकारियों में बदल गईं और उसके दोनों हाथों ने मेरे सिर को छोड़ दिया और अब वे वापस मेरी पीठ पर रेंगने लगे.
अब तक जिस दर्द की वजह से प्रिया के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था, वही दर्द अब उसे मज़े दे रहा था.
मैं भी अब धीरे धीरे अपने धक्कों की गति को बढ़ाने लगा, जिससे प्रिया के मुँह से सिसकारियां फूटनी‌ शुरू हो गईं.
मेरे धक्कों के साथ साथ प्रिया भी अब अपने कूल्हों‌ को‌ जोरों से उचकाने लगी थी.
उसने मेरे होंठों को छोड़ दिया और जोरों से अपने कूल्हों को उचका उचका कर अपनी चुत से मेरे लंड का स्वागत करने लगी.
वो अब पूरी तरह से उत्तेजित हो गयी थी, इसलिये उसकी चुत ने भी अब कामरस उगलना शुरू कर दिया.
कामरस ने चुत की दीवारों की चिकनाई को और भी बढ़ा दिया और मेरा लंड अब आसानी से चुत के अन्दर बाहर होने लगा.
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[email protected] कहानी जारी है.

स्रोत:इंटरनेट