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वासना के पंख 6

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वासना के पंख 6 1

. संध्या मोहन के साथ ही बैठ गई थी और मोहन मैक्सी के ऊपर से ही उसके स्तनों को दबा रहा था। एक बार तो उस से रहा नहीं गया और उसने उंदर हाथ डाल कर संध्या का एक स्तन मसल डाला। उधर वाइन का असर शारदा पर भी. होने लगा था और इस फिल्म के दृश्यों ने उसकी वासना भड़का दी थी वो भी प्रमोद के साथ जीभ से जीभ लड़ा कर चुम्बन करने लगी। फिल्म ख़त्म हुई तब तक 12 बजने में 10 मिनट कम थे। मोहन- यार, काश हम भी तुम्हारे नग्न समुद्रतट यानि न्यूड बीच वाला अनुभव ले पाते। संध्या- मुझे तो उस क्लब में जाकर चुदवाने का मन कर रहा है। प्रमोद- क्यों ना हम यहीं वो क्लब बना लें। मान लो यही वो क्लब है और हम न्यू इयर मनाने यहाँ आये हैं।. संध्या- एक काम करते हैं जैसे ही 12 बजेंगे, हम सब एक साथ नंगे हो जाएँगे तो फिर किसी को पहले या बाद में नहीं होना पड़ेगा और शर्म भी नहीं आएगी। मोहन- ठीक है फिर ऐसे कपड़े पहन लेते हैं जो एक झटके में निकल जाएं। शारदा- आप लोग अन्दर जा कर लुंगी पहन लो। संध्या- हाँ, हमारे कपड़े तो वैसे भी केवल ये डोरियों से अटके हैं बस अन्दर के कपड़े निकालने पड़ेंगे तो वो हम पहले ही निकाल लेते हैं। संध्या और शारदा ने जो मैक्सी पहनी थीं उनमें कंधे पर बस दो डोरी थीं जिनके सहारे पूरी ड्रेस लटक रही थी। जब दोनों मर्द बेडरूम में लुंगी लेने गए तो संध्या ने अपनी निगरानी में शारदा के ब्रा और पेंटी निकलवा दिए और खुद के भी. निकाल दिए। 12 बजने में 1 ही मिनट बचा था। प्रमोद (ऊंची आवाज़ में)- एक काम करो आप लोग भी यहाँ बेडरूम में ही आ जाओ। शारदा- ठीक है जी। शारदा ने नशे में लहराती हुई आवाज़ में जवाब दिया.
दोनों बेडरूम में पहुंचे तो प्रमोद और मोहन लुंगी लपेट कर आधे नंगे खड़े थे और आखिरी मिनट के सेकंड्स गिन रहे थे। 49 … 50 … 51 … 52 … 53 … 54 … 55 … 56 … 57 … 58 … 59 … हैप्पी न्यू इयर !!! एक झटके में दोनों लुंगियां ज़मीन. पर थीं। अगले ही क्षण संध्या की मैक्सी भी फर्श पर गिर गई लेकिन शारदा ने अपनी मैक्सी निकलने के बजाए दोनों हाथों से अपनी आँखें बंद कर लीं थीं। आखिर संध्या ने ही उसे अपने गले लगाते हुए उसकी मैक्सी नीचे. खसका दी। वैसे शायद वो ऐसी हालत में संध्या को अपने से चिपकने ना देती लेकिन अभी शर्म के मारे वो उससे चिपक गई और अपना सर उसके कंधे पर झुका कर आँखें मूँद लीं। मोहन जाकर संध्या के पीछे चिपक गया और प्रमोद. शारदा का पीछे। संध्या ने प्रमोद को आँख मारते हुए चुम्बन का इशारा किया और अपने होंठ आगे कर दिए। प्रमोद भी हल्का नशे में था और न्यू इयर पार्टी की मस्ती थी सो अलग। उसने भी आवाज़ किये बिना अपने होंठ संध्या. के होंठों से टकरा कर हल्का सा चुम्बन ले लिया। तभी संध्या ने शारदा धक्का दे कर अपने से अलग किया। संध्या- अब तू अपना पति सम्हाल; मैं अपना सम्हालती हूँ। इतना कह कर संध्या पलटी और घुटनों के बल बैठ कर मोहन. का लंड चूसने लगी। प्रमोद ने शारदा को पीछे से पकड़ लिया और एक हाथ से उसके स्तन मसलने लगा और दूसरे से उसकी चूत का दाना। एम्स्टर्डम में तो कोई अनजान था जिसके सामने शारदा ने चुदवाया था और वहां एक जोड़ा. स्टेज पर खुले आम चुदाई कर रहा था जिसे देख कर उसे जोश आ गया था; लेकिन यहाँ तो उसके पति का लंगोटिया यार था जिसके सामने वो नंगी खड़ी थी और वो अपनी पत्नी से लंड चुसवाते हुए उसके नंगे बदन को निहार रहा था।. पहली बार अपने बचपन के दोस्त की नंगी बीवी को देखते हुए मोहन के लंड को लोहे की रॉड बनने में देर नहीं लगी। उसने संध्या को वहीँ बिस्तर पर पटका और उसकी कमर के नीचे तकिया लगा कर उसे चोदने लगा। संध्या के. दोनों पैरों को उसने अपने हाथों से पकड़ रखा था और खुद घुटने मोड़ कर बिस्तर पर बैठे बैठे उसे चोद रहा था। प्रमोद और शारदा कुछ देर तक तो उनकी चुदाई देखते रहे फिर प्रमोद संध्या के बाजू में पीछे दीवार पर. तकिया लगा कर अधलेटा सा बैठ गया और शारदा को अपना लंड चूसने के लिए कहा। पहले तो कुछ देर उसने बिस्तर के किनारे बैठ कर प्रमोद का लंड चूसा लेकिन फिर सुविधा के हिसाब से बिस्तर पर पैर मोड़ कर बैठी और झुक कर. चूसने लगी। ऐसे में उसकी गांड मोहन की आँखों के ठीक सामने थी और दोनों जंघाओं के बीच उसकी चिकनी मुनिया भी झाँक रही थी। मोहन कभी शारदा की गांड और चूत को देखता तो कभी उसके झूलते मम्मों को। संध्या का ध्यान. काफी देर से मोहन की नज़रों पर था। उसने भी सोचा क्यों ना वो कोई शरारत करे। उसने अपना सर प्रमोद की ओर घुमाया और जैसे ही प्रमोद ने उसकी ओर देखा, संध्या ने अपने हाथों से अपने स्तनों को सहलाते हुए आँखों से उनकी ओर इशारा किया और फिर अपने होंठों से एक हवाई चुम्बन प्रमोद की ओर फेंका। प्रमोद इस मादक आमंत्रण के सम्मोहन में बंध कर जैसे खुद-ब-खुद संध्या की ओर झुका और उसके रसीले आमों का रस चूसने लगा। शारदा तो. प्रमोद के लंड पर झुकी थी इसलिए देख नहीं पाई कि अभी अभी क्या हुआ लेकिन इस हरकत ने मोहन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसकी आँखों के सामने उसका दोस्त उसकी बीवी के स्तनों को मसलते हुए चूस रहा था। मोहन की. उत्तेजना और बढ़ गई और उस से रहा नहीं गया। उसने भी शारदा की गांड पर हाथ फेरते हुए एक उंगली उसकी भीगी-भीगी चुनिया-मुनिया के अन्दर सरका दी। शारदा को तो जैसे करंट लग गया। पहले तो वो कुछ क्षणों के लिए जैसे. मदहोशी के आगोश में समां गई लेकिन जैसे ही वो मदहोशी टूटी उसे याद आया कि उसके पति ने वादा किया था कि उसके अलावा शारदा को कोई नहीं चोदेगा और वो अचानक उठ कर बैठ गई और गुस्से से मोहन की ओर मुड़ी… शारदा-. आपकी हिम्म… त… लेकिन तभी उसे एहसास हुआ कि उसने अभी अभी क्या देखा था। उसने अपना सर वापस प्रमोद की ओर घुमाया और देखा कि वो अभी भी संध्या का स्तनपान करने में व्यस्त था। शारदा- अब समझ आया। यही चाहिए था ना. आपको? तो फिर मेरी क्या ज़रूरत थी। मुझे अपने चरित्र पर कोई दाग नहीं लगवाना; आपको जो करना है कीजिये; मैं मना नहीं करती लेकिन मुझे इस सब में शामिल नहीं होना है। मैं जा रही हूँ। आप लोग मज़े करो। इस से पहले. कि प्रमोद सम्हाल पाता या समझ पाता कि क्या हुआ है, शारदा बाहर निकल गई। प्रमोद- क्या हुआ यार, अचानक से इतना क्यों भड़क गई। अच्छा नहीं लगा तो मना कर देती। मोहन- नहीं यार! भाभी भड़कीं तो मेरी हरकत से थी फिर तेरी हरकत देख के उनका गुस्सा बेकाबू हो गया। प्रमोद- तुझे तो मैंने बताया था ना कि वो मेरे अलावा किसी से नहीं चुदवाएगी फिर तूने हरकत की क्यों? मोहन- नहीं यार, मेरा चोदने का कोई इरादा नहीं था। वो तो तुझे संध्या के बोबे चूसते देखा तो सोचा छूने में क्या हर्ज़ है तो मैंने एक उंगली भाभी की चूत में डाल दी पीछे से, ये सोच के कि उनको भी थोड़ा मज़ा आ जाएगा। प्रमोद- अरे यार! गलती मेरी ही है। उसने कहा था कि उसे मेरे अलावा कोई हाथ नहीं लगाएगा और मैंने तुझे बोल दिया कि मेरे अलावा कोई नहीं चोदेगा। अब तो ये ग़लतफ़हमी महंगी पड़ गई। खैर तुम अपनी चुदाई खत्म करो मैं जा के देखता हूँ मना सकता हूँ या नहीं अब उसको। आधे. घंटे में वापस ना आऊं तो फिर इंतज़ार मत करना। मोहन और संध्या का तो मन फीका पड़ गया था, तो उन्होंने फिर आगे चुदाई नहीं की। प्रमोद ने भी शारदा को मानाने की कोशिश की लेकिन उसने बात करने से साफ़ इन्कार कर दिया। प्रमोद ने फिर वापस जाना सही नहीं समझा, वो वहीं शारदा के साथ चिपक कर सो गया। उधर मोहन-संध्या ने भी कुछ समय तक इंतज़ार किया फिर वो भी सो गए। अगली सुबह दोनों जल्दी निकल गए क्योकि पंकज को उसकी दादी के भरोसे छोड़ कर आए थे तो ज्यादा देर रुक नहीं सकते थे। इस सामूहिक चुदाई का तो कुछ नहीं हो पाया क्योंकि शारदा के संस्कार उसे पराए मर्द से चुदवाने की इजज़र नहीं डे रहे थे लेकिन संध्या क्या उसके और प्रमोद. के बीच कोई और नया समीकरण बन पाएगा? देखते हैं अगले भाग में! दोस्तो, यह ग्रुप सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, बताने के लिए मुझे यहाँ मेल कर सकते हैं [email protected] आपके प्रोत्साहन से मुझे लिखने की प्रेरणा मिलती है।.
स्रोत:इंटरनेट