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विधवा मामी की वासना तृप्ति

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विधवा मामी की वासना तृप्ति 1

. देसी गांव की चुदाई मैंने अपनी विधवा मामी की की.
मैं अपने ननिहाल गया.
वहां मेरी विधवा मामी भी थी.
ऐसा संयोग बना कि मैं और मामी घर में अकेले रह गये.
अन्तर्वासना के सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार। मित्रो, मेरा नाम राजेन्द्र सिंह है लेकिन मेरे घर वाले प्यार से मुझे राजा बुलाते हैं.
मैं अभी 23 साल का हूं और शरीर ठीक-ठाक है.
मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से हूं और एक अंतर्राष्ट्रीय कम्पनी में इंजीनियर हूं.
मैं दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहता हूं.
अब देर ना करते हुए सीधे देसी गांव की चुदाई कहानी पर आता हूं.
यह कहानी मेरे और मेरी मामी के बीच की है.
ये कोरोना में लॉकडाउन के समय की बात है.
जब देश में कोरोना की वजह से लॉकडाउन हो गया था तो उसके बाद मेरी कंपनी में घर से काम करने की इजाजत मिल गई.
उसके बाद मेरा भी ऑफिस जाना बंद हो गया.
उस वक्त मैंने पापा से बोला कि क्यों न हम गांव चलें कुछ दिनों के लिए? वैसे भी दिल्ली में कोरोना बहुत तेजी से बढ़ रहा था.
गांव जाने की बात को सुनकर मम्मी भी खुश हो गई क्योंकि हम लोग अपने गांव वाले घर काफी अरसे से नहीं गए थे.
मम्मी और मेरी रजामंदी देखकर पापा भी मान गए और फिर हमने इमरजेंसी पास बनवाया और गाड़ी से निकल गये.
गांव जाने के बाद हमें पता चला कि गांव में हमारे पास वाले घर में ही किसी को कोरोना हो गया था.
उसके बाद हम वहां से अपनी नानी के घर चले गये.
नानी के घर में सब लोग हमें अचानक देखकर काफी खुश हो गये.
मैं अब मेरे ननिहाल के सदस्यों का परिचय आपको दे देता हूं.
ननिहाल में मेरे नाना (70), नानी (65) और उनकी छोटी बहू अपनी बेटी के साथ रहती थी.
बड़े मामा (45) के थे और छोटे मामा (41) के थे मगर छोटे मामा की मौत कुछ समय पहले बाइक एक्सीडेंट में हो गयी थी.
अब घर में मेरे नाना-नानी और छोटी मामी व उनकी बेटी रिया ही थे.
मेरी छोटी मामी का नाम दीक्षा था और वह 38 साल की थी.
वो इतनी कम उम्र में ही विधवा हो गयी थी.
मेरे बड़े मामा मुम्बई में जॉब करते थे इसलिए वो अपने परिवार के साथ काफी समय से वहीं मुंबई में ही रह रहे थे.
वो गांव में कभी कभार ही आते थे.
यहां पर केवल ये चार लोग ही थे.
दीक्षा मामी ने घर की इज्जत बनाये रखने और अपनी बेटी की वजह से दूसरी शादी नहीं की थी.
वो अकेली ही मेरे नानी के साथ अपनी बेटी की परवरिश कर रही थी.
तो हम लोग वहां पहुंच गये थे और काफी खुश थे.
सब कुछ सही चल रहा था.
सब लोग काफी खुश थे.
फिर दो दिन बाद मैंने मम्मी से कहा कि मौसी के यहां भी घूम आते हैं.
मामी को भी ले चलेंगे.
सब लोग तैयार हो गये.
अगली सुबह जब हम जाने लगे तो रिया के पैर में चोट लग गयी.
मामी ने जाने से मना कर दिया.
फिर मेरे नाना ने मुझे भी वहीं रोक लिया क्योंकि रिया की देखभाल अच्छे से हो जाती.
इसलिए मां मेरी मौसी के यहां चली गयी और नाना-नानी भी अपनी दूसरी बेटी से मिलने के लिए चले गये.
अब घर में हम तीन ही लोग थे.
मैंने मामी से कहा कि रिया को डॉक्टर के पास ले चलते हैं.
मामी बोली- तुम्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है.
थोड़ी ही चोट है.
मेरे पास घर में दवाई रखी है.
वैसे भी कोरोना में अस्पताल जाना ठीक नहीं है.
अगर वहां से संक्रमण हो गया तो मुसीबत बहुत बढ़ जायेगी.
मुझे भी मामी की बात समझ में आ गयी.
मामी ने रिया को दवाई लगा दी और वो कुछ देर के बाद सो गयी.
सब कुछ नॉर्मल हो गया.
उसके बाद मैं और मामी बैठकर बातें करने लगे.
अचानक से मामी पूछ पड़ी- अपनी शादी में तो बुलायेगा ना मुझे? मैं उनके सवाल पर हंसने लगा और बोला- कैसी बात कर रही हो मामी, आपको नहीं बुलाऊंगा तो किसे बुलाऊंगा? फिर हम यहां वहां की बातें करने लगे.
मैं मामी के साथ अब थोड़ा खुलने लगा था क्योंकि घर में भी कोई नहीं था और हम दोनों अकेले ही थे.
उनकी बेटी रिया भी दूसरे कमरे में सो रही थी.
तभी मामी ने पूछा- और बताओ, अभी तक कोई पसंद आई है या वैसे ही घूम रहे हो? मामी के इस सवाल पर मैं शर्मा गया.
मैं कुछ नहीं बोला और बस मुस्कराता रहा.
वो बोलीं- अरे … तू तो ऐसे शर्मा रहा है जैसे मैं कल ही तेरी शादी करवा रही हूं? तेरी उम्र में तो गर्लफ्रेंड होना अब आम बात है … बता दे अगर कोई है तो? मैं बोला- नहीं, कोई नहीं है.
वो बोली- मैं बन जाऊं फिर? मैंने मामी की ओर हैरानी से देखा तो वो जोर जोर से हंसने लगी.
वो बोलीं- शर्मा मत … मजाक कर रही हूं.
अब मैं तेरे नाना नानी के साथ तो मजाक कर नहीं सकती इसलिए आज थोड़ा हल्का महसूस कर रही हूं.
मुझे भी अब इस बात पर ध्यान गया कि मामी तो अकेली हैं.
भले ही नाना नानी हैं लेकिन दिल की बात सुनने या सुनाने के लिए तो उनके पास कोई है ही नहीं.
उनकी जिन्दगी में तो केवल उनकी बेटी ही है.
इसलिए मुझे मामी की बातों का बुरा नहीं लगा और मुझे उनके साथ सहानुभूति हुई.
मगर इस सहानुभूति के साथ ही मेरे मन में एक और भावना भी साथ साथ पनप रही थी.
वो भावना थी कि मामी की सेक्स इच्छाओं के बारे में सोचने की.
कितने ही दिनों से वो अकेली थीं.
उनके पास उनकी शारीरिक इच्छाओं को पूरी करने वाला कोई नहीं था.
अचानक ही मेरा ध्यान इस बात पर चला गया कि कहीं मामी मुझमें अपनी सेक्स इच्छाओं को पूरी करने का साधन तो नहीं ढूंढ रही? इसीलिए तो मामी मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछ रही थी.
अब मेरा नजरिया मामी के लिए थोड़ा बदलने लगा.
मेरा ध्यान उनके जिस्म पर जाने लगा.
उनकी चूचियां 36 के साइज की थीं और उनके सूट में उनके सीने पर पूरी कसी हुई रहती थीं.
उनकी गांड बहुत ज्यादा बड़ी तो नहीं थी लेकिन कम से कम 36 की तो रही होगी.
मगर पूरी गोल गोल शेप में थी.
जांघें भी काफी सुडौल थीं.
उनकी कमर लगभग 32 के साइज की लग रही थी.
आप इनके फीगर से ही अन्दाजा लगा सकते हैं कि कितने सुडौल बदन की मालकिन होगी वो! उसके बाद वो अपने काम में लग गयीं.
वो किचन में खाना बनाने लगीं.
मैं वहीं हॉल में बैठकर टीवी देखने लगा.
मेरी नजर मामी की गांड पर ही जा रही थी.
वो भी बीच बीच में मुझे देखने लगती थीं और मैं केवल मुस्करा देता था.
एकदम से उनके मुंह से निकला- आऊच … आह्ह … मैं जल्दी से उठकर उनकी तरफ दौड़ा तो मैंने देखा कि मामी का हाथ प्रेशर कुकर से लगकर जल गया था और कई इंच जगह में से लाल हो गया था.
उनको बहुत दर्द हो रहा था.
फिर मैंने जल्दी से पूछा- मामी, जलन वाली क्रीम है क्या घर में? वो बोली- देख वहां बेडरूम में मेरे ड्राअर में पड़ी होगी.
मैं अंदर मामी के रूम में गया तो क्रीम ढूंढने लगा.
वहां पर मुझे उनके बेड के ड्राअर में कुछ कॉन्डोम मिले.
मैं सोच में पड़ गया कि जब मामा ही नहीं है तो मामी कॉन्डोम का क्या करती है? फिर वहीं पास में एक अखबार के टुकड़े में लिपटा हुआ मुझे एक छोटा बेलनाकार लकड़ी का डंडा मिला.
वो ठीक उतनी ही मोटाई का था जितना एक औसत लंड होता है.
वहीं पास में तेल की एक शीशी भी पड़ी हुई थी.
मुझे समझते देर नहीं लगी कि ये अपनी चूत को बेलन से शांत करती होगी.
ये कॉन्डम भी उसी के लिए रखे हैं.
फिर वो बाहर से चिल्लाई- कहां रह गया राजा … मिली नहीं क्या क्रीम? फिर मैं जल्दी से क्रीम उठाकर वापस चला गया.
मैं मामी के हाथ पर क्रीम लगाने लगा.
मैं मामी के बदन से लगभग सटकर खड़ा था.
उनके कमरे में वो बेलन, कॉन्डम और तेल की शीशी देखने के बाद मेरे अंदर भी वासना के भाव आ गये थे और मैं मामी के बदन से अपने लंड को टच करने की कोशिश कर रहा था.
मेरा लौड़ा खड़ा हो गया था.
मेरे हाथ में मामी का हाथ था.
उनका हाथ बहुत ही कोमल सा था.
मैं उसको पकड़ कर सहलाते हुए क्रीम लगा रहा था.
मैं बोला- जलन हो रही है क्या? वो बोली- हां, बहुत हो रही है.
मैंने कहा- क्रीम लगाने से जलन नहीं होती है.
आराम से हो जाता है। वो नीचे ही नीचे हंसने लगी.
मैं भी समझ गया कि वो मेरी बात का मतलब समझ गयी है.
अब तक मेरा लंड पूरा तनाव में आ गया था.
मामी का जो हाथ नीचे लटक रहा था उससे मैं अपने लंड को टच कर रहा था.
मामी मेरे लंड को पकड़ना तो चाहती थी लेकिन हिचक रही थी.
वो बस हाथ को लंड से टच करवाये हुए खड़ी थी.
मैं भी और जोर से लंड को उसके हाथ पर दबा रहा था.
अब मैं सोच रहा था कि किसी तरह मामी को पूरी गर्म कर दूं और वो खुद ही मेरे लंड को पकड़ ले.
मगर ऐसा नहीं हुआ.
मामी के चेहरे पर घबराहट तो थी लेकिन उसने लंड को हाथ में पकड़ने की कोशिश नहीं की मगर लंड से हाथ हटाया भी नहीं.
फिर मैंने कहा- आप अपने रूम में जाकर आराम कर लो पहले.
खाना तो बाद में भी बन जायेगा.
वो बोली- मगर तुझे भूख लगी होगी.
मैं बोला- मुझे आप दूध पिला देना.
उसी में हो जायेगा मेरा! फिर से मैंने उसके सामने अपनी इच्छा जताई और वो समझ भी गयी.
उसने मेरे तने हुए लंड की ओर देखा और मुस्कराकर बोली- काफी बदमाश हो गया है तू! उसके बाद मैं उसको रूम में ले गया.
रूम में ले जाते वक्त मेरा हाथ मामी की कमर में था.
मैं उसकी कमर को सहलाते हुए जा रहा था और वो कुछ नहीं बोल रही थी.
फिर मैंने उसको रूम में लेटा दिया.
वो अभी भी चोर नजर से मेरे लंड की ओर ही देख रही थी.
मुझे पता चल गया कि आग तो उसके अंदर भी लगी हुई है.
मगर मैं फिर मन मारकर बाहर आ गया.
अब मैं वहां से गया नहीं बल्कि वहीं दरवाजे के पास खड़ा रहा.
मामी के बदन में वासना की आग जल चुकी थी और मैं जानता था कि या तो वो मेरे पास आयेगी या फिर अपनी चूत में वो बेलन डालेगी.
हुआ भी वैसा ही.
दो मिनट बाद उसने यहां वहां देखा और अपना ड्राअर खोला.
उसने वो डंडा निकाला और फिर उस पर कॉन्डम चढ़ा लिया.
उसके बाद उसने वो तेल लगाया और अपनी सलवार खोल ली और साथ में चड्डी भी सरका दी.
मामी ने सलवार नीचे करके अपनी टांगें ऊपर उठा लीं.
अब इस मुद्रा में उनका चेहरा उनकी टांगों के पीछे ढ़क गया क्योंकि उसने सलवार पूरी तरह से बाहर नहीं निकाली थी इसलिए उसको टांगें उठानी पड़ रही थीं.
फिर उसने वो डंडा लिया और धीरे धीरे अपनी चूत पर उसको रगड़ने लगी.
मैं तो देखकर बावला सा होने लगा.
मामी की बालों वाली चूत बहुत ही सेक्सी लग रही थी.
धीरे धीरे उसने वो डंडा चूत में घुसाना शुरू किया.
फिर उसने वो डंडा अपनी चूत में डाल लिया और उसको धीरे धीरे आगे पीछे करने लगी.
उसके मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं.
जब भी डंडा उसकी चूत में जाता तो वो आह्ह … करके सिसकार उठती.
इधर मुझसे अब कंट्रोल में रहना मुश्किल होता जा रहा था.
मैं सोच रहा था कि काश इस डंडे की जगह मेरा लंड मामी की चूत में जा रहा होता.
कुछ देर तक तो मैं इस नजारे को देखता रहा.
मगर फिर मुझसे रुकना मुश्किल हो गया.
मैंने सोचा कि अभी नहीं तो फिर कभी नहीं.
मैं एकदम से रूम में दाखिल हुआ और आवाज दी- मामी … वो एकदम से उछलकर उठ बैठी थी.
उसकी सलवार उसकी अधनंगी टांगों में फंसी थी और बेलन हाथ में था.
उसका चेहरा लाल हो गया.
मैं बेशर्म होकर उसके पास चला गया और उसकी चूत को देखने लगा.
मैंने कहा- मैं कुछ मदद करूं क्या मामी? मैंने मेरी पैंट में तने लंड को रगड़कर मामी को दिखाते हुए कहा.
उसने मेरे मोटे मूसल लंड को पैंट में तना देखा और मुस्करा दी.
वो बोली- अब जब तूने सब देख ही लिया है तो पूछ क्यों रहा है? मैं भी मुस्करा दिया.
मैंने उसकी सलवार पकड़ी और पूरी तरह से खींचकर निकाल दी.
मामी अब नीचे से पूरी नंगी हो गयी थी.
मगर मैं उसको ऊपर से भी नंगी देखना चाहता था.
मैंने उसके पास जाकर उसे लिटा लिया और उसके होंठों को पीने लगा.
उसने वो बेलन एक तरफ डाल दिया और मेरे सिर को पकड़ कर मेरे होंठों का रस पीने लगी.
फिर मैंने उसका कमीज उतरवा दिया और फिर ब्रा भी खोल दी.
उसके मोटे मोटे 36 के चूचे मैंने आजाद कर दिये.
अब मैं उन मोटे चूचों को दबाते और मसलते हुए उनके निप्पलों को काटने लगा.
मैंने बारी बारी से एक एक बोबे को मुंह लगाकर पीया और मामी मेरी पैंट को खोलने लगी.
उसने मेरी पैंट खोलकर मेरे लंड को हाथ में लिया तो उसके मुंह से आह्ह … स्स्स … करके एक कामुक आवाज निकली.
शायद उसने बहुत दिनों के बाद लंड पकड़ा था.
फिर वो मेरे लंड की मुठ मारने लगी.
मैं पहले से ही अपने लंड को रगड़ कर आया था.
मेरे लंड में तनाव के कारण दर्द हो रहा था.
मेरी नजर मामी के चेहरे पर ही बनी हुई थी.
वो पूरी चुदासी हो चुकी थी.
अब वो मेरे हाथ पकड़ कर अपने बूब्स के ऊपर रखकर दबाने लगी.
मैंने कभी किसी लड़की के बूब्स दबाये नहीं थे इसलिए मैं बहुत उत्तेजित हो गया और चूचों को जोर जोर से दबाने लगा और किस करने लगा.
मेरा जोश बहुत ज्यादा था तो मामी कराहने लगी और बोली- आराम से कर राजा … मैं यही हूं.
कहीं नहीं जा रही … मगर मेरी प्यास आज अच्छे से बुझा दे … मैं बहुत दिनों से सूखी ही तड़प रही हूं.
मैंने जोश में कहा- हां मामी, आज मैं आपकी आग को बुझाकर ही दम लूंगा.
मैं और जोर जोर से बूब्स दबाने लगा.
फिर कभी पेट पर तो कभी नाभि पर चूमने लगा.
फिर ऊपर आकर वैसे ही उसके होंठों को चूसने लगता.
किस करते करते मेरा हाथ मामी की चूत पर गया तो मामी सिहर सी गयी.
उसकी चूत पूरी गीली और चिकनी हुई पड़ी थी.
मैं तेजी से उसकी चूत पर हथेली से सहलाने लगा.
वो हर पल और ज्यादा गर्म होती जा रही थी.
मैं उसकी चूत को तेजी से रगड़ता जा रहा था.
फिर मैं नीचे की ओर गया और उसकी टांगों को फैलाकर मैंने उसकी बालों वाली चूत को चाटना शुरू कर दिया.
उसकी चूत की मादक खुशबू और झांटों की महक में मैं खो सा गया.
उसकी चूत बाहर से सांवली लेकिन अंदर से पूरी गुलाबी थी.
मैंने जीभ अंदर दे दी और उसकी चूत के रस को चूसने लगा.
वो एकदम सिसिया उठी और मेरे मुंह को जोर से अपनी चूत में दबाने लगी.
मैंने उसकी चूत में जीभ दे दी और उसकी चूत को जीभ से ही चोदने लगा.
उसने टांगें मेरे सिर पर लपेट लीं और तेजी से चूत में मेरे सिर को घुसाने लगी.
मुझे सांस आना बंद हो गया लेकिन फिर भी मैं चूत को जीभ से चोदता रहा.
जब उससे रुका न गया तो उसने मुझे 69 की पोजीशन में कर लिया और मेरे लंड को चूसते हुए अपनी चूत को चुसवाने लगी.
अब हम दोनों ही स्वर्ग की सैर कर रहे थे.
कुछ देर तक हम एक दूसरे को चूसते चाटते रहे मगर फिर उसने चूत हटा ली और टांगें फैलाकर मेरे सामने चूत खोलकर लेट गयी.
वो बोली- बस राजा … अब मेरी चूत में ये लंड डाल दे.
मुझे लंड चाहिए … अब जीभ से काम नहीं चलेगा.
मुझे चोद दे … प्लीज। मैंने उसकी चुदास को समझा और चुदाई के लिये तैयार हो गया.
मैंने लंड का सुपारा उनकी चूत पर रखा और थोड़ा जोर लगाया तो मामी के मुंह से आह्ह … निकल गई लेकिन फिर भी वो- अंदर डाल … अंदर डाल … करके बड़बड़ाती रही.
उसके बाद मैंने थोड़ा और जोर लगाया और एक ही बार में पूरा लन्ड चूत में उतार दिया.
मामी की आंखों में एक सुकून सा तैर गया.
उसने अपनी चूत में लंड को एडजस्ट किया और मुझे अपने ऊपर लिटा लिया.
मैंने उसके होंठों पर होंठों को चिपका लिया और दोनों के नंगे बदन एक दूसरे के बदन से चिपक गये.
हाथों में मैंने उसके बूब्स थाम लिये और उसकी चूत चोदने लगा.
वो मस्ती में आकर सिसकारने लगी- आह्ह … राजा … आह्ह … कितने दिनों के बाद ये सुख मिला है … चोद राजा … आह्ह … चोद मुझे … ओह्ह … घुसा दे पूरा … फाड़ दे छेद … चोद दे मुझे। मैं भी वासना में सिसकार रहा था- हां मामी … तुम्हारी गर्म चूत में मेरा. लंड … ये चोद देगा तुम्हें … ओह्ह … कितना मजा है चूत चोदने में … मेरी रखैल बन जाओ मामी … मैं आपको खुश रखूंगा.
मामी- हां … बना ले अपनी रखैल … रोज मेरी चूत को चोदना … रोज मैं तुझे अपना दूध पिलाऊंगी.
इस तरह से हम दोनों एक दूसरे को कामुक बातें सुनाते हुए चुदाई का मजा लेने लगे.
फिर मैंने अपना मुंह उसके बूब्स पर लगाया और गचागच मामी की चूत में लंड के धक्के लगाने लगा.
वो भी मेरे लंड से चुदकर मस्त होने लगी.
हम दोनों चुदाई में जैसे खो ही गये.
ये ध्यान भी नहीं रहा कि उनकी बेटी भी दूसरे रूम में सो रही है.
हम दोनों के मुंह से तेज तेज आवाज में सिसकारी निकल रही थी.
मैं एक ही पोजीशन में मामी को चोदता जा रहा था.
वो भी पूरा जोर लगाकर मुझे अपनी बांहों में कसकर भींचे हुए थी.
अगर मैं उठने की कोशिश भी करता तो वो मुझे अपने से और ज्यादा जोर से चिपका लेती थी.
मैं भी पूरी ताकत के साथ उसकी चूत में धक्के लगा रहा था.
फिर एकाएक मामी ने मेरी पीठ को नोंचना शुरू कर दिया.
वो मेरी गर्दन और कानों पर काटने लगी.
वो नीचे से दोगुनी तेजी से अपनी चूत को मेरे लंड पर चोद रही थी.
15-20 मिनट हो गये थे हमें चुदाई में लगे हुए.
दोनों का बदन पसीने में पूरी तरह से भीग गया था.
चूत से पच पच की आवाज आने लगी थी.
और तभी मामी की चूत ने ढे़र सारा पानी छोड़ दिया.
चूत के गर्म पानी का अहसास पाकर मेरी भी चरम सीमा आ गयी और मैंने मामी से पूछा- कहां गिराना है? वो बोली- चूत में नहीं, कल ही मेरे पीरियड्स खत्म हुए हैं.
फिर मैंने लंड को चूत से बाहर खींच लिया और मामी ने खुद ही मेरे लंड को मुंह में ले लिया.
वो घुटनों के बल होकर मेरे लंड को चूसने लगी और मैं मामी के मुंह को चोदने लगा.
दो चार धक्कों के बाद ही मेरा लावा फूटा और मैं मामी के मुंह में स्खलित होने लगा.
मेरे लंड से ढे़र सारा माल निकला और मामी उसको पूरा पी गयी.
उसके बाद हम दोनों थक कर निढाल हो गये.
कुछ देर तक ऐसे ही पड़े रहे और फिर हम उठ गये.
हमने अपने कपड़े पहने और फिर नहा धोकर खाना खाया.
इस तरह से मैं जब तक गांव में रहा मैंने मामी के साथ बहुत मजे लिये.
हर रोज तो चुदाई नहीं हो पाई लेकिन जब देर रात में मौका मिलता तो हम चुपके से घर के किसी कोने में जाकर चुदाई कर लेते थे.
दोस्तो, आपको मेरी मामी की चुदाई की ये देसी गांव की चुदाई कहानी अच्छी लगी या नहीं … बतायें जरूर। आगे भी मैं आपके लिए गर्मागर्म सेक्स कहानियां लेकर आता रहूंगा.
आप मुझे मेरी ईमेल पर मैसेज कर सकते हैं अथवा कहानी के नीचे दिये गये कमेंट बॉक्स में भी अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं.

स्रोत:इंटरनेट